Friday, May 22, 2020

पीरियडस

उसे पीरियड्स भी आते हैँ
जो मजदूर महिलाएं हफ्तों से पैदल चल रही हैँ उनमे से कइयों के पीरियड्स चल रहे होंगे। कई के अचानक शुरू हुए होंगे। चलते काफिले में अचानक शुरू हुए पीरियड्स के लिए सबको कैसे रुकने को बोल सकती थी वो ? तो पीरियड्स में चलती रही। 40 मर्दों के बीच ट्रक में बैठी महिला का पीरियड शुरू हो जाये तो क्या करेंगी ? कैसे मैनेज़ किया होगा ? रोटी और बच्चों के लिए दूध खरीदने के पैसे नहीं तो पैड्स तो नहीं ही होंगे। कोई कपड़ा होगा भी तो लगातार हफ़्तों के पैदल चलने में कहां धोया, कब कैसे सुखाया होगा ? कभी सोचा है  ? उन दिनों में चलते हुए जाँघ छिल गयी होंगी उसकी ।
कुछ मजदूर महिलायें गर्भवती भी थी। हमारे घर की गर्भवती को जरा सा दर्द हो तो हस्पताल ले भागते हैँ, उन्होंने दर्द किससे कहा होगा ? कह भी दिया तो पति कितना बेसहारा और मजबूर फील किया होगा कि कुछ नहीं कर सकता। एक मजदूर महिला को चलते हुए लेबर पेन हुआ, उसने रास्ते में बच्चे को जन्म दिया,  बच्चे की नाल काटी और 2 घंटे बाद फिर चलने लगी। आपके घर की महिलाओं की  हफ़्तों मालिश होती है।  सोचो उसपे क्या गुजरी होंगी। कई महिलाओं में इंफेक्शन फैलेगा, कई कोरोना की बजाय इंतेज़ाम की कमी और इंफेक्शन से मर जाएंगी। इसका हिसाब कौन देगा  ? सरकारों को इसका खयाल नहीं आया  ? अरे राजनीति करने वालो, ये 50% वोट भी है यही समझ के सेनेट्री पैड बंटवा देते।

जिस व्यक्ति का परिवार ना हो उसे राजा नहीं बनाना चाहिए, वो उतना संवेदनशील नहीं होता। वो दर्द पढ़-सुन सकता है, महसूस नहीं कर सकता। तुम्हारे तो परिवार है,  तुमने क्योँ महसूस नहीं किया  ? अब याद रखना कि इस समय सरकार तुम्हें क्या बता रही थी।
#कालचक्र
LakshmiPratap Singh

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