Sunday, March 3, 2013

पोस्ट लंबी जरुर है पर कडवा सच है जरुर पढें :

पोस्ट लंबी जरुर है पर कडवा सच है जरुर पढें :

दिल्ली मे कल फिर एक
बलात्कार कांड हुआ और
वो भी एक
7 साल की बच्ची के साथ ।
ऐसे वीभत्स मानसिकता के
लोग मृत्युदंड के ही लायक
है,
प्रमाणित होने के बाद
एक पल के लिए भी देर न
हो इनको मृत्युदंड मे ।
वैसे क्या कभी सोचा है
आपने कि जिस देश मे एक से
बढ़ कर
एक चरित्रवान लोग हुए
है वहाँ आज ये सब
क्यो हो रहा है ?
इसका कारण हम खुद है,
सारे भारत वासी, हर एक
इंसान
क्यो कि जब प्रेम और
प्यार की बात चलती है
तो हम
सिर्फ स्त्री और पुरुष के
विषय मे सोचते है कि जैसे
प्यार
तो उनके ही बीच
हो सकता है।
आधुनिकता के नाम पर
बेहूदा वस्त्र पहनना,
शराब-
सिगार, ईवनिंग पार्टी,
डेटिंग जैसे शब्द आम
हो गए, अब
इनको बोलने या इनके
बारे मे बात करना कोई
शर्म
की बात नहीं रह गई ।
तो ये मानसिकता हमने
खुद विकसित की है
लोगो मे । अब
जब इनके विरोध मे
कभी किसी को समझाने
की कोशिश
भी करते है तो वो हमे
ही दक़ियानूसी,
रूढ़िवादी बता कर चल
देता है ।
किसी को उंगली पकड़ने
का मौका आप दोगे
तभी वो कलाई
पकड़ने की हिम्मत
दिखा सकता है ।
बहुत
सी छोटों मोटी घटनाए
आप और हम रोज़मर्रा मे
देखते है लेकिन नज़र अंदाज़
करते चले जाते है या फिर
हंस के
हम भी उसके भागीदार
बन जाते है । और जब
यही उकसावा किसी को जानवर
बना देता है तब
मोमबत्ती ले कर सदको पे
उतार जाते है ।
टीवी पर जब विज्ञापन
मे नंगी लडकीय दिखाई
जाती है
तो देखने कर खुश होने वाले
हम ही होते है ।
बाइक सवार लड़का जब
कहता है"कैसे इसकी ले लूँ
मैं"तब
चुप रहने वालों को कोई
अधिकार नहीं है
किसी बलात्कार
की घटना का विरोध
करने का ।
हम खुद बलात्कारी है,
हमारी संस्कृति के,
माता और
पिता की आशाओ के, बहन
और भाई के मार्गदर्शन के
बलात्कारी है हम ।
"बलात्"यानि जबरन, बल
पूर्वक और"कार"
यानि कर्म
या कोई करतूत, अर्थात
जबरन, जिद पूर्वक या बल
पूर्वक
किया कोई भी कर्म
"बलात्कार"होता है ।
तो सोच कर
देखना मित्रो हर दिन
हम कितने बलात्कार करते
हैं ।
और जिस दिन आप चरित्र
से थोड़ा सा भी पतित
होते हो,
किसी भी स्त्री को नज़र
भर के गलत नजरिए से देख
भी लेते
हो उसी वक़्त आप सबसे
पहला बलात्कार
अपनी"माँ"के
साथ करते हो,
क्यो की उस माँ ने आप
जैसी औलाद
नहीं चाहिए थी,
वो दुनिया का सबसे
भोला और
सच्चा इंसान
आपको समझती है। उस
माँ ने जो कुछ
आपको सिखाया और
जो कुछ आशाए आपसे
वो रखती है उन
सबका बलात्कार आप
उसी एक पल मे कर डालते
हो जब
किसी स्त्री को असम्मान
की दृष्टि से देख भी लेते
हो ।
चरित्र से गिरि हुई
पीढ़ी क्या खाक
आतंकवादियो से
लड़ेगी, क्या खाक
भ्रष्टाचार से लड़ेगी ।
लंगोट
तो संभालती नहीं

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