एक ही बात पे लोग हैरान है,
सांस लेता हुआ शख्स बेजान है.
बिक रहा सब यहां तोल पे, मोल पे,
सब मकां से बडी उस की दुकान है.
मुल्क आजाद पर,सोच पे झंजिरे,
होठ खामोश है, आंख तूफान है.
तुं मसीहा बदल,या बदल दे दवा,
आखरी सांस पे देख इमान है.
बूत होता अगर पूजना छोडते,
सो खता से भरा, फिर भी इन्सान है.
सांस लेता हुआ शख्स बेजान है.
बिक रहा सब यहां तोल पे, मोल पे,
सब मकां से बडी उस की दुकान है.
मुल्क आजाद पर,सोच पे झंजिरे,
होठ खामोश है, आंख तूफान है.
तुं मसीहा बदल,या बदल दे दवा,
आखरी सांस पे देख इमान है.
बूत होता अगर पूजना छोडते,
सो खता से भरा, फिर भी इन्सान है.
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