डॉक्टर सरोज सिंह (साइकेट्रिस्ट ) काठियावाड़ ,गुजरात कहती है कि लोग गलत कहते है कि औरत को नही समझा जा सकता ।शर्त महज इतनी है कि औरत को समझना हो तो समझने वाले को कुछ औरत बनना पड़ेगा ...
मैं बहुत हद तक एडमायर करता हूँ उनकी थ्योरी लेकिन एक पचड़े के जवाब में वो कोन्सियस और इनकोन्सियस की बोर और पकाऊ बातें कर सारी लिसनिंग की लंका लगा देती है ।इन्ही बातों और एस्ट्रोनॉट कॉन्सेप्ट के चलते भारत में मनोविज्ञान का स्थान बाबाओ , ओझाओं और तांत्रिकों ने ले लिया ...
मैंने उनसे पूछा था कि " क्या एक औरत शादी के बाद किसी गैर मर्द से सच्चा वाला प्यार कर सकती है ..?"
ये सवाल इसलिए कि फेसबुक में 9 महीने पूर्व जुड़ी एक महिला मित्र जो अब मेरी घनिष्ठ मित्र है ..उन्होंने अपनी आप बीती सुनाते हुए इकरार किया कि उन्हें आज साढ़े सैंतीस की उम्र और दो बच्चों के बाद सच्चा प्यार हो गया है और वो भी कुछ दो साल पहले फेसबुक में उनसे जुड़े एक 27 वर्षीय युवा से ।
इन्हें यकीन है कि मैं इन्हें कोई रास्ता दिखा सकता हूँ लेकिन इन्होंने जो रास्ता चुन लिया है वो इन्हें अब सिर्फ बर्बादी की जानिब ले जायेगा...ये भी खूब समझती है लेकिन बस बहे जा रही हैं...
लेकिन इनमें सिर्फ इनकी गलती ढूँढी जाये तो अन्याय होगा ..16 साल पहले जब ये इच्छाधारी युवती हुआ करती थी तब इनके तमाम आशिकों की फेहरिस्त में इन्होंने उस योग्य आशिक का चयन किया जिन्होंने इनके लिए बस शिव धनु नही तोड़ा बाकि जान देने के ...हमेशा साथ रहने के ..तन्हा न छोड़ने के खालिस देशी लवर वादों की परम्परा निभाई.... ये इस लौंडे का हाथ पकड़ के फरार भी हो गई ...शादी के उन दिनों जब तक बच्चे की आहट पेट में नही पड़ी प्यार भी जवान रहा और जिस्म भी ...लेकिन फिर हासिल को कभी भी चबा लेने वाले भारतीय पुरुषवाद ने इनमें धीरे-धीरे अपनी अरुचि दिखाने का रंग प्रारम्भ किया...जिसके रंग से ये बेरंग तो हुई लेकिन अब दिन भर बच्चे और दिवार घूरने के इतर इन्हें सिर्फ हासिल हुआ तो एक सन्नाटा ...आशिक के ठेठ पति बन जाने पर कभी लिपस्टिक , पॉउडर का बाय हार्ट प्राइज़ याद रखने की इनकी अद्भुत शक्ति एवं कौशल का तेजी से पतन हुआ एवं उसका स्थान भिन्डी ,करेले और बैगुन के बढते -चढ़ते दामों ने ले लिया ...ये सब चलता रहा और भारत में मोबाईल क्रान्ति ने दस्तक दी अपरिचित लोग आपस में एक मिस कॉल से जुड़ने लगे ...घड़ी की सुइयाँ रिश्तों को बनाने बिगाड़ने लगी फेसबुक के अवतरण ने इस आग में घी का काम किया और अँधेरे में एंड्रॉयड की जलती स्क्रीन ने रिश्तों का कत्ल करने का संगीन इरादा तय कर लिया ....एक ही घर के लोग इसके आते ही अबोल और अपरिचित होने लगे ....
औरत को सिर्फ तलवार और प्यार के दम पर जीता जाने वाली थ्योरी लताड़ दी गई और उसके साथ उसमें मोडिफिकेशन करके जोड़ा गया कि औरत को तलवार , प्यार और एन्ड्रोइड के चलते जीता जा सकता है ..
अब 42 का पति जब पूरी तरह एक ही छत के नीचे उदासीन हो गया तो उसकी काट मोबाइल के नोटिफिकेशन ने करनी शुरू कर दी ...
एक अजनबी जो दो साल पहले सिर्फ फोटो पर लाइक करता था आज ये तक जानने लगा कि वो किस कलर के अंडरगारमेंट्स पहनना लाइक करती है ...पति के बिलकुल अज्ञात में गमन की प्रदत्त तन्हाई को ...उस पार से आते मेसेज ...हाय !...आप कैसी है ...क्या कर रही है ...हैप्पी बर्थ डे...दिन भर आपके बारे में सोच रहा था ...उदास क्यूँ हो....खाँसी क्यूँ है ....ने ले ली और प्यार की मयार पर अपनी बुनियाद से खड़ी औरत उस बेल नुमा ढाल की और बढ़ने लगी ..
जरुरी नही कि हर दफा पत्नी की वक्त दिया जाये मगर कायदा तो ये भी नही कि उसे टीवी , फ्रिज की तरह बेजान समझ तन्हा छोड़ दिया जाये ..आखिर है तो वो भी इंसान ...डर है कि एंड्रॉयड के बनते -बिगड़ते रिश्ते उन बच्चों की जिंदगियां न लील ले जो अपने मम्मी -पापा से बराबर का प्यार करते है ....आपको हक है प्यार करने का लेकिन आपको कोई हक नही कि बच्चों की किस्मत पर अपनी मुहब्बत के पासे से दांव लगाये ... याद रखियेगा लाखों की भीड़ में वो एक मर्द बरामद होगा जो आप और आपसे जुड़ी चीजों को सहर्ष अपना ले ...वगरना याद रखियेगा पुरुष तो वो जानवर है कि जब हवश उसके सर पर सवार हो जाये तो उसे औरत के जिस्म पर उसका मंगल सूत्र भी बोझ लगने लगता है .......
Thursday, August 2, 2018
औरत
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