दुश्मनों की कमी नहीं मगर फिर भी दोस्तों को दुश्मन बनाने की कला कोई भारत से सीखे।
खबर है की संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में श्रीलंका के खिलाफ लाये जा रहे प्रस्ताव का भारत समर्थन करेगा। इससे पहले भी पिछले साल संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार निकाय के एक प्रस्ताव, जिसमे लिट्टे के खिलाफ लड़ाई में कथित युद्ध अपराधों के लिए श्रीलंका की निंदा की गई थी, पर भारत पश्चिमी देशों का साथ देते हुए प्रस्ताव के पक्ष में एवं श्रीलंका के खिलाफ मतदान कर चूका है। दिलचस्प बात यह थी की चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत भारत के पड़ोसियों ने प्रस्ताव के खिलाफ और श्रीलंका के पक्ष में मतदान किया था।
आमतौर पर देश विशेष से जुड़े प्रस्ताव पर मतदान नहीं करने वाला भारत, द्रमुक समेत तमिलनाडु के अन्य पार्टियों के जबर्दस्त दबाव में है। यह इस बात का ज्वलंत उदहारण है की कैसे "क्षेत्रीय राजनीती" भारत के अंतर्राष्ट्रीय नीति को प्रभावित कर रही है।
भारत का यह रुख श्रीलंका के लिए मुश्किल भरा है। वैश्विक मुद्दों पर श्रीलंका या तो भारत के साथ साथ देता है या फिर उसके रुख के अनुरूप निर्णय लेता है।
भारत पर भी कश्मीर समेत अन्य राज्योंमें मानवाधिकारों के हनन के आरोप लगते रहे हैं। कोई हमारे नीति-निर्धारकों को समझाए की जिनके खुद के घर शीशे के हों, वो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं उछाला करते।
खबर है की संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में श्रीलंका के खिलाफ लाये जा रहे प्रस्ताव का भारत समर्थन करेगा। इससे पहले भी पिछले साल संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार निकाय के एक प्रस्ताव, जिसमे लिट्टे के खिलाफ लड़ाई में कथित युद्ध अपराधों के लिए श्रीलंका की निंदा की गई थी, पर भारत पश्चिमी देशों का साथ देते हुए प्रस्ताव के पक्ष में एवं श्रीलंका के खिलाफ मतदान कर चूका है। दिलचस्प बात यह थी की चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत भारत के पड़ोसियों ने प्रस्ताव के खिलाफ और श्रीलंका के पक्ष में मतदान किया था।
आमतौर पर देश विशेष से जुड़े प्रस्ताव पर मतदान नहीं करने वाला भारत, द्रमुक समेत तमिलनाडु के अन्य पार्टियों के जबर्दस्त दबाव में है। यह इस बात का ज्वलंत उदहारण है की कैसे "क्षेत्रीय राजनीती" भारत के अंतर्राष्ट्रीय नीति को प्रभावित कर रही है।
भारत का यह रुख श्रीलंका के लिए मुश्किल भरा है। वैश्विक मुद्दों पर श्रीलंका या तो भारत के साथ साथ देता है या फिर उसके रुख के अनुरूप निर्णय लेता है।
भारत पर भी कश्मीर समेत अन्य राज्योंमें मानवाधिकारों के हनन के आरोप लगते रहे हैं। कोई हमारे नीति-निर्धारकों को समझाए की जिनके खुद के घर शीशे के हों, वो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं उछाला करते।
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