Thursday, February 28, 2013

हिन्दी हूँ।

एक बूढ़ी औरत.... राजघाटपर बैठे- बैठे
रो रही थी.
न जाने किसका पाप था जो, अपने आंसुओं से
धो रही थी।
मैंने पूछा - माँ! तुम कौन?
मेरी बात सुन कर वह बहुत देर तक
रही मौन
लेकिन जैसे ही उसने अपना मुह खोला
लगा दिल्ली का सिंहासन डोला
वह बोली- अरे! तुम जैसे नालायको के
कारण शर्मिंदा हूँ,
न जाने अब तक क्यो जिंदा हूँ।
अपने लोगो की उपेक्षाके कारण तार-
तार हूँ, चिंदी हूँ,
मुझे गौर से देख... मै
राष्ट्रभाषा हिन्दी हूँ।
जिसे होना था महारानी, आज
नौकरानी है
हिन्दी के आँचल में तो है सद्भाव, मगर
आँखों में पानी है।
गोरी मेम को दिल्ली की गद्दी और मुझे
बनवास ?
कदम- कदम पर होता है मेरा उपहास।
सारी दुनिया भारत को देख कारण
चमत्कृत है
एक भाषा- माँ अपने ही घर में बहिष्कृत है
बेटा, मै तुम लोगों के पापो को ही बासठ
वर्षो से बोझ की तरह ढो रही हूँ,
कुछ और नही कर सकती, इसलिए
रो रही हूँ।
अगर तुम्हे मेरे आंसूपोंछने है, तो आगे आओ,
सोते हुए देश को जगाओ
और इस गोरी मेम को हटा कर, मुझे
गद्दी पर बिठाओ.
अरे, मै हिन्दी हूँ, मुझसे मत डरो,
हर भाषा को लेकर चलती हूँ और सबके साथ
दीपावली के दीपक- सा जलती हू.

Zara sochiye

शादी से पहले हर लड़के को शौक होता है कि उसकी कमसे कम एक सुन्दर सी गर्लफ्रैंड हो..आजकल आसानी ले मिल भी जाती हैं क्यों कि लड़कियां भी कुछ ऐसा ही सोचती है! अब बारी आती है अपनी गर्ल फ्रैंड को खुश करने और अपना इम्प्रेशन डालने की..तो चाहे लड़का खुद कुछ भी न कमाता हो, अपने पिता जी से पॉकेट मनी मांग कर भी मौके निकाल निकाल कर उसे गिफ्ट देना नहीं भूलता. जहाँ तक हो सके कुछ ऐसा गिफ्ट देना चाहता है कि उसकी महबूबा उसे याद रक्खे. अक्सर लड़के माल में जाकर विदेशी ब्रांड की महगी महगी चड्डी औरचोली जो हजारों रुपये की मिलती हैं खरीद कर देते हैं.. लेकिन जब शादी हो जाती है तो वही महबूबा बोझ लगने लगती है..अब उसे अन्दर के तो छोडो तन ढकने के कपडे भी मिल जाएँ तो गनीमत है... वह भी उसे मागने पड़ते हैं. कभी सोचा है ऐसा क्यों? शायद इस लिए कि जब तक हमेंकोई चीज मिल नहीं जाती उसे पाने के लिए हम एडी छोटी का जोर लगा देते हैं और जब मिल जाती है तो उसकी क़द्र नहींकरते..यह अलग बात है कि दूसरे लोग या पडोसी उसी की कदर करना चाहते हैं..ऐसा नहीं है कि यह गलती सिर्फ पुरुष करते हैं.. महिलाएं भी शादी से पहले पार्कों में झाड़ के नीचे भी सुहागरात मानाने को राजी रहती हैं लेकिन शादी के बाद जब घर गृहस्थी का बोझ पड़ जाता है और खास कर जब बच्चे हो जाते हैं तो पति की कोई अहमियत नहीं रहती और वह सिर्फ कोल्हू का बैल नजर आता है जो पत्नी से पहले जैसे प्यार की उम्मीद भी नहीं कर सकता. यहीकारण होता है कि पति भी बाहर अगर थोड़ी सी भी छमक छल्लो देखे तो रीझ जाता है और फिर दोनों के बीच रिश्ते में दरार पड़ जाती है जो हमेशा बढती रहती है. माना कि यह बात सब पर लागू नहीं होती और जिस पर होती भी है वह यह जताना नहीं चाहते लेकिन जिन पर लागू होती है उन्हें सोचना चाहिए कि क्या पहले जैसा प्यार हमेशा नहीं बनाकर रखना चाहिए?

हास्य व्यंग्य

भीख मांगने का लल्लनटॉप तरीका: हास्य व्यंग्य
एक भिखारी भीख मांगने के लिए एक घर केदरवाजे पहुंचा और दस्तक दी. अंदर से एक अधेड़ महिला बाहर आई.
भिखारी: माता जी, भूखे को रोटी दे दो.
महिला: शर्म नहीं आती. इतने हट्टे-कट्ठे हो. कुछ काम किया करो.
भिखारी ने सुर बदला: आप भी इतनी खूबसूरत हैं, गोरी-चिट्टी हैं, गजब काफिगर है और आपकी उम्र भी ज्यादा नहीं है. आप मुंबई जाकर हिरोइन क्यों नहीं बन जातीं? घर पर बेकार बैठी हैं.
महिला: जरा रुको, मैं अभी तुम्हारे लिए हलवा-पूरी लाती हूं.

झाड़ू-बेलन …..

पत्नी भी अजीब कयामत होती है दोस्तों.जिनकी होती है वह भगवान से इससे छुटकारा मांगते हैं और जिनकी नहीं होती उनपर राहु केतु अपना प्रभाव डालइसके चक्कर में पडवा देते हैं लेकिन सच तो यह है कि यह बला किसी को भी अपनेवश में कर उससे बुरा से बुरा काम भी करवा सकती है. इस बला की सबसे बु री बात शॉपिंग होती है. शॉपिंग के लिए पत्नी नामक प्राणी कुछ भी कर और करवा सकता है.ऐसे ही एक महाशय ने जो शायद अपनी से बेहद दुखी है उन्होंने एक हास्यकविता लिखी है आप भी पढिए और बताइएं कैसी है यह हास्य कविता :
तुमने कहा,मान गया गर
तो प्यार तुम्हारा ,गुलाब-जामुन
अगर न माना तेरे कहने को
तो प्यार तुम्हारा झाड़ू-बेलन
खट-खट खट-खट
खीट पीट खीट पीट
हँस कर सहा तो सुन्दर यौवन
नज़र घुमाया,तुम्हे भुलाया
फिर प्यार तुम्हारा झाड़ू-बेल न
गिफ्ट जब लाया,गुलाब लगाया
कुछ क्षण गुज़रा हँस कर जीवन
भूल गया जब तेरे जन्म दिवस को
फिर प्यार तुम्हारा झाड़ू-बेलन
खरा उतरा जब हर वादे पर
स्वर्ग सी अनुभूति तेरा छुवन
जब टूट गया कोई वादा मुझसे
फिर प्यार तुम्हारा झाड़ू-बेलन
हँस कर मिला तो हँस कर लौटा
प्रसन्न रहा फिर दिन भर ये मन
जैसे हीं कुछ कमी गिनाया
फिर प्यार तुम्हारा झाड़ू-बेलन
हर जुर्म सहा तेरे प्यार में
हँसता रहा हर समय मै बेमन
अब तो आदत है लेने की
प्यार में तेरे झाड़ू-बेलन …..

बधाई, बधाई, बधाई....

बधाई, बधाई, बधाई....
इतिहास में पहली बार कांग्रेस ने कोईअच्छा काम किया है, इसके लिए हम सब युवा उनके आभारी है।
सरकार ने युवाओ के लिए 1 हजार करोड केमहाफंड का ऎलान किय है।
भारत की आधी आबादी युवा है अर्थात 60करोड़ तो गुणा भाग करने पर प्रति युवा 16 रूपए प्रतिवर्ष और 04 पैसे प्रतिदिन हमारे लिए है, हम हृदय से कांग्रेस के आभारी है, जो उसने युवाओ को 04 पैसे प्रतिदिन देने का एतिहासिक फैसला लिया।
अब हम सब युवा ऎश करेगें वो भी 04 पैसे प्रतिदिन में, लेकिन हम सरकार सेमाँग करते है की हमे राउंड फिगर में 05 पैसे प्रदान कर युवा शक्ति की इज्जत(?) में वृद्धि करे।
एक बार फिर से बधाई
हिप हिप हुर्रे....

चाहे कोई हो पार्टी,

चाहे कोई हो पार्टी, चाहे कोई भी हो सरकार
सबने दिया है जनता को, केवल भ्रष्टाचार
केवल भ्रष्टाचार, के आम आदमी है रोता
हाय रे महंगाई, जो पास है वो भी खोता
जो पास है वो भी खोता, के नए -२ नेता आए
सोचे कैसे इस देश को, लूट के हम खा जाये
लूट के हम खा जाये, कि नहीं इनका दीन ईमान
भ्रष्टाचार में डूब के, बन् गए ये हेवान
बन् गए ये हेवान, के छोड़ डी शर्म लिहाज सारी
मेरा भारत महान, रहेगा ये खेल हमेशा जारी
खेल हमेशा जारी, के कैसे आईना इन्हें दिखाए
ताकि शर्म में डूबके, या तो सुधरे या मर जाये

कुछ अनोखे हथियार.....

कुछ अनोखे हथियार.....
एक शक्तिशाली राजा थे- विनय सिंह। वह अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते थे, न ही किसी की योग्यता की कद्र करते थे। इसलिए उनके ही राज्य के अनेक लोग उनसे अप्रसन्न थे और अक्सरहमला बोल देते थे। विनय सिंह इस बात से बेहद परेशान थे। एक दिन वह अपने राजगुरु को इस बारे में बताते हुए बोले, 'गुरुजी, शत्रु हम पर कभी भी धावा बोल देते हैं। हमें इसका पता नहीं लग पाता। हैरानी तो इस बात की है कि हम पर हमला करने वाले हमारेही राज्य के लोग हैं। हम उन पर कैसे वार करें?'
राजगुरु बोले, 'पुत्र, तुम उन पर बिना देखे वार करो।' विनय सिंह हैरानी से राजगुरु सेबोले, 'भला बिना देखे कैसे वार करूं? ऐसा तो कोई हथियार नहीं होताजो शत्रु को देखे बिना उस पर चलाया जाता हो।' राजगुरु बोले, 'तुम उनको ऐसे शस्त्र से मारो जो लोहे या किसी सख्त धातु से बना न होकर मुलायम हो और सीधा हृदय को बेधने वाला हो।' अब तो राजा और बेचैन हो गए। वह बोले, 'गुरुजी, भला ऐसा कौन सा शस्त्र है और कहां मिलता है? मैंने तो ऐसे किसी शस्त्र के बारे में नहीं सुना।' राजगुरु हंसकर बोले, 'वह शस्त्र है-यथाशक्ति सारी प्रजा को जीविका उपलब्ध कराना।
जब प्रजा को रोजगार मिल जाता है तो उसकी अधिकतर समस्याएं हल हो जाती हैं। दूसरा शस्त्र है मीठा बोलनाऔर मीठे बोल के अनुरूप ही काम करना। तीसरा शस्त्र है योग्य व्यक्तियों का सम्मान करना। ये तीनों शस्त्र लोहे यासख्त धातु के बने हुए नहीं हैं लेकिन लोगोंके हृदय पर काफी प्रभाव डालते हैं। यदि इन शस्त्रों के माध्यम से तुम अपने विरोधियों को जीत लोगे तो वे तुम पर पीछे से प्रहार नहीं करेंगे और तुम्हारे वश में हो जाएंगे। राजा की आंखें खुल गईं। उन्होंने अपना व्यवहार बदला और कुछ ही समय में प्रजा के प्रिय बन गए।

जिन्दगी को जिन्दगी से झगड़ते देखा

चार दिनों की जिन्दगी मैं चार जिंदगियों को बिगड़ते देखा,

जिन्दगी को जिन्दगी से झगड़ते देखा ,
देखा हैं जिन्दगी को जिन्दगी की नज़र से,
रिश्तों की ताव्जों को सिकुड़ते देखा,

चार दिनों की जिन्दगी मैं चार जिंदगियों को बिगड़ते देखा,

मोहब्बत के कफ़न मैं मोहब्बत को लिपटते देखा,
मोहब्बत की नज़र मैं मोहब्बत को खटकते देखा,
देखा हर मंज़र जिंदगी का,
जिंदगी को जिंदगी की राह मैं रगड़ते देखा

चार दिनों की जिन्दगी मैं चार जिंदगियों को बिगड़ते देखा,

तान्हायिओं मैं संभलते देखा,
आबादियों मैं लड़खते देखा,
देखा पत्थर सी जिंदगी को,
और पत्थर को पिघलते देखा,

चार दिनों की जिन्दगी मैं चार जिंदगियों को बिगड़ते देखा, !!

Great Quotes Of Great MEN About WIFE...

Great Quotes Of Great MEN About WIFE...

If a man steals your wife, there is no better revenge than to let him keep her.
-Lee Majors 

After marriage, husband and wife become two sides of a coin; they just can't face each other, but still they stay together.
-Al Gore

By all means marry. If you get a good wife, you'll be happy. If you get a bad one, you'll become a philosopher.
-Socrates

Woman inspires us to great things, and prevents us from achieving them.
-Mike Tyson

The great question.. which I have not been able to answer... is, "What does a woman want?
-George Clooney

I had some words with my wife, and she had some paragraphs with me.
-Bill Clinton

"Some people ask the secret of our long marriage. We take time to go to a restaurant two times a week. A little candlelight, dinner, soft music and dancing. She goes Tuesdays, I go Fridays."
-George W. Bush

"I don't worry about terrorism. I was married for two years."
-Rudy Giuliani

"There's a way of transferring funds that is even faster than electronic banking. It's called marriage."
-Michael Jordan

"I've had bad luck with all my wives. The first one left me and the second one didn't." The third gave me more children!
-Donald Trump

Two secrets to keep your marriage brimming
1. Whenever you're wrong, admit it,
2. Whenever you're right, shut up.
-Shaquille O'Neal

The most effective way to remember your wife's birthday is to forget it once...
-Kobe Bryant

You know what I did before I married? Anything I wanted to.
-David Hasselhoff

My wife and I lived happily for twenty years. Then we met.
-Alec Baldwin

A good wife always forgives her husband when she's wrong.
-Barack Obama

Marriage is the only war where one sleeps with the enemy.
-Tommy Lee

Wednesday, February 27, 2013

चंद्रशेखर आज़ाद

बात उन दिनों की है जब
क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद
स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत थे और
फ़िरंगी उनके पीछे लगे थे।
फिरंगियों से बचने केलिए शरण लेने
हेतु आज़ाद एक तूफानीरात को एक घर में
जा पहुंचे जहां एक विधवा अपनी बेटी के
साथ रहती थी। हट्टे-कट्टे आज़ाद को डाकू
समझ कर पहले तो वृद्धा ने शरण देने से
इनकार कर दिया लेकिन जब आज़ाद ने
अपना परिचय दिया तो उसने उन्हें ससम्मान
अपने घर में शरण दे दी। बातचीत से आज़ाद
को आभास हुआ कि गरीबी के कारण
विधवा की बेटी की शादी में कठिनाई आ
रही है। आज़ाद ने महिला को कहा, 'मेरे सिर
पर पाँच हजार रुपए का इनाम है, आप
फिरंगियों को मेरी सूचना देकर
मेरी गिरफ़्तारी पर पाँच हजार रुपए
का इनाम पा सकती हैं जिससे आप
अपनी बेटी का विवाह सम्पन्न
करवा सकती हैं।
यह सुन विधवा रो पड़ी व कहा- "भैया! तुम
देश की आज़ादी हेतु अपनी जान हथेली पर रखे
घूमते हो और न जाने कितनी बहू-
बेटियों की इज्जत तुम्हारे भरोसे है। मैं
ऐसा हरगिज़ नहीं कर सकती।" यह कहते हुए
उसने एक रक्षा-सूत्र आज़ाद के हाथों में बाँध
कर देश-सेवा का वचन लिया। सुबह जब
विधवा की आँखें खुली तो आज़ाद जा चुके थे और
तकिए के नीचे 5000 रुपयेपड़े थे। उसके साथ
एक पर्ची पर लिखा था-
"अपनी प्यारी बहन हेतु एक छोटी सी भेंट-
आज़ाद।"

आजाद

दुनिया के किसी भी क्राँतिकारी की जुबाँ पर ऐसी भाषा नही मिलेगी जो आजाद की जुबाँ पर थी ।

एक बार आजाद से उनके गाँब के एक आदमी ने कहा कि तुम इतनी लूट करते हो और पूरा खजाना तुम्हारे पास रहता है तो क्या तुम उसमेँ से थोडा अपने बूढे माँ बाप को नहीँ दे सकते ?

तो आजाद ने दो उत्तर दिये थे जो दिल को छू जाते है

1-माँ बाप सिर्फ मेरे नही है और भी क्राँतिकारियोँ के है ।
और दूसरा

2-अगर तुम मेरे माँ बाप की सेवा न कर सको तो बता देना ।मेरी पिस्तौल की दो गोलियाँ निकल कर उनकी भी सेवा कर देगी ।

शत शत नमन है ऐसे क्राँतिकारी को, और हम भारतीय गर्वित हैं की आप जैसा लाल हमारे देश की धरती पर अवतरित हुआ|

आजाद

गाँधी जी के असहयोग आन्दोलन चौरीचौरा कांड के बाद वापस लेने से क्रांतिकारियों का गाँधी जी से मोहभंग हो गया| उसके बाद आजाद जी ने पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल,शचीन्द्रनाथ सान्याल योगेशचन्द्र चटर्जी के साथ मिलकर १९२४ में उत्तर भारत के क्रान्तिकारियों को लेकर एक दल हिन्दुस्तानी प्रजातान्त्रिक संघ (एच० आर० ए०) का गठन किया। 

क्रांतिकारी गतिविधिया जारी रखने के लिए धन की आवश्यकता थी तो इस संगठन ने गाँव के अमीर घरों में डकैतियाँ डालने की सोची, ताकि दल के लिए धन जुटाने की व्यवस्था हो सके| आजाद जी ने दल के सदस्यों के लिए यह नियम बनाया की किसी भी औरत के उपर हाथ नहीं उठाया जाएगा। 

एक बार एक गाँव में राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में डाली गई डकैती में जब एक औरत ने आज़ाद का पिस्तौल छीन लिया तो अपने बलशाली शरीर के बावजूद आज़ाद ने अपने उसूलों के कारण उस पर हाथ नहीं उठाया। इस डकैती में क्रान्तिकारी दल के आठ सदस्यों पर, जिसमें आज़ाद और बिस्मिल भी शामिल थे, पूरे गाँव ने हमला कर दिया। बिस्मिल ने मकान के अन्दर घुसकर उस औरत के कसकर चाँटा मारा, पिस्तौल वापस छीनी और आजाद को डाँटते हुए खींचकर बाहर लाये। इसके बाद दल ने केवल सरकारी प्रतिष्ठानों को ही लूटने का फैसला किया।

ऐसे थे हमारे आजाद जी उन्होंने जीवन पर्यंत महिलाओ को सम्मान दिया गर्व हैं हमें उन पर

जिनके खुद के घर शीशे के हों, वो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं उछाला करते

दुश्मनों की कमी नहीं मगर फिर भी दोस्तों को दुश्मन बनाने की कला कोई भारत से सीखे।
खबर है की संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में श्रीलंका के खिलाफ लाये जा रहे प्रस्ताव का भारत समर्थन करेगा। इससे पहले भी पिछले साल संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार निकाय के एक प्रस्ताव, जिसमे लिट्टे के खिलाफ लड़ाई में कथित युद्ध अपराधों के लिए श्रीलंका की निंदा की गई थी, पर भारत पश्चिमी देशों का साथ देते हुए प्रस्ताव के पक्ष में एवं श्रीलंका के खिलाफ मतदान कर चूका है। दिलचस्प बात यह थी की चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत भारत के पड़ोसियों ने प्रस्ताव के खिलाफ और श्रीलंका के पक्ष में मतदान किया था।
आमतौर पर देश विशेष से जुड़े प्रस्ताव पर मतदान नहीं करने वाला भारत, द्रमुक समेत तमिलनाडु के अन्य पार्टियों के जबर्दस्त दबाव में है। यह इस बात का ज्वलंत उदहारण है की कैसे "क्षेत्रीय राजनीती" भारत के अंतर्राष्ट्रीय नीति को प्रभावित कर रही है।
भारत का यह रुख श्रीलंका के लिए मुश्किल भरा है। वैश्विक मुद्दों पर श्रीलंका या तो भारत के साथ साथ देता है या फिर उसके रुख के अनुरूप निर्णय लेता है।
भारत पर भी कश्मीर समेत अन्य राज्योंमें मानवाधिकारों के हनन के आरोप लगते रहे हैं। कोई हमारे नीति-निर्धारकों को समझाए की जिनके खुद के घर शीशे के हों, वो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं उछाला करते।

Tuesday, February 26, 2013

"मैं चंद्रशेखर आजाद हूं|"

बुंदेलखण्ड में ओरछा के निकट एक नदी बहती है, जिसे सातार नदी कहते हैं| उस नदी के किनारे पर एक छोटी-सी कुटिया थी, जिसमें एक आदमी रहता था| घर-बार तो उसका कुछ था नहीं| बदन पर भी वह बस एक लंगोटी बांधे रखता था| लोग उसे 'ब्रह्मचारी' कहकर पुकारते थे| आस-पास के गांवों में जब कोई छोटा-मोटा उत्सव होता था तो पूजा-पाठ के लिए लोग उसे ले जाते थे| उसने कुछ मंत्र कण्ठस्थ कर लिए थे| कुटिया के आस-पास घना जंगल था| जंगल में भांति-भांति के पक्षी चहचहाते रहते थे और वन्य पशु भी घूमते रहते थे|
एक दिन जंगल का एक बड़ा अधिकारी वहां आया व बोला - "ब्रह्मचारी इधर एक जंगली सुअर आ गया है उसे उड़ाना है| चलो तुम भी चलो|"
ब्रह्मचारी ने हाथ जोड़कर कहा - "न-न मैं नहीं जाऊंगा| मुझे जानवरों से बड़ा डर लगता है|"
अधिकारी मुंह बनाकर बोला - "अरे ब्रह्मचारी होकर डरते हो| चलो उठो मैं तुम्हारे सस्थ हूं| हां यह बन्दूक ले लो| अगर सुअर तुम्हारे सामने आ जाए तो...|"
अधिकारी की बात काटकर ब्रह्मचारी ने कहा - "मैं क्या करूंगा! मुझे बंदूक चलानी नहीं आती|"
अधिकारी बोला - "कोई बात नहीं है| सुअर तुम्हारे पास नहीं आएगा| अगर फिर भी आ जाए तो बंदूक उलटी पकड़कर इसकी मूठ उसके सिर पर जमा देना|"
ब्रह्मचारी इंकार करता रहा, पर अधिकारी नहीं माना| वह उसे खींचकर जंगल में ले गया| उसके हाथ में एक बंदूक थमा दी और अपने से कुछ गज के फासले पर उसे बिठा दिया| हांका हुआ सुअर झाड़ियों के बीच से दौड़ता हुआ आगे आया| अधिकारी ने निशाना साधकर गोली दाग दी, लेकिन सुअर गिरा नहीं इससे साफ था कि निशाना चूक गया| अब क्या हो? जब तक दूसरी गोली चले तब तक वह आगे निकल गया| अधिकारी हैरान था किक्या करे| अचानक उसे गोली की आवाज सुनाई दी और उसने देखा कि सुअर कुलांट खाकर धरती पर चित गिर गया है और छटपटा रहा है|
अधिकारी ने पास जाकर देखा तो भौचक्कारह गया| गोली सुअर के ठीक मर्म-स्थल पर लगी थी|
अधिकारी को देखकर ब्रह्मचारी वहां आ गया| अधिकारी ने उसकी ओर कड़ी निगाह से देखा तो वह बोला - "यह क्या हो गया?सुअर जैसे ही मेरे आगे आया मेरी तो जान ही सुख गई| हाथ कांपने लगे और अचानक घोड़ा दब गया|"
अधिकारी ने कहा - "मुझे बनाने की कोशिश मत करो सच-सच बताओ तुम कौन हो? तुम अव्वल दर्जे के निशानेबाज हो| सुअर के ठीक वहां पर गोली लगी है, जहां लगनी चाहिए थी| यह काम किसी कुशलनिशानेबाज का ही हो सकता है|"
ब्रह्मचारी का चेहरा देखते ही बनता था, मानो अभी एक क्षण में ही वह रो पड़ेगा| ब्रह्मचारी बोला - "देखो तो अभी तक मेरा दिल कितना धड़क रहा है, राम-राम आज तो ऊपर वाले ने ही मेरी जान बचा ली|"
ब्रह्मचारी जैसे-जैसे अपनी बात कहता गया, अधिकारी का संदेह और बढ़ता गया| अंत में ब्रह्मचारी उसे साथ लेकर अपनी कुटिया पर आया और अधिकारी को कसम खिलाई कि वह किसी से कहेगा नहीं| फिर बोला - "मैं चंद्रशेखर आजाद हूं|"

बड़े अधिकारी शाहब

एक बार एक बड़े अधिकारी शाहब थे, बहुत ही ठरके वाले थे, खूब पैसा बनाते और उड़ाते थे !
उनके पिताजी बहुत बुजुर्ग थे, जिनके साथ वो शाहब बहुत बुरा बर्ताव करते थे, एक कोठरी में रखते थे, बचा-खुचा खिलाते थे, ओढने को फटी कम्बल देते थे !
उस घर में बुजुर्ग पिता से ज्यादा इज्जत नौकर और ड्राइवरों की हुआ करती थी !
इन्हीं परेशानियों और दुःख में वो बुजुर्ग इस दुनिया को छोड़ एक अच्छी दुनिया में चल बसे !
शाहब ने आदेश फ़रमाया "बुड्ढे का सामान फेंकके कोठरी की सफाई कर दो" !
नौकर सफाई करके सामान रद्दी वाले को देने लगे...
इतने में शाहब का बेटा, जो कोई चार-पांच साल का था आया और अपने दादा जी की फटी कम्बल को ले जाने लगा तो नौकरों ने मना किया !
पर उस बच्चे ने फटी कम्बल को सम्हाल के अपनी खिलोनों वाली अलमारी में रख दिया !
शाहब को बेरा पड़ा तो गुस्सा करते हुए आये और बच्चे से पूछा की तुमने इसे सम्हालके क्यूँ रखा है ??

बच्चे ने मासूमियत से जवाब दिया "पिताजी, जब आप बूढ़े हो जाओगे तब आपके काम आएगी"...


जैसा व्यव्हार हम अपने बुजुर्गों के साथ करते हैं वैसा ही व्यव्हार हमारे बच्चे हमारे साथ करने वाले हैं !

maan

Zindagi Mein Kuch Paya Aur Kuch Khoya
Lekin Tujhe Khona Nhi Chahta Maa
Zindagi Ne Kabhi Hasaya Aur Kabhi Rulaya
Lakin Tujhe Rulana Nhi Chahta Maa
Yaad Aati Hai Bahot Tere Bachpan Ki Wo Lory
Isi Liye Teri God K Elawa Kahin Aur Sona Nhi Chahta Maa
Kitna Daanta Tha Tune Bachpan Mein
Ab Q Nhi Daandti Tu Mujhe Maa
Kaise Zinda Reh Paunga Main Tere Baghair
Kabhi Fursat Mile Mujhe Tu Ye To Bata Maa
Zindagi Tune To Meri Roshan Kar Di
Lekin Khud Kiss Andhere Mein Kho Gayi Tu Maa
Kabhi To Khila Mujhe Apne Hath Ki Roti
Aaj Kal Bhukh Bahoth Lagthi Hai Mujhe Maa

“एक रोटी "

“एक रोटी "
डाइनिंग टेबल पर खाना देखकर बच्चा भड़का
फिर वही सब्जी, रोटी और दाल में तड़का....?

मैंने कहा था न कि मैं पिज्जा खाऊंगा
रोटी को बिलकुल हाथ नहीं लगाउंगा

बच्चे ने थाली उठाई और बाहर गिराई.......?

बाहर थे कुत्ता और आदमी दोनों रोटी की तरफ लपके .......?

कुत्ता आदमी पर भोंका
आदमी ने रोटी में खुद को झोंका

और हाथों से दबाया ---
कुत्ता कुछ भी नहीं समझ पाया

उसने भी रोटी के दूसरी तरफ मुहं लगाया
दोनों भिड़े
जानवरों की तरह लड़े

एक तो था ही जानवर,
दूसरा भी बन गया था जानवर.....

आदमी ज़मीन पर गिर पड़ा,
कुत्ता उसके ऊपर चढ़ा

कुत्ता गुर्रा रहा था
और अब आदमी कुत्ता है
या कुत्ता आदमी है,
कुछ भी नहीं समझ आ रहा था

नीचे पड़े आदमी का हाथ लहराया,
हाथ में एक पत्थर आया

कुत्ता कांय-कांय करता भागा........

आदमी अब जैसे नींद से जागा,
हुआ खड़ा,
और लड़खड़ाते कदमों से चल पड़ा.....

वह कराह रहा था रह-रह कर
हाथों से खून टपक रहा था बह-बह कर
आदमी एक झोंपड़ी पर पहुंचा.......

झोंपड़ी से एक बच्चा बाहर आया
और ख़ुशी से चिल्लाया

आ जाओ, सब आ जाओ
बापू रोटी लाया,
देखो बापू रोटी लाया,
देखो बापू रोटी लाया......... — !!

एक ही बात पे लोग हैरान है

एक ही बात पे लोग हैरान है,
सांस लेता हुआ शख्स बेजान है.

बिक रहा सब यहां तोल पे, मोल पे,
सब मकां से बडी उस की दुकान है.

मुल्क आजाद पर,सोच पे झंजिरे,
होठ खामोश है, आंख तूफान है.

तुं मसीहा बदल,या बदल दे दवा,
आखरी सांस पे देख इमान है.

बूत होता अगर पूजना छोडते,
सो खता से भरा, फिर भी इन्सान है.

Monday, February 25, 2013

साउथ पोल


साउथ पोल
की तरफ उड़ कर जा रही थी , ठंड
इतनी ज्यादा थी की उससे सहन नही हुई
और खून जम जाने
से वो वहीँ एक मैदान में गिर गयी ......
वहां पर एक गाय ने
आकर उसके ऊपर गोबर कर दिया , गोबर के
नीचे दबने के
बाद उस चिड़िया को एहसास हुआ की उसे
दरअसल उस गोबर के ढेर में गर्मी मिल
रही थी , लगातार गर्माहट के
एहसास ने उस छोटी चिड़िया को सुकून से
भर
दिया और उसने गाना गाना शुरू कर
दिया .....
वहां से निकल रही एक बिल्ली ने उस गाने
की आवाज़
सुनी और देखने लगी की ये आवाज़ कहाँ से आ
रही है ,थोड़ी देर बाद उसे एहसास हुआ
की ये आवाज़ गोबर
के ढेर के अंदर से आ रही है , उसने गोबर
का ढेर खोदा और
उस चिड़िया को बाहर निकाला और उसे
खा गयी .....:((
मॉरल - आपके ऊपर गंदगी फेंकने वाला हर
इंसान
आपका दुश्मन नही होता ,और आपको उस
गंदगी में से
बाहर निकलने वाला हर इंसान
आपका दोस्त
नही होता ...

मैं पाप बेचती हूँ | “


एक बार घूमते-घूमते कालिदास बाजार गये | वहाँ एक महिला बैठी मिली | उसके पास एक मटका था और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी | कालिदास ने उस महिला से पूछा : ” क्या बेच रही हो ? “

महिला ने जवाब दिया : ” महाराज ! मैं पाप बेचती हूँ | “
कालिदास ने आश्चर्यचकित होकर पूछा : ” पाप और मटके में ? “
महिला बोली : ” हाँ , महाराज ! मटके में पाप है | “
कालिदास : ” कौन-सा पाप है ? “
महिला : ” आठ पाप इस मटके में है | मैं चिल्लाकर कहती हूँ की मैं पाप बेचती हूँ पाप … और लोग पैसे देकर पाप ले जाते है |”
अब महाकवि कालिदास को और आश्चर्य हुआ : ” पैसे देकर लोग पाप ले जाते है ? “
महिला : ” हाँ , महाराज ! पैसे से खरीदकर लोग पाप ले जाते है | “
कालिदास : ” इस मटके में आठ पाप कौन-कौन से है ? “
महिला : ” क्रोध ,बुद्धिनाश , यश का नाश , स्त्री एवं बच्चों के साथ अत्याचार और अन्याय , चोरी , असत्य आदि दुराचार , पुण्य का नाश , और स्वास्थ्य का नाश … ऐसे आठ प्रकार के पाप इस घड़े में है | “

कालिदास को कौतुहल हुआ की यह तो बड़ी विचित्र बात है | किसी भी शास्त्र में नहीं आया है की मटके में आठ प्रकार के पाप होते है | वे बोले : ” आखिरकार इसमें क्या है ? ” //
महिला : ” महाराज ! इसमें शराब है शराब ! “
कालिदास महिला की कुशलता पर प्रसन्न होकर बोले : ” तुझे धन्यवाद है ! शराब में आठ प्रकार के पाप है यह तू जानती है और ‘ मैं पाप बेचती हूँ ‘ ऐसा कहकर बेचती है फिर भी लोग ले जाते है | धिक्कार है ऐसे लोगों को !

भगवान् का पता !


भगवान् का पता !

एक बार एक फ़क़ीर भीख मांगने के लिए मस्जिद के बाहर बैठा हुआ
होता है।
सब नमाज़ी उस से आँख बचा कर चले गए और उसे कुछ नहीं मिला।
वो फिर चर्च गया।

फिर मंदिर और फिर गुरुद्वारे।
लेकिन उसको किसी ने कुछ नहीं दिया।

आखिरी में वह हार कर एक शराब की दुकान के बहार आ कर बैठ
गया।
उस शराब की दुकान से जो भी निकलता उसके कटोरे में कुछ न कुछ
डाल देता।

कुछ देर बाद उसका कटोरा नोटों से भर गया तो नोटों से
भरा कटोरा देख कर फ़क़ीर ने आसमान की तरफ देखा और बोला।

"वाह रे प्रभु" रहते कहाँ हो और पता कहाँ का देते हो...!

उम्मीदों की नाव है,,,


उम्मीदों की नाव है,,,
ज़िन्दगी का पानी है,,,
लम्हों की बारिश में ,,
जस्बातो की कहानी है,,
तुफानो के मेले है,,,
ना जाने कितने झमेले है,,,
यहाँ कौन चलता है साथ,,
तुम भी अकेले
हम भी अकेले है,,
अरमानो की गिरहें है,,,
चाहत के गुच्छे है,,,
ना तुम यहाँ बुरे,,,
ना हम यहाँ अच्छे है,,,,
चरागों की बाती में,,,
गुमशुदा सी हस्ती है,,,
टूटती बिखरती ,,
ज़िन्दगी बड़ी सस्ती है,,
राहों की भुलभुलेय्या में,,,
अपने ही खयालो में,,
उलझ गया आकर,,,,
अपनी ही चालो में...
सजदो के ताबीज है,,,
मतलबी को खुदा है,,,
यहाँ कौन भला किसीसे
दिल से जुड़ा है,,
तेरा क्या कसूर हैं,,
कुदरत का दस्तूर है,,,
मौत कभी आज ,,
तो कभी दूर है,,, !!

एक स्त्री एक दिन एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ के पास के गई और बोली,


एक स्त्री एक दिन एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ के
पास के गई और बोली,
"डाक्टर मैँ एक गंभीर समस्या मेँ हुँ और मेँ
आपकीमदद चाहती हुँ । मैं गर्भवती हूँ,
आप किसी को बताइयेगा नही मैने एक जान
पहचान के सोनोग्राफी लैब से यह जान लिया है
कि मेरे गर्भ में एक बच्ची है । मै पहले से
एकबेटी की माँ हूँ और मैं किसी भी दशा मे
दो बेटियाँ नहीं चाहती ।"
डाक्टर ने कहा ,"ठीक है, तो मेँ
आपकी क्या सहायता कर सकता हु ?"
तो वो स्त्री बोली,"मैँ यह चाहती हू कि इस
गर्भ को गिराने मेँ मेरी मदद करें ।"
डाक्टर अनुभवी और समझदार था।
थोडा सोचा और फिर बोला,"मुझे लगता है कि मेरे
पास एक और सरल रास्ता है जो आपकी मुश्किल
को हल कर देगा।"वो स्त्री बहुत खुश हुई..
डाक्टर आगे बोला,"हम एक काम करते है
आप दो बेटियां नही चाहती ना ?? ?
तो पहली बेटी को मार देते है जिससे आप इस
अजन्मी बच्ची को जन्मदे सके और
आपकी समस्या का हल भी हो जाएगा. वैसे
भी हमको एक बच्ची को मारना है तो पहले
वाली को ही मार देते है ना.?"
तो वो स्त्री तुरंत बोली"ना ना डाक्टर.".!!!
हत्या करनागुनाह है पाप है और वैसे भी मैं
अपनी बेटी को बहुत चाहती हूँ । उसको खरोंच
भी आती है तो दर्द का अहसास मुझे होता है
डाक्टर तुरंत बोला,"पहले
कि हत्या करो या अभी जो जन्मा नही
उसकी हत्या करो दोनो गुनाह
है पाप हैं ।"
यह बात उस स्त्री को समझ आ गई । वह स्वयं
की सोच पर लज्जित हुई और पश्चाताप करते हुए
घर चली गई ।
क्या आपको समझ मेँ आयी ?
अगर आई हो तो SHARE करके दुसरे
लोगो को भी समझाने मे मदद कीजिये
ना महेरबानी. बडी कृपा होगी ।
हो सकता है आपका ही एक
shareकिसी की सोच बदल दे..
और एक कन्या भ्रूण सुरक्षित, पूर्ण विकसित
होकर इस संसारमें जन्म ले.....

ATM से कैसे पैसे निकालता है


जबर्दस्त :p

लड़का ATM से कैसे पैसे निकालता है -:

1. कार पार्क करता है
2. ATM जाता है
3. card Insert करता है
4 .PIN Enter करता है
5. cash निकालता है
6. ATM Card वापस रखता है
7. कार Drive करके निकल जाता है

लडकी ATM से कैसे पैसे निकालती है -:

1. कार पार्क करती है
2. makeup Check करती है
3. कार बंद करती है
4. makeup Check करती है
5. ATM जाती है
6. purse से ATM card निकालती है
7. card Insert करती है
8. जल्दी से Cancel बटन दबाती है
9. अपने purse से एक चिट निकालती है ..जिसमे
PIN नम्बर लिखा होता है
10. card Insert करती है
11. PIN Enter करती है
12. cash लेती है
13. कार में वापस जाती है
14. makeup Check करती है
15. car Start करती है
16. car रोकती है
17. ATM की तरफ भागती है
18. ATM card लेती है
19. कार में वापस जाती है
20. makeup Check करती है
21. car start करती है
22. makeup Check करती है
23. 1 km तक कार चलाती है
24. तभी उसे याद आता है मेरा पर्स कहा है
25. कार फिर ATM की तरफ मोडती है
Sudhir Rajasthani

Husbands VS Wives >=)

Husbands VS Wives >=) 

Husband: Do you know the meaning of WIFE?
It means, Without Information, Fighting Everytime!
Wife: No darling, it means,
With Idiot For Ever
=)) =)) =)) =)) =)) =)) =)) =)) =)) =))
Wife: I wish I was a newspaper,
So I'd be in your hands all day.
Husband: I too wish that you were a newspaper,
So I could have a new one everyday
Doctor: Your husband needs rest and peace. Here are some sleeping
pills.
Wife: When must I give them to him?
Doctor: They are for you

Wife: I had to marry you to find out how stupid you are.
Husband: You should have known it the minute
I asked you to marry me.

Husband: Today is Sunday & I have to enjoy it.
So I bought 3 movie tickets.
Wife: Why Three?
Husband: For you and your parents

Wife: What will you give me if I climb the great Mount Everest ?
Husband: A lovely Push...!!!

FANTASTIC WORDS.

1 TO 10 .....
FANTASTIC WORDS.
The most selfish one letter word.
" I "
Avoid it.
.
The most satisfying two letter word.
"We"
Use it.
.
The most poisonous three letter word.
"Ego"
Kill it.
.
The most used four letter word.
"Love"
Value it.
.
The most pleasing five letter word.
"Smile"
Keep it
.
The fastest spreading six letter word.
"Rumour"
✖✖Ignore it.✖✖
.
The hard working seven letter word.
"Success"
Achieve it.
.
The most enviable eight letter word.
"Jealousy"
↔↔Distance it.↔↔
.
The most powerful nine letter word.
"Knowledge"
Acquire it.
.
The most divine ten letter word.
"Friendship"
Maintain it....:)
Have Fun in life

Saturday, February 23, 2013

'prem' and 'karuna'


Satyam from my Blog Ef , writes on 'prem' and 'karuna' too .. more elaborately ..

Your translation is perfectly fine. Certainly you could not have done better with an impromptu attempt such as this is. I shall repeat my comments from elsewhere but before I do so and speaking for myself I should add that with any important thought or work or body of work new spaces are opened up for discussion. The important then lies in this space or these new avenues. Agreement or disagreement are beside the point as long as the work enables such exchanges and assuming one responds in ways befitting the rigor or thought of the work. I cannot hope to do so with my comments. Nonetheless I engage in this very incomplete and unworthy response:

A fascinating thought for sure. But couldn't one problematize it? The
Christian notion of love seems to shed such an opposition and completely
incorporate mercy. In other words no authentic mercy exists without
love and vice versa. Having said that I don't completely subscribe to
this idea. Because this definition of love is achieved bu stripping down
everything that is essential to love and making it something 'other'
and much more spiritualized. Which of course makes sense within the
context of faith but otherwise does great violence to any normative idea
of love.

Getting back to your father's opposition perhaps the selfishness of love
isn't such a bad thing. There is undoubtedly a selfish economy
minimally operative between the lover and whatever is loved but
sometimes this is a means of preservation. It preserves what is loved
more (or longer) than it otherwise might have. But it also perhaps
preserves the ethical in one's own self.

It is true that mercy does not operate with the same sense of exchange
but is it completely free of any economy? Isn't it precisely the self
that is somehow benefited each time the act of mercy is performed? At
the very least there is this possibility.

Contamination then on either side of this opposition..

In any case that wonderful paragraph from your father certainly branches
out in many different directions and calls for engagement. Which is all
that one can expect from a 'rich' thought or thinking..

In the same vein the biographical detail behind any such thought is of relatively less significance. Why, when and how your father wrote what he did enlightens us about his state of mind but the thought must stand independently. Now one could certainly complicate the same by offering other bits of evidence or other references from your father's work where he perhaps argues against what he has argued for here. Or maybe he doesn't argue against it but makes the opposition even more nuanced. Either way the original thought whether revised or corrected must stand on its own. And even if one disagrees with such a thought one has not in any way 'lessened' its significance. The truest homage is always one where one authentically engages with a work. To do so one one must necessarily 'argue'. A weak or blind 'obedience' in this sense would never be worthy of the work or thought. It would completely misunderstand even the notion of 'fidelity'. To use a register from elsewhere or a word that I like a lot any such thought is a 'provocation'. Because it invites those who might be interested to respond in similar ways. One cannot hope to equal the 'gift' offered by the thought but one must strive to respond in 'apposite' fashion. In doing so we also enrich the original work. We expand the range of its possibilities. We expand its meanings. So on and so forth. Even where there is revision or correction by a later voice or generation it only enhances the prestige of the thought that gave rise to it. We never overcome the heritage of thinking, we just keep responding to it anew. It is the same with any other work worthy of the name. Hence on my part I keep revisiting the site of the angry young man...



perhaps... I can't claim to have any serious knowledge on the Hindi though I think Amitji's translations here are correct. It's then a question of which meaning one chooses from a range of possibilities. Always of course the problem with translation. But Amitji's choices make sense because these sharpen the 'opposition' with love. if however you choose 'compassion' you start out perhaps more of an overlap. Again this is just about nuance and I certainly don't have any expertise whatsoever in Hindi. But this is where different translations create different tones. Also some of these meanings are thematically linked. So for instance one could argue that proper mercy isn't possible without authentic compassion. So the former might presuppose the latter. These problems often arise in translation because the original word has a whole web of semantic references that are interconnected. But when you translate you have to choose and even if in a footnote you mentioned those other possibilities as translators often do you wouldn't be able to evoke the same 'web' in a different language.

♥ STORY -- THE TOILET ♥

♥ STORY -- THE TOILET ♥


Once a Muslim brother got a job in a restaurant. He took with himself a container for water so that he can use it for toilet purposes. So, every time he goes to the toilet, he fills the container with water and takes it with him.

One day, a Christian man, who also works there, saw him taking water and asked him about the reason for it.

The Muslim brother told him that after releasing the dirty materials, we should clean that place and that cleanliness is a major part of Islam.

The man said that why not use the toilet papers?
The brother asked him that if such dirty thing touched his hands, would he use a toilet paper to wipe it off or use water?

The man understood and said that he would use water. The next day, the Christian man brought a container for himself andused it during relieving himself.

When he came out of the toilet, he was crying and tears were rolling down his cheeks.

The Muslim brother asked him about why he is crying. The Christian man said that "For the first time in my life, I feel completely clean."

Thereafter, he accepted Islam and became a devoted Muslim.

★ [ DON,T FORGET TO SHARE ] ★

करुणा और प्रेम

करुणा और प्रेम दोनों का जन्म एक ही स्रोत से होता है वह है मन ।प्रेम तब तक करुणा के साथ रहता है जबतक उसमे स्वार्थ न आ जाए और जब स्वार्थ उत्पन्न होता है तो करुणा नहीं होती ।करुणा निश्चय ही प्रेम से बड़ी होती है और यदि प्रेम मे करुणा रहे तो प्रेम अपने चरम रूप मे सामने आता है ।और जब केवल प्रेम रहे तो भी वह अपने चरम रूप मे ही आता है और तब एक प्रेमी अपने ही साथी को मारने मे हिचकता नहीं जैसा रूप आज हमें दिख रहा है ।यह सत्य है कि स्वार्थ के बिना प्रेम संभव नहीं होता और करुणा निःस्वार्थ होती है ।पर आज के परिवेश मे लोग दो रूप लिए चलते है करुणा का जो दिखाने की चीज़ है और स्वार्थ छुपाने की और दोनों को मिला जो प्रेम उत्पन्न होता है वह केवल और केवल दिखावा ही होता है ।पहचानना मुश्किल है की सामने वाले का हृदय करुणा से भरा है की मिलावट यहाँ भी डेरा डाल चुकी है ।

प्रेम व करुणा

प्रेम व करुणा दोनों ही एक दूसरे के पूरक विषय है ....एक के बगैर दूसरे का अस्तित्व संभव नहीं....फिर भी डॉ. हरिवंश राय बच्चनजी का विश्लेषण न केवल सही है बल्कि उपयुक्त भी है...

प्रेम स्वयं-स्फूर्त हो सकता है लेकिन करुणा उपजति है, बनती है, जन्म लेती है....बस यही फर्क मुझे दिखता है....हो सकता है प्रेम में करुणा का अभाव हो लेकिन करुणा में प्रेम अवश्य होता है....

प्रेमी के कई मायने हो सकते है प्रेमी भी भिन्न भिन्न रूप में मिलते है ....रिश्ते के अनुसार प्रेम का प्रकार व असर बदलते जाता है....प्रेम में स्वार्थ एक अनिवार्य दुर्गुण है ....स्वार्थ के बगैर प्रेम संभव नहीं ....माँ अपने कातिल पुत्र के लिए भी क्षमाशील होती है उसकी ढाल होती है ...वहीँ एक सच्चा प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए अपनी जान कुर्बान करने में जरा भी वक़्त नहीं लगाता .....

प्रेम को पग-पग पर परीक्षाएं देनी होती है करुणा के साथ ऐसा कोई बंधन नहीं होता ...एक विद्यमान है जबकि दूसरा आवरण मात्र है....

करुणाशील व्यक्ति चोट खाया हुआ, सुधरा हुआ, सबक सीखा हुआ व्यक्ति होता जबकि प्रेमी केवल नैसर्गिक गुण अवगुण का वाहक होता है.....

-निबंध-

-निबंध-

प्राथमिक पाठशाला की एक शिक्षिका ने अपने छात्रों को एक निबंध लिखने को कहा. विषय था "भगवान से आप क्या बनने का वरदान मांगेंगे" इस निबंध ने उस क्लास टीचर को इतना भावुक कर दिया कि रोते-रोते उस निबंध को लेकर वह घर आ गयी. पति ने रोने का कारण पूछा तो उसने जवाब दिया इसे पढ़ें, यह मेरे छात्रों में से एक ने यह निबंध लिखा है..

निबंध कुछ इस प्रकार था:-

हे भगवान, मुझे एक टीवी बना दो क्योंकि तब मैं अपने परिवार में ख़ास जगह ले पाऊंगा और बिना रूकावट या सवालों के मुझे ध्यान से सुना व देखा जायेगा. जब मुझे कुछ होगा तब टीवी खराब की खलबली पूरे परिवार में सबको होगी और मुझे जल्द से जल्द सब ठीक हालत में देखने के लिए लालायित रहेंगे. वैसे मम्मी पापा के पास स्कूल और ऑफिस में बिलकुल टाइम नहीं है लेकिन मैं जब अस्वस्थ्य रहूँगा तब मम्मी का चपरासी और पापा के ऑफिस का स्टाफ मुझे सुधरवाने के लिए दौड़ कर आएगा. दादा का पापा के पास कई बार फोन चला जायेगा कि टीवी जल्दी सुधरवा दो दादी का फेवरेट सीरियल आने वाला हे. मेरी दीदी भी मेरे साथ रहने के लिए के लिए हमेशा सबसे लडती रहेगी. पापा जब भी ऑफिस से थक कर आएँगे मेरे साथ ही अपना समय गुजारेंगे. मुझे लगता है कि परिवार का हर सदस्य कुछ न कुछ समय मेरे साथ अवश्य गुजारना चाहेगा मैं सबकी आँखों में कभी ख़ुशी के तो कभी गम के आंसू देख पाऊंगा. आज मैं "स्कूल का बच्चा" मशीन बन गया हूँ. स्कूल में पढ़ाई घर में होमवर्क और ट्यूशन पे ट्यूशन ना तो मैं खेल पाता हूँ न ही पिकनिक जा पाता हूँ इसलिए भगवान मैं सिर्फ एक टीवी की तरह रहना चाहता हूँ, कम से कम रोज़ मैं अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ अपना बेशकीमती समय तो गुजार पाऊंगा.

पति ने पूरा निबंध ध्यान से पढ़ा और अपनी राय जाहिर की. हे भगवान ! कितने जल्लाद होंगे इस गरीब बच्चे के माता पिता !

पत्नी ने पति को करुण आँखों से देखा और कहा,...... यह निबंध हमारे बेटे ने लिखा है !!

रामफल और गुलाबो की फोन वार्ता :--------

रामफल और गुलाबो की फोन वार्ता :--------

रामफल -----और रे गुलाबो के हाल स तेरा ?
गुलाबो ---- हाल न के मेरे मलेरिया हो रह्या स ? काम की बात करले मेरी इनकमिंग ठुकन लाग री स
रामफल ----के बोलू तेरे प्यार में कती जान लिकडण न हो रही है
गुलाबो -----हम्बे किते ना तेरे गोली लाग री स
रामफल --न्यू मत कह ना मै सैड दे सी फोन बंद कर दूंगा
गुलाबो -- फोन बंद करन की धमकी देता हो ते चाहे सौ बे कर दे ,उन्ह कुन्सा तू दूध का धुला स ?
रामफल -----ये तीर से ना मार ,मेरी कती सान्नी हो जाय्गी
गुलाबो --चोखा डांगर खा लेंगे
रामफल -- अच्छा तू कल तडके पार्क में आवेगी के ?
गुलाबो -- के करांगे पार्क में ?
रामफल -----बैठान्गे और के गोस्से पाथंगे ?
गुलाबो -- बैठन न के तू ब्यावाली भैंस है?
रामफल--- मजाक छोड़ अर बोलबाली आ जाइये
गुलाबो ---अर ज्ये नि आऊ ते ?
रामफल ---इसी बात करके तू मेरे दिल में खड्डे ना कर ,मै मर जायँगा
गुलाबो -- मरण की धमकी दें की जरूरत कोणी स ,अच्छा न्यू बता के ख्वावेगा
रामफल -- तू एक बे आ जाइये,फेर चाहे तू मेरे बुडके मार लिए
गुलाबो -- जा ना बावली तरेड ,मै के मानसखानी हु ?
रामफल --हाय रे ,तेरा यो ऐ अंदाज ते मन्ने खा गया , बस तू एक बे आज्या,तेरी बाट में मेरी आंख सूज क पकोड़े बरगी हो री स
गुलाबो-- के महालमाक्खी के छते गेल छेड़ खानी कर रह्या था ?
रामफल -- तू सारी हान मजाक ना करया कर ,कदे सीरियसली भी बता लिया कर ?
गुलाबो -- सीरियस न के तू आइ सी यू में भर्ती हो रह्या स ?
रामफल -- तेरे ते फोन पे बात करना ते आपने ए पिसा का नाश करना स ,तन्ने ते कदे ढंग सर बात ते करनी नि ,ठीक स कल दस बजे पार्क में पोहच जाइये,इब मै काटू सु इस फोन न ?
गुलाबो --तन्ने यो फोन साणी समझ राखा है जो काटन की बात करे से ?

तोता

एक लेडी तोते की दुकान में एक तोता खरीदने के लिए गई।

दुकानदार उस लेडी से: “ मेम यह तोता खरीद लीजिए, यह बिल्कुल इंसानों की तरह बोलता है।

लेडी हैरान होकर तोते से पूछती है: “ अच्छा फिर ये बताओ कि मैं तुम्हें कैसी लगती हूं ?

तोता: “ एक नंबर की कैरेक्टरलेस लगती हो।

लेडी को गुस्सा आ जाता है और वह दुकानदार से बोलती है: “ यह तोता तो गाली देता है ”।

दुकानदार उस लेडी से माफी मांगता है और उस तोते को अंदर ले जाकर खूब मारने लगता है, इस दौरान वह तोते से पूछता है: “ अब तो गाली नहीं देगा ”। तोता जवाब देते हुए: “ नहीं मालिक अब मैं गाली नहीं दूंगा।

तोते को मारने के बाद दुकानदार अंदर से बाहर आता है और लेडी से बोलता है.... लीजिए मैम ये तोता अब गाली नहीं देगा।

लेडी फिर से उस तोते से पूछती है: “ अगर मेरे घर में एक आदमी आए तो तुम क्या सोचोगे ”?

तोता: “ तुम्हारा पति होगा ”।

लेडी: “ अगर दो आदमी आए तो ”?

तोता: “ तुम्हारा पति और देवर”।

लेडी: “अगर तीन आदमी आए तो ” ?

तोता: “ तुम्हारा पति, देवर और भाई”।

लेडी: “ अगर चार हुए तो ”?

तोता डरकर दुकानदार की तरफ हाथ जोड़कर बोला: “ सर जी मैंने पहले ही बोला था कि यह कैरेक्टरलेस है”!!!

टी-स्टॉल

कटक के एक छोटे से टी-स्टॉल का मालिक गरीब बच्चों की मदद करत करते उनके लिए एक शिक्षक भी बन गया।हर सुबह चाय के ठेला चलाने वा प्रकाश राव कुछ गरीब बच्चों को दूध बेचता है जो उसके स्टॉल के करीब आते हैं। अगर यह 55 साल का चायवाला इस ओर कदम नहीं बढ़ाता तो शायद यह बच्चे कभी पढ़ ही नहीं पाते।

प्रकाश को 11 कक्षा में छात्रवृत्ति के बाद भी पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी जिसके कारण वह शिक्षा की अहमियत जान चुका था। इसके कारण ही प्रकाश ने बस्ती में रहने वाले बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया गया। इस गांव के 2 किमी के आस पास 4 सरकारी स्कूल हैं पर ज्यादातर मां बाप बेहद गरीब परिवार से हैं और वह अपने बच्चों को इस कारण वहां नहीं भेज सकते।

ऐसे बच्चों की मदद प्रकाश ने करी जिससे वह पास में ही अच्छी शिक्षा मुफ्त में ले पाएं।राव ने सभी बच्चों को कक्षा 3 तक पढ़ाता है और इसको पास करने वाले छात्रों को वह सरकारी स्कूल भेजने में भी मदद करता है।बस्ती में रहने वाली एक मां बी नागरातनम के मुताबिक स्कूल से बच्चों का मन पढ़ने में लग गया।इससे पहले सभी बच्चे आवारा घूमते रहते थे अब पढ़ाई में अपना ध्यान लगाकर वह अपना भविष्य बना रहे हैं।

हालांकि स्कूल बनाने का यह सपना इतना आसान नहीं था। प्रकाश को किसी वित्तीय संस्थान से कोई मदद नहीं मिली और उसने अपने बल पर यह काम पूरा किया। स्कूल के लिए पूरे महीने के किराया 10,000 रुपए होता है जिसमें 4 शिक्षकों का वेतन अलग होता है। प्रकाश अपने टी स्टॉल से 20,000 रुपए का फायदा महीने में कमाता है और कभी किसी बिल के भुगतान में देरी नहीं करता।

40 years of marriage..

40 years of marriage..

A married couple in their early 60s are celebrating their 40th wedding anniversary in a quiet, romantic little restaurant.
Suddenly, a tiny yet beautiful fairy appeared on their table.

She said, 'For being such an exemplary married couple and for being loving to each other for all this time, I will grant you each a wish.'

The wife answered, 'Oh, I want to travel around the world with my darling husband
The fairy waved her magic wand and - poof! - two tickets for the Queen Mary II appeared in her hands.

The husband thought for a moment: 'Well, this is all very romantic, but an opportunity like this will never come again. I'm sorry my love, but my wish is to have a wife 30 years younger than me.
The wife, and the fairy, were deeply disappointed, but a wish is a wish.

So the fairy waved her magic wand and poof!...

The husband became 92 years old.

The moral of this story:
Men who are ungrateful should remember fairies are female.....

SEND THIS TO A WOMAN WHO NEEDS A GOOD LAUGH .

AND TO ANY MAN WHO CAN HANDLE IT!!!!!

क्या लिखुँ?

क्या लिखुँ?
विधवा का रूदन कलाप लिखु,
या वृद्धाश्रम मेँ बुजुर्गो का अलाप लिखूं?

फाँसी पे लटका किसान लिखुँ,
भुख से तड़पता इँसान लिखूँ,

भ्रष्ट मंत्री तानाशाह सरकार लिखुँ,
बत्तिस लाख का टॉयलेट या सात हजार की भोजन की थाल लिखुँ।

सीमा पे कटते भारतीय लिखुँ,
या घर मेँ बँटते भारतीय लिखुँ??

रोटी-नमक पे जिंदगी काटने वाले के बारे मेँ लिखु,
या नमक हरामी करने वाले के बारे मेँ लिखुँ,
बोलो क्या लिखुँ??

एम ए पास बेरोजगार लिखुँ,
या दसवी पास मालामाल लिखुँ,
तम्बू के नीचे ठिठुरती खाल लिखुँ,
या पत्थर का महल विशाल लिखुँ,
बोलो क्या लिखुँ??

जहाजो मेँ सड़ता अनाज लिखुँ,
या खाने को दाने मुहाल लिखुँ??
रजाई तान के जम्हाई लेते फेसबुकिया जय जयकार लिखुँ,
या सीमा पे भारत माता पे हो रहा प्रहार लिखुँ,
बोलो क्या लिखुँ???

किसी जंगल में एक शेर रहता था

किसी जंगल में एक शेर रहता था। एक सियार उसका सेवक था। एक बार एक हाथी से शेर की लड़ाई हो गई। शेर बुरी तरह घायल हो गया। वह चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गया। आहार न मिलने से सियार भी भूखा था।
शेर ने सियार से कहा-‘तुम जाओ और किसी पशु को खोजकर लाओ, जिसे मारकर हम अपनेपेट भर सकें।’ सियार किसी जानवर की खोज करता हुआ एक गाँव में पहुँच गया। वहाँ उसने एक गधे को घास चरते हुए देखा।
सियार गधे के पास गया और बोला-‘मामा, प्रणाम! बहुत दिनों बाद आपके दर्शन हुए हैं। आप इतने दुबले कैसे हो गए?’ गधा बोला-‘भाई, कुछ मत पूछो। मेरा स्वामी बड़ा कठोर है। वह पेटभर कर घास नहीं देता। इस धूल से सनी हुई घासखाकर पेट भरना पड़ता है।’
सियार ने कहा-‘मामा, उधर नदी के किनारे एक बहुत बड़ा घास का मैदान है। आप वहीं चलें और मेरे साथ आनंद सेरहें।’गधे ने कहा-‘भाई, मैं तो गाँव कागधा हूँ। वहाँ जंगली जानवरों के साथ मैं कैसे रह सकूँगा?’
सियार बोला- ‘मामा, वह बड़ी सुरक्षित जगह है। वहाँ किसी का कोई डर नहीं है।तीन गधियाँ भी वहीं रहती हैं। वे भी एक धोबी के अत्याचारों से तंग होकर भाग आई हैं। उनका कोई पति भी नहीं है।आप उनके योग्य हो!’ चाहो तो उन तीनों के पति भी बन सकते हो। चलो तो सही।’
सियार की बात सुनकर गधा लालच में आ गया। गधे को लेकर धूर्त सियार वहाँ पहुँचा, जहाँ शेर छिपा हुआ बैठा था। शेर ने पंजे से गधे पर प्रहार किया लेकिन गधे को चोट नहीं लगी और वह डरकरभाग खड़ा हुआ।
तब सियार ने नाराज होकर शेर से कहा-‘तुम एकदम निकम्मे हो गए! जब तुम एक गधे को नहीं मार सकते, तो हाथी से कैसे लड़ोगे?’ शेर झेंपता हुआ बोला-‘मैं उस समय तैयार नहीं था, इसीलिए चूक हो गई।’
सियार ने कहा-‘अच्छा, अब तुम पूरी तरह तैयार होकर बैठो, मैं उसे फिर से लेकरआता हूँ।’ वह फिर गधे के पास पहुँचा। गधे ने सियार को देखते ही कहा-‘तुम तो मुझे मौत के मुँह में ही ले गए थे। न जाने वह कौन-सा जानवर था। मैं बड़ी मुश्किल से जान बचाकर भागा!’
सियार ने हँसते हुए कहा-‘अरे मामा, तुम उसे पहचान नहीं पाए। वह तो गर्दभी थी। उसने तो प्रेम से तुम्हारा स्वागत करने के लिए हाथ बढ़ाया था। तुम तो बिल्कुल कायर निकले! और वह बेचारी तुम्हारे वियोग में खाना-पीना छोड़कर बैठी है। तुम्हें तो उसने अपना पति मान लिया है। अगर तुम नहीं चलोगे तो वह प्राण त्याग देगी।’
गधा एक बार फिर सियार की बातों में आ गया और उसके साथ चल पड़ा। इस बार शेर नहीं चूका। उसने गधे को एक ही झपट्टे में मार दिया। भोजन करने से पहले शेर स्नान करने के लिए चला गया।
इस बीच सियार ने गधे के दोनों कानों के साथ-साथ उसका हृदय भी खा लिया। शेरस्नान करके लौटा तो नाराज होकर बोला-‘ओ सियार के बच्चे! तूने मेरे भोजन को जूठा क्यों किया? तूने इसके हृदय और कान को क्यों खा लिया?’
धूर्त सियार गिड़गिड़ाता हुआ बोला-‘महाराज, मैंने तो कुछ भी नहीं खाया है। इस गधे के कान और हृदय थे ही नहीं। यदि इसके कान और हृदय होते तो यह दोबारा मेरे साथ कैसे आ सकता था। शेर को सियार की बात पर विश्वास आ गया। वह शांत होकर भोजन करने में जुट गया।’

पेंसिल बनानेवाले ने पेंसिल उठाई और उसे डब्बे में रखने से पहले उससे कहा:

पेंसिल बनानेवाले ने पेंसिल उठाई और उसे डब्बे में रखने से पहले उससे कहा:

“इससे पहले कि मैं तुम्हें लोगों के हाथ में सौंप दूँ, मैं तुम्हें 5 बातें बताने जा रहा हूँ जिन्हें तुम हमेशा याद रखना, तभी तुम दुनिया की सबसे अच्छी पेंसिल बन सकोगी।

पहली – तुम महान विचारों और कलाकृतियों को रेखांकित करोगी, लेकिन इसके लिए तुम्हें स्वयं को सदैव दूसरों के हाथों में सौंपना पड़ेगा।

दूसरी – तुम्हें समय-समय पर बेरहमी से चाकू से छीला जाएगा लेकिन अच्छी पेंसिल बनने के लिए तुम्हें यह सहना पड़ेगा।

तीसरी – तुम अपनी गलतियों को जब चाहे तब सुधर सकोगी।

चौथी – तुम्हारा सबसे महत्वपूर्ण भाग तुम्हारे भीतर रहेगा।

और पांचवीं – तुम हर सतह पर अपना निशान छोड़ जाओगी। कहीं भी – कैसा भी समय हो, तुम लिखना जारी रखोगी।”

पेंसिल ने इन बातों को समझ लिया और कभी न भूलने का वादा किया। फ़िर वह डब्बे के भीतर चली गयी।

अब उस पेंसिल के स्थान पर आप स्वयं को रखकर देखें। उसे बताई गयी पाँचों बातों को याद करें, समझें, और आप दुनिया के सबसे अच्छे व्यक्ति बन पाएंगे।

पहली – आप दुनिया में सभी अच्छे और महान कार्य कर सकेंगे यदि आप स्वयं को ईश्वर के हाथ में सौंप दें। ईश्वर ने आपको जो अमूल्य उपहार दिए हैं उन्हें आप औरों के साथ बाँटें।

दूसरी – आपके साथ भी समय-समय पर कटुतापूर्ण व्यवहार किया जाएगा और आप जीवन के उतार-चढ़ाव से जूझेंगे लेकिन जीवन में बड़ा बनने के लिए आपको वह सब झेलना ज़रूरी होगा।

तीसरी – आपको भी ईश्वर ने इतनी शक्ति और बुद्धि दी है कि आप अपनी गलतियों को कभी भी सुधार सकें और उनका पश्चाताप कर सकें।

चौथी – जो कुछ आपके भीतर है वही सबसे महत्वपूर्ण और वास्तविक है।

और पांचवी – जिस राह से आप गुज़रें वहां अपने चिन्ह छोड़ जायें। चाहे कुछ भी हो जाए, अपने कर्तव्यों से विचलित न हों।

पेंसिल की कहानी का मर्म समझकर स्वयं को यह बताएं कि आप साधारण व्यक्ति नहीं हैं और केवल आप ही वह सब कुछ पा सकते हैं जिसे पाने के लिए आपका जन्म हुआ है।

कभी भी अपने मन में यह ख्याल न आने दें कि आपका जीवन बेकार है और आप कुछ नहीं कर सकते!

Friday, February 22, 2013

दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी है।


दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी है।
जैसे :
दरिया - खुद अपना पानी नहीं पीता।
पेड़ - खुद अपना फल नहीं खाते।
सूरज - अपने लिए कभी रोशनी नहीं करता.
फूल - अपनी खुशबु अपने लिए नहीं बिखेरते।
मालूम है क्यों?
क्योंकि दूसरों के लिए जीना ही असली जिंदगी है।
 

A TRUTH.

A TRUTH.
शादी की पहली रात को नवविवाहित जोड़े ने तय किया की वो सुबह कोई भी बिना कारण दरवाजा खटखटाएगा तो वो दरवाजा नहीं खोलेंगे.
सुबह पति के माँ ने दरवाजा खटखटाया.
दोनों ने एक दूसरे को देखा.और रात में जैसा तय किया था उस अनुसार उन्होंने दरवाज़ा नहीं खोला.
थोड़ी देर बाद पत्नी के पिता ने दरवाजा खटखटाया.
दोनों ने फिर एक दूसरे की और देखा.
पत्नी के आँखों से आंसू बहने लगे और उसने रोना शुरू कर दिया.
बोली "मैं अपने पिता
को ऐसे ही दरवाज़ा खटखटाते नहीं छोड़ सकती, मैं पहले ही उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर आयी हूँ, उन्हें कितना दुःख होगा अगर मैंने दरवाज़ा नहीं खोला तो."
पति ने कुछ नहीं कहा, पत्नी ने दरवाजा खोल दिया.
कई साल बीत गए,
इस युगल के 5 बच्चे हुए, जिनमे से पहले 4 लड़के थे और आख़िरी लड़की.
जब लड़की ने जन्म लिया तो उस व्यक्ति को बहुत खुशी हुई, उसे ऐसा लगा जैसे उसे भगवान ने ज़िंदगी का सबसे बड़ा उपहार दिया है.
उसने काफी बड़ा जश्न मनाया, और कई लोगो को बुलाया.
जश्न के दौरान उससे एक व्यक्ति ने पूछा की क्यों वह बेटी होने के खुशी में इतना जश्न मना रहा है, जबकी किसी भी बेटे के जन्म पर उसने जश्न नहीं मनाया.
उसने जवाब दिया : "ये बेटी ही है जो हमेशा मेरे लिए दरवाजा खोलेगी, बेटों का क्या भरोसा!"

इस कहानी को खुद वास्तविकता में परखिये, बेटे माता-पिता को नज़रंदाज़ कर सकते हैं, किन्तु बेटी नहीं !