Saturday, December 29, 2012

मोमबत्तियां,

समय चलते मोमबत्तियां, जल कर बुझ जाएँगी ...
श्रद्धा में डाले पुष्प, जल हीन मुर्झा जायेंगे ...
स्वर विरोध के और शांति के अपनी प्रबलता खो देंगे ...
किन्तु 'निर्भयता' की जलाई अग्नि हमारे ह्रदय को प्रज्वलित करेगी ...
जल हीन मुरझाये पुष्पों को हमारी अश्रु धाराएं जीवित रखेंगी ...
दग्ध कंठ से 'दामिनी' की 'अमानत' आत्मा विश्व भर में गूंजेगी ...
स्वर मेरे तुम, दल कुचलकर पीस न पाओगे ...
मै भारत की माँ बहेंनिया बेटी हूँ ,
आदर और सत्कार की मै हक़दार हूँ ...
भारत देश हमारी माता है ,
मेरी छोड़ो, अपनी माता की तो पहचान बनो !!

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