Saturday, December 29, 2012

Brave Girl

क्या बोलूं ? क्या लिखूं? खुद को लेखक कहता हूँ, पर आज शब्द कहीं खो रहे हैं|

'दामिनी' कहा किसी ने, किसी ने देश की 'अमानत',
करिश्मा 'the miracle girl' भी कहा किसी ने,
सच में अद्भुत साहसी थी वो बाला,
देश को जगा दिया उस बहन नें, आज खुद ही सो गयी है वो |

कोई खून का रिश्ता न था, हम अनजान थे उससे,
वैसे तो हर रोज अपराध होते हैं यहाँ, पर कुछ तो अब रिश्ता सा लगता है उससे,
आज एक दर्द सा है मन में, सच है इंसानियत शर्मसार है |

आज क्यूँ खुद से आंख नहीं मिला पा रहा मैं,
क्यूँ सुबह में कुछ कमी सी है,
कर ना सका जो कोई आज तक, तूने कर दिया ओ 'करिश्मा',

जरुरत है आत्ममंथन की, खुद से है एक वादा करना,
उस बहन उस बेटी ने जो साहस दिया है मन में,
जिस युवा जागरण का है ऐलान किया,
बुझने ना देंगे ये ज्योति, ना होने देंगे इंसानियत को शर्मसार दुबारा |

No comments:

Post a Comment