आमतौर पर यही देखा जाता है कि जब भी समाज में बलात्कार जैसे जघन्य और निंदनीय अपराधों को अंजाम दिया जाता है तो मीडिया में इस खबर के आने के बाद भी पीड़िता का नाम जाहिर नहीं किया जाता है। इस मामले में कानून के तहत बलात्कार पीड़िता का नाम सार्वजनिक नहीं किया जा सकता क्योंकि यह भारतीय दंड संहिता की धारा 228 ए के तहत अपराध माना जाता है। किन्तु देश की राजधानी दिल्ली में हुए एक बेहद क्रूर और हिंसक गैंग रेप के बाद केन्द्रीय राज्य मंत्री शशि थरूर के इस कथन ने कि बलात्कार पीड़िता का नाम छिपाकर क्या हासिल किया जा सकता है, एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या वर्तमान संदर्भ में बलात्कार या यौन हिंसा की शिकार महिला का नाम ना जाहिर कर हम कुछ गलत कर रहे हैं?
इस मुद्दे पर गंभीर रूप से सोचने वाले लोग दो वर्गों में बंट गए हैं। कुछ लोग हैं जो यह मानते हैं कि एक ओर तो हम बलात्कार की शिकार महिला को पीड़िता का दर्जा देते हैं और दूसरी ओर उसी का नाम छिपाकर हम उसे गलत होने का अहसास भी करवाते हैं। इस वर्ग में शामिल लोगों का कहना है कि जब तक हम बलात्कार पीड़िता के नाम को सभी से छिपाते रहेंगे तब तक उसे समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिलवा पाना वाकई कठिन हो जाएगा। इसे हमारे समाज की विडंबना ही कहा जा सकता है कि हम अपराधी को नहीं बल्कि पीड़िता को सभी की नजरों से छिपाकर रखते हैं जैसे उसने कुछ गलत किया हो। प्राय: देखा जाता है कि अपराधी इस बात से आश्वस्त होने के बाद कि सामाजिक मर्यादा का ध्यान रखते हुए लड़की कभी अपने साथ होने वाले अपराध का बखान नहीं करेगी, वह अपनी गंदी मानसिकता को और अधिक व्यापक करता जाता है और लड़कियों को अपना निशाना बनाता जाता है। वहीं अगर पीड़िता को इस बात का यकीन दिला दिया जाए कि ऐसी घटनाओं के लिए गलत वो नहीं बल्कि अपराधी है तो आए दिन होने वाली ऐसी घटनाओं पर अपने आप ही कमी आती जाएगी। कानूनी रूप से पीड़िता का नाम जाहिर करने जैसी व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि उस मासूम को लड़ने और अपना अधिकार मांगने में समाज की मदद और हिम्मत मिले।
वहीं दूसरा वर्ग वह है जो यह मानता है कि हमारा समाज बलात्कार पीड़िता को कभी भी सम्मान नहीं दे सकता ऐसे में अगर उसके नाम को सार्वजनिक कर दिया जाएगा तो शर्मिंदगी का अहसास उसे और उसके परिवारवालों पर भारी पड़ सकता है। समाज की बात ही छोड़िए उसके अपने परिवार के लोग ही उसे घृणित नजरों से देखना शुरू कर देते हैं। ऐसे में अगर उसके नाम को मीडिया में हाई लाइट कर सार्वजनिक कर दिया जाए तो यह पीड़िता के साथ-साथ उसके माता-पिता के भविष्य के लिए भी सही नहीं रहेगा। ऐसे में अपने हक की लड़ाई लड़ना तो दूर लोगों की नजरें उसे घर से बाहर भी नहीं निकलने देंगी।
उपरोक्त मामले के दोनों पक्षों पर विचार करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने उपस्थित हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना हमारे लिए नितांत आवश्यक है, जैसे:
1. क्या वाकई बलात्कार पीड़ित का नाम उजागर करना उसके लिए मददगार साबित हो सकता है?
2. बलात्कार पीड़िता के मामले में सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन लाना क्या आज के समय की मांग बन गई है?
3. अगर पीड़िता का नाम सभी के सामने ला दिया जाए तो क्या रूढ़िवादी समाज उसे अपेक्षित सम्मान दे पाएगा?
नोट: उपरोक्त मुद्दे पर आप कमेंट या स्वतंत्र ब्लॉग लिखकर अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं। किंतु इतना अवश्य ध्यान रखें कि आपके शब्द और विचार अभद्र, अश्लील और अशोभनीय ना हों तथा किसी की भावनाओं को चोट ना पहुंचाते हों।
No comments:
Post a Comment