Friday, January 25, 2013

कुम्भ मेला में साधू सन्यासियों का नाटक देखिये

कुम्भ मेला में साधू सन्यासियों का नाटक देखिये, वो अपनी सम्पत्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं| लक्सरी गाड़ियों में आते हैं 5 स्टार एयरकंडीशन टैंटों में रहते हैं, सोने चांदी के सिंहासनों पर बैठते हैं, सोने के कंठे और हीरे जवाहरात पहनते हैं| ये लोग प्रदर्शन करते हैं कि ये कितने अमीर हैं| कृपया बताएं कि ये धार्मिक व्यापारी किसी अन्य व्यापारी से किस प्रकार अलग हैं?
सबसे बड़ा जोक तो ये है कि साधू सन्यासी का मतलब होता है कि जिसके अन्दर वैराग्य हो, ये विशेषण उनके लिए प्रयोग में आते हैं जिनकी आसक्ति सांसारिक पदार्थों में नहीं है और जिसे पैसे से कोई मतलब नहीं है| सोने चांदी और धन का इस प्रकार से उपयोग और प्रदर्शन असल में साधू सन्यासी होने की अवधारणा से बिलकुल उलट है|

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