1992-93 में जो उधारीकरण (FDI)
की नीति अपनाई गई
थी उसकी सजा आज देश भुगत रहा है।देश
का विकास दर अत्यंत नीचे गिर चूका है।
उस उधार से बचने के लिए फिर से FDI
को बढ़ाया गया है।जिससे कुछ दिनों के
लिए उधार का विकास दर ऊपर
चढ़ेगा और प्रधानमंत्रीजी उस पर
वाहवाही लूटेंगे।
आज देश बिकना चालु हो गया है ।
निश्चित रूप से आज से 20 साल बाद इसके
गंभीर,अत्यंत गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
जो सिर्फ देश
की जनता भुगतेगी क्योकि ये साहेब
तो लूट कर जा चुके होंगे।
ये बात पूर्ण सत्य होगी। अपने जेहन में भर
लीजिये।
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