Monday, March 11, 2013

सेवानिवृत

आश्चर्य है कि जिस उम्र में सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत कर दिया जाता है उसी उम्र में राजनीति की जाती है। राजनैतिक महत्वकांक्षी सरकारी सेवा से निवृत होकर राजनीति में प्रवेश करते हैं।
आज देखने की बात है कि राजनैतिक गलियारे में कितने ऐसे साथ साल से अधिक आयु के सांसद या राज्य विधानसभा के सदस्य हैं जो पूर्व में सरकारी अधिकारी/कर्मचारी थे और सेवानिवृत होने के बाद राजनीति में प्रवेश करके राजनीतिक दलदल में कुलाँचे मारते फिर रहे हैं।
प्रश्न उठता है कि यदि ये बुज़ुर्ग 58 या 60 साल के बाद भी सरकार की सेवा के योग्य थे तो इन्हें इनकी सरकारी सेवा से निवृत क्यों किया गया ?
हमारे माननीय देश के माननीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जो पूर्व में रिज़र्व बैंक के भूतपूर्व गवर्नर थे उन्हें उनके उस पद से सेवानिवृत क्यों किया गया जो आज सही परिस्थितियों में बोलने के भी काबिल नहीं रह गए और जिन्हें आज गूंगे प्रधान मंत्री के नाम से भी जाना जाने लगा है ?
राजनीति की इन कुटिल चालों से देश की जनता परिचित हो चुकी है किन्तु राजनीतिक कुटिलता के चापलूस देश की भोली-भाली जनता को अपने कुटिल भ्रमों के जाल में बुरी तरह जकड़े हुए हैं और जनता कसमसा रही है।
जनता को इस कसमसाहट से कब, कैसे और कौन उबारेगा ?

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