Sunday, December 30, 2012

Damini ka प्रेरणा पत्र

प्रेरणा पत्र 
मै मरी नहीं हूँ! 
मैंने मौत को भी 12 दिन तक दरवाजे पर खड़ा रखा ये कहकर कि ''थोडा तो रुक जाओ, आर्यवर्तियो को जगाने दो कि देखो हस्तिनापुर में क्या हो रहा है?'' 
मै मरी नहीं हूँ! मैंने तो अब हर उस दिल में जगह बना ली है जो सभी समाज का हिस्सा है! मैंने पूरे हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरोया है! वो हिन्दुस्तान जिसे राजनीति नहीं चाहिए,वो समाज जिसे कोई आरक्षण नहीं चाहिए! वो व्यक्ति जिसके कंधे पर बेटी सर रख आज भी सोती है!
मरी नहीं हूँ मै! मुझे कोई नाम ना दो, मै ''वेदना'' नहीं ''प्रेरणा'' हूँ उस सोये हुए समाज के लिए जो आँखे मूँद कर सबकुछ लुटतेहुए देख रहा था! मै ''दामिनी'' नहीं ''दीक्षा'' हूँ उस सभी समाज के लिए जो अज भी नारी को पूजता है कि भविष्य में ऐसी घिनौनी वारदात न हो! मै तमाचा हूँ उस बेढंगे समाज के लिए जो मेरे पहनावे को निशाना तो बनाता है पर सबसे ज्यादा ताड़ता भी वही है! 
मरी नहीं हूँ मै! लोकतंत्र के सबसे मजबूत अस्त्र को धारण करने वालो सुनो मेरे लिए काली तस्वीर की कोई जरूरत नहीं, मै तो अब तुम्हारे रूप में बस चुकी हूँ! तुम्हारे दिल में उतर चुकी हूँ! तुम्हारे लिए एक ज्वार बन कर आई हूँ! तुम्हारे लिए मेरा कोई मजहब नहीं कोई जात नहीं कोई धर्म नहीं! बस तुम्हारे लिए मै ''प्रतिज्ञा'' हूँ कि मेरी कुर्बानी बेकार न जाने पाए!
मरी नहीं हूँ मै! मै जिन्दा हूँ तुम्हारी बहन के रूप में, तुम्हारी बेटी के रूप में, तुम्हारी प्रेमिका के रूप में, तुम्हारी सहचरी के रूप में! मै नहीं चाहती कि मेरी लो भड़के, मै चाहती हूँ कि मेरी आहुति सदा प्रज्वलित रहे! और इतना फैले कि असभ्य समाज जलकर सिर्फ राख बचे! ताकि अगली बार तुम्हारी नई नवेली दुल्हन तुम्हारा हाथ थाम कर दिल्ली में बैखौफ घूमे! ताकि दिल्ली ''रेप सिटी'' नहीं ''सेफ सिटी'' के नाम से जानी जाय!
मरी नहीं हूँ मै,मुझे जिन्दा रखने की जिम्मेदारी अब तुम्हारी है!

''पत्थर को पूजे हैं तो पत्थर भगवान हो जाये,
इंसानो का क्या करें अब के वो इंसान हो जाये....

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