Sunday, May 24, 2020

Admission

कल मुंबई के एक मित्र, जो मेरे छोटे भाई समान हैं, उन्होंने फोन किया व पूछा - 'भैया, बेटा MBA करना चाहता है, पुणे के एक कॉलेज से एडमिशन ऑफर आया है, क्या करना चाहिए,  मार्गदर्शन करिए, ज्ञान दीजिए' 😊 

मैंने कहा कि मार्गदर्शन चाहिए या ज्ञान ? 

वो हँसते हुए बोले कि मार्गदर्शन देने वाले उस मार्ग का दर्शन करा सकते जो हमारे लिए बना ही न हो, परंतु गुरु कभी गलत ज्ञान नही दे सकता, इसलिए भैया जी, आप ज्ञान ही दीजिए, जिससे जीवन में सुख व शांति बनी रहे, जो इस कोरोना काल मे बहुत जरूरी है 😊

ऐसा है, तो हे मेरे भाई, ज्ञान की बात सुनो 🙂

कोरोना काल लंबा है, कम से कम एक बरस चलेगा, दवा या टीका खोज लेने का बाद भी एक बरस चलेगा. 

कोरोना काल मे भले ही इंडस्ट्री, बिजनेस, दूकान खुल जाएं, पर काम कम होगा, प्रोडक्शन कम होगा, सेल्स कम होगा, बिजनेस कम होगा, इस कारण लोगों को नई नौकरियाँ नही मिलेंगी, उलटे लोगों की नौकरियां जाएंगी. 

कोरोना के कारण स्कूल कॉलेज नही खुलेंगे, खुलेंगे तो भी नही चलेंगे, माता पिता अभिभावक को अपने बच्चे की जान जादा जरूरी है, पढ़ाई लिखाई वो डिस्टेंस से कर लेगा या ऑनलाइन कर लेगा या अगले बरस कर लेगा. 

मूल बात यही है कि 'जान जादा जरूरी है'. इसके लिए बड़ा कॉलेज, ब्रान्डेड कॉलेज, नामी कॉलेज आदि देखने की जरूरत नही है, जो कॉलेज घर से 5 km के अंदर है, जहाँ से बच्चा अप्रत्याशित लॉक डाउन के समय पैदल आ सकता है, वही अच्छा है. 

वो स्कूल या कॉलेज अच्छा है, जो गाँव या छोटे शहर में हो, जहाँ जनसंख्या घनत्व कम हो, जो कोरोना से सेफ हो, जो आपके बच्चे के जीवन की सुरक्षा की गारेंटी ले सके, वहां एडमिशन कराएं, वहाँ पढ़ने भेजें. अगर ऐसी जगह या ऐसा कॉलेज न मिले तो सरकारी डिस्टेंस एजुकेशन या सरकारी  ऑनलाइन व्यवस्था में पढ़ाएं. 

सरकारी इसलिए कि वही स्थाई रहेगा. प्राइवेट स्कूल या कॉलेज के आर्थिक हालात बहुत अच्छे नही हैं, उन्होंने पिछले तीन महीने से अपने अध्यापकों को सैलरी नही दी है, उनके पास डिस्टेंस या ऑनलाइन स्टडी के लिए जरूरी लैब नही है, हाई बैंडविथ वाला इंटरनेट नही है, ऑनलाइन text books, वीडियो क्लिप्स नही हैं, ऑनलाइन पढ़ाने वाले टीचर नही हैं, मतलब डिस्टेंस व ऑनलाइन के लिए उनके पास जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर नही हैं, इसलिए वो बहुत भरोसे के नही हैं, उनका सिस्टम कभी भी क्रैश हो सकता है. 

जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तो सरकारी स्कूल कॉलेज के पास भी नही हैं, पर सरकार के पास पैसा है, इसलिए उसके पास इंफ्रास्ट्रक्चर develop करने की ताकत है, डेवेलप कर सकती है, और वो आज नही तो कल. सरकार का सिस्टम लगातार कई वर्षों तक loss में चलने के बाद भी क्रैश नही होता, क्योंकि सरकार के पास पैसा व पॉलिसी होती है. और आखिरी बात हर एक को समझना चाहिए कि सरकार का दिया हुआ रिजल्ट, सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री ही सब जगह valid होता है, मान्य होता है. 

अगर आस पास सरकारी विद्यालय या कॉलेज नही है तो अर्ध सरकारी या ट्रस्ट या संस्था या सामुदायिक स्कूल कॉलेज में पढ़ें. ध्यान रखें कि स्कूल या कॉलेज सरकार से मान्य हो. 

पैरेंट्स फीस पर भी ध्यान रखें. कोरोना काल मे एजुकेशन लोन या कोई दूसरा लोन कत्तई न लें. आपके पास जितना पैसा हो, उसका दो तिहाई परिवार के जीवन यापन के लिए रख लें, बचे हुए एक तिहाई में सभी बच्चों की पढ़ाई करवाएं. अगर आप के पास 1 करोड़ जमा हैं तो 33 लाख तक खर्च कर दें, अगर 1 लाख जमा है तो 33 हजार तक ही खर्च करें, अगर  1 हजार ही जमा है तो 300 ₹ ही खर्च करें. ऐसा क्यों ? यह बात मैं कभी बाद में बताऊँगा, आज इसे आप केवल ज्ञान की तरह ग्रहण करें. 

यदि अभी भी मन में संशय है तो केवल तीन सूत्र पर चलें. 

पहला - बच्चे का सुरक्षित जीवन सबसे जादा जरूरी है 

दूसरा - सरकारी संस्थाएं दीर्घकालिक होती हैं, उनका प्रमाणपत्र, रिजल्ट, सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री हर जगह valid होता है, सर्वमान्य होता है. अगर सरकारी संस्था न मिले तो सरकार मान्य संस्था देखें.

तीसरा - उधारी या लोन न लें, आप के पास जितना है उसी में करें, पहले परिवार के जीवन यापन की व्यवस्था करें, उसके बाद दूसरा काम करें। 

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