Thursday, January 31, 2013

राष्ट्रीयता

चुनाव में विजयी सांसद सदस्यों के स्वागतार्थ एक रात्रिभोज का आयोजन किया गया। भोज के सहभागी अपने-अपने विजय की चर्चा-परिचर्चा करने लगे।

टेबल में सजे स्वादिष्ट व्यंजनों के बरतन ख़ाली हो रहे थे। ख़ाली बरतन भरने का क्रम भी जारी था। कोई व्यंजन तो बरतन पर पहुँचने ही नहीं पाता था। सब मिलकर टूट पड़ते थे।

लेकिन टेबल पर सजाए गए बरतनों में से एक बरतन का व्यंजन तक़रीबन अनछूआ था। उस व्यंजन को कोई औपचारिकतावश या लोकलाज की ख़ातिर थोड़ा सा प्लेट में रखता। पर उस व्यंजन को किसी के मुँह में जाने का अवसर नहीं मिला।

हर सांसद सदस्य कोई भी स्वादिष्ट व्यंजन छोड़ने के पक्ष में नहीं था। इसलिए सब उस बरतन की ढकनी उठाकर देखते और कई तो नाक-भौं सिकोड़र रह जाते। उनके नाक-भौं सिकोड़ने से पता चलता उस बरतन का व्यंजन वाक़ई कड़वा होगा। भोज की समाप्ति पर भी वह व्यंजन अछूता ही रहा।

उस रात्रिभोज में पद, पैसे, महलें, गाड़ियाँ, विदेश भ्रमण, सुरा-सुंदरी जैसे व्यंजनो को सांसद सदस्यों ने छककर खाया उनके बरतन ख़ाली हो गए। उस अनुछूए बरतन में जो व्यंजन था उसका नाम था - राष्ट्रीयता।

आधुनिक विचारवाला युवक

नरेन्द्र आधुनिक विचारवाला युवक। पश्चिमी ढर्रे से पूरी तरह प्रभावित। रीति-रिवाज, परम्परा आदि उसके लिए कोई मायने नहीं रखते। जो मन में आया वही करता है।

नरेन्द्र की पत्नी उर्मिला भी ठीक वैसी ही। कोई बंधन नहीं, नरेन्द्र से एक क़दम आगे।

दोनों की अच्छी-ख़ासी नौकरी। भरपूर बैंक बैलेंस। गाड़ियाँ। नौकर नौकरानियाँ। एशोआराम। न अभाव, न अकाल।

नरेन्द्र बाहर निकलने की तैयारी में। उर्मिला को बताता है- "दोस्त के यहाँ जा रहा हूँ। देर हो सकती है, रात वहीं गुज़ार सकता हूँ।"

उर्मिला भी सजधजकर मायके जाने के लिए तैयार।

शहर की एक गली जहाँ बहुत से होटल और लॉज ग्राहकों की प्रतिक्षा में।

एक युवक एक लॉज में प्रवेश कर पूछता है- "आपके यहाँ.... की व्यवस्था है ?"

"जी, ज़रूर ! आप पधारें तो सही।"

युवक को एक कमरे में ले जाकर इंतज़ार करने को कहा गया है। वह उतावला हो रहा है।

कुछ देर बाद किसी ने दरवाज़ा खटखटाया....। एक युवती भीतर आ रही है...।

दोनो आमने सामने।

"उर्मिला तुम ?"

हमारे द्वारा ही हमारी भारतीय सभ्यता का साथ छूट रहा है ..!!

तुलसी की जगह Money plant ने ले ली
चाची की जगह Aunti ने ले ली ..!!

पिता जी डैड हो गये
भाई अब तो Bro हो गये ..!!

बेचारी बहन भी अब sis हो गयी
दादा दादी की लोरी तो अब टाय टाय फिस्स हो गयी ..!!

TV के साँस बहू मे भी अब साँप नेवले सा रिस्ता है
पता नही एकता कपूर औरत है या फरिस्ता है ..!!

जीती जागती माँ बच्चो के लिये Mammy हो गयी
रोटी अब अच्छी कैसे लगे Maggi जो इतनी yummy हो गयी ..!!

गाय का आशियाना अब शहरो की सडको पर बचा है
विदेशी कुत्तो ने लोगो के कंधो में बैठकर इतिहास रचा है ..!!

बहुत दुखी हूँ ये सब देख के दिल टूट रहा है
हमारे द्वारा ही हमारी भारतीय सभ्यता का साथ छूट रहा है ..!!

==> 2 मिनट लगेगा प्लीज पुरा पढना <=

==> 2 मिनट लगेगा प्लीज पुरा पढना <=
१.पापा कहते है "बेटा पढाई करके कुछ बनो" तो बुरा लगता है, पर यही बात जब गर्लफ्रेंड कहती है तो लगता है केयर करती है |
२. गर्लफ्रेंड के लिए माँ-बाप से झूठ बोलते है, पर माँ-बाप के लिए गर्लफ्रेंड से क्यूँ नहीं ?
३. गर्लफ्रेंड से शादी के लिए माँ-पापा को छोड़ देते है, पर माँ-पापा के लिए गर्लफ्रेंड को क्यूँ नहीं ?
4. गर्लफ्रेंड से रोज रात में मोबाईल से पूछते है खाना खाया की नहीं या कितनी रोटी खाई, पर क्या आज तक ये बात माँ-पापा से पूछी ?
5.गर्लफ्रेंड की एक कसम से सिगरेट छूट जाती है, पर पापा के बार-बार कहने से क्यूँ नहीं ?
कृपया अपने माँ-बाप की हर बात माने और उनकी केयर करे...और करते हो तो आपके माँ-बाप आपके लिए कुछ भी गर्व से करने को तैय्यार है |
और ये सबको बताये और समझाए, क्या पता आपकी बात उसके समझ में आ जाये...?
अपने को माहोल ही ऐसा बनाना है की हर बच्चा अपने माता-पिता को ही भगवान समझे |
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Wednesday, January 30, 2013

Wo ek masoom si chahat

Wo ek masoom si chahat
Wo ek benam si ulfat
Wo meri zaat ka hissa
Wo meri zeest ka qissa
Mujhe mehsus hota hey
Wo merey pas hy ab bhi
Wo jub jub yad ata hey
Nigahon mey samata hy
Zuban khamosh hoti hy
Magr ye ankh roti hy
Hum khud sey poch letey hein
Jisey hum yad krtey hein
Usay kiya piyar tha hum sey
Jo ab hum” soch letey hein
Usay b piyar tha Shayad
Isi “Shayad” sey wabasta hy ab to hr khushi meri
Yahi ek lafz “Shayad” ban gaya hy zindgi meri...

By Rahat Indori



By Rahat Indori
Peshaniyon pe likhe muqaddar nahi mile
Dastar kahan milenge jahan sar nahi mile

Awaragi ko dubate suraj se rabt hai
Magrib ke bad ham bhi to ghar par nahi mile

Kal ainon ka jashn hua tha tamam rat
Andhe tamashbinon ko patthar nahi mile

Main chahata tha khud se mulaqat ho magar
Aine mere qad ke barabar nahi mile

Pardes ja rahe ho to sab dekhate chalo
Mumkin hai wapas ao to ye ghar nahi mile

" मनुष्य' की एक खूबी' है : वह गिरे तो पशुओं से नीचे गिर सकता है, उठे तो देवताओं से ऊपर उठ सकता है | वह सिर्फ मनुष्य की खूबी है | वह मनुष्य की ही गरिमा है| बात तुम्हारे हाथ है |


" मनुष्य' की एक खूबी' है : वह गिरे तो पशुओं से नीचे गिर सकता है, उठे तो देवताओं से ऊपर उठ सकता है | वह सिर्फ मनुष्य की खूबी है | वह मनुष्य की ही गरिमा है| बात तुम्हारे हाथ है |

मनुष्य एक सीढ़ी है -- जिसका एक छोर पशुओं से नीचे चला गया है और दूसरा छोर बादलों के पार| तुम चाहो तो इसी सीढ़ी पर ऊपर चढ़ो और तुम चाहो तो इसी सीढ़ी पर नीचे उतरो| सीढ़ी एक ही है| कोई पशु मनुष्य से नीचे नहीं गिर सकता| अगर मनुष्य गिरने की तय कर ले तो सभी पशुओं को मात कर देगा| चंगेजखान, तैमूरलंग, नादिरशाह, इनका कौन मुकाबला कर सकेगा, कौन पशु? लाखों लोग काट डाले| खैर यह तो अतीत इतिहास हो गए; अभी-अभी अडोल्फ हिटलर ने, जोसेफ स्टैलिन ने लाखों लोग काट डाले| किस पशु ने इतने लोग काटे?

और एक बड़े मजे की बात है, कोई पशु अपनी जाति के पशुओं को नहीं मारता| कोई सिंह किसी दूसरे सिंह को नहीं मारता| कोई कुत्ता किसी दूसरे कुत्ते को नहीं मारता| सिर्फ आदमी अकेला है, जो आदमियों को मारता है| और अकारण भी मारता है| जैसे मारने की एक धुन सवार है आदमी को'! पशु अगर मारते भी हैं, एक तो अपनी जाति के पशुओं को कभी नहीं मारते, इतनी सज्जनता तो बरतते हैं| इतना तो पहचान उनको है| सिंह दूसरे सिंह पर हमला नहीं करता, कितना ही भूखा हो'| लेकिन दूसरी जाति के पशुओं को भी तभी मारते हैं जब भूखे होते हैं... "

कहानी- हृदय की इच्छाएं

कहानी- हृदय की इच्छाएं

एक राजमहल के द्वार पर बड़ी भीड़ लगी थी। किसी फकीर ने सम्राट से भिक्षा मांगी थी। सम्राट ने उससे कहा, ''जो भी चाहते हो, मांग लो।'' दिवस के प्रथम याचक की कोई भी इच्छा पूरी करने का उसका नियम था। उस फकीर ने अपने छोटे से भिक्षापात्र को आगे बढ़ाया और कहा, ''बस इसे स्वर्ण मुद्राओं से भर दें।'' सम्राट ने सोचा इससे सरल बात और क्या हो सकती है! लेकिन जब उस भिक्षा पात्र में स्वर्ण मुद्राएं डाली गई, तो ज्ञात हुआ कि उसे भरना असंभव था। वह तो जादुई था। जितनी अधिक मुद्राएं उसमें डाली गई, वह उतना ही अधिक खाली होता गया! सम्राट को दुखी देख वह फकीर बोला, ''न भर सकें तो वैसा कह दें। मैं खाली पात्र को ही लेकर चला जाऊंगा! ज्यादा से ज्यादा इतना ही होगा कि लोग कहेंगे कि सम्राट अपना वचन पूरा नहीं कर सके !'' सम्राट ने अपना सारा खजाना खाली कर दिया, उसके पास जो कुछ भी था, सभी उस पात्र में डाल दिया गया, लेकिन अद्भुत पात्र न भरा, सो न भरा। तब उस सम्राट ने पूछा, ''भिक्षु, तुम्हारा पात्र साधारण नहीं है। उसे भरना मेरी साम‌र्थ्य से बाहर है। क्या मैं पूछ सकता हूं कि इस अद्भुत पात्र का रहस्य क्या है?'' वह फकीर हंसने लगा और बोला, ''कोई विशेष रहस्य नहीं। यह पात्र मनुष्य के हृदय से बनाया गया है। क्या आपको ज्ञात नहीं है कि मनुष्य का हृदय कभी भी भरा नहीं जा सकता? धन से, पद से, ज्ञान से- किसी से भी भरो, वह खाली ही रहेगा, क्योंकि इन चीजों से भरने के लिए वह बना ही नहीं है। इस सत्य को न जानने के कारण ही मनुष्य जितना पाता है, उतना ही दरिद्र होता जाता है। हृदय की इच्छाएं कुछ भी पाकर शांत नहीं होती हैं। क्यों? क्योंकि, हृदय तो परमात्मा को पाने के लिए बना है।''

शांति चाहते हो? संतृप्ति चाहते हो? तो अपने संकल्प को कहने दो कि परमात्मा के अतिरिक्त और मुझे कुछ भी नहीं चाहिए। —

Saturday, January 26, 2013

गणतंत्र दिवस बनाम छुट्टी का दिन(लघुकथा)

गणतंत्र दिवस बनाम छुट्टी का दिन(लघुकथा)
गाँधी जी ने स्वर्ग में बैठे-बैठे सोचा, "कल गणतंत्र दिवस है| ज़रा अपने देश घूम कर आऊं|" पहचाने न जा सकें सो रिपोर्टर का भेष धर लिया| यही भेष उन्हें सबसे सहज लगा क्योंकि इन्ही के कही भी आने जाने पर कोई रोक टोक नहीं है| वे एक महानगर के ऑफिस से बाहर निकलते पुरुष के संग लग लिए| कुछ ही दूरी पर उसकी पत्नी भी अपने ऑफिस से बहार निकलती मिल गयी|
रिपोर्टर बने गाँधी जी ने पूछा - "कल गणतंत्र दिवस है, आप अपने देश के बारे में क्या सोचते है? आज हमारे देश को आज़ाद हुए इतने साल हो गए है| इस आज़ादी के लिए कितने ही देश-भक्त शहीद हो गए थे, उनके बारे में आप क्या कहेंगे?" वो व्यक्ति बोला - "छोडो यार , काहे की आज़ादी| सारा दिन ऑफिस में जुटे रहो; घर पर भी चैन नहीं मिलता| बड़ी मुश्किल सरे तो' छुट्टी' मिली है| खासकर कल तो सारे सरकारी दफ्तर भी बंद रहेंगे | घर पर आराम से रहेंगे, टीवी पर कोई नई फिल्म देखेंगे|" बीच में उसकी पत्नी बोली- "अरे भाई साहब, कल तक हम स्कूलों में शहीदों की कहानियां पढ़ते थे; आज हम खुद रोज़ दफ्तर में शहीद होते है| शुक्र है कल तो 'छुट्टी का दिन' है|'
गाँधी जी सोचने लगे,"बेकार ही भेष बदला|यहाँ तो अब हमें कोई पहचानता ही नहीं है|"(डॉ. रश्मि)

"माँ तुझे सलाम"

"माँ तुझे सलाम"

मैं आंसू आंसू रोया हूँ
कुछ रातों से ना सोया हूँ,
जो सीमाओं पर बिछुड़ गए
उनकी यादों में खोया हूँ
जो सुहागरात पर नयी नवेली दुल्हन को छोड़ कर चले गए
जो इकलौते होकर भी सीमा पर लड़ने चले गए
जो रण में शोलों के आगे लाश बिछाने चले गए
जो हँसते हँसते प्राणों की बलि चढ़ने चले गए
उन वीर शहीदों की कहानी,मैं लिखते लिखते रोया हूँ
जो सीमाओं पर बिछुड़ गए उनकी यादों में खोया हूँ
एक माँ अपने बेटे को लहू का टीका करती है
तुम्हारी हो दीर्घायु, ये दुआ हमेशा करती है
बेटे के इंतज़ार में निगाहें टक टक करती है
पर एक बिना सर की लाश आँगन में उतरती है
क्या बीती होगी माँ के दिल पर, ये सोच-सोच मैं रोया हूँ
जो सीमाओं पर बिछुड़ गए उनकी यादों में खोया हूँ
आज भी रक्षाबंधन पर बहन का हृदय जब रोता है
क्या कहती होगी माँ, जब बेटा पापा पापाकहकर रोता है
चुपके चुपके रोती होंगी आँखें, जब-जब करवा चौथ होता है
लग जाती होगी आग मन में, जब-जब सावन होता है
इस सावन की बारिशों में, मैं हरदम हरपलरोया हूँ
जो सीमाओं पर बिछुड़ गए उनकी यादों में खोया हूँ
जो सीमाओ पर लड़ते रहे, केवल तिरंगे केलिए
ख़ून की नदियाँ बहाते रहे, केवल तिरंगे के लिए
जिनके प्राणों की आहुति भारत माँ पर बलिहारी है
उनके शौर्य के तेज से सूरज की किरणें भी हारी हैं
उन बेटों का बलिदान हर भारतवासी पर क़र्ज़ होगा
उन वीरों का नाम तो स्वर्ण अक्षर में दर्ज होगा
आज शहीदों की आत्माएँ पुकार रही है हिन्दुस्तान को
नौजवान तैयार हो जाये देश पर बलिदान को
उन शहीदों की चिताओं को मैं कन्धा देते देते रोया हूँ
जो सीमाओं पर बिछुड़ गए उनकी यादों में खोया हूँ !

दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी

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दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी
'मुझे समझ नहीं आता, अगर आप किम कार्देशियन को पसंद कर सकते हैं, जेनिफर लोपेज, बियोंसे को पसंद कर सकते हैं तो मुझमें ऐसी क्या खराबी है।' आज अमेरिका के लॉस एजिंलिस की रहने 'मिकेल रफिनली' यही सवाल उनकी ओर उछालती हैं, जो उनके बड़े हिप्स को देख कर हंसते हैं। 
 
39 वर्षीय मिकेल दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स वाली महिला हैं। इसके कारण उनका वजन 418 किलोग्राम हो चुका है। उन्हें किसी की सलाह सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। वह अपने इस हाल में खुश है। उनके बंप्स (हिप्स) से बनने वाला घेरा करीब आठ फुट चौड़ा है, जबकि कमर सामान्य रूप से 40 इंच की है।
 
वे कहती हैं कि मुझे रोजमर्रा के काम में कोई परेशानी नहीं होती। वे मर्दों की ख्वाहिश को बयां करते हुए कहती हैं, 'उन्हें सूखी डंडियां पसंद नहीं आती, आखिर में वे तंदुरुस्त लड़की के पास ही लौट आते हैं।'


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 दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी
उन्हें किसी की सलाह सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। वह अपनी इस काया से खुश हैं। वह ट्रक चलाती है, क्योंकि वह कार में फिट नहीं आती हैं। वहीं, घर में भी उनके भारी-भरकम हिप्स का वजन सहने के लिए स्टील की कुर्सियां बनाई गई हैं। सोने के लिए उनके पास सात फुट का चौड़ा बिस्तर है।


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दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी
 मिकेल का सबसे बड़ा प्रशंसक अगर कोई है तो वह उनका पति रैगी ब्रुक (40 वर्षीय) है। वह कम्प्यूटर टेक्नीशियन है। उन्होंने दस साल पहले शादी की थी, जब मिकेल ऐसी नहीं थीं। मिकेल का कहना है कि मैं अपने पति को इसी रूप में सबसे ज्यादा सेक्सी लगती हूं, वह मुझे चिढ़ाते हुए कहते हैं कि मैं दिन-ब-दिन खूबसूरत होती जा रही हूं। 


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दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी
हालांकि वह शुरू से ऐसी नहीं थीं, किशोरावस्था में वह बहुत फिट लड़की हुआ करती थीं। तब उनका वजन 140 पाउंड के लगभग था, लेकिन उनके हिप्स तब भी बहुत बड़े थे। 22 साल की उम्र में मिकेल को पहला बच्चा एंड्रयू हुआ, जो आज 19 साल का है। यह उसका पहले पति से  हुआ बच्चा था। उसके बाद वह रैगी से मिली, जिससे उसे तीन और बच्चे हुए। 



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दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी
उसका कहना है कि मुझे समझ नहीं आता है कि मेरा सारा वजन हिप्स पर क्यों बढ़ रहा है। हालांकि, मैंने इसे प्रेग्नेंसी के दौरान कम करने की कोशिश की थी। मैं साइकोलॉजिकल डिग्री का कोर्स कर रही हूं। बताया गया है कि हर दिन 3000 कैलोरी कम की जा सकती है। यह सुनने में अच्छा लग सकता है, लेकिन मेरे जैसी महिला के लिए मुश्किल है।


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दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी

दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी
उन्होंने कबूल किया कि वे ब्रेकफास्ट में दो अंडे, सोसेज और बेकोन और कुछ आलू लेती हैं। लंच में फ्राइड फिश और फ्रेंच फ्राइस, जबकि रात के खाने में भारी भोजन को तरजीह देती हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे चिकन, चावल और स्नैक में चिप्स, पीनट्स क्रिस्प्स पसंद हैं।'


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दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी
पत्नी के हिप्स देखकर डरा हुआ दिखने की कोशिश करता रैगी..


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.दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी
वह दरवाजे से बगल से होकर निकलती हैं.




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..दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी
पति के साथ मस्ती के मूड में मिकेल



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दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी
बच्चों के साथ मिकेल एक्सरसाइज करते हुए...



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दुनिया में सबसे चौड़े हिप्स की मल्लिका, किम-जेनिफर लोपेज मेरे आगे भरती हैं पानी
अपने बच्चों के साथ मिकेल..



                                                               Saojanya se dainik bhaskar



सदी की सबसे बड़ी चुनौती, जिसे जीतने के लिए खोदनी पड़ी 91 सुरंगें और 2000 पुल! konkan railway

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सदी की सबसे बड़ी चुनौती, जिसे जीतने के लिए खोदनी पड़ी 91 सुरंगें और 2000 पुल!

मैंगलोर (कर्नाटक) से रोहा (महाराष्ट्र) तक की दूरी अगर आप ट्रेन से तय करें तो आपका सामना इस उपमहाद्वीप की उस सबसे हैरतंगेज मानवीय संरचना से होगा जिसे बनाने की कल्पना करने से भी लोग घबराते थे। 
 
जी हां,  हम बात कर रहे हैं कोंकण रेलवे के नाम से मशहूर उस रेलवे ट्रैक की जो कर्नाटक के मैंगलोर से महाराष्ट्र के रोहा को जोड़ता है।
 
समुद्र के किनारे बसे ये दोनों ही क्षेत्र आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण थे लेकिन इनके बीच किसी तरह का संपर्क मार्ग न होने से दोनों ही जगह के व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा था। 
 
अंततः सरकार ने उनकी सुध ली और इस क्षेत्र को रेलमार्ग से जोड़ने का फैसला किया। लेकिन फैसला लेने वालों को इस बात का बखूबी ज्ञान था कि इस फैसले को अमलीजामा पहनाना इस सदी की सबसे बड़ी चुनौती है। 
 
सरकार ने इस काम को पूरा करने का जिम्मा रेलवे के एक अधिकारी ई श्रीधरन को सौंपा। 740 किलोमीटर लम्बे इस बेहद दुर्गम रेलमार्ग को बनाने के लिए 2000 पुल और 91 सुरंगे खोदने पड़ीं। इस मार्ग को बनाने के लिए एशिया में पहली बार एक अनोखी तकनीक अपनाई गई। 



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सदी की सबसे बड़ी चुनौती, जिसे जीतने के लिए खोदनी पड़ी 91 सुरंगें और 2000 पुल!
मुंबई और मैंगलोर आर्थिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण राज्य रहे हैं। इन दोनों शहरों को जोड़ने के लिए इस क्षेत्र की दो बड़ी हस्तियों (मधु दंडवते और जॉर्ज फर्नांडीज) ने इस क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने का बीड़ा उठाया और इन दोनों शहरों को जोड़ने के लिए रेलवे लाइन बिछाने का फैसला किया।


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 सदी की सबसे बड़ी चुनौती, जिसे जीतने के लिए खोदनी पड़ी 91 सुरंगें और 2000 पुल!
1966 में इन दोनों शहरों को जोड़ने के लिए रेलवे लाइन का श्रीगणेश मुंबई के दिवा और रायगढ़ के अप्ता के बीच ट्रेन सेवा की शुरुवात कर रखी गई। 


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सदी की सबसे बड़ी चुनौती, जिसे जीतने के लिए खोदनी पड़ी 91 सुरंगें और 2000 पुल!
मधु दंडवते जब रेल मंत्री बने तो उन्होंने इस लाइन को रोहा तक बढ़वाया हालांकि, इसके बाद भी रोहा से मैंगलोर तक की दूरी अभी भी तय होनी बाकी थी। 


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सदी की सबसे बड़ी चुनौती, जिसे जीतने के लिए खोदनी पड़ी 91 सुरंगें और 2000 पुल!आगे चलकर मैंगलोर से मडगांव और फिर मडगांव से रोहा को जोड़ने से सम्बंधित प्लान का प्रोजेक्ट 1988 में सरकार को सौंपा गया। चूंकि यह लाइन कोंकण के तटीय इलाके से होकर गुजरती थी इसलिए इसे 'कोंकण रेलवे प्रोजेक्ट' नाम दिया गया। 


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सदी की सबसे बड़ी चुनौती, जिसे जीतने के लिए खोदनी पड़ी 91 सुरंगें और 2000 पुल!
जॉर्ज फर्नांडीज के रेलमंत्री बनने के बाद इस प्रोजेक्ट ने गति पकड़ी। 19 जुलाई 1990 को 'कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड' नामक एक स्वतंत्र इकाई की स्थापना की गई।


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 सदी की सबसे बड़ी चुनौती, जिसे जीतने के लिए खोदनी पड़ी 91 सुरंगें और 2000 पुल!
इस कंपनी ने पांच साल में प्रोजेक्ट को पूरा करने का निश्चय लिया। 15 सितम्बर 1990 को कंपनी ने अपने काम की शुरुवात की। यहां से शुरू होती है उस प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाने की शुरुवात जो आगे चलकर पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गई।


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सदी की सबसे बड़ी चुनौती, जिसे जीतने के लिए खोदनी पड़ी 91 सुरंगें और 2000 पुल!
इंसान ने हमेशा ही चुनौतियों को स्वीकार किया है और उन्हें जीतकर ही दम लिया है। इस कड़ी में हम आपको आधुनिक इंजीनियरिंग के एक ऐसे उदहारण से रूबरू कराने जा रहे हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बन गया।
                                                                     


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सदी की सबसे बड़ी चुनौती, जिसे जीतने के लिए खोदनी पड़ी 91 सुरंगें और 2000 पुल!
मैंगलोर और रोहा (महाराष्ट्र) दो ऐसी जगहें हैं जो समुद्र के किनारे बसते हैं लेकिन लम्बे समय तक इनके बीच कोई संपर्क मार्ग नहीं था


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सदी की सबसे बड़ी चुनौती, जिसे जीतने के लिए खोदनी पड़ी 91 सुरंगें और 2000 पुल!
संपर्क मार्ग की कमी की वजह से इन दोनों ही क्षेत्रों के लोगों के लिए व्यापार का रास्ता बंद पड़ा था। अस्सी के दशक में भारत सरकार ने इन दोनों क्षेत्रों को आपस में जोड़ने का फैसला किया। यह रास्ता कितना दुर्गम और जोखिम भरा है इसकी झलक आप स्लाइड में लगी तस्वीरों में पा सकते हैं।