Monday, March 4, 2013

‎!! विडम्बनाएँ !!


!! विडम्बनाएँ !!

तुलसी कहाँ उगाऊं, आँगन नहीं बचा,
गाय कहाँ पर बाँधू, गाँवन नहीं बचा !

बचे दूध का दहीं, बनता नहीं घरों में,
डिब्बाबंद संस्कृति में, जामन नहीं बचा !

किससे पूछूँ, तीज त्यौहार व्रत कथाएँ,
पूनम का सीधा लेने, ब्राह्मण नहीं बचा !

सबके अपने हो गए, कॉलोनी में फ्लेट,
बतियाने को कोई घर, कामन नहीं बचा !

कैसे भेजूँ दामिनी को, घर छोड़ अकेली,
पाक साफ़ किसी का, दामन नहीं बचा !
 विडम्बनाएँ 

तुलसी कहाँ उगाऊं, आँगन नहीं बचा,
गाय कहाँ पर बाँधू, गाँवन नहीं बचा !

बचे दूध का दहीं, बनता नहीं घरों में,
डिब्बाबंद संस्कृति में, जामन नहीं बचा !

किससे पूछूँ, तीज त्यौहार व्रत कथाएँ,
पूनम का सीधा लेने, ब्राह्मण नहीं बचा !

सबके अपने हो गए, कॉलोनी में फ्लेट,
बतियाने को कोई घ
‎!!!!र, कामन नहीं बचा !

कैसे भेजूँ दामिनी को, घर छोड़ अकेली,
पाक साफ़ किसी का, दामन नहीं बचा !

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