Monday, May 6, 2013

आओ फिर से बचपन जी लें....

गुजरते वक्त के साथ चलते चले गए हम
जिंदगी की खुशियों को बस खोजते गए हम
लेकर गई जहॉ ये वक्त की हवा
बस उसी के साथ बहते गए हम

जिंदगी ने यूं तो कभी फुरसत ही नहीं दी
पर पलट कर देखो तो लगता कि
कहाँ थे और कहॉ आ गए हम
पा तो लीं हैं मंजिलें हमने ज़िंदगी की
पर बहुत कुछ छोडकर आ गए यहाँ हम

बचपन के कुछ खेल और खिलौने
जैसे रास्ता तकते नींद बिछौने
लडना झगडना और मार पिटाई
त्यौहारों की मस्ती में मिठाई की ज्याफत
छोटी छोटी खुशियॉ में कैसे जी रहे थे
हॅसते हुए गाते तो रोते और लडते थे

पीछे छूटे यादों के उन गलियारों से
चलो साथ गुज़र कर हम भी आते हैं
कैसे छूट गया है जो बचपन हमारा
ढूंढ के फिर से उसे लाते हैं
देखो यादें बरबस ले आतीं हैं
पलकों से वो मोती भी चुन लें हम

आओ फिर से बचपन जी लें....

No comments:

Post a Comment