बड़े बे आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले....
*कहाँ तो हमारे चक्रवती सम्राट ने सोचा था, कि नेपाल के हिंदू राष्ट्र घोषित होते हि जगत गुरु योगी आदित्यनाथ और साक्षी महाराज के सानिध्य में पूरे ब्रह्मांड को हिंदू राष्ट्र बनाने और जम्बूद्वीप का भगवा झंडा पहराने के लिये अश्वमेध यज्ञ का आयोजन कर विजयी रथ छोड़ा जायेगा...*
*हमारे जलील-ए-ईलाही ने तो इस महायज्ञ के लिये जम्बूद्वीप का सम्राट बनते ही 40 टन चंदन कि लकड़ियां पहले हि नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में पहुँचा दी थी और साथ में 10,000 करोड़ रुपए की खैरात भी दे आये, ताकि ब्रम्हांड का पहला हिंदू शासक जब नेपाल की धरती पर कदम रखे तो उसके स्वागत में कोई कमी ना रहे*
*साथ ही नेपाल वालों को ये भरोसा दिलवाने में भी कोई कसर नहीँ छोड़ी कि हिंदू राष्ट्र घोषित होते हि यहां रामराज्य आ जायेगा..*
*लेकिन करोड़ो रूपए का मुफ्त चंदन घिसने और दस हजार करोड़ रूपए डकारने के बाद नेपाल वालो ने सबसे पहले तो नेपाल में भारतीय न्यूज चैनलो के प्रसारण पर रोक लगायी, फिर भारतीय मुद्रा को बैन किया, और फिर लाल झंडे वालों की सरकार बनवा दी*
चलो यहां तक तो ठीक था, लेकिन अब तो सीधे जम्बूद्वीप के कई इलाको पर अधिकार जता दिया, और तो और कोरोना वायरस का जिम्मेदार भी अब जम्बूद्वीप को बता रहा है ।
ये कमबख्त नेपाली चाहते हि नहीं कि वो रामराज्य में रहे, शायद रामराज्य की कुख्यात शोहरत रामराज्य से पहले ही नेपाल पहुँच गयी ।
और उनको पता लग गया कि -
*रामराज्य वो होगा जहाँ, महिलाओ को डायन बता कर मारा जाऐगा तो दलितों को मंदिर प्रवेश से रोकने के लिए मारा जायेगा*
*सती प्रथा, बाल विवाह, मृत्यु भोज, भ्रूण हत्या और जातिवाद गर्व कि बात होगी, जहाँ इंसान की जिंदगी की कीमत पशुओ से बदतर होगी*
*इक्कीसवी सदी में भी अपने घर तक पहुँचने के लिए करोड़ो लोगो को हजारो किलोमीटर का सफ़र नंगे पैर, भूखे, प्यासे रहकर पैदल ही तय करना होगा*
*हजारो लाखों लोग भूख प्यास से घर पहुँचने से पहले ही सडको पर दम तोड़ चुके होंगे. सैंकड़ो किलोमीटर पैदल चलने के बाद गर्भवती स्त्रियाँ सड़क पर बच्चे पैदा करेंगी और दो घंटे बाद फिर से पैदल ही दुख और दर्द की अंतहीन यात्रा पर निकल लेंगी*
*रामराज्य वो होगा जहाँ बलात्कार करने, धोका देने वाले, दलितों आदिवासियों कि गर्दन काटने वाले को देवता बनाया जायेगा*
*बाकी ऐसी बात भी नहीं है की नेपाल की इस हरकत से हमारे सवा 56 इंची वाले को गुस्सा नहीं आया ? गुस्सा आया है और वो नेपाल को गरियाना भी चाहते है, लेकिन छप्पनिया को पता है की नेपाल की तरफ आँख भी उठायी तो उसका नया दोस्त शी जिनपिंग अहमदाबाद में झूला नहीं झूलने नहीं आयेगा, बल्कि हमारे छप्पनिया साहब को हि घोड़ी बनाकर जीन कस देगा*
*तो भगतों अब एक ही रास्ता बचा है.... बजाओ ताली .. वही 6 नंबर वाली ... और, ताली पीटते हुए जोर से बोलो... नेपाल ! हाय ! हाय ! हाय !*
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