Tuesday, May 26, 2020

mazdoron ka dard

#रेल_का_खेल !

★ भारतीय रेल तो पहले ऐसी नहीं थी ! 🤔

कोई तो है ही, जो इस भयानक साजिश को अंजाम दे रहा है...? 🕵️

◆कोई है, जो नहीं चाहता कि मजदूर वापस जाए। 
कोई है जो अपने घर वापस जाने वाले मजदूरों में हर प्रकार का खौफ भर देना चाहता है। 
यात्रा का खौफ !
 
◆कोई है, जो साजिश कर रहा है कि यात्रा के बदहाल व्यवस्था की खौफ से बाकी बचे मजदूर वापस घर की ओर ना जाये।

◆ये कोई जो भी है ? 
एक व्यक्ति नहीं, पूरी गिरोह है जो सरकार के इस साज़िश को विचार दे रहा है।

वरना भारतीय रेल कभी इतनी नाकारा या अक्षम नहीं थी कि ट्रेन 9 दिन बाद गंतव्य तक पहूंचे। 🤔

◆सामाजिक सत्य है कि आपदा में कोई खुद का आशियाना छोड़ना नहीं चाहता। 
जो जहाँ रहता है वहीं रहकर महफूज रहना चाहता है। 

◆असुरक्षा की मजबूरी ही आपदा के समय लोगो को इधर-उधर भागकर सुरक्षित स्थान पर चले जाने को विवश करता है और सुरक्षित स्थान का मंजिल होता है उसका खुद का घर।

◆इसलिए मजदूर अपने कार्यस्थल से वापस घर की तरफ जा रहे हैं।

◆क्योंकि यही एक निम्न वर्ग है जिसे कोई संसाधन उपलब्ध नहीं है इस भीषण आपदा में अपने कार्यस्थल पर कुछ महीने बिना काम किये और बिन पैसे प्राप्त किये जीवन यापन करने का।

◆किसी ने इनकी सुध नहीं ली, उल्टे इनके जेहन में खौफ बिठाया गया। 
#मौत का खौफ !☠️
#कोरोना से मौत, भूख से मौत !💀👺☠️

इसलिए ट्रैन साज़िशन भटकाई जा रही है। 
*देर की जा रही है।*
कैंसिल की जा रही है, ताकि मजदूर वापस ना जाये। 
*गहरी साजिश खम्बानियो की.....!*

◆प्रशासनिक लापरवाही या प्रशासनिक साज़िश...?

जो भी हो रहा #शर्मनाक है !

#वक्त.....'वक्त' आने पर बहुत बड़ा हिसाब लेगी, जिसका जवाब हमसब को देना होगा।

◆सरकार अभी भी संभल जाए... ! मैं बार-बार सरकार को इसलिए कह रहा हूँ कि आपके बस में सबकुछ है लेकिन आप बिना #राजनीतिकरण के कुछ करना नहीं चाहते।

दोस्तों ये वही सरकार है जिनकी संवेदना मर चुकी है।
कारण- ये अपनी सरकार की वर्षगांठ मनाने या यूं कहें कि जश्न मनाने की तैयारी कर रही है।

इनको देश की कोई चिंता नहीं।
लिंक कमेंट बॉक्स में डाल दूँगा देख लीजिएगा आपलोग।

दुःखद ! बहुत ही दुःखद !!!.....🖋️

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