नरेन्द्र आधुनिक विचारवाला युवक। पश्चिमी ढर्रे से पूरी तरह प्रभावित। रीति-रिवाज, परम्परा आदि उसके लिए कोई मायने नहीं रखते। जो मन में आया वही करता है।
नरेन्द्र की पत्नी उर्मिला भी ठीक वैसी ही। कोई बंधन नहीं, नरेन्द्र से एक क़दम आगे।
दोनों की अच्छी-ख़ासी नौकरी। भरपूर बैंक बैलेंस। गाड़ियाँ। नौकर नौकरानियाँ। एशोआराम। न अभाव, न अकाल।
नरेन्द्र बाहर निकलने की तैयारी में। उर्मिला को बताता है- "दोस्त के यहाँ जा रहा हूँ। देर हो सकती है, रात वहीं गुज़ार सकता हूँ।"
उर्मिला भी सजधजकर मायके जाने के लिए तैयार।
शहर की एक गली जहाँ बहुत से होटल और लॉज ग्राहकों की प्रतिक्षा में।
एक युवक एक लॉज में प्रवेश कर पूछता है- "आपके यहाँ.... की व्यवस्था है ?"
"जी, ज़रूर ! आप पधारें तो सही।"
युवक को एक कमरे में ले जाकर इंतज़ार करने को कहा गया है। वह उतावला हो रहा है।
कुछ देर बाद किसी ने दरवाज़ा खटखटाया....। एक युवती भीतर आ रही है...।
दोनो आमने सामने।
"उर्मिला तुम ?"
नरेन्द्र की पत्नी उर्मिला भी ठीक वैसी ही। कोई बंधन नहीं, नरेन्द्र से एक क़दम आगे।
दोनों की अच्छी-ख़ासी नौकरी। भरपूर बैंक बैलेंस। गाड़ियाँ। नौकर नौकरानियाँ। एशोआराम। न अभाव, न अकाल।
नरेन्द्र बाहर निकलने की तैयारी में। उर्मिला को बताता है- "दोस्त के यहाँ जा रहा हूँ। देर हो सकती है, रात वहीं गुज़ार सकता हूँ।"
उर्मिला भी सजधजकर मायके जाने के लिए तैयार।
शहर की एक गली जहाँ बहुत से होटल और लॉज ग्राहकों की प्रतिक्षा में।
एक युवक एक लॉज में प्रवेश कर पूछता है- "आपके यहाँ.... की व्यवस्था है ?"
"जी, ज़रूर ! आप पधारें तो सही।"
युवक को एक कमरे में ले जाकर इंतज़ार करने को कहा गया है। वह उतावला हो रहा है।
कुछ देर बाद किसी ने दरवाज़ा खटखटाया....। एक युवती भीतर आ रही है...।
दोनो आमने सामने।
"उर्मिला तुम ?"
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