Sunday, March 31, 2013

एक था राजा ‘अजूबामल

एक था राजा ‘अजूबामल।’ उसके नगर के चारों और घनी पहाड़ियां थीं। उसके यहां सभी चीजों का दाम एक टका था। केसर हो या नमक, सब्जी हो या लकड़ी, कोयला हो या सोना, सब एक ही दाम में तुलते थे। अजूबाल बहुत मनमानी करता था। उसने कुछ चापलूस मंत्री नियुक्त कर रखे थे। वह उन्हीं की सलाह से सभी काम करता। बेचारी प्रजा डर के मारे कुछ नहीं कहती थी। उस नगर में शिकायत करने वाले को ही जेल हो जाती थी। 

एक बार नगर में तीन मित्र आए। वहां की दशा देखकर पहले दो मित्रों ने कहा, ‘भईया, इस नगर में रहना खतरे से खाली नहीं है। राजा की सनक का क्या भरोसा? कब किसे दबोच ले?’

तीसरा मित्र सभी चीजों के इतने कम दामों से खुश था। वह बोला, ‘मैं तो यहीं मजे से जीवन गुजारूंगा। कितनी अच्छी बात है कि मनचाही चीजें मिलेंगी। पहले दो मित्रों ने उसे बहुत समझाया कि वह लौट चले किंतु तीसरा मित्र टस-से-मस न हुआ। हारकर पहले दो मित्रों ने अपना पता देकर कहा, ‘यदि हमारी जरूरत पड़े तो बुलवा लेना। हम शीघ्र ही मदद को आ जाएंगे।’

तीसरे मित्र ने बे-मन से उनका पता संभाला और मकान की खोज में चल पड़ा। पहले दो मित्रों ने घोड़े को एड़ लगाई और रातों-रात नगर से बाहर निकल गए। तीसरा मित्र सुबह सोकर उठा। मुंह-हाथ धोकर बाजार की ओर चल पड़ा।

वहां उसने एक टका देकर स्वादिष्ट मिठाई खरीदी। दोने में से पहला टुकड़ा उठाया ही था कि राजा के सिपाहियों ने उसे चारों ओर से घेर लिया। हुआ यूं कि पिछली रात राजा के महल में चोरी हो गई थी. राजा ने आदेश दिया,‘जो भी अजनबी नगर द्वार से भीतर आया है, बेशक वही चोर होगा। उसे फांसी पर लटका दो।’

अब तो तीसरे मित्र की जान पर बन आई। उसने राजा से अनुनय-विनय की किंतु राजा ने अनसुना कर दिया। अंत में उसने दोनों मित्रों का सारा हाल लिखकर संदेश भिजवा दिया। अगले ही दिन फांसी का समय तय हुआ। बाजार के बीचों-बीच चौक पर फांसी दी जानी थी। सारा शहर अजनबी चोर को देखने उमड़ पड़ा। राजा भी पालकी पर सवार होकर पहुंच गया।

तभी तीसरे मित्र के पास एक खत पहुंचा। वह दोनों मित्रों ने लिखा था। तीसरे ने खत पढ़ा और फाड़कर चबा गया। कुछ ही देर में दोनों मित्र भी आ पहुंचे। ज्यों ही जल्लाद आगे बढ़ा। पहला मित्र राजा के चरणों में गिरकर बोला, ‘महाराज, मेरे मित्र को छोड़ दें। इसके बाल-बच्चे बहुत छोटे हैं।’

तीसरा मित्र वहीं से चिल्लाया, ‘नहीं महाराज, मुझे मरने दें। भला मरने से कैसा डरना?’ उसकी बात काटकर दूसरा मित्र बोला, ‘तुम दोनों सौ साल जीओ। महाराज तो मुझे ही फांसी चढ़ाएंगे।’ बस फिर क्या था! एक नौटंकी शुरू हो गई। तीनों मित्र एक-दूसरे से पहले मरना चाहते थे। राजा अजूबामल चक्कर खा गया।

वह कभी एक मित्र की ओर देखता तो कभी दूसरी की ओर। नगरवासी इस तमाशे को देखकर हैरान थे। अजूबामल ने तीनों मित्र को अपने पास बुलाकर पूछा, ‘मुझे सच-सच बता दो कि तुम मरने के लिए इतने उत्सुक क्यों हो? वरना मैं सबको जेल में डाल दूंगा।’

तीसरे मित्र ने योजना के मुताबिक हिचकिचाते हुए उत्तर दिया, ‘महाराज, आज मरने की बहुत शुभ घड़ी है। इस घड़ी में मरने वाला सीधा स्वर्गलोक जाएगा, इसलिए हम लड़ रहे हैं?’ यह सुनते ही अजूबामल का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। कड़कर बोला, ‘प्यारे मंत्रियों, शुभ घड़ी में मरने का सबसे पहला हक राजा को मिलना चाहिए। भला मेरे होते कोई और स्वर्ग में क्यों जाएगा? मुझे शीघ्र ही फांसी पर चढ़ा दो।’

मंत्रियों ने सोचा कि राजा के मरते ही हम राज्य पर कब्जा कर लेंगे। उन्होंने एक क्षण भी विलंब नहीं किया और अजूबामल को फांसी पर चढ़ा दिया। प्रजा मंत्रियों की चाल भांप गई थी। उसने पत्थर मार-मारकर मंत्रियों को अधमरा कर दिया।

जानते हो नया राजा कौन बना? पहले मित्र को राजा बनाया गया क्योंकि उसकी बुद्धिमानी से ही अजूबामल का अंत हुआ था। बाकी दो मित्र मंत्री बने। नगर में उचित कायदे-कानून बने और सभी सुख से रहने लगे।

सभी मानव समान हैं।


(एक थे पण्डित जी और एक थी पण्डिताइन। पण्डित जी के मन में जातिवाद कूट-कूट कर भरा था। परन्तु पण्डिताइन समझदार थी। समाज की विकृत रूढ़ियों को नही मानती थी।एक दिन पण्डित जी को प्यास लगी। संयोगवश् घर में पानी नही था। इसलिए पण्डिताइन पड़ोस से पानी ले आयी। पानी पीकर पण्डित जी ने पूछा।)
पण्डित जी- कहाँ से लाई हो। बहुत ठण्डा पानी है।
पण्डिताइन जी- पड़ोस के कुम्हार के घर से।
(पण्डित जी ने यह सुन कर लोटा फेंक दिया और उनके तेवर चढ़ गये। वे जोर-जोर से चीखने लगे।)
पण्डित जी- अरी तूने तो मेरा धर्म भ्रष्ट कर दिया। कुम्हार के घर का पानी पिला दिया।
(पण्डिताइन भय से थर-थर काँपने लगी, उसने पण्डित जी से माफी माँग ली।)
पण्डिताइन- अब ऐसी भूल नही होगी।
(शाम को पण्डित जी जब खाना खाने बैठे तो पण्डिताइन ने उन्हें सूखी रोटियाँ परस दी।)
पण्डित जी- साग नही बनाया।
पण्डिताइन जी- बनाया तो था, लेकिन फेंक दिया। क्योंकि जिस हाँडी में वो पकाया था,
वो तो कुम्हार के घर की थी।
पण्डित जी- तू तो पगली है। कहीं हाँडी में भी छूत होती है?
(यह कह कर पण्डित जी ने दो-चार कौर खाये और बोले-)
पण्डित जी- पानी तो ले आ।
पण्डिताइन जी- पानी तो नही है जी।
पण्डित जी- घड़े कहाँ गये?
पण्डिताइन जी- वो तो मैंने फेंक दिये। कुम्हार के हाथों से बने थे ना।
(पण्डित जी ने फिर दो-चार कौर खाये और बोले-)
पण्डित जी- दूध ही ले आ। उसमें ये सूखी रोटी मसल कर खा लूँगा।
पण्डिताइन जी- दूध भी फेंक दिया जी। गायको जिस नौकर ने दुहा था, वह भी कुम्हार ही था।
पण्डित जी- हद कर दी! तूने तो, यह भी नही जानती दूध में छूत नही लगती।
पण्डिताइन जी- यह कैसी छूत है जी! जो पानी में तो लगती है, परन्तु दूध में नहीलगती।
(पण्डित जी के मन में आया कि दीवार से सर फोड़ ले, गुर्रा कर बोले-)
पण्डित जी- तूने मुझे चौपट कर दिया। जा अब आँगन में खाट डाल दे। मुझे नींद आ रहीहै।
पण्डिताइन जी- खाट! उसे तो मैंने तोड़ कर फेंक दिया। उसे नीची जात के आदमी ने बुना था ना।
(पण्डित जी चीखे!)
पण्डित जी- सब मे आग लगा दो। घर में कुछ बचा भी है या नही।
पण्डिताइन जी- हाँ! घर बचा है। उसे भी तोड़ना बाकी है।
क्योकि उसे भी तो नीची जाति के मजदूरों ने ही बनाया है।
(पण्डित जी कुछ देर गुम-सुम खड़े रहे! फिर बोले-)
पण्डित जी- तूने मेरी आँखें खोल दीं। मेरी ना-समझी से ही सब गड़-बड़ हो रही थी।
कोई भी छोटा बड़ा नही है। सभी मानव समान हैं।
(एक थे पण्डित जी और एक थी पण्डिताइन। पण्डित जी के मन में जातिवाद कूट-कूट कर भरा था। परन्तु पण्डिताइन समझदार थी। समाज की विकृत रूढ़ियों को नही मानती थी।एक दिन पण्डित जी को प्यास लगी। संयोगवश् घर में पानी नही था। इसलिए पण्डिताइन पड़ोस से पानी ले आयी। पानी पीकर पण्डित जी ने पूछा।)
पण्डित जी- कहाँ से लाई हो। बहुत ठण्डा पानी है।
पण्डिताइन जी- पड़ोस के कुम्हार के घर से।
(पण्डित जी ने यह सुन कर लोटा फेंक दिया और उनके तेवर चढ़ गये। वे जोर-जोर से चीखने लगे।)
पण्डित जी- अरी तूने तो मेरा धर्म भ्रष्ट कर दिया। कुम्हार के घर का पानी पिला दिया।
(पण्डिताइन भय से थर-थर काँपने लगी, उसने पण्डित जी से माफी माँग ली।)
पण्डिताइन- अब ऐसी भूल नही होगी।
(शाम को पण्डित जी जब खाना खाने बैठे तो पण्डिताइन ने उन्हें सूखी रोटियाँ परस दी।)
पण्डित जी- साग नही बनाया।
पण्डिताइन जी- बनाया तो था, लेकिन फेंक दिया। क्योंकि जिस हाँडी में वो पकाया था,
वो तो कुम्हार के घर की थी।
पण्डित जी- तू तो पगली है। कहीं हाँडी में भी छूत होती है?
(यह कह कर पण्डित जी ने दो-चार कौर खाये और बोले-)
पण्डित जी- पानी तो ले आ।
पण्डिताइन जी- पानी तो नही है जी।
पण्डित जी- घड़े कहाँ गये?
पण्डिताइन जी- वो तो मैंने फेंक दिये। कुम्हार के हाथों से बने थे ना।
(पण्डित जी ने फिर दो-चार कौर खाये और बोले-)
पण्डित जी- दूध ही ले आ। उसमें ये सूखी रोटी मसल कर खा लूँगा।
पण्डिताइन जी- दूध भी फेंक दिया जी। गायको जिस नौकर ने दुहा था, वह भी कुम्हार ही था।
पण्डित जी- हद कर दी! तूने तो, यह भी नही जानती दूध में छूत नही लगती।
पण्डिताइन जी- यह कैसी छूत है जी! जो पानी में तो लगती है, परन्तु दूध में नहीलगती।
(पण्डित जी के मन में आया कि दीवार से सर फोड़ ले, गुर्रा कर बोले-)
पण्डित जी- तूने मुझे चौपट कर दिया। जा अब आँगन में खाट डाल दे। मुझे नींद आ रहीहै।
पण्डिताइन जी- खाट! उसे तो मैंने तोड़ कर फेंक दिया। उसे नीची जात के आदमी ने बुना था ना।
(पण्डित जी चीखे!)
पण्डित जी- सब मे आग लगा दो। घर में कुछ बचा भी है या नही।
पण्डिताइन जी- हाँ! घर बचा है। उसे भी तोड़ना बाकी है।
क्योकि उसे भी तो नीची जाति के मजदूरों ने ही बनाया है।
(पण्डित जी कुछ देर गुम-सुम खड़े रहे! फिर बोले-)
पण्डित जी- तूने मेरी आँखें खोल दीं। मेरी ना-समझी से ही सब गड़-बड़ हो रही थी।
कोई भी छोटा बड़ा नही है। सभी मानव समान हैं।

- अशोक चक्रधर

पानी से निकलकर मगरमच्छ किनारे पर आया,
इशारे से बंदर को बुलाया.
बंदर गुर्राया- खों खों, क्यों,
तुम्हारी नजर में तो मेरा कलेजा है?
मगर्मच्छ बोला- नहीं नहीं, तुम्हारी भाभी ने
खास तुम्हारे लिये सिंघाड़ेका अचार भेजा है.
बंदर ने सोचा ये क्या घोटालाहै,
लगता है जंगल में चुनाव आने वाला है.
लेकिन प्रकट में बोला- वाह!
अचार, वो भी सिंघाड़े का,
यानि तालाब के कबाड़े का!
बड़ी ही दयावान तुम्हारी मादा है,
लगता है शेर के खिलाफ़
चुनाव लड़ने का इरादा है.
कैसे जाना, कैसे जाना? ऐसे जाना, ऐसे जाना
कि आजकल भ्रष्टाचार की नदी में
नहाने के बाद जिसकी भी छवि स्वच्छ है,
वही तो मगरमच्छ है.
- अशोक चक्रधर

Friday, March 29, 2013

    • जबसे दुनिया को नीम के कीटनाशक और
      दुसरे गुणों का पता चला तबसे नीम
      को बढावा देने का काम शुरू हो गया पर
      भारतबासी ने कभी इसकीपरवा नही की |
      भारत में अभी नीम के 220 लाख पेड़ है पर
      ... चीन में जहां कभी एक भी नीम का पेड़
      नही था उहाँ अब 250 लाख नीम के पेड़
      हो गए है | अमेरिका, अफ्रीका, लातिन
      अमेरिका के सब देशो में जोर शोर से नीम के
      ऊपर काम हो रहा है | तंजानिया में 6
      लाख . उगांडा में २ लाख नीम के पेड़ हो गए
      है |
      नीम एक ऐसा पेड़ है जो 537
      कीड़ो को नियंत्रित कर सकता है परन्तु
      हमारे देश में इसकी कोई कद्र नहीं है ,
      हमारे वैज्ञानिक इस्पे बात नही करते |
      अगर आप धुप में नीम के पेड़ के निचे बैठे तोह
      १० डिग्री तापमान का फर्क होता है
      जो बहुत है एक तरह से नीम प्राकृतिक एयर
      कोंडीसोनर है | नीम २५० साल तक
      जिन्दा रहता है और ये एक ऐसा पेड़ है
      जो नुकसान दायक कीड़ेकी क्षमता कम कर
      देती है और अछे कीड़ो को बढावा देती है
      जो अद्भुत है | अगर GDP में नीम
      का फ़ायदा जोड़ा जाये तो हर साल
      25000 डॉलर का फ़ायदा होता है एक
      नीम के पेड़ से |
      See more
    जबसे दुनिया को नीम के कीटनाशक और
दुसरे गुणों का पता चला तबसे नीम
को बढावा देने का काम शुरू हो गया पर
भारतबासी ने कभी इसकीपरवा नही की |
भारत में अभी नीम के 220 लाख पेड़ है पर
चीन में जहां कभी एक भी नीम का पेड़
नही था उहाँ अब 250 लाख नीम के पेड़
हो गए है | अमेरिका, अफ्रीका, लातिन
अमेरिका के सब देशो में जोर शोर से नीम के
ऊपर काम हो रहा है | तंजानिया में 6
लाख . उगांडा में २ लाख नीम के पेड़ हो गए
है |
नीम एक ऐसा पेड़ है जो 537
कीड़ो को नियंत्रित कर सकता है परन्तु
हमारे देश में इसकी कोई कद्र नहीं है ,
हमारे वैज्ञानिक इस्पे बात नही करते |
अगर आप धुप में नीम के पेड़ के निचे बैठे तोह
१० डिग्री तापमान का फर्क होता है
जो बहुत है एक तरह से नीम प्राकृतिक एयर
कोंडीसोनर है | नीम २५० साल तक
जिन्दा रहता है और ये एक ऐसा पेड़ है
जो नुकसान दायक कीड़ेकी क्षमता कम कर
देती है और अछे कीड़ो को बढावा देती है
जो अद्भुत है | अगर GDP में नीम
का फ़ायदा जोड़ा जाये तो हर साल
25000 डॉलर का फ़ायदा होता है एक
नीम के पेड़ से |

Tuesday, March 26, 2013

कमीनी


सीढ़ियों से उतरते हुए बूढ़ी सास का काँपता हाँथ गमले में लग गया ..
हमला नीचे गिरते ही दो टुकड़े हो गया..!!सीढ़ियों से उतरते हुए बूढ़ी सास का काँपता हाँथ गमले में लग गया ..
हमला नीचे गिरते ही दो टुकड़े हो गया..!!
बहू अन्दर के कमरे से बडबडाते हुए बाहर निकली -:
हे भगवान लगता है आज फिर कमीनी ने कुछ मटियामेट कर दिया
पास में खड़ा छोटा बच्चा बोला -: माँ येकमीनी क्या होता है ..!
... बेटा कमीनी का मतलब तन्दुरुस्त होता है ..!!
कुछ दिन बाद सास की लाठी फ़र्स में फिसली तो पास में रखा
बोन चाइना का कप लेते हुए चली गई ,,
बहू -: सत्यानाश हो ...मैं तो त्रस्त आ गई हूँ इस हरामजादी से ..!!
पास में खड़ा बच्चा बोला -: माँ ये हरामजादी क्या होता है ..!
बेटा हरामजादी का मतलब कमजोर होता है..
कुछ समय बाद बच्चे की माँ हफ्ते भर को बीमार हो गई ..
हास्पिटल में भरती करना पड़ा ..
वहाँ काफी रिश्तेदार देखने आये हुए थे
तभी बच्चा अचानक बॊल पढ़ा -:
"माँ पहले तुम कितनी कमीनी थी
और अब कितनी हरामजादी हो गई हो "..:P:D=D
मोरल -: आप के बच्चो से आप को कल वही मिलने वाला है
जो आज आप अपने माँ बाप को दे रहे हैं..चाहे वो किसी तरह हो ..!

Sunday, March 24, 2013

Ek Shakhs Ki Chahat Ka, Armaan
Raha Aksar
Jo Jaan Kar Bhi Sub Kuchh, Anjaan
Raha Aksar
Yeh Pyar Mohabat Ka Hai Kya Khel,
RAB Jane
K Jis Ne Wafa Ki, Us Ko Nuqsan
Raha Aksar
Aata Hai Wo Neendon Me, Rehta Hai
Wo Khawbon Me
Ek Yehi To Us Ka Mujh Par, Ehsaan
Raha Aksar....!
एक बार रूस के महान साहित्यकार मैक्सिम गोर्की अपने देश के एक अन्य महान रचनाकार चेखोव से मिलने उनके घर गए। चेखोव गोर्की से अत्यंत गर्मजोशी से मिले और अनेक विषयों पर उनसे चर्चा करने लगे। बातचीत के दौरान गोर्की ने चेखोव से पूछा, 'आप समाज के विभिन्न वर्गों में किसे अधिक महत्व देते हैं?' गोर्की की बात सुनकर चेखोव बोले, 'वैसे तो सभी वर्गों की अपनी-अपनी जगह विशेष अहमियत है, किंतु मैं शिक्षक वर्ग को सबसे अ
धिक महत्व देता हूं। शिक्षक निस्संदेह ही पूजनीय एवं सर्वश्रेष्ठ हैं।' यह सुनकर गोर्की बोले, 'शिक्षक वर्ग की ऐसी कौन सी खासियत है जिसके कारण आप उन्हें सर्वश्रेष्ठ समझते हैं?' इस पर चेखोव बोले, 'किसी भी देश की नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार देकर आदर्श नागरिक बनाने का दायित्व शिक्षकों पर ही होता है। यदि शिक्षक सुखी-समृद्ध होगा तभी तो वह निश्चिंत होकर देश की आदर्श पीढ़ी के निर्माण में पूरी तन्मयता से लगा रह सकता है।'

चेखोव की बातें गोर्की बड़े ध्यान से सुन रहे थे। उनकी यह बात सुनकर वह बोले, 'तो ऐसे में आप शिक्षकों की कुछ मदद करना चाहते हैं?' यह सुनकर चेखोव बोले, 'मैं गुरुजन के प्रति बहुत श्रद्धा रखता हूं। यदि मेरे पास ढेर सारा धन आ जाए तो मैं उससे गांव में शिक्षकों के लिए सुविधाजनक मकान बनवाऊंगा।' गोर्की बोले, 'यह तो बहुत ही नेक निर्णय है।' इस पर चेखोव बोले, 'इतना ही नहीं, मैं एक ऐसे बड़े पुस्तकालय की व्यवस्था भी करूंगा कि अध्यापक, छात्र तथा ग्रामीण लोग पुस्तकों का अध्ययन कर ज्ञान प्राप्त कर सकें। किसी भी देश को आदर्श शिक्षकों तथा ज्ञान के भंडार की आवश्यकता पड़ती है। उसके सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के लिए ये चीजें जरूरी हैं। इसलिए मैं तो शिक्षकों की भूमिका को सर्वाधिक महत्व देता हूं। हमें इस वर्ग के प्रति अपनी कृतज्ञता दर्शानी चाहिए।' गोर्की यह सुनकर भावविभोर हो उठे। चेखोव के प्रति गोर्की के मन में सम्मान और बढ़ गया।

कोई पुरुष किसी स्त्री पर हाथ क्यों उठाता है?

कोई पुरुष किसी स्त्री पर हाथ क्यों उठाता है? या कोई भी व्यक्ति किसी के साथ हिंसा पर क्यों उतरता है? अमूमन होता यह है कि किसी का धैर्य जब जवाब दे जाता है, किसी के पास जब कोई तार्किक जवाब नहीं रह जाता, तभी वह दूसरे से हाथापाई पर उतरता है। हालांकि वह ऐसा करने से पहले इस बात का संज्ञान कर लेता है कि प्रतिपक्षी उससे बलवान है या कमजोर। जो मर्द स्त्रियों पर हाथ उठाते हैं, उनमें से ज्यादातर धैर्य और तर्क के मारे होते हैं। स्त्रियों की तुलना में वे बहुत ही उथले और बहुत कमजोर होते हैं।

मगर मर्दों को शायद इस बात का भान नहीं होगा। वे आज भी अपने अवचेतन में स्वयं को स्त्रियों से श्रेष्ठ समझते हैं। हालांकि स्त्रियां यह साबित कर चुकी हैं कि प्रकृति ने उन्हें पुरुषों के बराबर का प्राणी बनाया है। बल्कि, कई क्षेत्रों में उन्होंने पुरुषों से बेहतर परफॉर्म किया है। सवाल यह है कि पुरुषों के अवचेतन में ऐसा असत्य कैसे बना? मुझे लगता है कि इसके लिए वे तमाम दृश्य और घटनाएं जिम्मेदार हैं, जो वे बचपन से देखते आए और जिन्हें उन्होंने सच माना। अवचेतन का निर्माण असल में मुसलसल दृश्यों और घटनाओं से ही होता है। मसलन, हम पेड़ को हरे रंग का देखने के इतने अभ्यस्त हो जाते हैं कि रात के अंधेरे में भी जानते हैं कि हमारे सामने जो पेड़ हैं, वे हरे रंग के हैं।

इसी तरह हमारा स्त्रियों के प्रति नजरिया भी बचपन से देखे दृश्यों, घटनाओं और पढ़े गए विवरणों से बनता है। हम कोर्स की किताबों में देखते हैं कि अगर अस्पताल का दृश्य है तो उसमें डॉक्टर पुरुष है और स्त्री नर्स। अगर वह घर का दृश्य है तो पति कमाने जा रहा है, पत्नी बर्तन-चौका कर रही है। बच्चों का दृश्य है तो लड़के फुटबॉल खेल रहे हैं, लड़कियां झूला झूल रही हैं। और भी न जाने कितने दृश्य हमारे अवचेतन में जमा होते रहते हैं।

अपने फौजी पति के लड़ने जाने से पहले उसकी प्रेमिका या पत्नी उसे रो-रोकर विदा कर रही है। छेड़छाड़ और बलात्कार की खबरें भी अवचेतन में बनी रहती हैं। वह चाहे प्रेमिका के रूप में हो या पत्नी के रूप में, स्त्रियों पर बने जोक्स भी बेअसर तो नहीं जाते होंगे। यह सब स्त्रियों की एक खास तरह की छवि बनाते हैं। इसलिए दिल्ली रेप की घटना के बाद अगर हमें पढ़े-लिखे और जिम्मेदार पदों पर आसीन लोगों से भी स्त्रियों को लेकर ऊलूल-जलूल टिप्पणियां सुनने को मिल रही हैं, तो इसकी वजह यही है कि इन लोगों के अवचेतन में यही कूड़ा भरा हुआ है।

दिल्ली रेप के मुलजिमों के बयानों में से एक बयान मेरे लिए चौंकाने वाला था। इस शख्स का कहना था कि वह हीनता का शिकार था, क्योंकि उसका एक हाथ टेढ़ा था जिसके चलते लोग उसे 'कमतर' आंकते थे। यानी उसने अपनी हीनता को दबाने के लिए एक लड़की को अपना शिकार बनाया। अगर वाकई मर्द स्त्रियों पर ऐसे हिंसक हमले को अपनी हीनता को कम करने का जरिया समझते हैं, तो यह बहुत खतरनाक है। क्योंकि मर्दों में हीनता के स्रोतों की कमी नहीं। अपनी सेक्सुअल सामर्थ्य को लेकर ही कितने ही मर्द हीन ग्रंथि से भरे होते हैं। बल्कि अगर आप श्रेष्ठ मानवीय गुणों की गिनती करें, तो स्त्रियां हर गुण में पुरुषों से ऊपर दिखती हैं। धैर्य, त्याग, दया, सहनशीलता, सहिष्णुता, परोपकार, आदि इनमें से एक में भी पुरुष स्त्रियों से बेहतर नहीं। कितनी ही स्त्रियां हैं, जो विधवा होने के बाद अपना पूरा जीवन बच्चों की परवरिश में झोंक देती हैं। पर ऐसे पुरुष मैंने नहीं देखे।

तो पुरुष क्या स्त्रियों को खुद से श्रेष्ठ होने की सजा देते हैं? हीनता का भाव तो ऐसे ही उलटे काम करवाता है। मगर, हर चलन की एक समयसीमा होती है। नए बदलाव और जागरूकता पुरानी रूढि़यों को खत्म कर देते हैं। संभवत: जागरूक पुरुष इस बात को समझ रहे होंगे कि स्त्रियों को इस तरह और ज्यादा समय तक नहीं दबाया जा सकता। भारतीय समाज में कई बुराइयां थीं, समय के साथ वे कम हुईं, खत्म भी हो गईं। अब औरतों के प्रति पुरुषों के नजरिए की बारी है। इसे बदलने से भी कोई नहीं रोक सकता।

अवश्य पढें दिल पसीज जायेगा पढकर

अवश्य पढें दिल पसीज जायेगा पढकर

भगत सिंह
मार्च २३ १९३१ ... करीब...
अस्सी साल बीत गए थे...
वो लाहोर जेल के बाहर
आज फिर खडा था... अब
भी उसे वो दिन याद था...
बहुत भीड़ थी जेल के
बाहर.... दो और
साथी भी थे उसके...
फाँसी पर हँसते हँसते
चढ़ा था वह..
वही हंसी आज भी उसके
चेहरे पर थी.. देश आज़ाद
जो हो चुका था...
अस्सी साल बीत गए थे ...
बहुत आगे बढ़
गया होगा देश... बहुत कुछ
बदल गया होगा...
आखिर जान दी थी उसने...
जान..
वह इधर उधर देखने लगा...
रात बहोत हो चुकी थी...
कोई नज़र नहीं आ
रहा था... वह आगे की तरफ
बढ़ गया... दूर एक दीवार
से सटी खुर्सी पर एक
बूढा चौकीदार
सो रहा था.... वह
चौकीदार के पास पहुंचा ..
अपना हाथ उसके कंधो पर
रखा और .. धीरे से उसे
उठाया..."भाई साहब...
भाई साहब....."
नीद कच्ची थी..
चौकीदार ने
चेहरा उठा कर उसके चेहरे
की तरफ देखा... कुछ
जाना पहचाना सा चेहरा लगा...
पर याद नहीं था ..
किसका..
जाना पहचाना तो था....
"हाँ भाई... इतनी रात
अकेले घूम रहे हो...
क्या चाहिए"चौकी दार
ने चेहरा याद करने
की कोशिश करते हुए.. उससे
पुछा
"सब कैसा चल रहा है.. सब
कुछ ठीक है ना देश में..हम
आज़ाद हैं न अब"
सवाल ही कुछ ऐसा था ..
की चौकीदार को याद आ
गया..
की चेहरा किसका था...
"आप भगत सिंह हैं ना...
भगत सिंह...."
वोह
हल्का सा मुस्कुराया...
"हाँ...भगत सिंह ही हूँ.. सब
ठीक है ना देश में".......
उसने फिर से चौकीदार से
पुछा..
"हाँ सब ठीक है मुल्क में..
पर यह आपका मुल्क नहीं है
आप लाहोर में हैं"
"यह पाकिस्तान हैं जनाब..
पाकिस्तान ...., आप
हिंदुस्तान जाइए..
दिल्ली जाइए..."
वोह घबरा गया...
"पकिस्तान ??
हिन्दुस्तान ??
"हाँ बेटा अब तो चौंसठ
साल हो गए"चौकीदार ने
उसकी आखों में देखते हुए
कहा...
वोह मुड कर वापस अँधेरे
की तरफ जाने लगा... हलके
हलके कदमों से... वापस मुड
कर नहीं देखा... बस
चला जा रहा था ... धीरे
धीरे...
चेहरे पर
हंसी नहीं थी अब... आखें
भीग आयीं थी .... वोह
इतना कमज़ोर नहीं था..
फाँसी पर भी हँसते हँसते
चढ़ा था वह ...... पर आज आखें
भीग आयीं थी..
जान दी थी उसने.... जान.... :-(

जरुर शेयर करें ।

भगत सिंह का आखिरी सन्देशआप सबके लिए,


दोस्तों ये है भगत सिंह का आखिरी सन्देशआप सबके लिए, आओ आज उन सबके साथ खड़े हो जाये जो देश के लिए कुछ भी कर रहे है बिना धर्म जाति को देखकर, क्युकी भगत सिंह जातिधर्म नही मानते थे वो नास्तिक थे
"साथियों,
स्वाभाविक है कि जीनेकी इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए, मैं इसे छुपाना नहीं चाहता। लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं, कि मैं कैद होकर या पाबंद होकर जीना नहींचाहता।
मेरा नाम हिंदुस्तानी क्रांति का प्रतीक बनचुका है। ... दिलेराना ढंग से हंसते -हंसते मेरे फांसी पर चढ़ने की सूरत में हिंदुस्तानी माताएं अपने बच्चों के भगत सिंह बनने की आरजू किया करेंगी और देश की आजादी के लिए कुर्बानी देने वालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि उस क्रांति को रोकना साम्राज्यवाद या तमाम शैतानी शक्तियों के बूते की बात नहीं रहेगी।
आपका साथी
भगत सिंह"
(22 मार्च 1931 को लिखे भगत सिंह के आखिरी पत्र का अंश)
दोस्तों ये है भगत सिंह का आखिरी सन्देशआप सबके लिए, आओ आज उन सबके साथ खड़े हो जाये जो देश के लिए कुछ भी कर रहे है बिना धर्म जाति को देखकर, क्युकी भगत सिंह जातिधर्म नही मानते थे वो नास्तिक थे
"साथियों,
स्वाभाविक है कि जीनेकी इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए, मैं इसे छुपाना नहीं चाहता। लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं, कि मैं कैद होकर या पाबंद होकर जीना नहींचाहता।
मेरा नाम हिंदुस्तानी क्रांति का प्रतीक बनचुका है। ... दिलेराना ढंग से हंसते -हंसते मेरे फांसी पर चढ़ने की सूरत में हिंदुस्तानी माताएं अपने बच्चों के भगत सिंह बनने की आरजू किया करेंगी और देश की आजादी के लिए कुर्बानी देने वालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि उस क्रांति को रोकना साम्राज्यवाद या तमाम शैतानी शक्तियों के बूते की बात नहीं रहेगी।
आपका साथी
भगत सिंह"
(22 मार्च 1931 को लिखे भगत सिंह के आखिरी पत्र का अंश)

"तुम बेशर्म हो सकते हो लेकिन मैँ नही.. "


"तुम बेशर्म हो सकते हो लेकिन मैँ नही.. "
___ Ratan Tata
घटना बहुत पुरानी है लेकिन यादकर रतन
टाटा को बार बार सैल्यूट करने को जी चाहता है
इसलिये पुन: पोस्ट कर रहा हुँ
26/11 के बाद रतन टाटा ने अपने भारत और
विदेश के होटलोँ की श्रंखला के पुनर्निर्माण के
लिये टेँडर जारी किये उसके लिये
काफी कम्पनियोँ ने एप्लाई किया जिसमेँ कुछ
पाकिस्तानी कम्पनियाँ भी शामिल थी
दो पाकिस्तानी कम्पनियाँ अपनी बोली को मजबुत
करने के लिये बॉम्बे हाउस ( Head office of
Tata ) भी आई रतन टाटा से मिलने
बिना अपॉइंटमेँट के
क्योँकि टाटा ने उनको अपॉइंटमेँट के लिये टाईम
नहीँ दिया
उनको काफी देर तक बॉम्बे हाऊस के रिसेप्शन
पर वेट कराया गया फिर टाटा की तरफ से
बिजी होने का मैसेज देकर भगा दिया गया
दोनोँ उद्योगपति मुम्बई से दिल्ली गये और अपने
उच्चायुक्त से बात की और एक मंत्री के जरिये
टाटा को फोन लगवाया
मंत्री ने टाटा से उनको अपॉईँटमेँट देने
की रिक्यूस्ट की तो टाटा ने कहा
"तुम बेशर्म हो सकते हो लेकिन मैँ नही.. "
और फोन काट दिया
कुछ महिनोँ बाद पाकिस्तानी सरकार ने रतन
टाटा को एक लाख टाटा सूमो का ऑर्डर
दिया तो रतन टाटा ने पाकिस्तान को एक टायर
तक देने से मना कर दिया
राष्ट्र हमेशा सर्वोपरि होता है ये रतन
टाटा को पता है
"तुम बेशर्म हो सकते हो लेकिन मैँ नही.. "
___ Ratan Tata
घटना बहुत पुरानी है लेकिन यादकर रतन
टाटा को बार बार सैल्यूट करने को जी चाहता है
इसलिये पुन: पोस्ट कर रहा हुँ
26/11 के बाद रतन टाटा ने अपने भारत और
विदेश के होटलोँ की श्रंखला के पुनर्निर्माण के
लिये टेँडर जारी किये उसके लिये
काफी कम्पनियोँ ने एप्लाई किया जिसमेँ कुछ
पाकिस्तानी कम्पनियाँ भी शामिल थी
दो पाकिस्तानी कम्पनियाँ अपनी बोली को मजबुत
करने के लिये बॉम्बे हाउस ( Head office of
Tata ) भी आई रतन टाटा से मिलने
बिना अपॉइंटमेँट के
क्योँकि टाटा ने उनको अपॉइंटमेँट के लिये टाईम
नहीँ दिया
उनको काफी देर तक बॉम्बे हाऊस के रिसेप्शन
पर वेट कराया गया फिर टाटा की तरफ से
बिजी होने का मैसेज देकर भगा दिया गया
दोनोँ उद्योगपति मुम्बई से दिल्ली गये और अपने
उच्चायुक्त से बात की और एक मंत्री के जरिये
टाटा को फोन लगवाया
मंत्री ने टाटा से उनको अपॉईँटमेँट देने
की रिक्यूस्ट की तो टाटा ने कहा
"तुम बेशर्म हो सकते हो लेकिन मैँ नही.. "
और फोन काट दिया
कुछ महिनोँ बाद पाकिस्तानी सरकार ने रतन
टाटा को एक लाख टाटा सूमो का ऑर्डर
दिया तो रतन टाटा ने पाकिस्तान को एक टायर
तक देने से मना कर दिया
राष्ट्र हमेशा सर्वोपरि होता है ये रतन
टाटा को पता है

"Wo mujse meri udasio ki wajah puchte h

"Wo mujse meri udasio ki wajah
puchte h
kitna pagal h wo raat k sannate ki
wajah pochti h...
wo mujse mere ansuon ki wajah
puchti h.....
kitna pagal h barish k barasne ki
wajah puchti h...
wo mujse meri pasand k bare m
puchti h...
kitna pagal h khud apne hi bare
m puchti h wo mujse meri mohabatt ka sabab puchti h....
wo mujse meri wafa ki intaha
puchti h...
kitna pagal h kinare pe khadi ho kar
Samundar ki gehrai puchti h..

My Wife………♥

My Wife………♥

My queen, my gracious gown
I appreciate the lord for you are my glory gown,
You are my divine gown
I appreciate the educated nations,
I appreciate your sacred actions
Nine painful months you toil.
My queen, I know your goal
Indeed with God you won’t fail
Indeed in God we trust in true faith
I celebrate your struggle in true faith
The love tears on my cheeks,
Know the value you’re worth.
I know where your diamond tears fall,
I know your pain and love when the baby kicks
I know your mercy when we are in bliss,
My wife!
Together we share this Holy, lovely life.
My wife!

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Friday, March 22, 2013

Kadai paneer


 
Kadai-paneer-recipe-1       Kadai paneer is the easiest paneer recipe I make. I usually make it as side dish for roti, but goes well with simple pulaos too. I say it is easy recipe because it has no grinding part! Cool right?  So here is the simple way I make but turns out really delicious.  The coriander seeds and capsicum are the highlights of this recipe.


paneer-recipes

Ingredients

Paneer ,cubed1 cup
Onion2,cubed
Tomatoes3 (small),chopped
Capsicum1,cubed
Ginger,finely chopped1 tblsp
Green chillies2
Red chilli powder1 & 1/2  tsp
Dhaniya/coriander powder1 tblsp
Garam masala powder3/4 tsp
Turmeric powder1/8 tsp
SaltAs needed
Kasoori methi1 tsp
Coriander leaves,chopped2 tblsp
To Temper
Oil3 tblsp
Coriander seeds1 tsp

 

Method

  1. Heat oil in a pan/kadai and season with the coriander seeds. You can crush it roughly too before seasoning. But I added as such. Follow by adding ginger and give a quick fry.Add chopped onion, green chillies slit and fry till onion turns transparent.kp1
  2. Add the chopped tomatoes and add salt,add all the powders-chilli,dhaniya,garam masala and turmeric.Fry till tomatoes turn gooey.kp2
  3. Continue frying till oil oozes out and then add the cubed capsicum and fry for 1 or 2 minutes. The crunchiness and colour should not change.kp3
  4. Add the paneer cubes (paneer cubes should be kept immersed in hot water till use) and crush the kasoori methi within you palms to powder it and add it to it. Add 1/2 cup water and mix well. kp4
  5. Cook till the masala coats paneer well and the gravy is thick almost dry. Not too dry too. Add the chopped coriander leaves lastly and transfer to the serving dish.kp5
 
      We had it with simple dal tadka and steamed basmati rice,its my kiddo’s favorite,mine too. Just love the flavourful capsicum and the spicy dish goes well with the bland dal and its very comforting too!

Kadai+paneer-recipe
Notes
  • Keep paneer immersed in hot water until before you cook.
  • Cook capsicum without changing its crunchiness.
  • You can add ginger garlic paste in palce of ginger.Use one tsp.
  • Enjoy hot!

vada pav


Vada pav SET    
   You all wont believe that I have not ever tasted vada pav till I made it myself this time and tasted. Even I had a thought that they keep Urad vada inside the pav buns and that’s the vada pav. Now I know its like south Indian potato bonda sandwiched between pav bunsWinking Then I referred Tarla dalal site, also googled and partially adapted recipe from here too.

Ingredients

For Vada
Potato2
Turmeric1/8 tsp
Green chillies2
Garlic2 flakes
SaltAs needed
For  Outer covering
Besan flour1/4 cup
Rice flour1 tblsp
Turmeric2 pinches
Cooking sodaA pinch
Saltas needed
To Temper
Oil1 tsp
Mustard1/2 tsp
Asafoetida1/8 tsp
Curry leavesfew
Red Garlic chutney
Red chilli powder1 – 2 tsp
Garlic10 – 12 flakes
Coconut,grated2 tblsp
Saltas needed
Dry roast coconut till dry and grind everything with no water or very less water. I made it as wet chutney and had with other tiffin items too…
Red garlic chutney-1
Green Chutney
Mint or coriander leaves1 small bunch
Green chilli1-2
Lemon Juicefrom 1 lemon
Almonds/Cashews(optional)5-7
SaltAs needed
Blend everything with very less water and store in a airtight container. You can refrigerate and use for various chats and sandwiches.
Green chutney

Method :

  1. Pressure cook potatoes,peel off the skin and mash it.Chop garlic and green chillies finely.
  2. Heat oil in a pan and season with the items given under the “To temper” table.Add garlic, green chillies, turmeric,salt and give it a fry. Add the mashed potato and mix well. Stir fry for two minutes.
    SEASONPOTATO
  3. Cool down and divide into 6 and make balls.
  4. Make a thick batter with gram flour,rice flour,turmeric and salt,adding little water.
    FLOURBATTER
  5. Heat a paniyaram pan or kadai with oil for deep frying. Coat the potato balls with the besan batter and fry them until golden brown in all the sides.
    vadavada
  6. Drain in paper towel.
    Vadaset
  7. To arrange the vada and pav , slit the buns to two,leaving one side still in contact.Apply green and red chutneys in the inner sides of the buns.
    chutneyChutney
  8. Keep the vada we made and close the bun. Enjoy the big bite :)
    vada inVada pav

                                                            Wanna bite??huh?

Vada-pav
Notes:
  • You can deep fry the vadas too. But I like this way,no compromise in taste too.
  • I used butter rolls as pav buns for this.

Hakka noodles


vegetable-hakka-noodles
          I used to think making hakka noodles is complicated until I tried fried rice ,which I make often now a days. So hakka noodles also now a days become usual dish at our home. I love the smoky flavour we get when we toss the vegetable. I feel the wok they use in the restaurants also play a significant roll in the flavour of hakka noodles. Its so simple to make and kids would love this. Only thing is we have to cook the noodles properly to remove the wax coating which is not good for our health. I used Ching’s hakka noodles to prepare this and its good too. You can use any plain noodles for making this.
 vegetable-hakka-noodles

VEGETABLE HAKKA NOODLES (serves 2)

Ingredients

Plain noodles1 & 1/2 cup
Finely cut cabbage3/4 cup
Carrot1
Capsicum1/2
Spring onion3 sprigs
Pepper1/2 tsp
Tomato chilli sauce1 & 1/2 tsp
SaltAs needed
Oil2 tblsp

Method

  1. Cook noodles as per the instructions given in the pack or boil 3-4 cups of water and cook noodles for 3-4 minutes. Make sure its not over cooked. Drain water and wash it to remove the excess starch and add 1 tsp oil and mix well to avoid sticking.1-hakka
  2. Cut veggies into fine thin strips,chop the spring onion finely(green part) and chop the white part separately. Heat a pan with oil and fry white part of the spring onion. 2-hakka
  3. Add the veggies one by one frying each for half minute. Add the sauces, salt and pepper. Give a quick stir.3-hakka
  4. Add the drained noodles and mix well. Add the chopped spring onion and stir well.4-hakka
                                          Serve hot with any Manchurian or as such with sauce.
     Vegetable-hakka-noodles
Notes
  • Use oil generously. You can use any cooking oil or olive oil the best.
  • Fry always in high flame. If you can, try tossing the veggies in such a way that it catches fire. This gives the smoky flavour as in restaurants. Oil should be more to do this.
  • You can also add white pepper or ajinomoto in this. Ajinomoto is not advisable for health though.

Monday, March 11, 2013

धर्मनिरपेक्षता का'मोदी मंत्र', इंडिया फर्स्‍ट dekhte hain modi apni kahi hui baat par kayam rehta hai ya sala apni baat badlta hai yeh to waqt hi batayega

धर्मनिरपेक्षता का'मोदी मंत्र', इंडिया फर्स्‍ट

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार सुबह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अमेरिका और कनाडा में बैठे प्रवासी भारतीयों को संबोधित किया., मोदी ने कहा कि मेरे अनुसार धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा'इंडिया फर्स्‍ट'है.

नरेंद्र मोदी ने कहा कि हर निर्णय में भारत ही सर्वोपरि होना चाहिए. उन्‍होंने कहा कि हम कोई भी काम करें, वह भारत के लिए होना चाहिए. इससे सारा सेक्यूलरिज्‍म अपने- आप हममें आ जाएगा.

मोदी ने कहा, ‘धर्मनिरपेक्षता की मेरी परिभाषा काफी साधारण है, ‘पहले भारत’. आप जो भी करें, जहां कहीं भी काम करें, इसके सभी नागरिकों के लिए भारत ही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.’

गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘देश सभी धर्मों और विचारधाराओं से ऊपर है.’ उन्होंने कहा कि लोगों को इसी सिद्धांत का पालन करना चाहिए.

मोदी ने कहा, ‘मैं इससे सहमत हूं कि एक भारतीय के तौर पर, भारत से प्रेम करने वाले एक नागरिक के तौर पर, आप भी मेरी इस परिभाषा से सहमत होंगे. हम कोई भी काम करें या कोई भी फैसला करें, सबसे ऊपर भारत ही होना चाहिए.’

बीजेपी नेता ने कहा, ‘भारत के हित से कम कुछ भी हमारा लक्ष्य नहीं होना चाहिए और यदि ऐसा होता है तो धर्मनिरपेक्षता अपने आप हमारी रगों में दौड़ेगी.’ मानवाधिकार हनन के मुद्दे पर मोदी को अमेरिकी वीजा से इनकार कर दिया गया था.

पिछले हफ्ते व्हार्टन इंडिया इकनॉमिक फोरम में मुख्य वक्ता के तौर पर दिया जाने वाला नरेंद्र मोदी का भाषण रद्द कर दिया गया था. यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिलवेनिया के प्रोफेसरों और छात्रों के एक तबके की ओर से मोदी का विरोध किए जाने की वजह से भाषण को रद्द करना पड़ा था.

हालांकि, अपने संबोधन में मोदी ने व्हार्टन मुद्दे पर भी कुछ नहीं बोला. व्हार्टन विवाद से काफी पहले ‘ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी’ की ओर से इस कार्यक्रम की योजना बनायी गयी थी.

न्यू जर्सी के एडिसन और शिकागो में मोदी के भाषण को सुनने के लिए सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए थे. अपने संबोधन में मोदी ने युवाओं के कौशलपूर्ण विकास पर जोर दिया क्योंकि भारत की कुल आबादी में युवा जनसंख्या 65 फीसदी है. उन्होंने भारतीय समुदाय से कहा कि वह भारत के समुचित विकास में मदद करे.

मोदी ने गांधीनगर से अपना संदेश एडिसन, न्यूजर्सी, शिकागो, इलिनॉयस में बैठे एनआरआई लोगों को देते हुए कहा कि हमने विकास को राजनीति से अलग रखा है. उन्होंने कहा कि महाकुंभ जैसा शानदार आयोजन भारत में होता है. यूरोप के कई देशों की आबादी कुंभ में गंगा किनारे जुटे लोगों जितनी है. महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में हर देवी-देवताओं से कोई ना कोई संदेश मिलता है. भगवान शिव से हमें जहर पीने की और जहर पचाने की प्रेरणा मिलती है. इससे हमें बुराइयां और कटुता को पचाकर अपने मन-मंदिर में अमृतरस को बसाना चाहिए.

मोदी ने कहा कि इस 21वीं सदी में पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है. मंदी के वक्त गुजरात के विकास ने आशा का संचार किया. पूरा विश्व गुजरात के विकास को देख रहा है. भारत सरकार का स्किल डेवलपमेंट बजट 1000 करोड़ रुपये है, जबकि हमारे जैसे छोटे राज्य का 800 करोड़ रुपये है. इससे हमारी प्रतिबद्धता का पता चलता है.

उन्होंने कहा कि अब गुजरात के लोग समझ गए हैं कि सभी समस्याओं का हल विकास है. हमारे पास अथाह युवा शक्ति है, उसका इस्तेमाल कर विकास करना चाहिए. मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा लेकर युवाओं को आज देश को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए...

शादी से पहले सेक्स


पहली मुलाकात में सेक्स करने से कमज़ोर हो जाता है रिश्ता...
लंदन: अब साबित हो गया है कि शादी से पहले सेक्स नहीं करने देने की सदियों पुरानी परम्परा और मान्यता यूं ही नहीं बनी है, और उसमें वैज्ञानिक आधार भी है... अनुसंधानकताओं ने अब इसी परम्परा के कारगर होने की पुष्टि कर दी है... उनका कहना है कि शादी होने तक यौन संबंध बनाने, यानि सेक्स करने से परहेज़ रखने वाले जोड़े, पहली ही मुलाकात में सेक्स कर लेने वाले जोड़ों के मुकाबले ज़्यादा खुश रहते हैं और उनका रिश्ता ज़्यादा लम्बे समय तक टिकता है...

अपनी तरह के इस पहले अध्ययन में कॉर्नेल विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा है कि शुरू में ही शारीरिक संबंध बना लेने की वजह से अच्छे संबंधों से जुड़े बाकी तथ्यों की तरफ से ध्यान हट जाता है... इन तथ्यों में एक-दूसरे के प्रति वचनबद्धता, परवाह, आपसी समझ और साझा मूल्य शामिल हैं... ब्रिटिश समाचारपत्र 'द इन्डिपेन्डेन्ट' ने अनुसंधानकर्ताओं के हवाले से कहा है, "शादी से पहले सेक्स में संयम बरतने से रिश्ते की सेहत पर अच्छा असर पड़ता है..."

अनुसंधानकर्ताओं ने इस संबंध में 600 जोड़ों से उनके रिश्ते के बारे में बात की... उन लोगों से उनके यौन जीवन (सेक्सुअल लाइफ) के बारे में पूछताछ के बाद उनसे उनके रिश्तों के बारे में पूछा गया और उसी आधार पर इस अध्ययन का निष्कर्ष निकाला गया... अध्ययन के ये नतीजे 'मैरिज एंड फैमिली' के ताजा जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं...

आजाद सिंह


उम्र 22 साल। लेकिन कद महज तीन फिट, तीन इंच। नाम है आजाद सिंह। जेनेटिक बीमारी के कारण सामान्य कद हासिल नहीं कर पाए।

नतीजतन जिंदगी में तमाम दुश्वारियों से रूबरू होना पड़ा।

सर्कस वाले ले जाना चाहते थे। गांव-स्कूल में साथी-सहपाठी मजाक उड़ाते थे। फिर भी आजाद ने हौसला नहीं छोड़ा। पढ़ाई जारी रखी। आज शिक्षक हैं। एक कन्या विद्यालय में कंप्यूटर की शिक्षा देते हैं।

गुड़गांव जिले के बादशाहपुर निवासी आजाद का शरीरिक विकास चार साल की उम्र में ही थम गया। परिजनों ने इसके लिए तमाम प्रयास किए। दिल्ली के कलावती, सफदरजंग सहित कई अस्पतालों में संपर्क किया। कहीं उम्मीद की किरण नहीं दिखी। सराय काले खां में एक निजी अस्पताल ने एक इंजेक्शन लगवाने के लिए कहा। कीमत करीब ढाई लाख बताई गई। लेकिन लंबाई बढ़ेगी, इसकी गारंटी नहीं मिल रही थी। इसलिए कद बढ़ाने का मोह छोड़ दिया और पढ़ाई में जुट गए।

बारहवीं तक की पढ़ाई बादशाहपुर के राजकीय बाल विद्यालय से पूरी की। इस दौरान खुशनसीबी से दो दोस्त भी मिले-मनोज और रविंद्र। इन दोस्तों ने हमेशा हौसला बढ़ाया, साथ दिया। कालेज की मैडम ने भी हमेशा पढ़ाई पर ध्यान देने और नकारात्मक विचार मन में न लाने के लिए प्रेरित किया।

उनकी प्रेरणा और सहयोग से ही आजाद सिंह ने एक निजी संस्थान से कंप्यूटर की शिक्षा पूरी की और पिछले तीन माह से कन्या विद्यालय में बतौर कंप्यूटर टीचर तैनात हैं। यहां छात्राएं और स्टाफ पूरा सम्मान देते हैं। बारहवीं कक्षा में पढ़ रही आजाद की छोटी बहन लक्ष्मी की लंबाई भी 3 फीट 7 इंच है, जबकि ग्यारहवीं में पढ़ने वाली बहन सुमन की कदकाठी सामान्य है।

यूं तो मां ने स्कूटी लेकर दे दी है, जिस पर आजाद कभी-कभार बहन सुमन के साथ स्कूल चले जाते हैं। लेकिन पसंद पैदल चलना ही है। ज्यादातर पैदल ही स्कूल आते-जाते हैं। आजाद ने आज तक रेल में यात्रा नहीं की है। बस में यात्रा के दौरान मम्मी को हमेशा साथ ले जाते हैं।

बकौल आजाद सिंह-'यह माता-पिता के आशीर्वाद और मेहनत का ही नतीजा है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मैं आज अपने पैरों पर खड़ा हूं। अब बहनों को बेतहर शिक्षा दिलाना चाहता हूं। अपनी शिक्षा को भी आगे बढ़ाना चाहता हूं।'

दरअसल, आजाद ने स्नातक की पढ़ाई के लिए गुड़गांव के एक सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया था। लेकिन प्राचार्य ने कहा कि कॉलेज में दिक्कत हो सकती है इसलिए गुड़गांव में पढ़ाई का विचार त्याग दिया।
आज़ाद सिंह के इस हौसले को हमारा सलाम।
उम्र 22 साल। लेकिन कद महज तीन फिट, तीन इंच। नाम है आजाद सिंह। जेनेटिक बीमारी के कारण सामान्य कद हासिल नहीं कर पाए। 

नतीजतन जिंदगी में तमाम दुश्वारियों से रूबरू होना पड़ा। 

सर्कस वाले ले जाना चाहते थे। गांव-स्कूल में साथी-सहपाठी मजाक उड़ाते थे। फिर भी आजाद ने हौसला नहीं छोड़ा। पढ़ाई जारी रखी। आज शिक्षक हैं। एक कन्या विद्यालय में कंप्यूटर की शिक्षा देते हैं। 

गुड़गांव जिले के बादशाहपुर निवासी आजाद का शरीरिक विकास चार साल की उम्र में ही थम गया। परिजनों ने इसके लिए तमाम प्रयास किए। दिल्ली के कलावती, सफदरजंग सहित कई अस्पतालों में संपर्क किया। कहीं उम्मीद की किरण नहीं दिखी। सराय काले खां में एक निजी अस्पताल ने एक इंजेक्शन लगवाने के लिए कहा। कीमत करीब ढाई लाख बताई गई। लेकिन लंबाई बढ़ेगी, इसकी गारंटी नहीं मिल रही थी। इसलिए कद बढ़ाने का मोह छोड़ दिया और पढ़ाई में जुट गए। 

बारहवीं तक की पढ़ाई बादशाहपुर के राजकीय बाल विद्यालय से पूरी की। इस दौरान खुशनसीबी से दो दोस्त भी मिले-मनोज और रविंद्र। इन दोस्तों ने हमेशा हौसला बढ़ाया, साथ दिया। कालेज की मैडम ने भी हमेशा पढ़ाई पर ध्यान देने और नकारात्मक विचार मन में न लाने के लिए प्रेरित किया।
 
उनकी प्रेरणा और सहयोग से ही आजाद सिंह ने एक निजी संस्थान से कंप्यूटर की शिक्षा पूरी की और पिछले तीन माह से कन्या विद्यालय में बतौर कंप्यूटर टीचर तैनात हैं। यहां छात्राएं और स्टाफ पूरा सम्मान देते हैं। बारहवीं कक्षा में पढ़ रही आजाद की छोटी बहन लक्ष्मी की लंबाई भी 3 फीट 7 इंच है, जबकि ग्यारहवीं में पढ़ने वाली बहन सुमन की कदकाठी सामान्य है। 

यूं तो मां ने स्कूटी लेकर दे दी है, जिस पर आजाद कभी-कभार बहन सुमन के साथ स्कूल चले जाते हैं। लेकिन पसंद पैदल चलना ही है। ज्यादातर पैदल ही स्कूल आते-जाते हैं। आजाद ने आज तक रेल में यात्रा नहीं की है। बस में यात्रा के दौरान मम्मी को हमेशा साथ ले जाते हैं। 

बकौल आजाद सिंह-'यह माता-पिता के आशीर्वाद और मेहनत का ही नतीजा है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मैं आज अपने पैरों पर खड़ा हूं। अब बहनों को बेतहर शिक्षा दिलाना चाहता हूं। अपनी शिक्षा को भी आगे बढ़ाना चाहता हूं।'
 
दरअसल, आजाद ने स्नातक की पढ़ाई के लिए गुड़गांव के एक सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया था। लेकिन प्राचार्य ने कहा कि कॉलेज में दिक्कत हो सकती है इसलिए गुड़गांव में पढ़ाई का विचार त्याग दिया।
आज़ाद सिंह के इस हौसले को हमारा सलाम।