समाज की नियमावली पढ़ रहा था
समाज को सबसे अधिक आपत्ति अंतरजातीय विवाह से होती है
समाज किसी बलात्कारी हत्यारे डकैत दंगाई बेवड़े को बर्दाश्त कर सकता है
लेकिन
अंतरजातीय विवाह समाज को बर्दाश्त नहीं !!!
धन्य हो !
ये समाज के रखवाले हैं !!!
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प्रायः प्रायः सभी समाज में विवाह को लेकर गंभीर चिंताएँ हैं
खासकर तब
जब लड़की पढ़ी लिखी हो, अच्छी नौकरी करती हो
उसके लिए योग्य लड़का समाज के भीतर खोजना जटिल कार्य होता है
हमारे समाज के ग्रुप में आज चर्चा चल रही थी
तो एक "बुद्धिजीवी" ने कहा कि आखिर क्यूँ एक उच्च ओहदे वाली लड़की एक कम पढ़े लिखे लड़के के साथ विवाह नहीं कर सकती
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ये बात जितनी आसानी वो बोल गए
यदि उनकी खुद की पुत्री के विवाह की बात होती तो उन्हें कैसी कठिनाई होती
यह समझा जा सकता है
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एक तो सामाजिक ढांचा ही ऐसा है
जहां पुरुष को स्त्री से ऊपर माना जाता है
एक लड़की "बेचारी" इतनी मेहनत से ऊंचाई पर पहुँचती है
लेकिन
उसे अपने से निचले स्तर के लड़के को खुद से श्रेष्ठ मानना पड़े
भई आपने ही समाज का सिस्टम ऐसा बनाया है
पुरुष तो घर के कार्य करेगा नहीं
उस पर से
यही समाज वाले ताना मार मार कर चिढ़ा चिढ़ा कर
उस दंपति का जीना हराम करेंगे
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और ये पूरी तरह से अव्यवहारिक है कि आप एक पढ़ी लिखी लड़की को अपने से कम पढ़े लिखे लड़के से विवाह के लिए बाध्य करें
यह विवाह के नियमों के विपरीत है
वैसे तो
एक पढ़े लिखे लड़के को भी किसी कम योग्य लड़की से विवाह नहीं करना चाहिए
लेकिन
ये लोग धन के लालच में अथवा स्त्री की सुंदरता देखकर ऐसे विवाह कर लेते हैं
अब पढ़ी-लिखी लड़की को ऐसा क्या कारण मिल रहा है जो वो एक कम पढ़े लिखे लड़के से विवाह कर ले
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लेकिन
अंतरजातीय विवाह के नाम से सब डर घबरा जाते हैं
धीरे धीरे जैसे-जैसे आर्थिक संपन्नता बढ़ रही है
लोगों के मन से समाज का भय जा रहा है
और ये लोग समाज से छिटकते जा रहे हैं
इसका परिणाम यह होगा
कि
समाज को बचाने के जो मूर्खतापूर्ण प्रयास ये लोग कर रहे हैं
कल को वो समाज ही नहीं बचेगा
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बदलते सामाजिक परिवेश में
समाजों को अब अंतरजातीय विवाह को स्वीकार करना ही एक मात्र उपाय है
और यही सही भी होगा
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