Tuesday, February 19, 2013

इंस्पेक्टर

अभी अखबार में खबर पढ़ी "राजधानी के नौ थानों में नहीं हैं इंस्पेक्टर !!", मन में आया पूछ लूँ कि जिन थानों में इंस्पेक्टर हैं वो क्या उखाड़ रहे हैं ?? लड़कियां थाने जाकर पुलिस कंप्लेंट करने से डरती हैं क्यूंकि उन्हें लगता है कि जो ज्यातती उनके साथ बाहर हुई उससे ज्यादा तो पुलिस वाले अन्दर उनसे घटिया से सवाल पूछ-पूछकर कर देंगे। और अगर शिकायत दर्ज कर भी ली तो भी ज़रुरत पड़ने पर कार्यवाई होगी इसकी कोई गारेंटी नहीं ......!! अभी कुछ दिन पहले एक केस सामने आया जिसमें एक लड़के ने राह चलती लड़की के साथ बत्तमीजी की, लड़की ने जाकर पुलिस में शिकायत की तो अगले दिन लड़के ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर उसका गैंग रेप कर दिया और सीना ठोककर कहा कि "कौन से थाने में रपट लिखाने गयी थी, कहाँ हैं वो इंस्पेक्टर ... क्यूँ नहीं आया अब तुझे बचाने" .... तो थानों में इंस्पेक्टर होने ना होने से क्या फर्क पड़ता है जब गुनेंगारों में मन में उनका खौफ़ ही नहीं है .....

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