गाँधी जी के असहयोग आन्दोलन चौरीचौरा कांड के बाद वापस लेने से क्रांतिकारियों का गाँधी जी से मोहभंग हो गया| उसके बाद आजाद जी ने पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल,शचीन्द्रनाथ सान्याल योगेशचन्द्र चटर्जी के साथ मिलकर १९२४ में उत्तर भारत के क्रान्तिकारियों को लेकर एक दल हिन्दुस्तानी प्रजातान्त्रिक संघ (एच० आर० ए०) का गठन किया।
क्रांतिकारी गतिविधिया जारी रखने के लिए धन की आवश्यकता थी तो इस संगठन ने गाँव के अमीर घरों में डकैतियाँ डालने की सोची, ताकि दल के लिए धन जुटाने की व्यवस्था हो सके| आजाद जी ने दल के सदस्यों के लिए यह नियम बनाया की किसी भी औरत के उपर हाथ नहीं उठाया जाएगा।
एक बार एक गाँव में राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में डाली गई डकैती में जब एक औरत ने आज़ाद का पिस्तौल छीन लिया तो अपने बलशाली शरीर के बावजूद आज़ाद ने अपने उसूलों के कारण उस पर हाथ नहीं उठाया। इस डकैती में क्रान्तिकारी दल के आठ सदस्यों पर, जिसमें आज़ाद और बिस्मिल भी शामिल थे, पूरे गाँव ने हमला कर दिया। बिस्मिल ने मकान के अन्दर घुसकर उस औरत के कसकर चाँटा मारा, पिस्तौल वापस छीनी और आजाद को डाँटते हुए खींचकर बाहर लाये। इसके बाद दल ने केवल सरकारी प्रतिष्ठानों को ही लूटने का फैसला किया।
ऐसे थे हमारे आजाद जी उन्होंने जीवन पर्यंत महिलाओ को सम्मान दिया गर्व हैं हमें उन पर
क्रांतिकारी गतिविधिया जारी रखने के लिए धन की आवश्यकता थी तो इस संगठन ने गाँव के अमीर घरों में डकैतियाँ डालने की सोची, ताकि दल के लिए धन जुटाने की व्यवस्था हो सके| आजाद जी ने दल के सदस्यों के लिए यह नियम बनाया की किसी भी औरत के उपर हाथ नहीं उठाया जाएगा।
एक बार एक गाँव में राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में डाली गई डकैती में जब एक औरत ने आज़ाद का पिस्तौल छीन लिया तो अपने बलशाली शरीर के बावजूद आज़ाद ने अपने उसूलों के कारण उस पर हाथ नहीं उठाया। इस डकैती में क्रान्तिकारी दल के आठ सदस्यों पर, जिसमें आज़ाद और बिस्मिल भी शामिल थे, पूरे गाँव ने हमला कर दिया। बिस्मिल ने मकान के अन्दर घुसकर उस औरत के कसकर चाँटा मारा, पिस्तौल वापस छीनी और आजाद को डाँटते हुए खींचकर बाहर लाये। इसके बाद दल ने केवल सरकारी प्रतिष्ठानों को ही लूटने का फैसला किया।
ऐसे थे हमारे आजाद जी उन्होंने जीवन पर्यंत महिलाओ को सम्मान दिया गर्व हैं हमें उन पर
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