Saturday, February 9, 2013

Sharm karo...........


Sharm karo...........

देश के यूवा 14 फरवरी को आने वाले अपने त्यौहार की तैयारी
मेँ लग गये हैँ ।
देश के सभी गिफ्ट सेंटर , माल्स , रेस्टोरेंट युवाओं के लिए दुल्हन की तरह सजने
लगे हैँ ।
अब करो अपने प्यार का इजहार ।
मैने अपने एक मित्र से कहा
'यार ये भी कोई त्यौहार हुआ क्या ?'
मित्र ने मेरी बात सुनकर समझाया
'बेटा त्यौहार का तो मालूम नहीँ मगर इस
बार तेरी भाभी को I LOVE YOU
बोल ही दूगाँ ।'
फिर कुछ देर रुक कर वो फिर बोला
'और बेटा तेरे सिने मेँ दिल नहीँ हैँ इसलिए तू 'वेलेनटाईन' जेसे
पवित्र त्यौहार कि महता को नहीँ जानता ।'
अब उसे केसै समझाउँ कि दिल तो मेरे सिने मेँ भी है ,मगर वो सबसे
पहले उसके लिए धङकता है जिसने
मुझे 9 माह गर्भ मेँ रखा ।
और फिर ये कैसा प्यार है
तुम लोगो का . . .
कि हर लड़का 10 लड़कियों से प्रेम काइज़हार करेगा. हर लड़की 15 लड़कों को प्रेम का संदेश भेजेगी ।
क्या यही प्यार हैँ ?
सोचने वाली बात है कि सच्चा प्रेम है कहाँ पे ?
पार्क में घुमना, होटल में खाना प्रेम का ही क्या रूप है ?
भेड़ों की चाल में शामिल हो जाना ही जिन्दगी है तो,
ऐसी जिन्दगी में सोचने की जगह ही कहाँ है ?
अगर सच्चा प्रेम है तो क्या उसका कोई खास दिन भी होता है ?
हर दिन क्या प्रेम के नाम नहीं हो सकता ?
क्या मानव होकर हर दिन हम मानव से प्यार नहीं कर सकते ?
हर दिन किसी से या देश से प्यार का इजहार नहीं कर सकते ?
अरे प्रेमी ही बनना है तो
कृष्ण बनो , राधा बनो , मीरा बनो,
भगतसिँह बनो,चन्द्रशेखर आजाद बनो।
हम प्रेम का विरोध नहीँ करते है ,
मगर उसे करने के तरिको का विरोध करते है ।
इस दिन सङको के किनारे बैठे प्रेमी जोङे एक दूसरे को चूँमते चाटते है , येँ कहा का
प्यार है ?
जो लोग अपनी माँ के लिए कभी चप्पल नहीँ खरिद कर लाये ,
वो इस दिन मँहगेँ से मँहगा
तोहफा खरिद कर अपनी प्रेमिका को देते हैँ,
येँ कहाँ का प्यार हैँ ?
पैसो से प्यार को तौलते हो,
वाह रे मेरे देश के यूवा वाह !!

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