पीड़िता को श्रद्धांजलि दी।
समय चलते मोमबत्तियां, जलकर बुझ जाएंगी..
श्रद्धा में डाले पुष्प, जलहीन मुरझा जाएंगे..
स्वर विरोध के और शांति के अपनी प्रबलता खो देंगे..
किंतु 'निर्भयता' की जलाई अग्नि हमारे हृदय को प्रच्वलित करेगी..
जलहीन मुरझाए पुष्पों को हमारी अश्रु धाराएं जीवित रखेंगी..
दग्ध कंठ से 'दामिनी' की 'अमानत' आत्मा विश्वभर में गूंजेगी..
स्वर मेरे तुम, दल कुचलकर पीस न पाओगे..
मैं भारत की मां, बहन या बेटी हूं,
आदर और सत्कार की मैं हकदार हूं..
भारत देश हमारी माता है,
मेरी छोड़ो, अपनी माता की तो पहचान बनो!!
-अमिताभ बच्चन
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