Wednesday, August 22, 2018

मीना

मीना अक्सर स्कूल जाने के नाम से झिझकने लगी है क्यूँकि स्कूल का रास्ता बाजार से होकर गुजरता है ....
बाजार जो खड़ा है समाज के खोखले उसूलो और उनके रसिक मिजाज की बेहुदा ,बदबूदार ईटों पर .....
नुक्कड़ की तंग गली से होकर जैसे ही मीना सामने वाले चौक की दीवार को देखती है एक बेहद अश्लील विदेशी और संगत देशी फ़िल्मी पोस्टर उसे नजर नीचे करने पर मजबूर कर देता है ..फिर मनचलों के  बेशर्मी से लबालब फिकरे उसके आत्मसम्मान के परखच्चे उड़ा देते है ...थोड़ा और आगे जाकर एक हाईटेक शोरूम के सामने एक महिला और पुरुष का अंडर गारमेंट्स का फ़ूहड़ आदमकद इलेक्ट्रोनिक प्रिंट पोस्टर उसको अंदर तक हिला देता है .....नजरें नीची करके थोड़ा दूर जाने पर भीड़ से खचाखच प्लेस जहाँ कुछ मौकापरस्त भीड़ की आड़ में शारीरिक छेड़छाड़ करते है वो राह बदल कर दूसरी गली पकड़ती है मगर सामने वाली दुकान पर एक बूचड़ बकरे की गर्दन पर छुरा फेर कर खून का फव्वारा तसले में भर रहा होता है .... वो मासूम ये देख कुछ पल के लिए ठिठक जाती है और चेतना खो देती है तभी पीछे से ऑटो वाले की टू टू से हवाश संभाले वो आगे बढ़ती है और उसकी नाक पर एक मादक बू दखलंदाज़ी करती है और देखती है कि सामने एक शराब की दुकान है जिसके सामने एक शराबी लेटा पड़ा है और उसके बगल में टूटी शराब की बोतल से शराब रिस रही है ....फिर नशेड़ियों  के फिकरों का फ़ूहड़ दौर जिसे वो पीछे छोड़ आई थी .....
कुछ देर चलने के बाद उसे स्कूल नज़र आता है और उसकी जान में जान आती है .......मगर छुट्टी होने से कुछ देर पहले उसका चेहरे का रंग महज इसलिए उड़ जाता है क्यूँकि उसे याद आता है कि उसे ,उसी रास्ते से घर लौटना है जहाँ से चलके वो स्कूल आई थी ....!

No comments:

Post a Comment