भगत सिंह का आखिरी सन्देशआप सबके लिए,
दोस्तों ये है भगत सिंह का आखिरी सन्देशआप सबके लिए, आओ आज उन सबके साथ खड़े हो जाये जो देश के लिए कुछ भी कर रहे है बिना धर्म जाति को देखकर, क्युकी भगत सिंह जातिधर्म नही मानते थे वो नास्तिक थे
"साथियों,
स्वाभाविक है कि जीनेकी इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए, मैं इसे छुपाना नहीं चाहता। लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं, कि मैं कैद होकर या पाबंद होकर जीना नहींचाहता।
मेरा नाम हिंदुस्तानी क्रांति का प्रतीक बनचुका है। ... दिलेराना ढंग से हंसते -हंसते मेरे फांसी पर चढ़ने की सूरत में हिंदुस्तानी माताएं अपने बच्चों के भगत सिंह बनने की आरजू किया करेंगी और देश की आजादी के लिए कुर्बानी देने वालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि उस क्रांति को रोकना साम्राज्यवाद या तमाम शैतानी शक्तियों के बूते की बात नहीं रहेगी।
आपका साथी
भगत सिंह"
(22 मार्च 1931 को लिखे भगत सिंह के आखिरी पत्र का अंश)
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