Thursday, April 18, 2013

"जिँदगी मेँ दोस्त नही बल्कि दोस्त मेँ जिँदगी होनी चाहिए"

क्या शीर्षक होने चाहिए इस कहानी का?

एक दोस्त ने नया मोबाइल खरीदा..!!
राहुल : देख, राकेश मैने नया मोबाइल खरीदा..!!
राकेश : वाह.. क्या बात है, बंदा तेजी मेँ है.. आज पार्टी तो देनी पडेगी तुझे..!
अगर पार्टी देगा तो मैँ भी तुझे एक Gift दुँगा..!
राहुल : OK चल ठीक है आज रात को Hotel मेँ पार्टी मेरी तरफ से..
(रात को दोनो Hotel मेँ मिलते है)
राकेश : अरे यार तु इतना गरीब है,
एक-एक रुपया इकठ्ठा करके मोबाइल खरीदा और अब पार्टी का इंतजाम कैसे किया..?
राहुल : पार्टी के लिए मोबाइल बेच दिया.. तेरे लिए तो जान भी दे दु तु कहे तो...!
राकेश : मुझे पता था तु साला ऐसा ही कुछ करेगा... इसलिए तुने जिस दुकान पर मोबाइल बेचा मैने वही से वापस खरीद कर
लाया हु... ले यह मेरी तरफ से "GIFT"

मोरल : "जिँदगी मेँ दोस्त नही बल्कि दोस्त मेँ जिँदगी होनी चाहिए"

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