EK Kavita
राष्ट्रगान पुछ रहा है दिल्ली की दिवारो से,
कब तक हम गोली खायेँ सरकारी पहरेदारो से,
सिँहासन खुद ही शामिल है अब तो गुंडागर्दी मेँ,
संविधान के हत्यारेँ है अब सरकारी वर्दी मेँ,
कोई भी निष्पक्ष नही है अब सता के पाले मेँ,
आज पुलिस के हाथो मेँ भी अत्याचारी डंडे है,
संसद के सीने पर खुनी दाग दिखाई देता ह
इस समय तो पुरा भारत जलियाँवाला बाग दिखाई देता है ॥
राष्ट्रगान पुछ रहा है दिल्ली की दिवारो से,
कब तक हम गोली खायेँ सरकारी पहरेदारो से,
सिँहासन खुद ही शामिल है अब तो गुंडागर्दी मेँ,
संविधान के हत्यारेँ है अब सरकारी वर्दी मेँ,
कोई भी निष्पक्ष नही है अब सता के पाले मेँ,
आज पुलिस के हाथो मेँ भी अत्याचारी डंडे है,
संसद के सीने पर खुनी दाग दिखाई देता ह
इस समय तो पुरा भारत जलियाँवाला बाग दिखाई देता है ॥
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