अच्छा जान एक किस तो कर दो !
तभी एक मद्धम रुनझुन हँसी सुनी और फोन डिस्कनेक्ट हो गया ...
कार स्टार्ट करने से पहले मैंने फोन की गैलरी में जाकर अपनी पत्नी रेखा और चार साला बेटी सपना की तस्वीर को अँगुलियों से छुआ और अनायास ही मुँह से निकल पड़ा -
" मेरी साँस के रुकने तक मेरी जिंदगी का हर इक कतरा तुम्हारा है ..मेरी जिंदगी हो तुम दोनों "
तभी फोन में बैटरी खत्म हो गई और वो ऑफ़ हो गया ..फोन को कार चार्जर में लगाया और घड़ी में टाइम देखा ...मायका शहर से सिर्फ तीन घंटे दूर है तो सोचा रेखा और सपना शायद अब ट्रेन में बैठ गए होंगे..तो क्यूँ न तीन घण्टे शॉपिंग की जाए !
पहले टॉयज की दुकान से सपना के लिए खूब टॉयज खरीदे ...फिर उसी के लिए चॉकलेट , पेस्ट्रीज ..अब बारी थी रेखा की साड़ियों की लेकिन पहले उसके लिए मेहरून चूड़िया खरीदी ...फिर साड़ियों की दुकान पर जाकर साड़िया उलटने -पुलटने लगा ...तभी पास चलते टी.वी से एक न्यूज़ मेरे कान में आकर गिरी ..
" सुंदरनगर से आ रही ट्रेन पटरी से उतर गई ..मृतकों की संख्या 200 से ऊपर बताई जा रही है ..लोग अभी भी उसमें फ़ंसे है ..
मेरे पैर जैसे जमीन में धँस गए ...होश को सेकंडों के कंधे पर सम्हाला और बेतहाशा कार की ओर दौड़ लगा दी ..कार के पास पहुँचकर देखा तो पाया चाबी उसी साड़ी की दुकान में भूल आया हूँ.. वक्त न था वापस जाने का तो वहीं से एक टैक्सी पकड़ी और उससे घटनास्थल पर पहुँचने को कहा ..घटनास्थल जितना करीब आ रहा था उतना ही करीब आ रही थी रोने और चीखने की आवाजें ...
भीड़ के कारण टेक्सी आगे नही जा सकती थी तो टेक्सी वाले को उसका किराया पेड कर पलटे डिब्बों की और दौड़ लगा दी
...अब सिर्फ खून ही ज़िंदा और ताजा मौजूद था वहां ...पुलिस ने मुझे किनारे कर दिया ... एक किनारे बैठ कर सिर्फ रोता और बिलखता रहा मैं ...रात के तकरीबन 12 बजे मेरी आँख अपने आप पलकों से लग गई ...तभी फिर कान में एक चीख गिरी और आँख खुल गई ...कुछ लोग एक औरत को तसल्ली दे रहे थे ...तभी उनमें से एक आदमी बोला -
" करीम मुल्ला इस ट्रेन का ड्राईवर था ..साला जरूर उसने जानबूझकर ऐसा किया होगा ..आतंकवादी साला !"
आँसू पोंछें ..सीधा रिसेप्सन में जाकर करीम का पता पूछा ..पता मिलते ही प्लेटफॉर्म से बाहर आया ..एक फ्रेश वॉटर की बोतल खरीदी ...उसका पानी खाली किया ..उसमें एक नजदीकी पेट्रोल पम्प से पेट्रोल भरवाया ..और एक ऑटो को नूर बस्ती चलने को कहा ..कुछ 1 बजे रात को मैं नूरबस्ती पहुँचा ..पास आहाते में सोये एक आदमी से करीम का घर पूछा ..उसके लकड़ी के घर के करीब कदम थामे..इधर-उधर गहरी नजरों से देखा ...फिर तमाम पेट्रोल उसके मकान में छिड़क दिया ...फिर जेब में हाथ डाला लेकिन ..माचिस नही थी मेरे पास तो झल्लाकर करीम का दरवाजा पीटा ...
दरवाजा एक 6 या 7 साल की बच्ची ने खोला ..उसके पीछे दो और बच्ची खड़ी डर से कँपकंपा रही थी ...उन्ही में खड़ी एक 5 साला बच्ची में मुझे अपनी बेटी सपना की झलक दिखाई दी ... तभी एक बच्ची तपाक से बोली -
"अब्बू लेलवे टेशन है अंतल ! अम्मी उनतो लेने दई है "
आँसू उमड़ आये आँखों में.. उन बच्चियों के सर पर हाथ फेरकर मैं ठंडे ..सूने ..बुझे कदमों से पैदल ही घर की ओर निकल गया ...घर के दरवाजे पर जैसे ही पहुँचा अंदर से रेखा और सपना और साथ में टी.वी चलने की आवाजें सुनाई दी ..दरवाजा नॉक किया ..झटके से दरवाजा खुला ..
अनिल ! आप कहाँ थे ..ओय माय गॉड ये क्या हाल बना रखा है आपने अपना ..?
बेतहाशा लिपट गया दोनों से और फूट -फूट कर रोने के बाद जब संभला तो मैंने भरी आवाज से पूछा ..तुम तो ट्रेन से आने वाली थी ..?
अरे ! वो मिस हो गई तो बस से आये फिर तुम्हे बताना चाहा लेकिन तुम्हारा फोन स्विच ऑफ़ आ रहा था ....
तभी फिर टी. वी की आवाज मेरे कान में गिरी ..
" सूत्रो के हवाले से पता चला है कि ट्रेन हादसे का सबसे बड़ा कारण अनुभवी ट्रेन ड्राईवर करीम जमाली के स्थान पर एक टेम्पररी ड्राईवर रोशन लाल को ट्रेन चलाने की अनुमति देना था ..."
घटना की ओर देखकर रेखा भौचक्की रह गई ..ओह माय गॉड अनिल ..
उसके और कुछ बोलने से पहले मैंने फिर उसकोऔर पास खड़ी अपनी बच्ची को गले लगा लिया ..रेखा की आँख में आँसू थे और सपना सिसक रही थी ...मगर मेरी थरथराती नजर डाईनिंग टेबल में पड़ी उस माचिस की डिब्बी पर अटक गई ..जो मुझसे लगातार एक सवाल पूछ रही थी कि- "अनिल ! गर होती उस वक्त जेब में तुम्हारी तो क्या किसी के सुने पर सच में फूँक देते तीन मासूमों की जिंदगियाँ ...?नवाजिश
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