Monday, April 22, 2013

मूर्ख से पाला पड़े तो .....

मूर्ख से पाला पड़े तो .....

अकबर बादशाह के समय में बीरबल प्रधानमंत्री थे | एक दिन बादशाह ने बीरबल को बुलाया और कहने लगे कि बीरबल तुम इतने होशियार हो तो तुम्हारे वालिद तो तुमसे भी ज्यादा अक्लमंद होंगे | मैं उनसे मिलना चाहता हूं | बीरबल ने कहा कि सरकार वह देहात के रहने वाले सीधे साधे हैं | किंतु बादशाह ने कहा कि मेरी बड़ी इच्छा है कि उनके दर्शन करूं | बीरबल ने बादशाह का मतलब समझ लिया और बोला कि अच्छी बात है | कुछ दिनों बाद उसने समाचार भेजकर अपने पिता को बुलाया | उनके लिये बहुत ही सुन्दर पोशाक बनवाया और समझाया कि पिता जी - बादशाह आपसे मिलना चाहता है | आप जब दरबार में जाइऐगा तो बादशाह को सलाम करके बैठ जाएयेगा | बादशाह आपसे कुछ भी पूछे – कोई उत्तर न दीजिएगा |

एक दिन बीरबल के पिता जी खूब सज धज कर दरबार में पहुंचे | बादशाह को खबर की गई कि बीरबल के पिता जी आये हैं | बादशाह थोड़ी देर में आया | उसे देखकर बीरबल के पिता जी ने सलाम किया और बैठ गए | बादशाह ने पूछा कि आप बीरबल के पिता हैं | पिताजी चुप थे | उसने फिर पूछा कि आप का नाम क्या है | वे अब भी चुप रहे और कुछ नहीं बोले | आगे बादशाह ने पूछा कि गाँव की खेती इस साल कैसी है ? पिता जी चुप रहे |

बादशाह ने दर्जनों सवाल किये किन्तु बीरबल के पिता ने जबान तक नहीं हिलाई | बादशाह खीज उठा और यह कहते हुए अन्दर चला गया कि किस मुर्ख से आज पाला पड़ा |

बादशाह के जाने के बाद बीरबल के पिता जी भी उठकर घर चले आये और उन्होंने बीरबल से सारी बातें बता दी | बीरबल ने कहा कि ठीक है | चार दिन बाद बीरबल दरबार पहुंचे तो अकबर बादशाह ने कहा अरे बीरबल सुनो तुमसे एक जरुरी बात करनी है | बीरबल करीब आये तो बादशाह ने कहा कि बीरबल - “यदि मूर्खों से पाला पड़ जाय तो क्या करना चाहिए”

इस पर बीरबल तपाक से बोल पड़ा कि ‘हुजूर, सरकार चुप्प रहना चाहिए’.

यह सुनकर बादशाह की आँखें नीची हो गयी।

No comments:

Post a Comment