धर्म कहता है कि यदि आप कुम्भमेला में जाकर डुबकी लगायेंगे तो आपके सारे पाप धुल जायेंगे और आप मरने के बाद स्वर्ग जायेंगे| कितनी बढ़िया बात है, अब आप स्वतंत्र हो, चाहे जितने पाप करो, क्योंकि ये सब तो केवल एक डुबकी में ही धुल जायेंगे, जो मर्जी आये करो फिर एक गोता लगाकर स्वर्ग चले जाओ|
कुम्भ में डुबकी लगाना एक पुण्य है, और पुण्य वह काल्पनिक धन है जिससे कि आप स्वर्ग में प्रवेश करने की टिकट खरीद सकते हो, ठीक उसी तरह जैसे कि आप सिनेमा की टिकट खरीदते हो| जितना जादा पैसा आप खर्च करोगे उतनी बढ़िया जगह बैठने के लिए आपको मिलेगी| इस धार्मिक सिनेमा में परफोरमर हैं, डिस्ट्रीब्यूटर (वितरक) भी हैं, तो प्रचारक भी हैं और टिकट बेचने वाले भी हैं| कुम्भ जैसी मूवी का धर्म रूपी निर्माता चाहता तो यही है कि मेरी फिल्म का शो हाउसफुल जाना चाहिए, और वर्षों के प्रचार के बाद लाखों लोग तो अब बिना बुलाये भी स्वतः चले आते हैं|
अगर आप इन गुरुओं, धार्मिक नेताओं, कथावाचकों, साधुओं और बाबाओं को देखो तो ये अपना पूरा प्रयास हर तरह के करतब और तरीकों का इस्तेमाल करते हैं कि कैसे जादा से जादा पब्लिक इनके टेंट में चलने वाले प्रवचनों, पूजाओं और समारोह में आये और इनका शो हाउसफुल जाये तथा ये जादा से जादा कमाई कर सकें| पर मेरे भाई अगर आप गौर से देखोगे तो ये भी केवल एक फिल्म की तरह परदे पर चलने वाला नाटक है, धोखा है, जिसमें कोई सच्चाई नहीं है|
कुम्भ में डुबकी लगाना एक पुण्य है, और पुण्य वह काल्पनिक धन है जिससे कि आप स्वर्ग में प्रवेश करने की टिकट खरीद सकते हो, ठीक उसी तरह जैसे कि आप सिनेमा की टिकट खरीदते हो| जितना जादा पैसा आप खर्च करोगे उतनी बढ़िया जगह बैठने के लिए आपको मिलेगी| इस धार्मिक सिनेमा में परफोरमर हैं, डिस्ट्रीब्यूटर (वितरक) भी हैं, तो प्रचारक भी हैं और टिकट बेचने वाले भी हैं| कुम्भ जैसी मूवी का धर्म रूपी निर्माता चाहता तो यही है कि मेरी फिल्म का शो हाउसफुल जाना चाहिए, और वर्षों के प्रचार के बाद लाखों लोग तो अब बिना बुलाये भी स्वतः चले आते हैं|
अगर आप इन गुरुओं, धार्मिक नेताओं, कथावाचकों, साधुओं और बाबाओं को देखो तो ये अपना पूरा प्रयास हर तरह के करतब और तरीकों का इस्तेमाल करते हैं कि कैसे जादा से जादा पब्लिक इनके टेंट में चलने वाले प्रवचनों, पूजाओं और समारोह में आये और इनका शो हाउसफुल जाये तथा ये जादा से जादा कमाई कर सकें| पर मेरे भाई अगर आप गौर से देखोगे तो ये भी केवल एक फिल्म की तरह परदे पर चलने वाला नाटक है, धोखा है, जिसमें कोई सच्चाई नहीं है|
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