Sunday, May 26, 2013

STEVE JOBS CONVOCATION SPEECH AT STANFORD


STEVE JOBS CONVOCATION SPEECH AT STANFORD
“Stay Hungry Stay Foolish”


Thank You;  आज world की सबसे बहेतरीन Universities में से एक के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर मैं खुद को गौरवान्वित महसूस  कर रहा हूँ. मैं आपको एक सच बता दूं ; मैं कभी किसी college से pass  नहीं हुआ; और आज पहली बार मैंकिसी college graduation ceremony के इतना करीब पहुंचा हूँ. आज मैं आपको अपने जीवन की तीन कहानिया सुनाना  चाहूँगा… ज्यादा कुछ नहीं बस तीन कहानिया.
मेरी पहली कहानी , dots connect करने के बारे में है. Reed College में दाखिला लेने के 6 महीने के अंदर ही मैंने पढाई छोड़ दी, पर मैं उसके 18 महीने बाद तक वहाँ किसी तरह आता-जाता रहा. तो सवाल उठता है कि मैंने college क्यों छोड़ा? ….Actually, इसकी शुरुआत मेरे  जन्म से पहले की है.
मेरी biological mother*  एक young , अविवाहित  graduate student थी, और वह मुझे किसी और को adoption के लिए देना चाहती थी. पर उनकी एक ख्वाईश थी की कोई college graduate ही मुझे adopt करे. सबकुछ बिलकुल set था और मैं एक वकील और उसकी wife  के द्वारा adopt किया जाने वाला था कि अचानक उस couple  ने अपना विचार बदल दिया और decide किया कि उन्हें एक लड़की चाहिए. इसलिए तब आधी-रात को मेरे parents, जो तब waiting list में थे,को call  करके बोला गया कि , “हमारे पास एक baby-boy है, क्या आप उसे गोद लेना चाहेंगे?” और उन्होंने झट से हाँ कर दी. बाद में मेरी biological mother  को पता चला कि मेरी माँ college pass नहीं हैं और पिता तो High School  पास भी नहीं हैं. इसलिए उन्होंने Adoption Papers sign करने से मना कर दिया; पर कुछ महीनो बाद मेरे होने वाले parents के मुझे college भेजने के आश्वाशनके बाद वो मान गयीं. तो मेरी जिंदगी कि शुरुआत कुछ इस तरह हुई और सत्रह साल बाद मैं college गया..पर गलती से मैंने Stanford जितना ही महंगा college चुन लिया. मेरे working-class parents  की सारी जमा-पूँजी मेरी पढाई में जाने लगी. 6 महीने बाद मुझे इस पढाई में कोई value नहीं दिखी.मुझे कुछ idea नहीं था कि मैं अपनी जिंदगी में क्या करना चाहता हूँ, और college मुझे किस तरह से इसमें help करेगा..और ऊपर से मैं अपनी parents की जीवन भर कि कमाई खर्च करता जा रहा था. इसलिए मैंने कॉलेज drop-out करने का निर्णय लिए…और सोचा जो होगा अच्छा होगा. उस समय तो यह सब-कुछ मेरे लिए काफी डरावना था पर जब मैं पीछे मुड़ कर देखता हूँ तो मुझे लगता है ये मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा decision था.
जैसे ही मैंने college छोड़ा मेरे ऊपर से ज़रूरी classes  करने की बाध्यता खत्म हो गयी . और मैं चुप-चाप सिर्फ अपने interest की classes करने लगा. ये सब कुछ इतना आसान नहीं था. मेरे पास रहने के लिए कोई room नहीं था , इसलिए मुझे दोस्तों के room में फर्श पे सोना पड़ता था.मैं coke  की bottle को लौटाने से मिलने वाले पैसों से खाना खता था.,मैं हर Sunday  7 मील पैदल चल कर Hare Krishna Temple  जाता था ,ताकि कम से कम हफ्ते में एक दिन पेट भर कर खाना खा सकूं. यह मुझे काफी अच्छा लगता था.
.मैंने अपनी life में जो भी अपनी curiosity और intuition की वजह से किया वह बाद में मेरे लिए priceless साबित हुआ. Let me give an example. उस समय Reed College  शायद दुनिया की सबसे अच्छी जगह थी जहाँ Calligraphy* सिखाई जाती थी. पूरे campus में हर एक poster , हर एक label  बड़ी खूबसूरती से हांथों से calligraph  किया होता था .चूँकि मैं college से drop-out कर चुका था इसलिए मुझे normal classes करने की कोई ज़रूरत नहीं थी. मैंने तय किया की मैं calligraphy की classes करूँगा और इसे अछ्छी तरह से सीखूंगा. मैंने serif और sans-serif type-faces के बारे में  सीखा.; अलग-अलग letter-combination के बीच में space vary करना और किसी अच्छी  typography को क्या चीज अच्छा बनाती है , यह भी सीखा . यह खूबसूरत था, इतना artistic था कि इसे science द्वारा capture  नहीं किया जा सकता था, और ये मुझे बेहद अच्छा लगता था. उस समय ज़रा सी भी उम्मीद नहीं थी कि मैं इन चीजों का use कभी अपनी life में करूँगा. लेकिन जब दस साल बाद हम पहला Macintosh Computer बना रहे थे तब मैंने इसे Mac में design कर दिया. और Mac  खूबसूरत typography युक्त दुनिया का पहला computer बन गया.अगर मैंने college से drop-out नहीं किया होता तो Mac मैं कभी multiple-typefaces या  proportionally spaced fonts नहीं होते , और चूँकि Windows ने Mac की copy  की थी तो शायद ये  किसी भी personal computer में ये चीजें नहीं होतीं. अगर मैंने कभी drop-out ही नहीं किया होता तो मैं कभी calligraphy की  वो classes  नहीं कर पाता और फिर शायद personal computers में जो fonts होते हैं , वो होते ही नहीं.
Of course,  जब मैं college में था तब भविष्य में देख कर इन dots  को connect करना  impossible था; लेकिन दस साल बाद जब मैं पीछे मुड़  कर देखता हूँ तो सब कुछ बिलकुल साफ़ नज़र आता है. आप कभी भी future  में झांक कर dots connect नहीं कर सकते हैं. आप सिर्फ past देखकर ही dots connect कर सकते हैं; इसलिए आपको यकीन करना होगा की अभी जो हो रहा है वह आगे चल कर किसी न किसी तरह आपके future से connect हो जायेगा. आपको किसी न किसी चीज में विश्ववास करना ही होगा —अपने guts में, अपनी destiny में, अपनी जिंदगी या फिर अपने कर्म में…किसी न किसी चीज मैं विश्वास करना ही होगा…क्योंकि इस बात में believe करना की आगे चल कर dots connect होंगे आपको अपने दिल की आवाज़ सुनने की हिम्मत देगा…तब भी जब आप बिलकुल अलग रास्ते पर चल रहे होंगे…and that will make the difference.
मेरी दूसरी कहानी , love और loss  के बारे में है. मैं जिस चीज को चाहता था वह मुझे जल्दी ही मिल गयी. Woz और मैंने अपने parents के गराज से  Apple  शरू की तब मैं 20 साल का था. हमने बहुत मेहनत की और 10 साल में Apple दो लोगों से बढ़ कर $2 Billion  और 4000 लोगों की company हो गयी. हमने अभी एक साल पहले ही अपनी finest creation Macintosh release की , मैं तीस का हो गया था और मुझे company से fire  कर दिया गया.
STEVE JOBS
STEVE JOBS
आप अपनी बनायीं हुई company से fire कैसे हो सकते हैं ? Well, जैसे-जैसे company grow की, हमने एक ऐसे talented आदमी को hire किया ,जिसे मैंने सोचा कि वो मेरे साथ company run करेगा , पहले एक साल सब-कुछ ठीक-ठाक चला…. लेकिन फिर company के future vision  को लेके हम दोनों में मतभेद होने लगे. बात Board Of Directors तक पहुँच गयी, और उन लोगों ने उसका साथ दिया,so at thirty , मुझे निकाल दिया गया…publicly निकाल दिया गया. जो मेरी पूरी adult life का focus था वह अब खत्म हो चुका था, और ये बिलकुल ही तबाह करने वाला था. मुझे सचमुच अगले कुछ महीनो तक समझ ही नहीं आया कि मैं क्या करूं.
मुझे महसूस हुआ कि ये सबकुछ इतनी आसानी से accept  करके मैंने अपने पहले कि generation के entrepreneurs को नीचा दिखाया है. मैं David Packard* और Bob Noyce* से मिला और उनसे सबकुछ ऐसे हो जाने पर माफ़ी मांगी. मैं एक बहुत बड़ा public failure था, एक बार तो मैंने valley* छोड़ कर जाने की भी सोची.पर धीरे – धीरे मुझे अहसास हुआ की मैं जो काम करता हूं, उसके लिए मैं अभी भी  passionate हूँ. Apple में जो कुछ हुआ उसकी वजह से मेरे passion में ज़रा भी कमी नहीं आई है….मुझे reject कर दिया गया है, पर मैं अभी भी अपने काम से प्यार करता हूँ. इसलिए मैंने एक बार फिर से शुरुआत करने की सोची. मैंने तब नहीं सोचा पर अब मुझे लगता है की Apple से fire किये जाने से अच्छी चीज मेरे साथ हो ही नहीं सकती थी. Successful होने का बोझ   अब beginner होने के हल्केपन में बदल चूका था , मैं एक बार फिर खुद को बहुत free महसूस कर रहा था…इस स्वछंदता की वज़ह से मैं अपनी life  की सबसे creative period  में जा पाया.
अगले पांच सालों में मैंने एक company … NeXT  और एक दूसरी कंपनी Pixar start की और इसी दौरान मेरी मुलाक़ात एक बहुत ही amazing lady  से हुई ,जो आगे चलकर मेरी wife बनी. Pixar ने दुनिया की पहली computer animated movie , “ Toy Story”  बनायीं, और इस वक्त यह दुनिया का सबसे सफल animation studio है. Apple ने  एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए NeXT को खरीद लिया और मैं Apple में वापस चला गया. आज Apple, NeXT  द्वारा develop की गयी technology use करती है….अब Lorene और मेरा एक सुन्दर सा परिवार है. मैं बिलकुल surety के साथ कह सकता हूँ की अगर मुझे Apple से नहीं निकाला गया होता तो मेरे साथ ये सब-कुछ नहीं होता. ये एक कड़वी दवा थी …पर शायद patient को इसकी ज़रूरत थी.कभी-कभी जिंदगी आपको इसी तरह ठोकर मारती है. अपना विश्वाश मत खोइए. मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ कि मैं सिर्फ इसलिए आगे बढ़ता गया क्योंकि मैं अपने काम से प्यार करता था…I loved my work.
आप really क्या करना पसंद करते हैं यह आपको जानना होगा, जितना अपने love को find करना ज़रूरी है, उतना ही उस काम को ढूँढना ज़रूरी जिसे आप सच-मुच enjoy करते हों आपका काम आपकी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा होगा, और truly-satisfied होने का एक ही तरीका है की आप वो करें जिसे आप सच-मुच एक बड़ा काम  समझते हों…और बड़ा काम करने का एक ही तरीका है की आप वो करें जो करना आप enjoy करते हों.यदि आपको अभी तक वो काम नहीं मिला है तो आप रूकिये मत..उसे खोजते रहिये. जैसा कि दिल से जुडी हर चीज में होता है…वो जब आपको मिलेगा तब आपको पता चल जायेगा…और जैसा की किसी अच्छी relationship में होता है वो समय के साथ-साथ और अच्छा होता जायेगा ….इसलिए खोजते रहिये…रूकिये मत.
मेरी तीसरी कहानी death  के बारे में है. जब मैं 17  साल का था तो मैंने एक quote पढ़ा , जो कुछ इस तरह था, “ यदि आप हर रोज ऐसे जियें जैसे की ये आपकी जिंदगी का आखीरी दिन है ..तो आप किसी न किसी दिन सही साबित हो जायेंगे.” इसने मेरे दिमाग पे एक  impression बना दी, और तबसे…पिछले 33  सालों से , मैंने  हर सुबह उठ कर शीशे में देखा है और खुद से एक सवाल किया है , “ अगर ये  मेरी जिंदगी का आखिरी दिन होता तो क्या मैं आज वो करता जो मैं करने वाला हूँ?” और जब भी लगातार कई दिनों तक जवाब “नहीं” होता है , मैं समझ जाता हूँ की कुछ बदलने की ज़रूरत है. इस बात को याद रखना की मैं बहत जल्द मर जाऊँगा मुझे अपनी life  के बड़े decisions लेने में सबसे ज्यादा मददगार होता है, क्योंकि जब एक बार death  के बारे में सोचता हूँ तब सारी expectations, सारा pride, fail होने का डर सब कुछ गायब हो जाता है और सिर्फ वही बचता है जो वाकई ज़रूरी है.इस बात को याद करना की एक दिन मरना है…किसी चीज को खोने के डर को दूर करने का सबसे अच्छा  तरीका है.आप पहले से ही नंगे हैं.ऐसा कोई reason नहीं है की आप अपने दिल की ना सुने.
करीब एक साल पहले पता चला की मुझे cancer है . सुबह 7:30 बजे मेरा scan हुआ, जिसमे साफ़-साफ़ दिख रहा था की मेरे pancreas में tumor  है. मुझे तो पता भी नहीं था की pancreas क्या होता है. Doctor ने लग-भग यकीन के साथ बताया की मुझे एक ऐसा cancer है जिसका इलाज़ संभव नहीं है..और अब मैं बस 3 से 6 महीने का मेहमान हूँ. Doctor  ने सलाह दी की मैं घर जाऊं और अपनी सारी चीजें व्यवस्थित कर लूं, जिसका indirect मतलब होता है कि , “आप मरने की तैयरी कर लीजिए.”  इसका मतलब कि आप कोशिश करिये कि आप अपने बच्चों से जो बातें अगले दस साल में करते , वो अगले कुछ ही महीनों में कर लीजिए. इसका ये मतलब होता है कि आप सब-कुछ सुव्यवस्थित कर लीजिए की आपके बाद आपकी family को कम से कम परेशानी हो.इसका ये मतलब होता है की आप सबको गुड-बाय कर दीजिए.
मैंने इस diagnosis के साथ पूरा दिन बिता दिया फिर शाम को मेरी biopsy हुई जहाँ मेरे मेरे गले के रास्ते, पेट से होते हुए मेरी intestine में एक endoscope डाला गया और एक सुई से tumor से कुछ cells  निकाले गए. मैं तो बेहोश था , पर मेरी wife , जो वहाँ मौजूद थी उसने बताया की जब doctor ने microscope से मेरे cells देखे तो वह रो पड़ा…दरअसल cells देखकर doctor समझ गया की मुझे एक बहुत ही दुर्लभ प्रकार का  pancreatic cancer है जो surgery से ठीक हो सकता है. मेरी surgery हुई और सौभाग्य से अब मैं ठीक हूँ.
मौत के इतना करीब मैं इससे पहले कभी नहीं पहुंचा , और उम्मीद करता हूँ की अगले कुछ दशकों तक   पहुँचूं भी नहीं. ये सब देखने के बाद मैं ओर भी विश्वाश के साथ कह सकता हूँ की death एक useful but intellectual concept है.कोई मरना नहीं चाहता है, यहाँ तक की जो लोग स्वर्ग जाना चाहते हैं वो भी…फिर भी मौत वो मजिल है जिसे हम सब share  करते हैं.आज तक इससे कोई बचा नहीं है. और ऐसा ही होना चाहिए क्योंकि शायद मौत ही इस जिंदगी का सबसे बड़ा आविष्कार है .  ये जिंदगी को बदलती है, पुराने को हटा कर नए का रास्ता खोलती है. और इस समय नए आप हैं. पर ज्यादा नहीं… कुछ ही दिनों में आप भी पुराने हो जायेंगे और रस्ते से साफ़ हो जायेंगे. इतना dramatic होने के लिए माफ़ी चाहता हूँ पर ये सच है.आपका समय सीमित है, इसलिए इसे किसी और की जिंदगी जी कर व्यर्थ मत कीजिये. बेकार की सोच में मत फंसिए,अपनी जिंदगी को दूसरों के हिसाब से मत चलाइए. औरों के विचारों के शोर में अपनी अंदर की आवाज़ को, अपने intuition को मत डूबने दीजिए. वे पहले से ही जानते हैं की तुम सच में क्या बनना चाहते हो. बाकि सब गौड़ है.
जब मैं छोटा था तब एक अद्भुत publication, “The Whole Earth Catalogue”  हुआ करता था, जो मेरी generations की bibles में से एक था.इसे Stuart Brand नाम के एक व्यक्ति, जो यहाँ … MelonPark से ज्यादा दूर नहीं रहता था, और उसने इसे अपना poetic touch दे के बड़ा ही जीवंत बना दिया था. ये साठ के दशक की बात है, जब computer और desktop publishing  नहीं हुआ करती थीं., पूरा catalogue ..typewriters, scissors और  Polaroid cameras की मदद से बनाया जाता था. वो कुछ-कुछ ऐसा था मानो Google को एक book के form में कर दिया गया हो….वो भी गूगल के आने के 35 साल पहले.वह एक आदर्श था, अच्छे tools और महान विचारों से भरा हुआ था.
Stuart और उनकी team ने “The Whole Earth Catalogue”के कई issues  निकाले और अंत में एक final issue  निकाला. ये सत्तर के दशक का मध्य था और तब मैं आपके  जितना था. Final issue के back cover पे प्रातः काल का किसी गाँव की सड़क का द्दृश्य था…वो कुछ ऐसी सड़क थी जिसपे यदि आप adventurous हों तो किसी से lift माँगना चाहेंगे. और उस picture के नीचे लिखा था, Stay Hungry, Stay Foolish”..  ये उनका farewell message था जब उन्होंने sign-off  किया…,Stay Hungry, Stay Foolish” और मैंने अपने लिए हमेशा यही wish किया है, और अब जब आप लोग यहाँ से graduate हो रहे हैं तो मैं आपके लिए भी यही wish करता हूँ , stay hungry, stay foolish. Thank you all very much.


लोग अलग नज़रिए अलग!

लोग अलग नज़रिए अलग!
एक आदमी अपने परिवार के साथ जंगल में रहता था।

एक दिन उसे जंगल में एक शीशा मिला।

शीशे में उसने खुद को देखा तो उसको लगा की पापा की तस्वीर है।

वो उस शीशे को अपने घर ले आया और उससे रोज़ बातें करने लगा।

यह देख उसकी बीवी को शक हुआ।

एक दिन उसने शीशा निकाला और अपना अक्स देख कर बोली," अच्छा तो ये है वो चुड़ैल जिससे मेरा शौहर बातें करता है।"

उसने शीशा अपनी सास को दिखाया तो सास ने कहा, "कोई बात नहीं, बूढी है जल्दी मर जायेगी।"

Saturday, May 25, 2013

अ से अनाल

तीन वर्षीय बच्ची किताब खोलकर पढ़ने लगी, "अ से अनाल... आ से आम...
एकाएक उसने पूछा,"पापा, ये अनाल क्या होता है?"
"यह एक फल होता है, बेटे।" मैंने उसे समझाते हुए कहा,"इसमें लाल-लाल दाने होते हैं, मीठे-मीठे!"
"पापा, हम भी अनाल खायेंगे..." बच्ची पढ़ना छोड़कर जिद्द-सी करने लगी।
मैंने उसे डपट दिया,"बैठकर पढ़ो। अनार बीमार लोग खाते हैं।तुम कोई बीमार हो! चलो,अंग्रेजी की किताब पढ़ो। ए फॉर ऐप्पिल... ऐप्पिल माने...।"
सहसा, मुझे याद आया, दवा देने के बाद डॉक्टर ने सलाहदी थी– पत्नी को सेब दीजिए, सेब।
और मैं मन ही मन पैसों का हिसाब लगाने लगा था। सब्जीभी खरीदनी थी। दवा लेने के बाद जो पैसे बचे थे, उसमें एक वक्त की सब्जी ही आ सकती थी। बहुत देर सोच-विचार के बाद, मैंने एक सेब तुलवा ही लिया था– पत्नी के लिए।
बच्ची पढ़ रही थी, "ए फॉर ऐप्पिल... ऐप्पिल माने सेब..."
"पापा, सेब भी बीमाल लोग खाते हैं?... जैसे मम्मी?..."
बच्ची के इस प्रश्न का जवाबमुझसे नहीं बन पड़ा। बस, बच्ची के चेहरे की ओर अपलक देखता रह गया था।
बच्ची ने किताब में बने सेबके लाल रंग के चित्र को हसरत-भरी नज़रों से देखते हुए पूछा,
"मैं कब बीमाल होऊँगी, पापा?"

यह प्यार हैं


जब एक छोटी लड़की अपने पापा को बाहर से
आया देखकर उनके लिए भागकर एक गिलास
पानी का लाये| यह प्यार हैं
——————————

जब सुबह पत्नी, पति के लिए चाय बनाती हैं
और उस चाय को पति को देने के पहले पहला
घूंट पीती हैं| यह प्यार हैं
——————————

जब एक माँ अपने बेटे को सबसे बढ़िया मिठाई
का टुकड़ा सबसे छुपा कर देती हैं| यह प्यार हैं
——————————

जब आपका दोस्त फिसलन भरी सड़क पर
आपका हाथ बहुत मजबूती से पकड़ लेता हैं
ताकि आप गिर ना सके| यह प्यार हैं
——————————

जब आपका भाई आपको मैसेज करके बोले घर
टाइम पर आ जाना देर होने परमुझे तुम्हारी फ़िक्र
होती हैं| ये प्यार है ।
——————————

प्यार सिर्फ वह नहीं की लड़का और लड़की एक
दुसरे की बांहों में बाँहे डाले सारे शहर का चक्कर
लगाए, और अश्लीलता फैलाये दरअसल सच्चा प्यार वह हैं जिसमे एक दूसरे
का ख्याल रखा जाए ।।।।।।

शुभ सँध्या मेँ हमारे प्यारे मित्रजनोँ का दिल से स्वागत हैँ.......!!
जब एक छोटी लड़की अपने पापा को बाहर से
आया देखकर उनके लिए भागकर एक गिलास
पानी का लाये| यह प्यार हैं
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जब सुबह पत्नी, पति के लिए चाय बनाती हैं
और उस चाय को पति को देने के पहले पहला
घूंट पीती हैं| यह प्यार हैं
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जब एक माँ अपने बेटे को सबसे बढ़िया मिठाई
का टुकड़ा सबसे छुपा कर देती हैं| यह प्यार हैं
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जब आपका दोस्त फिसलन भरी सड़क पर
आपका हाथ बहुत मजबूती से पकड़ लेता हैं
ताकि आप गिर ना सके| यह प्यार हैं
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जब आपका भाई आपको मैसेज करके बोले घर
टाइम पर आ जाना देर होने परमुझे तुम्हारी फ़िक्र
होती हैं| ये प्यार है ।
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प्यार सिर्फ वह नहीं की लड़का और लड़की एक
दुसरे की बांहों में बाँहे डाले सारे शहर का चक्कर
लगाए, और अश्लीलता फैलाये दरअसल सच्चा प्यार वह हैं जिसमे एक दूसरे
का ख्याल रखा जाए ।।।।।।

शुभ सँध्या मेँ हमारे प्यारे मित्रजनोँ का दिल से स्वागत हैँ.......!!

Wednesday, May 22, 2013

अभिमान

एक घर के मुखिया को यह अभिमान हो गया कि उसके बिना उसके परिवार का काम नहीं चल सकता। उसकी छोटी सी दुकान थी। उससे जो आय होती थी, उसी से उसके परिवार का गुजारा चलता था। चूंकि कमाने वाला वह अकेला ही था इसलिए उसे लगता था किउसके बगैर कुछ नहीं हो सकता। वह लोगों के सामने डींग हांका करता था।
एक दिन वह एक संत के सत्संग में पहुंचा। संत कह रहे थे, 'दुनिया में किसी के बिना किसी का काम नहीं रुकता। यह अभिमान व्यर ्थ है कि मेरे बिना परिवार या समाज ठहर जाएगा। सभी को अपने भाग्य के अनुसार प्राप्त होता है।' सत्संगसमाप्त होने के बाद मुखिया ने संत से कहा, 'मैं दिन भर कमाकर जो पैसे लाता हूं उसी से मेरे घर का खर्च चलता है। मेरे बिना तो मेरे परिवार के लोग भूखे मर जाएंगे।'
संत बोले, 'यह तुम्हारा भ्रम है। हर कोई अपने भाग्य का खाता है।' इस पर मुखिया ने कहा, 'आप इसे प्रमाणित करके दिखाइए।' संत ने कहा, 'ठीक है। तुम बिना किसी को बताए घर से एक महीने के लिए गायब हो जाओ।' उसने ऐसा ही किया। संत ने यह बात फैला दी कि उसे बाघ ने खा लिया है। मुखिया के परिवार वालों ने कई दिनों तक शोक मनाया। गांव वाले आखिरकार उनकी मदद के लिए सामने आए। एक सेठ ने उसके बड़े लड़के को अपने यहां नौकरी दे दी। गांव वालों ने मिलकर लड़की की शादी कर दी। एक व्यक्ति छोटे बेटे की पढ़ाई का खर्च देने को तैयार हो गया। एक महीने बाद मुखिया छिपता-छिपाता रात के वक्तअपने घर आया। घर वालों ने भूत समझकर दरवाजा नहीं खोला। जब वह बहुत गिड़गिड़ाया और उसने सारी बातें बताईं तो उसकी पत्नी ने दरवाजे के भीतर से ही उत्तर दिया,'हमें तुम्हारी जरूरत नहीं है। अब हम पहले से ज्यादा सुखी हैं।' उस व्यक्ति का सारा अभिमान उतर गया,.......भावा­ ­­र्थ ..... सं सा र ..... किसी के लिए भी नही रुकता ... यहाँ सभी के बिना काम चल सकता है इस संसार को चलाने वाला परमात्मा है.

Sunday, May 19, 2013

घेवर


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सावन और राखी के त्यौहार की विशेष मिठाई घेवर (Ghevar Sweet) है. हम तो अपने देश में है इसलिये हमें घेवर आसानी से मिल जाता है, लेकिन जो देश से बाहर है, उन्हें घेवर मुश्किल से मिलता है घेवर आप घर पर भी बना सकते है, दिखने में एसा लगता है कि इसे बनाना मुश्किल होगा लेकिन है बड़ा आसान. आईये हम आज घेवर बनायें
आपने बाजार में घेवर बनते देखा है? घेवर बनाने के लिये स्पेशल कढ़ाई प्रयोग में लाई जाती है जिसका तला समतल होता है, जो करीब 12 इंच गहराई और 5-6 इंच चौड़ाई की होती है.  बाजार में घेवर बनाने के लिये तो समतल तले की बड़ी कढ़ाई होती है और उसमें छ्ह इंच उंचे बेलनाकार के गोले डाल जाते हैं, घी भरी कढाई में ये गोले पड़े रहते हैं और इन्हीं गोलों में घोल डाल कर घेवर तला जाता हैं, लेकिन अभी आप इन्हें भूल जाईये.
घेवर घर पर सामान्य भगोनी में बहुत अच्छी तरह से बनाया जा सकता है.

आवश्यक सामग्री - Ingredients for Ghevar Sweets

  • मैदा - 300 ग्राम (3 कप)
  • घी -  50 ग्राम ( 1/4 कप)
  • दूध - 100 ग्राम (आधा कप)
  • पानी - 300 ग्राम (1 1/2 कप)
  • घी - घेवर तलने के लिये

चाशनी बनाने के लिये

  • चीनी - 300 ग्राम(1 1/ 2 कप)
  • पानी - 200 ग्राम (1 कप)]

विधि - How to make Ghevar

मैदा छान कर किसी बर्तन में निकाल लीजिये, घी और ठंडा दूध किसी बड़े बर्तन में निकालिये और मिला कर खूब फैटिये मैदा डालकर अच्छी तरह मिलाइये और फैटिये.  अब थोड़ा थोड़ा पानी डालिये और घोल को खूब फैटिये, घोल में कोई गुठली न रहे और घोल एकदम चिकना हो जाय.  घेवर बनाने के लिये घोल तैयार है.  घोल की कन्सिस्टेन्सी एसी हो कि चमचे से घोल गिराने पर पतली धार से गिरे.
भगोने में करीब आधा भगोने की ऊचाई तक घी भर कर गरम कीजिये, घी अच्छी तरह गरम होने पर यानी मैदा की कोई भी बूंद घी में गिरे तो वह तुरन्त ऊपर उठकर तैरने लगे.  मैदा का घोल किसी चमचे में भर कर बहुत ही पतली धार से इस गरम घी में डालिये, घोल डालने पर घी से उठे झाग ऊपर दिखाई देने लगते हैं,
दूसरा चमचा घोल डालने के लिये 1-2 मिनिट रुकिये, घी के ऊपर झाग खतम होने दीजिये, अब फिर से दूसरा चमचा घोल भरकर बिलकुल पतली धार से घोल घी में डालिये, आप देखेंगे कि घी फिर से झाग से भर जाता है, झाग खतम करने के लिये फिर से 1-2 मिनिट रुकिये,.
आप जितना बड़ा घेवर बनाना चाहते हैं उसके हिसाब से उतना घोल आप भगोने में डालेंगे, घोल को भगोने के बीच में डाला जाता है, यह घोल नीचे तले में जाता और तैर कर वापस किनाने पर पहुंच कर इकठ्ठा हो जाता है, यदि घेवर में बीच में जगह न रहे तो आप  किसी चमचे की पतली डंडी या तान से बीच से घोल हटाकर थोड़ी जगह बना सकते है इसी जगह से घोल को डालते रहिये जब तक घेवर का आकार सही न हो जाय.
जब पर्याप्त घोल डाल चुके तब गैस की फ्लेम मीडियम कर दीजिये, अब आप घेवर को मीडियम आग पर हल्का ब्राउन होने तक सिकने दीजिये.
Ghevar
जब घेवर ऊपर से हल्का ब्राउन दिखने लगे तब घेवर को निकाल कर थाली में रखिये (घेवर को निकालने के लिये किसी लकड़ी या स्टील की पतली छड़ का प्रयोग किया जा सकता है) और थाली को तिरछा कर दीजिये ताकि अतिरिक्त घी थाली में नीचे की ओर निकल कर आ जाय.
सारे घेवर तल कर आप इसी तरह तैयार करके थाली में रख लीजिये.
2 तार की चीनी की चाशनी तैयार कीजिये:
किसी बर्तन में 1 1/2 कप चीनी में 1 कप पानी डाल कर गैस फ्लेम पर चाशनी बनने रखिये, उबाल आने के बाद 5-6 मिनिट तक पकाइये, चाशनी को चम्मच से लेकर एक बूंद किसी प्लेट में गिराइये, ठंडा होने पर उंगली और अंगूठे के बीच चिपका कर देखिये, वह उंगली और अंगूठे के बीच चिपकनी चाहिये, चाशनी में  2 तार बनने चाहिये, चाशनी तैयार हो गई है.
चाशनी को ठंडा कीजिये और एक घेवर उठाइये, चाशनी में डुबाकर निकाल लीजिये, एक एक करके सारे घेवर जो आपने बनाये हैं वे चाशनी में डुबाकर निकाल लीजिये, चाशनी से घेवर निकाल कर थाली में लगाइये और थाली को तिरछा रखिये ताकि अतिरिक्त चाशनी निकल कर थाली में नीचे की ओर इकठ्ठी हो जाय, थोड़ी ही देर में घेवर से अतिरिक्त चाशनी निकल जाती है.
Ghevar in Chasni
ये घेवर हवा में 1 घंटे सूखने दीजिये, अब आपके मीठे घेवर तैयार हैं, आप इन्हैं अभी तो खा ही सकती हैं, और बचे हुये घेवर एअर टाइट कन्टेनर में भर कर रख लीजिये,  2 सप्ताह तक कन्टेनर से घेवर निकालिये और खाइये.

घेवर के ऊपर रबड़ी और कतरे हुये सूखे मेवे लगाकर उसे और अधिक स्वादिष्ट बनाइये:

घेवर में रबड़ी और मेवा की  टॉपिंग लगा देने से यह और भी अधिक स्वादिष्ट हो जाता है.
1 लीटर फुल क्रीम दूध को किसी भारी तले के बर्तन में डालकर उबलने रख दीजिये, उबाल आने पर गैस फ्लेम धीमी कर दीजिये और दूध को उबलते रहने दीजिये, थोड़ी थोड़ी देर में चमचे से चलाते अवश्य रहें ताकि दूध तले में न लगे, दूध उबलते उबलते गाड़ा हो जाय यानी अपनी मात्रा का 1/3 रह जाय तब गैस फ्लेम बन्द कर दीजिये, दूध की रबड़ी घेवर पर डालने के लिये तैयार है, इस रबड़ी में 2 छोटी चम्मच चीनी डालकर हल्की सी मीठी कर दीजिये.

बादाम 10 -15 बारीक कतर कर, पिस्ते भी 10-15 बारीक कतर कर और इलाइची 4-5 छीलकर बारीक कूट कर मिला लीजिये.
घेवर के ऊपर एक परत दूध की रबड़ी की बिछाइये और ऊपर से कतरे हुये मेवे डाल दीजिये अब आप इस घेवर (Ghevar) को खाइये और बताइये कि घेवर कितना स्वादिष्ट बना है.

सामान्य घेवर को तो 2 सप्ताह तक रख सकते है लेकिन रबड़ी की टॉपिग लगे घेवर (Ghevar with Rabri Mewa Toping) को आप 2 दिन तक फ्रिज में रख कर खा सकते हैं क्यों कि रबड़ी जल्दी खराब हो जाती है इसलिये जितने घेवर 2 दिन में खाये जा सके, उतने ही घेवर पर रबड़ी की टॉपिंग कीजिये.
यह रेसिपी गौरी के कहने पर लिखी गई है,

दाल बाटी (Daal - Batti)



दाल बाटी (Daal - Batti) जितना राजस्थान में पसंद किया जाता है उतना ही दाल बाफला (Dal Bafla) के नाम से इंदौर-मालवा के इलाके में पसंद किया जाता है.
जब भी कभी छुट्टी हो, घर में मेहमान हों, और आप गप शप में दिन बिता रहे हों तो दाल बाटी (Daal Baati)  यानी दाल बाफला (Dal Bafla)  बनाईये. इसे बनाते समय आप बीच बीच में अपनी गप शप भी करते रहिये.  आपको इन्हें बनाते समय बातचीत के लिये भरपूर समय मिलेगा और आप स्पेशल खाना भी तैयार कर सकेंगे.

बाटी के लिये आवश्यक सामग्री ( For bati or dumplings)

  • गेहूँ का आटा- 400 ग्राम( 4 कप )
  • सूजी ( रवा ) - 100 ग्राम ( एक कप)
  • घी - 100 ग्राम ( आधा कप )
  • अजवायन- आधा छोटी चम्मच
  • बेकिंग पाउडर - आधा छोटी चम्मच (यदि आप चाहें)
  • नमक - स्वादानुसार (एक छोटी चम्मच)
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विधि How to make Dal Bati

आटा और सूजी को एक बर्तन में मिला कर 3 टेबिल स्पून घी, बेकिंग पाउडर, अजमायन और नमक मिला दीजिये. गुनगुने पानी की सहायता से आटे को चपाती के आटे से थोड़ा सा सख्त आटा गूथ लीजिये.  आटे को 20 मिनिट के लिये ढककर रख दीजिये, ताकि आटा फूल कर सैट हो जाय. 20 मिनिट बाद इस आटे को तेल के हाथ से मसल कर चिकना कर लीजिये. गुथे आटे से थोड़ा आटा तोड़ कर मध्यम आकार के गोले बना लिजिये.
आप चाहें तो इसके अन्दर मटर की पिठ्ठी, आलू की पिठ्ठी, पनीर की पिठ्ठी या मेवे की पिट्ठी बनाकर भर सकते हैं.

बाटियाँ 2 तरीके से बनाई जाती हैं.

बाटी को पानी में उबालकर बनाना
1 लीटर पानी भगोने में भर कर गैस पर गरम करने के लिये रख दीजिये और जब पानी में उबाल आ जाय तब ये गोले उबलते पानी में डाल दीजिये. 15 मिनिट तक इन गोलों को उबालिये.
पानी से उबले हुये गोले निकाल कर प्लेट में रखिये और अब इनको तन्दूर या ओवन में ब्राउन होने तक सेक लीजिये. सेकी हुई बाटियों को पिघले हुये घी में डुबा कर निकालिये. तैयार बाटियाँ प्याले या प्लेट में रखिये.
बाटी को बिना उबाले बनानाइस तरीके से बाटी उबाले बिना ही बनायीं जाती हैं. तन्दूर को गरम कीजिये, तन्दूर में आटे के गोले सिकने के लिये रखिये, इन गोलों को तन्दूर में पलट पलट कर सेकें. बाटियाँ फटने लगेंगी और ब्राउन हो जायेंगी. सिकी बाटी ओवन से निकाल कर प्लेट में रख लीजिये. बचे हुये घी को पिघला कर रख लीजिये. सेकी हुई बाटियों को फोड़ कर घी में डुबा कर निकाल कर प्लेट या प्याले में लगाइये.
दोनों तरह की बाटियां अच्छी होतीं है. आप इनमें से किसी भी तरीके से बाटी बनाइये और बताइये कि आपको कौन सी तरह से बनी बाटी ज्यादा अच्छी लगी.

बाटी के लिये मिक्स दाल

  • अरद की दाल - 100 ग्राम ( आधा कप )
  • मूंग की दाल - 50 ग्राम ( 1/4 कप )
  • चना की दाल - 50 ग्राम ( 1/4 कप )
  • घी- 2 टेबिल स्पून
  • हींग - 1-2 पिन्च
  • जीरा- 1 छोटी चम्मच
  • हल्दी पाउडर- आधा छोटी चम्मच
  • धनियाँ पाउडर - एक छोटी चम्मच
  • लाल मिर्च पाउडर - आधा छोटी चम्मच
  • टमाटर - 2 - 3
  • हरी मिर्च- 1-2
  • अदरक - 2 इंच लम्बा टुकड़ा
  • गरम मसाला - एक चौथाई छोटी चम्मच
  • हरा धनियाँ - छोटी आधा कटोरी ( बारीक कटा हुआ )
  • नमक स्वादानुसार ( एक छोटी चम्मच )

विधि

दालों को 1 घंटा पहले धो कर पानी में भिगो दीजिये.
भीगी हुई दालों को कुकर में, दुगने पानी ( 2 कप पानी) डालकर और नमक डाल कर पकने के लिये गैस पर रख दीजिये. एक सीटी आने के बाद 2-3 मिनिट तक धीमी गैस पर पकायें. गैस बन्द कर दीजिये.
टमाटर, हरी मिर्च और 1 इंच अदरक का टुकड़ा मिक्सी से बारीक पीस लीजिये.
कढ़ाई में 2 टेबिल स्पून घी डाल कर गरम करें. हींग और जीरा डाल दें. जीरा भुनने के बाद हल्दी पाउडर और धनियाँ पाउडर डालें. 2-3 बार चमचे से चलायें और पिसा हुआ टमाटर का मिश्रण, लाल मिर्च पाउडर और 1 इंच लम्बे अदरक को बारीक काट कर डाल दें. मसाले को तब तक भूनें जब तक कि मसाले के ऊपर तेल न तैरने लगे, ये मसाला कुकर में पकी हुई दाल में मिला दीजिये आवश्यकतानुसार पानी (दाल को आप जितना पतला चाहें) मिला दीजिये, उबाल आने पर गरम मसाला डालिये और नमक को टेस्ट करके आवश्यकतानुसार थोडा़ सा और डाल दीजिये. आधा हरा धनियाँ डाल कर मिला दीजिये. दाल तैयार हो गयी है.  दाल को प्याले में निकालिये और बचे हुये हरे धनिये और घी डाल कर सजाये.
दाल और बाटियाँ तैयार है. गरमा गरम दाल बाटी परोसिये और खाइये.
6 लोगों के लिये. | बनाने में समय : लगभग 90 मिनट.
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Rajasthani Dal Bafla


Rajasthani Dal Bafla

Rajasthani Dal Bafla Recipe
Rajasthani Dal Bafla Recipe
  • Ingredients for Bafla(dumplings)
  • 4 cup wheat flour
  • 1 cup corn flour(not corn starch)
  • 1 1/2 tbsp(tablespoon) thymol seeds
  • 2 tsp(tea-spoon) salt
  • 1/2 tsp turmeric powder
  • 1tbsp ghee(clarified butter)
  • 250gm ghee for dipping
  • Preparation
  • Take 2 liters of water in a vessel and boil it.
  • Mix all of the above ingredients and make a soft dough.
  • Make small balls of the dough just of the size of dumplings.
  • Put these balls in the boiling water on high heat.
  • Once the balls start to rise on the surface of the water, remove them on strainer so that excessive water drains away. This should take approximately 10 minutes to happen.
  • Place the balls in a preheated oven at 180-200deg cel. for 60 minutes.
  • Once they are done, cut the balls into halves and dip them in ghee.
  • Remove them once they have soaked just enough ghee.
  • Ingredients for Dal(Lentil Soup)
  • 1 cup boiled toor dal(yellow pigeon peas)
  • 2 large tomatoes, finely chopped
  • 1 medium sized onions, finely chopped
  • 1tsp ginger
  • 1tsp garlic
  • 1tsp green chili, finely chopped
  • 1/2tsp turmeric powder
  • 1tsp red chili powder
  • 1tsp garam masala powder
  • 2 pinch heeng(Asafetida)
  • 1tsp salt
  • 2tbsp coriander leaves
  • 1tsp jeera(cumin seeds)
  • 1tsp mustard seeds
  • 3 whole dried red chilies
  • 2tbsp ghee
  • Preparation
  • Take 2tbsp ghee in a wok. Add mustard seeds and cumin seeds.
  • Add red chili and asafetida when the mustard seeds begin to crackle.
  • Now add ginger, garlic, green chili, and onion and fry it till onions become golden brown.
  • Add chopped tomatoes, turmeric powder, red chili, garam masala powder and salt as per your taste.
  • Cook it till tomatoes become soft.
  • Now mash the already boiled dal and put it in the wok. Add 1 1/2 cups of water.
  • Cook it at high heat and allow it to boil at least for 5 minutes.
  • Sprinkle chopped coriander and serve with bafla.

Saturday, May 18, 2013

मेमसाब

एक दिन मेमसाब बोलीं काम वाली बाई से - " अपने लड़के पर ध्यान क्यों नहीं देती? देखा ,कैसा मरियल सा है ! थोडा खिलाया पिलाया कर तो पढाई में भी मन लगेगा! नहीं तो तेरे जैसे ही घर घर काम करता घूमेगा!"

बाई ने तसल्ली से मेमसाब को देखा , झाड़ू नीचे पटकी , पल्ला कमर में खोंसा ,गला साफ़ किया और बोली - "ऐसा है मैडम जी कि आपके मोटे कद्दू जैसे लड़के से मेरा लड़का लाख गुना अच्छा है! कभी देखा है अपने लड़के को ध्यान से ...एक सूंड लटका दोगी तो पूरे गणेशजी में झांकी में बिठाने के काम आएगा!! मेरे लड़के से जरा रेस लगवा लो अपने लाल की ...दस कदम भी दौड़ ले तो धन्य मानना खुद को! और हाँ ...ये जो आपका छोकरा दिन भर कुरकुरे और बर्गर खाता वीडियोगेम में घुसा रहता है न तब मेरा छोरा गिल्ली डंडा और कबड्डी खेलता है! और एक बात और सुन लो ...मुझे पता है इतने मंहगे स्कूल में पढ़ाने और चार चार ट्यूशन लगाने पर भी आपके छोरे की सेकण्ड डिविज़न आई है ...और मेरा छोरा अपनी क्लास में फर्स्ट आया है! और कुछ कहना है या मैं झाड़ू लगा लूं ...?

मेमसाब का पसीना छूट पड़ा ..मेमसाब को काटो तो खून नहीं ...मेमसाब थूक गटकने लगीं ...मेमसाब कभी अपने थोक के भाव बेटे को देखतीं ,कभी बाई के मरियल लड़के को!
बाई झाड़ू लगाकर जाते जाते बोली .." फ़ालतू में मेरे मुंह मत लगना अब !"

तभी माय एफ एम पर गाना बजा " छोडो भी ये गुस्सा ज़रा हंस के दिखाओ ...दादी अम्मा दादी अम्मा मान जाओ .."
मेमसाब ने गुस्से में रेडियो का टेंटुआ मरोड़ा ,एक नज़र पिज़्ज़ा खाते अपने जिगर के टुकड़े पर डाली ...बिना कारण एक झापड़ रसीद किया और आँखों में आंसू भर कर " ये रिश्ता क्या कहलाता कहलाता है " देखने लगीं!

Friday, May 17, 2013

सर्कस

उस बंदर की वजह से सर्कस बड़ा फेमस था।

एक दिन वो बंदर मर गया, सर्कस मालिक को बड़ी चिंता हुई कि अगर ये बात बाहर पता चली तो सर्कस का सम्मान घट जायेगा 
उसने चुपचाप बंदर को दफना दिया और एक बेरोजगार दुबले पतले युवा को कहा कि वो बंदर की खाल पहन कर करतब दिखाए अच्छे पैसे मिलेंगे 
वो राजी हो गया, और करतब दिखाने लगा । 

दर्शकों की रुचि को ध्यान में रखकर और अच्छा प्रर्दशन करने लगा
अब तो सर्कस और ज्यादा मशहूर हो गया हर शो फुल जाता था।

एक दिन हुवा यूं कि वो बंदर रस्सी पर गुलाटियां लेते हुए करतब दिखा रहा था अचानक रस्सी छूट गयी और वो बद्द से उपर से खुले शेर के पिंजड़े में जा टपका एकदम शेर के सामने!

उसकी हालत खराब, वो बचाओ! बचाओ! चिल्लाने ही वाला था
कि शेर ने उसके मुंह पर हाथ रखा और कान में बोला- ".
.
.
अबे चुप! मेरी भी नौकरी खायेगा क्या?".

बहुत समय पहले की बात है

बहुत समय पहले की बात है !! एक सरोवर में बहुत
सारे मेंढक रहते थे !! सरोवर के बीचों -बीच एक
बहुत पुराना धातु का खम्भा भी लगा हुआ था जिसे
उस सरोवर को बनवाने वाले राजा ने
लगवाया था !! खम्भा काफी ऊँचा था और
उसकी सतह भी बिलकुल चिकनी थी !!
एक दिन मेंढकों के दिमाग में आया कि क्यों ना एक
रेस करवाई जाए !! रेस में भाग लेने
वाली प्रतियोगीयों को खम्भे पर
चढ़ना होगा और जो सबसे पहले एक ऊपर पहुच
जाएगा वही विजेता माना जाएगा !!
रेस का दिन आ पंहुचा !! चारो तरफ बहुत भीड़
थी !! आस -पास के इलाकों से भी कई मेंढक इस रेस में
हिस्सा लेने पहुचे !! माहौल में सरगर्मी थी !! हर
तरफ शोर ही शोर था !!
रेस शुरू हुई, लेकिन खम्भे को देखकर भीड़ में एकत्र
हुए किसी भी मेंढक को ये यकीन नहीं हुआ कि कोई
भी मेंढक ऊपर तक पहुंच पायेगा !! हर तरफ
यही सुनाई देता - "अरे ये बहुत कठिन है !!
वो कभी भी ये रेस पूरी नहीं कर पायंगे !!
सफलता का तो कोई सवाल ही नहीं !! इतने चिकने
खम्भे पर चढ़ा ही नहीं जा सकता !!"
और यही हो भी रहा था, जो भी मेंढक कोशिश
करता, वो थोड़ा ऊपर जाकर नीचे गिर जाता !!
कई मेंढक दो -तीन बार गिरने के बावजूद अपने
प्रयास में लगे हुए थे !!
पर भीड़ तो अभी भी चिल्लाये जा रही थी - "ये
नहीं हो सकता , असंभव !!" और वो उत्साहित मेंढक
भी ये सुन-सुनकर हताश हो गए और अपना प्रयास
छोड़ दिया !!
लेकिन उन्ही मेंढकों के बीच एक छोटा सा मेंढक था,
जो बार -बार गिरने पर भी उसी जोश के साथ
ऊपर चढ़ने में लगा हुआ था !! वो लगातार ऊपर
की ओर बढ़ता रहा और अंततः वह खम्भे के ऊपर पहुच
गया और इस रेस का विजेता बना !!
उसकी जीत पर सभी को बड़ा आश्चर्य हुआ !!
सभी मेंढक उसे घेर कर खड़े हो गए और पूछने लगे -
"तुमने ये असंभव काम कैसे कर दिखाया, भला तुम्हे
अपना लक्ष्य प्राप्त करने की शक्ति कहाँ से
मिली, ज़रा हमें भी तो बताओ कि तुमने ये विजय
कैसे प्राप्त की ??"
तभी पीछे से एक आवाज़ आई - "अरे उससे क्या पूछते
हो , वो तो बहरा है !!"
अक्सर हमारे अन्दर अपना लक्ष्य प्राप्त करने
की काबीलियत होती है, पर हम अपने चारों तरफ
मौजूद नकारात्मकता की वजह से खुद को कम आंक
बैठते हैं और हमने जो बड़े-बड़े सपने देखे होते हैं उन्हें
पूरा किये बिना ही अपनी ज़िन्दगी गुजार देते
हैं !! आवश्यकता इस बात की है हम हमें कमजोर
बनाने वाली हर एक आवाज के प्रति बहरे और ऐसे
हर एक दृश्य के प्रति अंधे हो जाएं !!
और तब हमें
सफलता के शिखर पर पहुँचने से कोई नहीं रोक
पायेगा !!

साहूकार बहुत चालाक

एक किसान को गाँव के साहूकार से कुछ धन उधार
लेना पड़ा।
बूढा साहूकार बहुत चालाक और धूर्त था, उसकी नज़र किसान की खूबसूरत बेटी पर थी।
अतः उसने किसान से एक सौदा करने का प्रस्ताव
रखा। उसने कहा कि अगर किसान अपनी बेटी की शादी साहूकार से कर दे
तो वो उसका सारा कर्ज माफ़ कर देगा।
किसान और उसकी बेटी, साहूकार के इस प्रस्ताव से कंपकंपाउठे। तब साहूकार ने उनसे कहा कि ठीक है,
अब ईश्वर को ही यह
मामला तय करने देते हैं।
उसने कहा कि वो दो पत्थर उठाएगा,एक कालाऔर एक सफ़ेद, और उन्हें एक खाली थैले में डाल देगा। फिर किसान की बेटी को उसमें से एक पत्थर उठाना होगा-
१-अगर वो काला पत्थर उठाती है तो वो मेरी पत्नी बन जायेगी और किसान का सारा कर्ज माफ़ हो जाएगा ,
२-अगर वो सफ़ेद पत्थर उठाती है तो उसे साहूकार
से शादी करने की जरूरत नहीं रहेगी और फिर
भी किसान का कर्ज माफ़ कर दिया जाएगा,
३-पर अगर वो पत्थर उठाने से मना करती है
तो किसान को जेल में डाल दिया जाएगा।
वो लोग किसान के खेत में एक पत्थरों से भरी पगडण्डी पर खड़े थे, जैसे ही वो बात कर रहे
थे, साहूकार ने नीचे झुक कर दो पत्थर उठा लिये,
जैसे ही उसने पत्थर उठाये, चतुर बेटी ने देख लिया कि उसने दोनों ही काले पत्थर उठाये हैं और उन्हें थैले में डाल दिया।
फिर साहूकार ने किसानकी बेटी को थैले में से एक पत्थर उठाने के लिये कहा।
अब किसान की बेटी के लिये बड़ी मुश्किल होगयी, अगर वो मना करती है तो उसके पिता को जेल में डाल
दिया जाएगा,
और अगर पत्थर उठाती है तो उसे साहूकार से शादी करनी पड़ेगी।
किसान की बेटी बहुत समझदार थी, उसने थैले में
हाथ डाला और एक पत्थर
निकाला, उसे देखे बिना ही घबराहट में पत्थरों से भरी पगडण्डी पर नीचे गिरादिया,
जहां वो गिरते ही अन्य पत्थरों के बीच गुम
हो गया।
"हाय, मैं भी कैसी अनाड़ी हूँ", उसने कहा," किन्तु कोई बात नहीं,अगर आप थैले में दूसरा पत्थर
देखेंगे तो पता चल जाएगा कि मैंने कौनसापत्थर
उठाया था।"
क्योंकि थैले में अभीदूसरा पत्थर है, किसान की बेटी जानती थी कि थैली से केवल काला पत्थर निकलेगा और यही माना जायेगा कि उसने सफ़ेद पत्थर उठाया था और साहूकार भी अपनी बेईमानी को स्वीका नहीं कर पाता इस तरह होशियार किसानकी बेटी ने असंभव
को संभव कर दिखाया।
"बड़ी से बड़ी समस्या का भी हल होता है, बस हम
उसे हल करने का कदम नहीं उठाते

Thursday, May 16, 2013

एक बकरा था

ज्ञानी व्यक्ति 2 मिनट देकर पूरा जरुर। पढ़े :--
किसी राजा के पास एक बकरा था. एक बार उसने एलान किया की जो कोई एस बकरे
को जंगल में चराकर तृप्त करेगा मैं उसे आधा राज्य दे दूंगा. किंतु बकरे का पेट
पूरा भरा है या नहीं इसकी परीक्षा मैं खुद करूँगा. इस एलान को सुनकर एक मनुष्य
राजा के पास आकर कहने लगा की बकरा चरना कोई बड़ी बात नहीं है.वह बकरे
को लेकर जंगल में गया और सारे दिन उसे घास चरता रहा. शाम तक उसने बकरे
को खूब घास खिलाई और फिर सोचा की सारे दिन इसने इतनी घास खाई है अब
तो इसका पेट भर गया होगा तो अब इसको राजा के पास ले चलूँ. बकरे के साथ वह
राजा के पास गया. राजा ने थोड़ी सी हरी घास बकरे के सामने रखी तो बकरा उसे
खाने लगा. इसपर राजा ने उस मनुष्य से कहा की तूने उसे पेट भर
खिलाया ही नहीं वर्ना वह घास क्यों खाने लगता. बहुतों ने बकरे का पेट भरने
का प्रयत्न किया किंतु ज्योंही दरबारमें उसके सामने घास डाली जाती की वह खाने
लगता. एक सत्संगी ने सोचा इस एलान का कोई रहस्य है, तत्व है. मैंयुक्ति से
काम लूँगा. वह बकरे को चराने के लिए ले गया. जब भी बकरा घास खाने के लिए
जाता तो वह उसे लकड़ी से मार देता. सारे दिन में ऐसा कई बार हुआ. अंत में बकरे ने
सोचा की यदि मैं घास खाने का प्रयत्न करूँगा तो मार खानी पड़ेगी. श्याम को वह
सत्संगी बकरे को लेकर राजदरबार में लौटा. बकरे को उसने बिलकुल घास
नहीं खिलाई थी फिर भी राजा से कहा मैंने इसको भरपेट खिलाया है. अत: यह अब
बिलकुल घास नहीं खायेगा. कर लीजिये परीक्षा. राजा से घास डाली लेकिन उस
बकरे ने उसे खाया तो क्या देखा और सूंघा तक नहीं. बकरे के मन में यह बात बैठ
गयी थी की घास खाऊंगा तो मार पड़ेगी. अत: उसनेघास नहीं खाई.
यह बकरा हमारा मन ही है. बकरे को घास चराने ले जाने वाला जीवात्मा है.
राजा परमात्मा है. मन को मारो, मन पर अंकुश रखो. मन सुधरेगा तो जीवन सुधरेगा.
मन को विवेकरूपी लकड़ी से रोज पीटो. भोग से जीव तृप्त नहीं हो सकता.
भोगी रोगी होता है. भोगी की भूख कभी शांत नहीं होती. त्याग में ही तृप्ति समाई हुई
है ||

सभी आँकडे 2012 के हैँ...!!

सभी आँकडे 2012 के हैँ...!!

#भारत मेँ 33 हजार काँलेज हैँ परन्तु इनमे से एक भी विश्व के 200 मे नहीँ है

#विश्व शिक्षा सूची मेँ शामिल 181 देशोँ मेँ भारत का स्थान 150 के करीब है

#गुणवत्ता के हिसाब से 73 देशोँ मेँ 72 वे स्थान पर है

#बी ए के 10 ग्रेजुएट मेँ से मात्र 1 नौकरी के लायक है

# बी टेक के 4 ग्रेजुएट मेँ से मात्र 1 नौकरी के लायक है

#प्राथमिक स्कूलोँ मे78% बच्चे दाखिला लेते हैँ पर मात्र 13% उच्च अर्थात 6 कक्षा मेँ दाखिला लेते हैँ

#भारत के 90% मेँ से 70% विश्व विद्यालय औसत दर्जे की शिक्षा भी नहीँ दे पा रहे...!!

इसके मुख्य कारण:

#हमे बचपन से 33%अंक लाने की आदत डाल कर देश मेँ गधे पैदा किये जाते हैँ तथा गरीब को गरीब बना कर रखा जाता है

#हालाँकि देश कि जिनके पास हैसियत है वो अपना पेट काट कर अपने बच्चे पब्लिक स्कूलोँ मेँ पढाते पाते हैँ

#देश की 75% से ज्यादा आबादी जो 20 रुपये रोज की मोहताज है वो क्या करे?

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Tuesday, May 14, 2013

METHI MATAR MALAI RECIPE



methi matar malai
      I have always wondered how methi in the methi mutter malai could taste and afraid of trying it if it could be bitter. But when I tried last week, there was not even a pinch of bitter taste in the gravy. May be the butter, cream and milk we are using in the recipe. I was thinking how I will like and afraid how Aj will like it. But he loved it! So when ever I get fresh methi leaves, I am gonna make this. Pair it with Naan or roti, you will sure love it! Recipe slightly adapted from here.
methi matar malai

Methi Matar Malai Recipe


   Prep & Cooking time : 30 mins  Serves : 3

 

Ingredients


Green peas(frozen)2 cups
Methi leaves fresh1 cup
Cream1/4 cup
Milk1/2 cup
Garam masala1/2 tsp
Turmeric (optional)a pinch
Butter1 tblsp
Kasoori methi(optional)2 pinches
Saltas needed
Jeera1 tsp

 

To fry and grind


Onion1
Cashews7
Green chilli5
Ginger1 small piece
Cardamom2
Cloves1

 

Method


  1. Wash methi leaves and separate the leaves from stem. Chop it roughly.2-methimuttermalai 
  2. In a kadai, heat butter, add cardamom, cloves, onion, green chilli, ginger. Fry until onions are transparent. Cool down and add cashews and place in the blender.1-methimuttermalai
  3. Grind it into a smooth paste. Heat kadai with remaining butter and add jeera.3-methimuttermalai 
  4. Add the ground paste and fry well in medium heat.Cook until raw smell goes off with out changing the colour.4-methimuttermalai
  5. Add green peas and methi. Fry until peas gets cooked well.5-methimuttermalai
  6. Add turmeric and garam masala. Fry for 2 minutes. Add milk and mix well. The flame should be medium and cook for 3-4 minutes. Do not boil in high flame.6-methimuttermalai 
  7. Lastly add the cream and mix well. Let it be for 2 minutes in medium flame again. Switch off the flame and transfer to the serving bowl.7-methimuttermalai
Notes

    • You can skip garam masala, kasoori methi and turmeric. But it gives some flavour to the gravy.
    • After adding milk or cream never put the stove flame to high.
    • Cashews are important as binding agent for keeping the milk or cream from not curdling. So do not skip it.
    • Pinch of sugar can be added to retain the green colour of the peas while frying.
    • You can pre cook the peas too and then proceed with the preparation.
    • If you are using dried peas, soak overnight or for 12 hours and then pressure cook it for 2 – 3 whistles and then make this gravy.
    • If using fresh ones, cook it before proceeding.
     
        Serve with rotinaan or any pulavs. I would love to have this with naan. Yummy and creamy methi matar malai!

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