Sunday, March 10, 2013

यह जीवन, यह राजपाट सबकुछ उसी का दिया है और हम उसे ही भूल गए।

एक राजा अपना राजपाट छोड़ कर अचानक फकीर बन गया। मंत्रियों ने पूछा, ऐसा क्यों कर रहे हैं। राजा ने अपनी आपबीती सुनाई। कहा, कल मैं नदी के किनारे घूम रहा था कि एक बच्चा मिल गया। वहीं रेत पर मिट्टी से खेल रहा था।

मैंने पूछा, मिट्टी से क्यों खेल रहे हो? हाथों में गंदगी लगेगी, कपड़े भी खराब होंगे।उसने कहा, यही मेरा खिलौना है। मैं ने फिर पूछा, स्कूल नहीं जाते? उसने कहा, यही मेरा स्कूल है। मुझे लगा, शायद किसी गरीब का बच्चा हो, मां-बाप के पास उसे पढ़ाने की सुविधा न हो।

मैंने सुझाया, मेरे साथ चलो, तुम्हें पढ़ने को भेजूंगा और बढ़िया से बढ़िया खिलौने भी दूंगा... या फिर जो कुछ भी तुम्हें चाहिए।

बच्चा गंभीर हो गया, फिर बोला, जब मैं सोउंगा तो क्या तुम मेरी रखवाली करोगे? जब मुझे भूख लगेगी तो क्या तुमको खुद ब खुद समझ में आ जाएगा और तुम मेरी पसंद की चीजें बना कर ला दोगे। क्या तुम खुद देखते रहोगे कि मेरे कपड़े कब मैले हो गए हैं और अब उन्हें बदलना चाहिए। क्या तुम मेरे साथ खेलोगे भी?

मैंने कहा, इतना तो नहीं कर सकता। मेरे ऊपर दूसरी भी कई जिम्मेदारियां हैं। कई काम देखने होते हैं। लेकिन मैं इसकी व्यवस्था कर सकता हूं। तब बच्चे ने कहा, लेकिन मैं जिनके साथ रहता हूं वे मेरे लिए यह सब खुद करते हैं।मेरे मां-बाप को सब पता होता है कि कब मुझे नींद आने वाली है और कब भूख लगेगी।

उसकी यही बात सुन कर मेरी आंखें खुल गईं। इतना छोटा बच्चा यह देख रहा है कि उसके मां-बाप उसके लिए क्या कर रहे हैं। हम प्रभु को परम पिता कहते हैं। पर इतने बड़े और समझदार हो कर भी यह नहीं देखते कि वह हमारे लिए क्या-क्या करता है। यह जीवन, यह राजपाट सबकुछ उसी का दिया है और हम उसे ही भूल गए।

इसीलिए फकीरी बाना ओढ़ा है, ताकि हर पल उसकी कृपा को महसूस कर सकूं -राजा ने कहा।

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