Thursday, February 28, 2013

जिन्दगी को जिन्दगी से झगड़ते देखा

चार दिनों की जिन्दगी मैं चार जिंदगियों को बिगड़ते देखा,

जिन्दगी को जिन्दगी से झगड़ते देखा ,
देखा हैं जिन्दगी को जिन्दगी की नज़र से,
रिश्तों की ताव्जों को सिकुड़ते देखा,

चार दिनों की जिन्दगी मैं चार जिंदगियों को बिगड़ते देखा,

मोहब्बत के कफ़न मैं मोहब्बत को लिपटते देखा,
मोहब्बत की नज़र मैं मोहब्बत को खटकते देखा,
देखा हर मंज़र जिंदगी का,
जिंदगी को जिंदगी की राह मैं रगड़ते देखा

चार दिनों की जिन्दगी मैं चार जिंदगियों को बिगड़ते देखा,

तान्हायिओं मैं संभलते देखा,
आबादियों मैं लड़खते देखा,
देखा पत्थर सी जिंदगी को,
और पत्थर को पिघलते देखा,

चार दिनों की जिन्दगी मैं चार जिंदगियों को बिगड़ते देखा, !!

No comments:

Post a Comment