Sunday, February 10, 2013

कहता है प्यार बाँट दूँगा


कहता है प्यार बाँट दूँगा

तो क्या,
अपना प्यार
बाँट दोगे तुम

अरे छोड़ो भी यारों
किस-किस को
कब-कब कैसे-कैसे
बाँटोगे

अच्छा चलो दिखाओ
कहाँ हैं तुम्हारे पास
प्यार

खाली फोकट झूठ
का पुलिंदा उठाए
फिरते हो

अपनी माँ के चारपाई
का निवाड़ आज तक
नहीं बदला गया

कभी तुमने खुद हो कर
अपनी पत्नी को एक ग्लास
पानी भी नहीं दिया

पिता को अब छड़ी की
जरूरत पड़ती है
उसका एहसास तक नहीं
तुमको

बेटी आगे पढ़ना चाहती है
कर्मजले तुमने रोक रखी है
उसकी पढ़ाई

बेटा बुरी संगत मे मगन है
रोज जेब खर्च देना नहीं भूलते
उसमे तुम्हें प्यार दिखता है

दादी चल फिर नहीं सकती
सब कुछ बिस्तर मे ही होता है
नाक सिकोड़ लेते हो
वह देखा नहीं जाता तुमसे

और कहते हो मैं प्यार बाँट दूँगा

ढ़ोल मत पीट, ढपली मत बजा
अपनी अस्मिता को बचाने के
इस तरह टोटके मत कहता फिर

कौंवे की तरह कांव-कांव करता
फिरता है

मैं प्यार बाँट दूँगा
मैं प्यार बाँट दूँगा

आ मैं तुझे सिखाता हूँ,,,,,,,,,
उपर लिखे सारे काम
अपने घर पर ही करने लग
प्यार तेरा खुद-ब-खुद बंट
जाएगा.........

आजमा ले मेरे लल्लू लाल
कनखजूरे, फोकट की सलाह
बहुत काम आएगी|||

प्यार बाँटूँगा प्यार बाँटूँगा
ढींगचा-ढींगचा मत कर

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