Sunday, March 3, 2013

बीरबल का परिवार

बीरबल का परिवार
बुद्धिमान, हाज़िर जवाब और लोगों को लाजवाब
कर देने वाले शहंशाह अकबर के नवरत्नों में से
एक बीरबल का नाम महेशदास दुबे था और
वो मध्य प्रदेश के सीधी जिले के घोघरा में
पैदा हुए थे।
कहा जाता है कि घोघरा गांव में ही बीरबल के
पिता गंगादास का घर हुआ करता था और
यहीं उनकी माता अनाभा देवी नें वर्ष 1528 में
रघुबर और महेश नाम के जुड़वां बच्चोंको जन्म
दिया।
बीरबल की 37 वीं पीढ़ी भी इसी गांव में रह
रही है और ये लोग मजदूरी करके अपना पेट पालते
हैं।
कई सालों तक बीरबल से जुड़े कई दस्तावेज़ उनके
पास पीढ़ी दर पीढ़ी सुरक्षित रहे। मगर हाल
ही में उनकी दुकान में पानी भर गया औरउनमें से
कुछ दस्तावेज़ नष्ट हो गए।
इन दस्तावेजों में रीवा के महाराजा का पत्र और
अकबर के दरबार का हुक्म-नामा शामिल थे
जो फारसी में लिखे हुए थे। गंगा के परिवार के
पास बीरबल की कुछ दूसरी यादगार चीज़ें आज
भी मौजूद हैं. मसलन शंख, घंटा और कुछ किताबें।
कहते हैं कि बीरबल फारसी और संस्कृत के
विद्वान थे और कविताएं भी लिखा करते थे।
इसके अलावा उनकी शिक्षा संगीत में भीहुई थी।
यही वजह है कि सबसे पहले उन्हें जयपुर के
महाराज के दरबार में और बाद में रीवा के
महाराज के दरबार में बतौर राज
कवि रखा गया था।
गांववालों का कहना है कि दरअसल रीवा के
महाराज ने ही बादशाह अकबर को बीरबल तोहफे़
के रूप में दिया था. मगर इतिहासकार इससे
सहमत नहीं हैं।
बीरबल की इस जन्मस्थली में उनसे जुड़ी यादगार
चीज़ें लगभग अब नहीं के बराबर हैं। वक़्त के साथ
सबकुछ ख़त्म होता चला गया।गांव के तालाब के
किनारे वो घर जिसमे उनके माता पिता रहते थे,
अब नहीं है।
ये जगह अब एक वीरान टीला है जहां जानवर
चरते रहते हैं। कभी कभी गांव के नौजवान तालाब
के किनारे इस टीले पर बैठकर अपना समय बिताते
हैं।
अगर इतने सालों में इस गांव में कुछ
नहीं बदला तो वो है घोघरा का प्राचीन मंदिर
जहां बीरबल और उनके भाई जाया करते थे।
इस प्राचीन देवी के मंदिर के वयोवृद्ध
पुजारी सुखचंद्र सिंह का कहना है
कि ऐसी मान्यता है कि यहीं से बीरबल
को वरदान मिला था।
वो कहते हैं: "पहले ये मंदिर तालाब केकिनारे था,
बाद में देवी की मूर्ती को यहां स्थापित
किया गया।
बीरबल का कोई बेटा नहीं था। कहा जाता है
कि उनकी सिर्फ एक बेटी थी कमला, जिसने
शादी नहीं की थी। इसलिए आज उनके भाई रघुबर
ही उनके वंश को चला रहे हैं। घोघरा में ये
विशवास है कि ऐसा देवी के वरदान की वजह से
ही हुआ होगा।
गंगा दुबे के घर की बैठक में
लोगों का आना जाना लगा रहता है। बीरबल के
वंशज होने की वजह से पूरे इलाके में
उनका काफी सम्मान भी है। लोग उनके घर
को फ़क्र के साथ देखते हैं और अक्सर इनके
यहां गांव वालों की लंबी लंबी बैठकेंभी होती हैं।
इनका परिवार भी खिचड़ी का शौकीन है। मगर
गंगा कहते हैं कि उनके घर पर खिचड़ी जल्दी बन
जाती है ! वो हंसते हुए कहते हैं,"बीरबल
की खिचड़ी तो कभी बन नहीं पायी।
वो तो बादशाह अकबर की नसीहत के लिए
खिचड़ी बना रहे थे। मगर हमारी खिचड़ीतो जल्द
बन जाती है।"
घोघरा में बीरबल और अकबर की नोक झोंक
लगभग हर जुबां पर है। सीधी जिले के इससुदूर
इलाके में कभी बिजली रहती है कभी नहीं। गांव के
लोग खाली समय में अकबर और बीरबल के
किस्सों से ही अपना दिल बहलाते हैं।
गंगा दुबे इस गांव में अपनी पत्नी और दो बेटों के
साथ रहते हैं।
बीरबल का जन्म कहाँ हुआ. इस संबंध मेंकई मत हैं,
यह जानकारी बी.बी.सी. हिन्दी से ली गई है

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