(आयुर्वेदिक नुस्खेँ)
*इनको करने से आंखों को ठंडक
मिलेगी और
चश्मा नहीं लगेगा*
आंखों की सही देखरेख व पोषण के अभाव में
ही अधिकतर
लोगों को चश्मा लगता है और एक बार जिन
लोगों को चश्मा लगा होता है
उनके नंबर बढ़ जाते
हैं या आंखों संबंधी और
कई अन्य समस्याएं
उन्हें घेर लेती हैं।
ऐसे में
आंखों की सुरक्षा के
लिए
सभी को सावधानी बरतनी चाहिए।
यहां हम कुछ टिप्स
बता रहे हैं जिनसे
आपकी आंखों की रोशनी तेज
रहेगी और आंखे
थकेगी नहीं।
-रात को मिट्टी के
बर्तन में दो चम्मच
त्रिफला एक
गिलास पानी में
भिगो दें। सुबह
छानकर उस
पानी से आंखे धोने से
आंखे स्वस्थ रहती हैं। रूई को गुलाबजल में
भिंगाकर आंखों पर
एक घंटा रखने से
गर्मी से होने वाले
नेत्र रोगों में
आराम मिलता है।
रात को आठ
बादाम
की गिरी को पानी में
डालकर छोड़ दें।
सुबह उसे पीस कर
पानी मिलाकर
पी जाएं।
- रुई को गर्म दूध में
भिंगोकर ठंडा कर
लें और फिर उसे
आंखों पर रखें।
आंखों को ठंडक
मिलेगी। सूखे
नारियल
की गिरी और 60
ग्राम शक्कर
मिलकर प्रतिदिन
एक सप्ताह तक
खाने से आंखों के
सामान्य रोगों में
लाभ होता है।
गन्ना व
केला खाना आंखों के
लिए हितकारी है।
आंखों की स्वस्थ्यता के लिए अच्छी नींद
जरूरी है।
वरना आंखों के नीचे
काला पड़ जाता है
और रोशनी धुंधली पड़
जाती है।
- एक गिलास नींबू
पानी रोज पीने से
आंखों की ज्योति बढ़ती है।
प्याज का रस
आंखों में डालने से
आंखों की रोशनी बढ़ती है।
मसूर की दाल घी में
छौंक लगाकर खाने
से भी आंखों को शक्ति मिलती है।
पैरों के तलवे में
सरसों के तेल
की मालिश करने,
स्नान से पूर्व अंगूठे
को सरसों के तेल से
तर कर देने से आंख के रोग नहीं होते,
आंखों की रोशनी बढ़ती है।
-कम रोशनी में
या लेटकर पढऩे से
बचें इसलिए
नहीं क्योंकि इससे
आंखें कमजोर
होती है
बल्कि इसलिए
क्योंकि इससे
आंखों को थकान
होती है। ऐसे में
पढऩे से आंखे कमजोर
तो नहीं होती है
लेकिन सिरदर्द व
आंखों से पानी आने
की शिकायत होने
लगती है।
इसका स्वाभाविक
कारण पोजीशन
का बदलाव ।आंखो में
पानी आने
का कारण जो आंसू
होते हैं वो अश्रु
मार्ग से बहने के
बजाए आंखों से
रिसने लगते हैं
तो आंखों से
पानी आने
का एहसास
होता है ।
-फलों, सब्जियों, खासकर पत्तेदार
हरी सब्जियों के
अधिक सेवन करने से
आंखें सुरक्षित
रहती है।
विटामिन ए और
विटामिन ई के
को अपने खानपान
में शामिल करके
आंखों को स्वस्थ
रखा जाता है। अगर
खानपान में शामिल
न कर सकें
तो सप्लमेंट के
जरिये विटामिन ई
हासिल कर सकते हैं
सभी प्रकार के
खाने वाले तेलों में
गिरीदार
फलों तथा बीजों में
विटामिन ई
पाया जाता है।
अगर खानपान
को समय रहते
ही सुधार
लिया जाय
तो तमाम
परेशानियों से बच
सकते हैं।
*इनको करने से आंखों को ठंडक
मिलेगी और
चश्मा नहीं लगेगा*
आंखों की सही देखरेख व पोषण के अभाव में
ही अधिकतर
लोगों को चश्मा लगता है और एक बार जिन
लोगों को चश्मा लगा होता है
उनके नंबर बढ़ जाते
हैं या आंखों संबंधी और
कई अन्य समस्याएं
उन्हें घेर लेती हैं।
ऐसे में
आंखों की सुरक्षा के
लिए
सभी को सावधानी बरतनी चाहिए।
यहां हम कुछ टिप्स
बता रहे हैं जिनसे
आपकी आंखों की रोशनी तेज
रहेगी और आंखे
थकेगी नहीं।
-रात को मिट्टी के
बर्तन में दो चम्मच
त्रिफला एक
गिलास पानी में
भिगो दें। सुबह
छानकर उस
पानी से आंखे धोने से
आंखे स्वस्थ रहती हैं। रूई को गुलाबजल में
भिंगाकर आंखों पर
एक घंटा रखने से
गर्मी से होने वाले
नेत्र रोगों में
आराम मिलता है।
रात को आठ
बादाम
की गिरी को पानी में
डालकर छोड़ दें।
सुबह उसे पीस कर
पानी मिलाकर
पी जाएं।
- रुई को गर्म दूध में
भिंगोकर ठंडा कर
लें और फिर उसे
आंखों पर रखें।
आंखों को ठंडक
मिलेगी। सूखे
नारियल
की गिरी और 60
ग्राम शक्कर
मिलकर प्रतिदिन
एक सप्ताह तक
खाने से आंखों के
सामान्य रोगों में
लाभ होता है।
गन्ना व
केला खाना आंखों के
लिए हितकारी है।
आंखों की स्वस्थ्यता के लिए अच्छी नींद
जरूरी है।
वरना आंखों के नीचे
काला पड़ जाता है
और रोशनी धुंधली पड़
जाती है।
- एक गिलास नींबू
पानी रोज पीने से
आंखों की ज्योति बढ़ती है।
प्याज का रस
आंखों में डालने से
आंखों की रोशनी बढ़ती है।
मसूर की दाल घी में
छौंक लगाकर खाने
से भी आंखों को शक्ति मिलती है।
पैरों के तलवे में
सरसों के तेल
की मालिश करने,
स्नान से पूर्व अंगूठे
को सरसों के तेल से
तर कर देने से आंख के रोग नहीं होते,
आंखों की रोशनी बढ़ती है।
-कम रोशनी में
या लेटकर पढऩे से
बचें इसलिए
नहीं क्योंकि इससे
आंखें कमजोर
होती है
बल्कि इसलिए
क्योंकि इससे
आंखों को थकान
होती है। ऐसे में
पढऩे से आंखे कमजोर
तो नहीं होती है
लेकिन सिरदर्द व
आंखों से पानी आने
की शिकायत होने
लगती है।
इसका स्वाभाविक
कारण पोजीशन
का बदलाव ।आंखो में
पानी आने
का कारण जो आंसू
होते हैं वो अश्रु
मार्ग से बहने के
बजाए आंखों से
रिसने लगते हैं
तो आंखों से
पानी आने
का एहसास
होता है ।
-फलों, सब्जियों, खासकर पत्तेदार
हरी सब्जियों के
अधिक सेवन करने से
आंखें सुरक्षित
रहती है।
विटामिन ए और
विटामिन ई के
को अपने खानपान
में शामिल करके
आंखों को स्वस्थ
रखा जाता है। अगर
खानपान में शामिल
न कर सकें
तो सप्लमेंट के
जरिये विटामिन ई
हासिल कर सकते हैं
सभी प्रकार के
खाने वाले तेलों में
गिरीदार
फलों तथा बीजों में
विटामिन ई
पाया जाता है।
अगर खानपान
को समय रहते
ही सुधार
लिया जाय
तो तमाम
परेशानियों से बच
सकते हैं।
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