#टिड्डा सारी हरियाली चट कर जाएगा...
बहरों को सुनाने के लिए ऊंची आवाज की जरूरत पड़ती है, ये बात भगत सिंह ने कही थी।
चूंकि,
पर्यावरण संकट की शुरुआती चेतावनियां नजरअंदाज कर दी गईं, इसलिए शायद कुदरत ने भी अपनी आवाज ऊंची कर ली है।
कोरोना महामारी, अम्फान तूफान के बाद अब टिड्डी दलों का हमला भी लोगों की मुसीबत बढ़ाने के लिए तैयार बैठा है।
अम्फान तूफान ने ओडीशा और बंगाल में लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। लाखों पेड़ टूट कर गिर पड़े हैं और बहुत सारे लोगों की जान चली गई है। लाखों लोगों से पहले ही उनके घर खाली करा लिए गए थे। चक्रवाती तूफान अम्फान के दौरान 190 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली हवाएं चलने की बात कही जा रही है। तूफान से हुए पूरे नुकसान का आकलन करने में अभी कुछ समय लगेगा। लेकिन, इस बीच भारत में एक और मुसीबत तैयार खड़ी हो रही है।
भारत के कई हिस्सों में टिट्डी दलों की मौजूदगी देखी जा रही है।पिछले दिनों आई कुछ मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि पाकिस्तान की तरफ से टिड्डियों का एक दल उड़कर राजस्थान के पार गया है। चूंकि इस समय राजस्थान के बड़े हिस्से में खेत खाली पड़े हैं। इसलिए उन्हें बैठने और खाने के लिए खास कुछ नहीं मिला। इसलिए वे उड़कर आगे निकल गए। राजस्थान के बूंदी, सीकर, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ आदि जिलों में टिड्डी दलों के दिखने की सूचना हैं। लगभग छब्बीस सालों बाद पिछले साल राजस्थान में लोगों ने टिड्डी दलों का हमला देखा था। पिछले साल मई में शुरू हुआ यह हमला इस वर्ष फरवरी तक चला था। इस दौरान राजस्थान के बारह जिलों में 6 लाख 70 हजार हेक्टेयर के लगभग फसल तबाह हो गई। टिड्डी दलों के हमले से कुल मिलाकर एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। राजस्थान के बाद अब खबर मध्यप्रदेश से आई है। मध्यप्रदेश के 15 जिलों में टिड्डी दलों के हमले की बात कही जा रही है। इसमें मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा व अन्य जिले शामिल हैं। टिड्डी दलों से मुकाबले के लिए यहां पर अग्निशमन वाहनों में कीटनाशक दवाएं भरकर छिड़काव किया जा रहा है।
#टिड्डी दलों के बारे में हमें कुछ बेसिक बातों को जान लेन चाहिए। टिड्डी एक छोटा सा कीड़ा होता है। जिसे कहीं-कहीं टिड्डा भी कहा जाता है,जब कीट लाखों-करोड़ों की संख्या में होता है तो यह किसी विशालकाय भूखे दैत्य जैसा साबित होता है। जो सबकुछ को कुछ ही घंटों में तहस-नहस कर देता है। एक टिड्डी दल में अस्सी लाख से ज्यादा कीट हो सकते हैं। हवा के साथ वे एक दिन में 150 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी उड़कर पूरी कर सकते हैं। जब वे उड़ते हैं तो कीटों के किसी बादल जैसे लगते हैं। अगर आपको याद हो कि पिछले साल टिड्डी दलों के बादल में फंसे एक विमान की आपात लैंडिंग केन्या में करानी पड़ी थी। इसके हमले को देखते हुए पाकिस्तान में एमरजेंसी तक घोषित करनी पड़ी थी।
आपको शायद यकीन नहीं होगा कि यह कीट कितनी तेजी से बढ़ता है। इसके एक झुंड में अस्सी लाख तक कीट हो सकते हैं। जो कि एक दिन में ही ढाई हजार लोगों के बराबर या दस हाथियों के बराबर खाना खा सकता है। अपने पहले प्रजनन काल में यह कीट बीस गुना बढ़ता है, दूसरे प्रजनन काल में 400 गुना और तीसरे प्रजनन काल में 16 हजार गुना बढ़ जाता है।
पूरी दुनिया में पर्यावरण संकट अलग-अलग रूपों में प्रगट हो रहा है। कोरोना वायरस उसी पर्यावरण संकट का एक हिस्सा है। तो अम्फान तूफान उसका दूसरा हिस्सा है। आस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग पर्यावरण संकट का एक और रूप है। इसी तरह से टिड्डी दलों का हमला भी पर्यावरण संकट का एक अलग रूप है। जलवायु संकट के चलते मौसम चक्र मे बदलाव हुआ है। इसके चलते अरब सागर में असमय चक्रवाती तूफान आए हैं। इनके चलते अफ्रीका और अरब में असमय बारिश हुई। जिससे इन टिड्डी दलों को पनपने का भरपूर मौका मिला। अब ये कीट अरब सागर के तीनों किनारों यानी भारत, पाकिस्तान, अरब और अफ्रीका के देशों पर अपना कहर बरपा रहे हैं।
लोकस्ट वार्निंग आर्गनाइजेशन (एलडब्लूओ) का अनुमान है कि मई के बचे हुए हिस्से और जून के महीने में यह टिड्डी दल कई जगहों पर अपना कहर बरपाएगा। वो जहां भी फसल और हरियाली देखेगा उसे चट कर जाएगा।
उससे बचने का एक ही तरीका है कि हम पृथ्वी की चेतावनियों को ध्यान से सुनें। जानें कि वो क्या कह रही है। पर जिन पर इसका जिम्मा है, क्या वो इसके लिए तैयार हैं?
(टिड्डी दलों के हमले का चित्र इंटरनेट से लिया गया है)
No comments:
Post a Comment