Sunday, February 17, 2013

र्स्वग मेँ सेँ लडकी ने अपनी माँ को लिखा पत्र...!!

र्स्वग मेँ सेँ लडकी ने अपनी माँ को लिखा पत्र...!!
मेरी प्यारी मम्मी...
तु अब दवाखाने से घर आ गई होगी..?
तेरी तबियत की मुझे चिँता होती है..
अब आपकी तबियत अच्छी होगी..?
प्यारी मम्मी तेरी कोख से मेरा अंश रहा
तब से मुझे वात्सल्य से उभरता माँका चेहरा देखना है...
मम्मी मेरे गाल पर तेरा एक प्यारभरी चुम्मी के लिए तरसती हु.
मुझे मेरी जननी के हाथ मेँ फुल होकर खीलना था...
मुझे मेरी मम्मी के हाथ से मार खाकर रोना था.....
मम्मी, मुझे तेरेआगंन मेँ पाँव रखना था
और अपना घर खिल खिलाट भरना था....
और मम्मी, मुझे तेरी लोरी सुनते-सुनते सोने कि तरस थी.....
कुदरत ने मुझे तेरा लडका बनाया होता तो कोई प्रोब्लमनही होती..
मम्मी, लेकिन तुझे कुदरत कान्यायमंजुर नही था.
तुझे तो लडके कि भुख थी.
तुझे तो केवल मात्र संतान से गोद नही भरनी थी..
तेरे तो भविष्य मेँ कमाऊ लडके कि सपंति से घर भर देना था..
मम्मी, तुझे तो मिलकत का वारिस उगाना था..
और बुढापे मेँ माँ बेटा-बहुका प्रेम,
सेवा और दु:ख मेँ आँसु पुछनेका सहारा चाहिएथा.
तुझे मेरी काली भाषा सुनना कि पसंद नही थी..
तुझे तेरे दिल मेँ कोई प्रेम नही आया?
इसिलिए मम्मी तु दवा खाने जाकर मुझ से छुटकारा पा लिया...
मम्मी, जब डाँक्टर कैँची सेफुल जेसी बेटी को कुचल रहा था..
मेरे शरीर के एक के बाद एक अगं काटकर अलग रख रहा था..
मुझे लग रहा था कि अब माँ कोदया आयेगीलेकिन तुझे दया नही आयी...
तुझे तो दया नही आयी मम्मी! लेकिन भगवान को तो दया आयी.
डाक्टर के तेज धार कि कैँचीसे मेरा कलेजा फट गया और भगवान ने मुजे अपने पास बुला लिया.....
मम्मी, तु खुद लडकी है,
तो यह बात कैसे भुल गई ? चलोवो तो सब ठीक है, लेकिन तेरेपेट मे हि मेरी कब्रबना दी तुजे जरा भी दया नहि आयी ?
चिँता मत कर मम्मी, अब जब मेरा भाईजन्म ले तब
इस लडकी कि याद दिलाना... अरे हाँ ! रक्षाबंधन के दिन मुझे याद करके भाई को मेरा आशिर्वाद देना ।

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