Monday, February 11, 2013

बीरबल क खिचड़ी

बीरबल क खिचड़ी
एक दफा शहंशाह अकबर ने घोषणाकी कि यदि कोई व्यक्ति सर्दीके मौसम में नर्मदा नदी के ठंडे पानी में घुटनों तक डूबा रह कर सारी रात गुजार देगा उसे भारी भरकम तोहफ़ेसे पुरस्कृत किया जाएगा.एक गरीब धोबी ने अपनी गरीबी दूरकरने की खातिर हिम्मत की और सारी रात नदी में घुटने पानीमें ठिठुरते बिताई और जहाँपनाह सेअपना ईनाम लेने पहुँचा.बादशाह अकबर ने उससे पूछा – तुम कैसे सारी रात बिना सोए, खड़े-खड़े ही नदी में रात बिताए? तुम्हारे पास क्या सबूत है?धोबी ने उत्तर दिया – जहाँपनाह, मैं सारी रात नदी छोर के महल के कमरे में जल रहे दीपक को देखता रहा और इस तरह जागते हुए सारी रात नदी के शीतल जल में गुजारी.तो, इसका मतलब यह हुआ कि तुम महल के दीए की गरमी लेकर सारी रात पानी मेंखड़े रहे और ईनाम चाहते हो. सिपाहियों इसे जेल में बन्द कर दो - बादशाह ने क्रोधित होकर कहा.बीरबल भी दरबार मेंथा. उसे यह देख बुरा लगा कि बादशाह नाहक ही उस गरीब पर जुल्म कर रहे हैं. बीरबल दूसरे दिन दरबार में हाजिर नहींहुआ, जबकि उस दिन दरबार की एक आवश्यक बैठक थी. बादशाह ने एक खादिम को बीरबलको बुलाने भेजा. खादिम ने लौटकर जवाब दिया – बीरबल खिचड़ी पका रहेहैं और वह खिचड़ी पकते ही उसे खाकर आएँगे.जब बीरबल बहुत देर बादभी नहीं आए तो बादशाह को बीरबल की चाल में कुछ सन्देहनजर आया. वे खुद तफतीश करने पहुँचे. बादशाह ने देखा कि एक बहुत लंबे से डंडे पर एक घड़ा बाँध कर उसे बहुत ऊँचा लटका दिया गया है और नीचे जरा सा आग जल रहा है. पास में बीरबल आराम से खटिए पर लेटे हुए हैं.बादशाह ने तमककर पूछा – यह क्या तमाशा है? क्या ऐसी भी खिचड़ी पकती है?बीरबल ने कहा - माफ करें, जहाँपनाह, जरूर पकेगी. वैसी ही पकेगी जैसी कि धोबी को महल के दीये की गरमी मिली थी.बादशाह को बात समझ में आ गई. उन्होंने बीरबल को गले लगाया और धोबी को रिहा करने और उसे ईनाम देने का हुक्म दिया

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