Tuesday, September 24, 2013

ध्यान आकर्षित

एक दिन किसी निर्माण के दौरान भवन की छटी मंजिल से सुपर वाईजर ने नीचे कार्य करने वाले मजदूर को आवाज दी.
निर्माण कार्य की तेज आवाज के कारण नीचे काम करने वाला मजदूर कुछ समझ नहीं सका की उसका सुपरवाईजर उसे आवाज दे रहा है.
फिर
सुपरवाईजर ने उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए एक १० रु का नोट नीचे फैंका, जो ठीक मजदूर के सामने जा कर गिरा
मजदूर ने नोट उठाया और अपनी जेब मे रख लिया, और फिर अपने काम मे लग गया .
अब उसका ध्यान खींचने के लिए सुपर वाईजर ने पुन: एक ५०० रु का नोट नीचे फैंका .
उस मजदूर ने फिर वही किया और नोट जेब मे रख कर अपने काम मे लग गया .
ये देख अब सुपर वाईजरने एक छोटा सा पत्थर का टुकड़ा लिया और मजदूर के उपर फैंका जो सीधा मजदूर के सिर पर लगा. अब मजदूर ने ऊपर देखा और उसकी सुपर वाईजर से बात चालू हो गयी.
ये वैसा ही है जो हमारी जिन्दगी मे होता है.....
भगवान् हमसे संपर्क करना ,मिलना चाहता है, लेकिन हम दुनियादारी के कामो मे व्यस्त रहते है, अत: भगवान् को याद नहीं करते.
भगवान् हमें छोटी छोटी खुशियों के रूप मे उपहार देता रहता है, लेकिन हम उसे याद नहीं करते, और वो खुशियां और उपहार कहाँ से आये ये ना देखते हुए,उनका उपयोग कर लेते है, और भगवान् को याद नहीं करते.
भगवान् हमें और भी खुशियों रूपी उपहार भेजता है, लेकिन उसे भी हम हमारा भाग्य समझ कर रख लेते है, भगवान् का धन्यवाद नहीं करते ,उसे भूल जाते है.
तब भगवान् हम पर एक छोटा सा पत्थर फैंकते है , जिसे हम कठिनाई कहते है, और तुरंत उसके निराकरण के लिए भगवान् की और देखते है,याद करते है.
यही जिन्दगी मे हो रहा है.
यदि हम हमारी छोटी से छोटी ख़ुशी भी भगवान् के साथ उसका धन्यवाद देते हुए बाँटें, तो हमें भगवान् के द्वारा फैंके हुए पत्थर का इन्तजार ही नहीं करना पड़ेगा...!!!!!

आतंकवाद क्या है

कहीं भी कोईं बम विस्फोट होता है तो आतंकवाद पर बहस छिड़ जाती है ये बहस गली मोहल्लों शहर की पान की दुकानों, चाय की दुकानों रेल में बस में सफर करने वाले डेली पेसेंजरों से शुरु होकर बड़े – बड़े मीडिया हाऊस के पैनल डिसक्सन तक पहुंच जाती है। लेकिन आतंकवाद क्या है उसकी परिभाषा क्या है ? उसका जनक कौह है ? ये कहीं सुनने को नहीं मिला और न ही कोई सटीक परिभाषा गढ़ी गई जिससे आतंकवाद को परिभाषित किया जा सके अगर 9/11 को ही आतंकवाद माना जाता है है तो नागाशाकी और हिरोशिमा की जमीन को बंजर बनाने वाला परमाणू हमला क्या था ? सम्राट अशोक द्वारा किया गया कलिंग का संहार क्या था ? अंग्रेजों द्वारा किया गया जलियां वाला बाग क्या था ? पवन पुत्र हनुमान जी द्वारा सोने की लंका को जला देना क्या था ? अमेरिका में जो हमला होता है तो वह आतंकी करते हैं मगर जब अमेरिका द्वारा ईराक, अफ्गानिस्तान, पाकिस्तान में ड्रोन हमले किये जाते हैं वह क्या है ? क्या वह आतंकवाद नहीं है ? फिस्तीनियों का इजरईल द्वारा किया गया नरसंहार क्या है ? 1983 में असम के नेली में किया गया 5000 बंग्लादेशिय़ों का संहार क्या था ? 1984 में दिल्ली में सिक्खों में का नरसंहार क्या था ? क्या वह आतंकवाद नहीं था ? 1987 में मेरठ के मलियाना हाशिमपुरा में पीएसी के द्वारा किया गया अल्पसंख्कों का कत्ल ऐ आम क्या था ? 1993 में मुंबई में शिवसेना के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया 1100 अल्पसंख्यकों का कत्ल ओ गारत क्या था ? क्या वह आतंकवाद नहीं था ? उसके बाद 2002 में भारत के कथित विकसित राज्य में जो हुआ क्या वह आतंकवाद नहीं था ? उसके बाद असम में, फारबिसगंज में, मुजफ्फरनगर में, महाराषट्रा के धूले में पश्चिमी यूपी के मसूरी में होने वाली घटनाओं को आप कौनसे चश्में से देखते हैं ? अगर निर्दोषों को ही मारना ही आतंकवाद है तो क्या उपरोक्त घटनाओं में मरने वाले निर्दोष नहीं थे ? अगर दिल्ली, मुंबई, समझोता एक्सप्रेस, अजमेर, हैदराबाद, बंग्लूरू अमेरिका, केनिया, इंग्लेंड आदी स्थानों पर बम विस्फोट करना ही आतंकवाद है तो फिर उपरोक्त घटनाओं को आप क्या नाम देंगे ? क्या ये आतंकवाद नहीं है ? क्या इन घटनाओं में मरने वाले निर्दोष नहीं थे ? बगदाद की सड़कों पर बहते हुऐ खून को, सीरिया में कैमिकल हमले में कतार लगाकर मारे गये लोगों के खून को किस घटना से जोड़ेंगे क्या वह आतंकवाद नहीं है ? अफसोस ये सब आतंकवाद है मगर हम और हमारे बुद्धीजीवी आतंकवाद की उसी परिभाषा को मानते हैं जिसे अमेरिका मानता है। 

भेड़िया

एक दिन भेड़िया मजे से
मछली खा रहा था की अचानक
मछली का कांटा उसके गले में अटक गया |
भेड़िया दर्द के मारे चीखा-चिल्लाया | वह
इधर-उधर भागता फिरा | पर उसे चेन न
मिला | उससे न खाते बनता था न पीते
बनता था |
तभी उसे नदी किनारे खड़ा एक सारस दिखाई
दिया | भेड़िया सारस के पास गया |
भेड़िया की आँखे में आसू थे | वह
गिडगिडा कर बोला, “सारस भाई, मेरे गले में
कांटा अटक गया है | मेरे गले से कांटा निकल
दो | में तुम्हारा अहसान कभी न भुलुगा | मुझे
इस दर्द से छुटकारा दिला दो |
सारस को भेडिये पर दया आ गई | उसने
अपनी लंबी चोंच भेडिये के गले में डाली और
कांटा निकाल दिया | भेडिये को बड़ा चेन
मिला | सारस बोला, भेडिये भाई मेने आप
की मदद की है अब आप मुझे कुछ इनाम दो |
इनाम की बात सुनते ही भेडिये को गुस्सा आ
गया | सारस की अपने बड़े-बड़े दांत दिखाते
हुए बोला, “तुझे इनाम चाहिए? एक तो मेरे मुंह
में अपनी गंदी चोंच डाली | मेने सही –
सलामत निकल लेने दी | और अब इनाम
मांगता है | जिंदा रहना चाहता है तो भाग
जा यंहा से इनाम मांगता है |”
बेचारा सारस वहा से चुप चाप चला गया |
सीख: जो भी आप की मदद करे
उसकी हमेशा मदद करे |

स्त्री

एक बार ध्यान लगाकर पढ़िएगा जरूर।
एक आदमी जब पैदा होता है तो उस समय जब
उसकी जीवन उर्जा बड़ी संवेदनशील होती है
तो उसे एक स्त्री ही संभालती है…



….
वो है उसकी माँ.
.…

फिर जब थोडा सा बड़ा होता है (बैठने लायक)
तो वहां भी एक लड़की ही मिलती है
जो उसकी देखरेख करती है उसके साथ खेलती है
….
उसका मन बहलाती है……. जब तक
की वो इतना बड़ा नहीं हो जाता की बाहर
के संसार में अपने दोस्त बना सके…

..
….
वो है उसकी बहिन……
……
फिर जब वो स्कूल जाता है तो वहां फिर एक
महिला है जो उसकी सहायता
करती है….. चीज़ों को समझने में………… उसे
सहारा देती है, उसकी कमजोरियों को दूर करने
में….. और उसको एक अच्छा इंसान बनाने
में…

……
वो है उसकी अध्यापिका…
…….…
फिर जब वो बड़ा होता है……….. और जब
जीवन
से उसका संघर्ष शुरू
होता है…. जब भी वो संघर्ष में वो कमजोर
हो जाता है…..
तो एक लड़की ही उसको साहस देती है


वो है उसकी प्रेमिका
(सामान्यत:)

……. .
जब आदमी को जरूरत होती है………. साथ
की अपनी अभिव्यक्ति प्रकट
करने के लिए …… अपना दुःख और सुख बाटने
के लिए फिर एक लड़की वहां
होती है…

…..
वो है उसकी पत्नी……
…..
फिर जब जीवन के संघर्ष और रोज
की मुश्किलों का
सामना करते करते आदमी कठोर होने लगता है
……..
तब उसे निर्मल बनाने वाली भी एक
लड़की ही होती है…

…..
और वो है उसकी बेटी.……
……
और जब आदमी की जीवन यात्रा ख़त्म होगी तब
फिर एक स्त्रीलिंग ही होगी जिससे उसका अंतिम
मिलन होगा ….. जिसमे वो समां कर
पूरा हो जायेगा…
....
...
… और वो होगी मात्रभुमि…
…..…
.
.
.
.
याद रखें अगर आप मर्द हैं तो सम्मान दें हर
महिला को…
……

……
जो हर पल आपके साथ किसी न किसी रूप में
है…

Sunday, September 22, 2013

इस दुनिया में हिन्दू तो पहले से हैं,लेकिन मुसलमान बाद में क्यों बने...???

प्रश्नः इस दुनिया में हिन्दू तो पहले से हैं,लेकिन मुसलमान बाद में क्यों बने...???

उत्तरःमानव इतिहास का अध्ययन करने से पता चलता है कि इस धरती पर अलग अलग विभिन्न मानव नहीं बसाए गए अपितु एक ही मानव से सारा संसार फैला है। निम्नलिखित तथ्यों पर ध्यान दें, आपके अधिकांश संदेह खत्म हो जाएंगे।
सारे मानव का मूलवंश एक ही पुरूष तक पहुंचता है, ईश्वर ने सर्वप्रथम विश्व के एक छोटे से कोने धरती पर मानव का एक जोड़ा पैदा किया जिनको आदम तथा हव्वा के नाम से जाना जाता है। उन्हीं दोनों पति-पत्नी से मनुष्य की उत्पत्ति का आरम्भ हुआ जिन को कुछ लोग मनु और शतरूपा कहते हैं तो कुछ लोग एडम और ईव जिनका विस्तारपूर्वक उल्लेख पवित्र ग्रन्थ क़ुरआन(230-38) तथा भविष्य पुराण प्रतिसर्ग पर्व खण्ड 1 अध्याय 4 और बाइबल उत्पत्ति (2/6-25) और दूसरे अनेक ग्रन्थों में किया गया है। उनका जो धर्म था उसी को हम इस्लाम कहते हैं जो आज तक सुरक्षित है।
ईश्वर ने मानव को संसार में बसाया तो अपने बसाने के उद्देश्य से अवगत करने के लिए हर युग में मानव ही में से कुछ पवित्र लोगों का चयन किया ताकि वह मानव मार्गदर्शन कर सकें। वह हर देश और हर युग में भेजे गए, उनकी संख्या एक लाख चौबीस हज़ार तक पहुंचती है, वह अपने समाज के श्रेष्ट लोगों में से होते थे तथा हर प्रकार के दोषों से मुक्त होते थे। उन सब का संदेश एक ही था कि केवल एक ईश्वर की पूजा की जाए, मुर्ति-पूजा से बचा जाए तथा सारे मानव समान हैं, उनमें जाति अथवा वंश के आधार पर कोई भेदभाव नहीं।
परन्तु उनका संदेश उन्हीं की जाति तक सीमित होता था क्योंकि मानव ने इतनी प्रगति न की थी तथा एक देश का दूसरे देशों से सम्बन्ध नहीं था। उनके समर्थन के लिए उनको कुछ चमत्कारियां भी दी जाती थीं, जैसे मुर्दे को जीवित कर देना, अंधे की आँखें सही कर देना, चाँद को दो टूकड़े कर देना आदि।
लेकिन यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि पहले तो लोगों ने उन्हें ईश्दूत मानने से इनकार किया कि वह तो हमारे ही जैसा शरीर रखने वाले हैं। फिर जब उनमें असाधारण गुण देख कर उन पर श्रृद्धा भरी नज़र डाली तो किसी समूह ने उन्हें ईश्वर का अवतार मान लिया तो किसी ने उन्हें ईश्वर की सन्तान मान कर उन्हीं की पूजा आरम्भ कर दी। उदाहरण स्वरूप गौतम बुद्ध को देखिए बौद्ध मत के गहरे अध्ययन से केवल इतना पता चलता है कि उन्हों ने ब्रह्मणवाद की बहुत सी ग़लतियों की सुधार की थी तथा विभिन्न पूज्यों का खंडन किया था परन्तु उनकी मृत्यु के एक शताब्दी भी न गुज़री थी कि वैशाली की सभा में उनके अनुयाइयों ने उनकी सारी शिक्षाओं को बदल डाला और बुद्ध के नाम से ऐसे विश्वास नियत किए जिसमें ईश्वर का कहीं भी कोई वजूद नहीं था। फिर तीन चार शताब्दियों के भीतर बौद्ध धर्म के पंडितों ने कश्मीर में आयोजित एक सभा में उन्हें ईश्वर का अवतार मान लिया।

बुद्धि की दुर्बलता कहिए कि जिन संदेष्टाओं नें मानव को एक ईश्वर की ओर बोलाया था उन्हीं को ईश्वर का रूप दे दिया गया।

इसे यूं समझिए कि यदि कोई पत्रवाहक एक व्यक्ति के पास उसके पिता का पत्र पहुंचाता है तो उसका कर्तव्य बनता है कि पत्र को पढ़े ताकि अपने पिता का संदेश पा सके परन्तु यदि वह पत्र में पाए जाने वाले संदेश को बन्द कर के रख दे और पत्रवाहक का ऐसा आदर सम्मान करने लगे कि उसे ही पिता का महत्व दे बैठे तो इसे क्या नाम दिया जाएगा....आप स्वयं समझ सकते हैं।

ऐसा ही बिल्कुल संदेष्टाओं के साथ भी हुआ।

जब सातवी शताब्दी में मानव बुद्धि प्रगति कर गई और एक देश का दूसरे देशों से सम्बन्ध बढ़ने लगा तो ईश्वर ने अलग अलग हर देश में संदेश भेजने के नियम को समाप्त करते हुए विश्वनायक का चयन किया। जिन्हें हम मुहम्मद सल्ल0 कहते हैं, उनके पश्चात कोई संदेष्टा आने वाला नहीं है, ईश्वर ने अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्ल0 को सम्पूर्ण मानव जाति का मार्गदर्शक बना कर भेजा और आप पर अन्तिम ग्रन्थ क़ुरआन अवतरित किया जिसका संदेश सम्पूर्ण मानव जाति के लिए है । उनके समान धरते ने न किसी को देखा न देख सकती है। वही कल्कि अवतार हैं जिनकी हिन्दु समाज में आज प्रतीक्षा हो रही है।

Friday, September 13, 2013

सकारात्मक

अपनाएं खुश रहने के कुछ टिप्स...
हरदम खुश रहें.
खुशी मन की एक अवस्था का नाम है। इस
भागती-दौड़ती जिंदगी में हर कोई खुश
रहना चाहता है, पर रह नहीं पाता है।
इसका कारण यह है कि हर कोई काम के दबाव से
दो-चार है। रही-सही कसर अन्य घरेलू काम
पूरा कर देते हैं। बच्चों की-सी खुशी अब दुर्लभ
प्रतीत होती है। खेलते बच्चों का चिल्ला कर
खुशी का इजहार करना अब बहुत कम देखने
को मिलता है, क्योंकि आजकल के बच्चे पढ़ाई के
बोझ-तले दबे हुए हैं। उन्हें इतना होमवर्क
मिलता है कि वे चाह कर भी अधिक खेल और
खुशी का इजहार नहीं कर पाते हैं।
हमेशा सकारात्मक सोचें :- खुश रहने के लिए हमें
चाहिए कि हम हमेशा सकारात्मक ही सोचें।
नकारात्मकता से मन व शरीर पर विपरीत प्रभाव
पड़ता है। यह हो गया तो क्या होगा?
वो हो गया तो क्या होगा? आदि-आदि अनेक
प्रकार के नकारात्मक विचारों को झिड़क दें।
इससे कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है सिवाय
तनाव के।
हंसमुख रहें : - हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें। उदास
व गमगीन चेहरा किसी को भी नहीं लुभाता है।
हंसमुख व्यक्ति के आसपास सदा सभी लोग
मंडराते रहते हैं, जबकि दुखी या निराश
व्यक्ति से लगभग सभी लोग किनारा कर लेते हैं।
इसलिए व्यक्ति को हर परिस्थिति में मुस्कुराते
रहना चाहिए।
चार्ली चैप्लिन से प्रेरणा लें :- मशहूर ब्रिटिश
हास्य कलाकार चार्ली चैप्लिन के निजी जीवन
को अगर हम देखें तो पाएंगे कि वे काफी दुखी,
निराश एवं एक हद तक गरीब व्यक्ति थे।
बावजूद इसके, उन्होंने अपने निजी जीवन
को कभी भी चेहरे व पर्दे पर प्रकट नहीं होने
दिया।
उनकी एक प्रेमिका ने उनको सिर्फ इसलिए छोड़
दिया, क्योंकि उनके पास धन का अभाव था,
यानी वे 'गरीब' कलाकार थे। इस पर उन्होंने
सोचा था कि प्रेमिका भी उसी के पास होती है
जिसके पास धन होता है। इसका उन्हें
गहरा सदमा लगा था।
इसके बाद भी उन्होंने अपने निजी जीवन को अपने
ऊपर हावी नहीं होने दिया तथा अपनी कला के
माध्यम से ‍ब्रिटेन ही नहीं,
सारी दुनिया को हंसाया और आज
भी ‍‍‍फिल्मी पर्दे के माध्यम से हंसा रहे हैं। उनके
जैसा हंसोड़ कलाकार अब कहां? तो यह है
परिस्थितियों से पार पाने का तरीका।
परिस्थितियां आती-जाती हैं : - हर व्यक्ति के
जीवन में उतार-चढ़ाव आते-जाते रहते हैं। इनसे
निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि अपना मनोबल
मजबूत कर उससे लोहा लेने के लिए भिड़
जाना चाहिए। अगर हम महापुरुषों की जीवनी पढ़ें
तो पाएंगे कि उनके जीवन में कई विषम
परिस्थितियां आईं किंतु उन्होंने हार
नहीं मानी और परिस्थितियों को अपने पक्ष में
कर लिया।
उन्होंने परिस्थितियों का डटकर
मुकाबला किया तथा हमेशा मुस्कुराते रहें।
कभी भी उनका उदास चेहरा हमने नहीं देखा।
गांधीजी व नेहरूजी का तो हमने
मुस्कुराता चेहरा ही देखा है, कभी भी उदास
या गमगीन नहीं।
खिलखिलाओ और जोर से हंसो :- चाहे
कैसी भी परिस्थिति हो, इंसान
को हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए। खिलखिलाने से
मनुष्य का तनाव कम होता है तथा वह चिंतामुक्त
होता है और शरीर से सकारात्मक
रसायनों का स्राव होता है। मनोचिकित्सक
भी कहते हैं कि हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहने
वाला व्यक्ति जीवन-पथ पर
हमेशा अग्रणी रहता है तथा वह अन्य के मुकाबले
जुझारू होता है।
इस प्रकार की छोटी-बड़ी बातों को ध्यान में
रखकर हम भी खुश रह सकते हैं तथा जीवन
को उमंग उत्साह से भरपूर कर सकते हैं। तो आप
भी आज और अभी से खिलखिलाना शुरू कर
दीजिए तथा दूसरों को भी खिलखिलाइए।

"अगले जनम मोहे बिटिया न देना"

महानायक अमिताभ बच्चन ने दिल्ली दुष्कर्म
पीड़िता को अपनी श्रद्धांजलि स्वरुप यह
कविता लिखी----------- --
==========================
माँ बहुत दर्द सह कर।
बहुत दर्द दे कर..
तुझसे कुछ कह कर मैं जा रही हूँ........
आज मेरी विदाई में जब सखियाँ मिलने
आएँगी...
सफ़ेद जोड़े में लिपटी देख सिसक सिसक मर
जाएँगी...
लड़की होने का खुद पे फिर वो अफ़सोस
जताएंगी.....
माँ तू उनसे इतना कह
देना दरिंदो की दुनिया में संभल कर
रहना.......... .....
माँ राखी पर जब भैया की कलाई सूनी रह
जाएगी..
याद मुझे कर कर जब उनकी आँख भर
आयेगी....
तिलक माथे पर करने को माँ रूह मेरी भी मचल
जाएगी...
माँ तू भैया को रोने न देना...
मैं साथ हूँ हर पल उनसे कह देना....... ... ..
माँ पापा भी छुप छुप बहुत रोएंगे ...
मैं कुछ न कर पाया ये कह के खुद
को कोसेंगे....
माँ दर्द उन्हें ये होने न देना..
इलज़ाम कोई लेने न देना...
वो अभिमान है मेरा सम्मान है मेरा..
तू उनसे इतना कह देना........
माँ तेरे लिए अब क्या कहूँ
दर्द को तेरे शब्दों में कैसे बाँधू ...
फिर से जीने का मौका कैसे मांगू......
माँ लोग तुझे सतायेंगे....
मुझे आजादी देने का तुझपे इलज़ाम लगायेंगे....
माँ सब सह लेना पर ये न कहना ---
"अगले जनम मोहे बिटिया न देना"
"अगले जनम मोहे बिटिया न देना"

रोचक तथ्य

रोचक तथ्य :-
1. मनुष्य का दाया फेफडा, बाएँ फेफडे से
बड़ा होता है क्योकि उसने दिल
को जगह देनी होती है.
2. आपकी हाथ की हथेली और पैर
का हथेली पर कभी भी बाल नही आ सकते.
3. जिन लोगो कि शरीर पर तिलों
की संख्या ज्यादा होती है वह औसतन कम
तिल वाले लोगो से ज्यादा जीते हैं.
4. अपने muscles के बारे में
सोचना आपको ताकतवर बनाता है.
5. दुनिया के सबसे कम उम्र के मां-बाप 8
और 9 साल के थे और 1910 में चीन में रहते
थे.

Saturday, August 31, 2013

फ़ेसबुकिया ज्ञान

लड़का पढ़ने में ध्यान नहीं लगता था - सारे दिन फेसबुक पर बैठा चैट करता था .

परीक्षा में कम नंबर आने पर बाप ने लड़के को 4 झापड़ रसीद कर दिये |

लड़का रोने लगा तो बाप ने कहा : सॉरी - चुप हो जाओ
अब से ध्यान लगा कर पढ़ो .

लड़ने ने अपनी नोटबुक से एक पेज फाड़ा और उस कागज को अपने बाप के हाथ में दे कर बोला - इसको मुट्ठी में भींच दीजिये .

बाप ने वो कागज लिया और मुट्ठी में भींच दिया.

लड़के ने कागज को फैला कर सीधा किया और दिखा कर बोला : अब इस कागज को सॉरी बोलिए और देखिये इसकी सलवटें जाती हैं क्या ?

बाप ने स्कूटर की चाबी दे कर कहा : मेरा स्कूटर स्टार्ट करो .

लड़ने ने 1 किक मारी - स्कूटर स्टार्ट नहीं हुआ.

बाप ने आ कर ज़ोर लगा कर 4 किक मारी - स्कूटर स्टार्ट हो गया .

बाप ने लड़के से पूछा : स्कूटर स्टार्ट कैसे हुआ ? ज़ोर से 4 किक मारने से ना ?

लड़का : हाँ .

बाप : तू भी इस स्कूटर की तरह है.और आइंदा तेरा
फ़ेसबुकिया ज्ञान मुझे मत देना !!

don't write on corrency note


कृपया शेयर करें ...

भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा निर्देश:

आज भारतीय मुद्रा "नोट" पर मात्र लिखने की वजह से ही,
भारतीय सरकार, हर साल करीब 2638 करोड़ रूपये खो देती है
करेंसी नोट पर कुछ भी लिखने से वे एस.टी.डी.
लेनदेन के लिए भी इस्तेमाल नहीं किये जा सकते ....

जैसे: हमें कभी भी ए.टी.एम. में लिखे नोट्स(new) नहीं मिलते ......

क्या आपने डॉलर या पाउंड देखा है जिस पर कुछ लिखा हो ??

जब हम इसका मूल्य जानेंगे तभी हम अपनी मुद्रा का सच्चा सम्मान कर पाएंगे !!!!!
जागो भारत जागो

Wednesday, August 28, 2013

आखिरी काम !

आखिरी काम !

एक बूढ़ा कारपेंटर अपने काम के लिए काफी जाना जाता था ,
उसके बनाये लकड़ी के घर दूर -दूर तक प्रसिद्द थे , पर अब
बूढा हो जाने के कारण उसने
सोचा कि बाकी की ज़िन्दगी आराम से गुजारी जाए और वह
अगले दिन सुबह-सुबह अपने मालिक के पास पहुंचा और
बोला , ” ठेकेदार साहब , मैंने बरसों आपकी सेवा की है पर
अब मैं बाकी का समय आराम से पूजा-पाठ में
बिताना चाहता हूँ , कृपया मुझे काम छोड़ने की अनुमति दें । “
ठेकेदार कारपेंटर को बहुत मानता था , इसलिए उसे ये सुनकर
थोडा दुःख हुआ पर वो कारपेंटर को निराश
नहीं करना चाहता था , उसने कहा , ” आप यहाँ के सबसे
अनुभवी व्यक्ति हैं , आपकी कमी यहाँ कोई नहीं पूरी कर
पायेगा लेकिन मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि जाने से पहले
एक आखिरी काम करते जाइये । ”
“जी , क्या काम करना है ?” , कारपेंटर ने पूछा ?
“मैं चाहता हूँ कि आप जाते -जाते हमारे लिए एक और
लकड़ी का घर तैयार कर दीजिये .” , ठेकेदार घर बनाने के
लिए ज़रूरी पैसे देते हुए बोला ।
कारपेंटर इस काम के लिए तैयार हो गया . उसने अगले दिन
से ही घर बनाना शुरू कर दिया , पर ये जान कर कि ये
उसका आखिरी काम है और इसके बाद उसे और कुछ
नहीं करना होगा वो थोड़ा ढीला पड़ गया। पहले जहाँ वह
बड़ी सावधानी से लकड़ियाँ चुनता और काटता था अब बस
काम चालाऊ तरीके से ये सब करने लगा। कुछ एक हफ्तों में
घर तैयार हो गया और वो ठेकेदार के पास पहुंचा । ” ठेकेदार
साहब , मैंने घर तैयार कर लिया है , अब तो मैं काम छोड़ कर
जा सकता हूँ ?”
ठेकेदार बोला ” हाँ , आप बिलकुल जा सकते हैं लेकिन अब
आपको अपने पुराने छोटे से घर में जाने की ज़रुरत नहीं है ,
क्योंकि इस बार जो घर आपने बनाया है
वो आपकी बरसों की मेहनत का इनाम है; जाइये अपने
परिवार के साथ उसमे खुशहाली से रहिये !”.!”.
कारपेंटर यह सुनकर स्तब्ध रह गया , वह मन ही मन सोचने
लगा , “कहाँ मैंने दूसरों के लिए एक से बढ़ कर एक घर बनाये
और अपने घर को ही इतने घटिया तरीके से बना बैठा …क़ाश
मैंने ये घर भी बाकी घरों की तरह ही बनाया होता !

इससे ये सीख मिलती हैं की जबतक काम करो पूरा दिल लगा कर करो..

Monday, August 26, 2013

कवच

एक सच यह भी
पूरे मोहल्ले में यह चर्चा थी कि गुड़िया को एड्स
की बीमारी है। दरअसल उसका पति एक
सरकारी मुलाज़िम था जो कि सिर्फ २५ वर्ष
की आयु में ही अचानक
किसी रहस्यमयी बीमारी का शिकार हो कर
दुनिया छोड़ गया था। एड्स पर काम कर
रही एक स्वयंसेवी संस्था के कार्यकर्ता बहुत
समझा-बुझा कर गुडिया को एड्स की जाँच
करवाने अपने साथ ले गए थे।
गुड़िया को जो सरकारी पेंशन मिलती थी उसी से
किसी तरह अपना जीवन यापन कर रही थी।
जांच करने वाले डॉक्टर ने बड़ी हैरानी से
पूछा कि रिपोर्ट में तो तुम्हें कोई बीमारी नहीं है,
तुम तो बिलकुल स्वस्थ हो, फिर यह एड्स
का अफवाह क्यों ? तुम लोगों को मुँह तोड़ जवाब
क्यों नहीं देती ? हाथ जोड़ कर
गुड़िया बोली,"डॉ० साहिब, आप से विनती है यह
बात किसी से भी मत कहिएगा, एक जवान
बेवा अपनी इज्जत खूंखार भेडियों से अभी तक
इसी अफवाह के सहारे ही बचाती रही है, भगवान्
के लिए मेरा यह कवच मुझ से मत छीनिए!"

अब्राहिम लिंकन ,,,

कोशिश करते
हो सफलता फिर
भी नही मिलती तो निरा
मत होना उस
आदमी को याद करना -
जिसने 21वे वर्ष में बोर्ड
मेम्बर का चुनाव लड़ा और
हार गया...
22 वे वर्ष में व्यवसाय
करना चाहा उसमे
भी असफल हुआ,,,
27 वे वर्ष में पत्नी ने
तलाक दे दिया,,,
32 वे वर्ष में सांसद पद के
लिए खड़ा हुआ फिर मात
खा गया,,,
42 वे वर्ष में फिर सांसद
पद के लिया खड़ा हुआ फिर
हार गया,,,,
47 वे वर्ष में उप-
रास्ट्रपति पद के
लिया खड़ा हुआ पर फिर
परास्त हुआ,,,,
लेकिन वही व्यक्ति 51 वे
वर्ष में
अमेरिका का राष्ट्रपति
था -
अब्राहिम लिंकन ,,,
हिम्मत मत हारो नए
सिरे से यात्रा शुरु करो ,
कामयाबी जरुर
मिलेगी ..,,,

मंदिर आई दलित महिला के साथ पुजारी ने किया रेप

आशाराम के बाद एक और कारनामा लेकिन मीडिया की सुर्खिया नहीं बना..

मंदिर आई दलित महिला के साथ पुजारी ने किया रेप

मुरैना। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के दिमनी थाना क्षेत्र में श्रद्धा के केंद्र नगरसेन मंदिर क्षेत्र में एक दलित महिला के साथ मंदिर के पुजारी और एक अन्य बाबा द्वारा बलात्कार करने का मामला प्रकाश में आया है।

पुलिस सूत्रों ने आज बताया कि मेडिकल परीक्षण में बलात्कार की पुष्टि हो जाने के बाद दिमनी थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कर लिया है। पीड़ित दलित महिला नगरसेन मंदिर पर रहने वाले बाबाओं से अपने बीमार पुत्र के इलाज के लिए दवा और दुआ मांगने आई थी।

सूत्रों ने कहा कि घटना के बाद बलात्कार के आरोपी दोनों बाबा मंदिर से भाग गए हैं। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने थाने पर प्रदर्शन कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। सूत्रों के अनुसार रविवार की शाम दिमनी पुलिस थाने के समीप स्थित नगरसेन मंदिर पर पोरसा की एक दलित महिला अपने बीमार बच्चे के लिए बाबाओं से दवा लेने आई थी।

मन्दिर मस्जिद

वो- मन्दिर मस्जिद को रोते हैं

ना रोजी है ना रोटी है, ना तन पे एक लंगोटी है,
पर वो- मन्दिर मस्जिद को रोते हैं, नफरत के बीज बोते हैं

छुये आसमान महंगाई, पीठ पेट से लग आई है,
घनघोर उदासी छाई है,
पर वो- मन्दिर मस्जिद को रोते हैं, और अपना देश डुबोते हैं

बच्चे मजदूरी पर जीते हैं,वो इल्म से रहते रीते हैं,
हम खून के आंसू पीते हैं
पर वो- मन्दिर मस्जिद को रोते हैं, ऐसे भी नेता होते हैं

ना नारी का यहां मान हैं,ना दलितों की पहचान हैं
ना विकलांगों को स्थान हैं
पर वो- मन्दिर मस्जिद को रोते हैं, जो है उस को भी खोते हैं

है जहर हवा में पानी में, और नेताओं की बानी में,
नहीं जोष बचा जवानी में, सब लगे हुये मनमानी में
पर वो- मन्दिर मस्जिद को रोते हैं, बरबादी पे खुष होते हैं

असली बातों से सरोकार नहीं,है देश से इनको प्यार नहीं
ये मजहब के भी यार नहीं,
इसीलिये - मन्दिर मस्जिद को रोते हैं, सब नारे इनके थोथे हैं

अब हमने तो ये माना हैं, बस सच्चा एक तराना है
मन्दिर मस्जिद तो काफी हैं, इक देश है उसे बचाना हैं!

(रजनीकांत जोक्स की लेटेस्ट सीरीज

हा हा हा लीिजए दोस्तो पेश है रजनी कान्त जी के ताजातरीन जोक्स

आया रे छाया रजनीकांत
(रजनीकांत जोक्स की लेटेस्ट सीरीज)
*कुछ दिनों पहले चीन का एयरपोर्ट कोहरे
की वजह से बंद था.. बाद में
पता चला कि रजनीकांत भारत में सिगरेट
पी रहा था!!!
*रजनीकांत ने अपनी केजी1 की पढ़ाई 7 अलग-
अलग जगहों से की थी.. आज वो सारी जगहें
आईआईटी के नाम से जानी जाती हैं।
*रजनीकांत के भारत में रहने पर सरकार उन्हें
हर साल टैक्स पे करती है।
*सूर्य ग्रहण की परिभाषा
जब रजनीकांत गुस्से में सूरज को घूरते हैं, सूरज
चांद के पीछे छुप जाता है। इस अद्भुत
घटना को सूर्य ग्रहण के नाम से जाना जाता है।
*एक दिन रजनीकांत उठे और सोचा कि उन्हें कम
से कम अपनी नॉलेज का एक परसेंट
हिस्सा तो दुनिया के साथ शेयर
करना ही चाहिए....
और इसी के बाद गूगल का जन्म हुआ।
*सोचिए क्या होता अगर रजनीकांत 150 साल
पहले पैदा हुए होते तो..??
ब्रिटिश लोगों को आजादी की लड़ाई
लड़नी पड़ती..
* रजनी पर बेस्ट जोक
यहां तक की गजनी भी रजनी को याद रखता है।
*मैसूर से बैंगलौर के लिए एक मेल
किया गया था.. पर पहुंचा नहीं। पूछिए क्यों?
रजनीकांत ने उसे मंड्या में ही रोक लिया था।
*क्या आपको पता है भूकंप क्यों आते हैं?
और सही जवाब है कि रजनीकांत जब अपना फोन
वाइब्रेशन मोड में रखते हैं तो भूकंप आ जाता है।
*एक दिन रजनीकांत ने अपना स्कूल बंक कर
दिया था..!!
तब से वह दिन संडे के रूप में जाना जाता है!!
* मिस्त्र की पिरामिड दरअसल रजनीकांत के
प्राइमरी स्कूल का क्राफ्ट प्रोजेक्ट है।
*ब्रेकिंग न्यूज: इसरो के अस्तित्व का खात्मा
रजनीकांत ने सारे रॉकेट दीवाली सेलिब्रेशन के
लिए खरीद लिए हैं।
*रजनीकांत ने हर-एक कोने पर कुंए के साथ एक
एकड़ जमीन खरीदी.. पूछिए क्यों ??
.......ताकि वह कैरम खेल सकें।
*फिल्म मिशन इम्पॉसिबल में टॉम क्रूज से पहले
रजनीकांत को अप्रोच किया गया था। लेकिन
रजनीकांत ने फिल्म करने से मना कर दिया.....
क्यों?
क्योंकि रजनीकांत को फिल्म का टाइटल बहुत
इन्सल्टिंग लगा था।
(और जोक्स पढ़ने के लिए क्लिक कर

Yanna raskala mind it

Saturday, August 24, 2013

पोखरण 1: जब कृष्ण ने उंगली पर पहाड़ को उठाया...

पोखरण 1: जब कृष्ण ने उंगली पर पहाड़ को उठाया...

 शनिवार, 24 अगस्त, 2013 को 07:00 IST तक के समाचार
पोखरण परमाणु परीक्षण
18 मई, 1974 की सुबह आकाशवाणी के दिल्ली स्टेशन पर बॉबी फ़िल्म का वो मशहूर गाना बज रहा था, "हम तुम एक कमरे में बंद हों और चाबी खो जाए."
ठीक नौ बजे गाने को बीच में ही रोक कर उद्घोषणा हुई, कृपया एक महत्वपूर्ण प्रसारण की प्रतीक्षा करें
कुछ सेकंडों बाद रेडियो पर उद्घोषक के स्वर गूँजे, "आज सुबह आठ बजकर पांच मिनट पर भारत ने पश्चिमी भारत के एक अज्ञात स्थान पर शांतिपूर्ण कार्यों के लिए एक भूमिगत परमाणु परीक्षण किया है."
इससे एक दिन पहले लंदन में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के प्रधान सचिव पीएन हक्सर बार-बार भारतीय उच्चायुक्त बीके नेहरू से सवाल कर रहे थे, "दिल्ली से कोई ख़बर आई?"
जैसे ही भारत के क्लिक करेंपरमाणु परीक्षण की ख़बर मिली नेहरू ने हक्सर के चेहरे पर आई राहत को साफ़ पढ़ा.
वो समझ गए कि हक्सर क्यों बार-बार दिल्ली से आने वाली ख़बर के बारे में पूछ रहे थे.

किसका सिर काटा जाए

पाँच दिन पहले 13 मई को परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष होमी सेठना की देखरेख में भारत के क्लिक करेंपरमाणु वैज्ञानिकों ने परमाणु डिवाइस को असेंबल करना शुरू किया था.
14 मई की रात डिवाइस को अंग्रेज़ी अक्षर एल की शक्ल में बने शाफ़्ट में पहुंचा दिया गया था. अगले दिन सेठना ने दिल्ली के लिए उड़ान भरी. इंदिरा गाँधी से उनकी मुलाक़ात पहले से ही तय थी.
सेठना ने कहा, "हमने डिवाइस को शाफ़्ट में पहुंचा दिया है. अब आप मुझसे ये मत कहिएगा कि इसे बाहर निकालो क्योंकि ऐसा करना अब संभव नहीं है. अब आप हमें आगे जाने से नहीं रोक सकतीं."
इंदिरा का जवाब था, "गो अहेड. क्या तुम्हें डर लग रहा है ?"
सेठना बोले, "बिल्कुल नहीं. मैं बस ये बताना चाह रहा था कि अब यहाँ से पीछे नहीं मुड़ा जा सकता." अगले दिन इंदिरा गाँधी की मंज़ूरी ले कर सेठना पोखरण वापस पहुँचे.
उन्होंने पूरी टीम को जमा किया और सवाल किया कि अगर ये परीक्षण असफल हो जाता है तो किसका सिर काटा जाना चाहिए? बम के डिज़ाइनर राजगोपाल चिदंबरम ने छूटते ही जवाब दिया, "मेरा."
टीम के उपनेता पी के आएंगर भी बोले, "किसी का सिर काटने की ज़रूरत नहीं है. अगर ये असफल होता है तो इसका मतलब है भौतिकी के सिद्धांत सही नहीं हैं." ( राजा रमन्ना,इयर्स ऑफ़ पिलग्रिमेज)

जीप ने दिया धोखा

होमी सेठना
18 मई की सुबह पोखरण के रेगिस्तान में गर्मी कुछ ज़्यादा ही थी. विस्फोट को देखने के लिए वहाँ से पाँच किलोमीटर दूर एक मचान सा बनाया गया था.
वहाँ पर होमी सेठना, राजा रमन्ना, तत्कालीन थलसेनाध्यक्ष जनरल बेवूर, डीआरडीओ के तत्कालीन अध्यक्ष बीडी नाग चौधरी, टीम के उपनेता पी के आयंगर और लेफ़्टिनेंट कर्नल पीपी सभरवाल मौजूद थे.
नाग चौधरी के गले में कैमरा लटक रहा था और वो लगातार तस्वीरें खींच रहे थे. चिदंबरम और एक दूसरे डिज़ाइनर सतेंद्र कुमार सिक्का कंट्रोल रूम के पास एक दूसरे मचान पर थे.
श्रीनिवासन और इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेशन टीम के प्रमुख प्रणव दस्तीदार कंट्रोल रूम के अंदर थे. परीक्षण के लिए सुबह आठ बजे का समय निर्धारित किया गया था.
लेकिन इससे एक घंटे पहले अंतिम जाँच करने गए वैज्ञानिक वीरेंद्र सिंह सेठी की जीप परीक्षण स्थल पर स्टार्ट होने का नाम ही नहीं ले रही थी. समय निकलता जा रहा था. आख़िरकार सेठी ने जीप वहीं छोड़ी और दो किलोमीटर पैदल चल कर कंट्रोल रूम पहुँचे.
सेठना ने वहाँ मौजूद थल सेनाध्यक्ष जनरल बेवूर से पूछा कि जीप का क्या किया जाए जो परीक्षण स्थल के बिल्कुल पास खड़ी थी. जनरल बेवूर का जवाब था, "ओह यू कैन ब्लो द डैम थिंग अप."
ऐसा करने की नौबत नहीं आई क्योंकि इस बीच भारतीय सेना के जवान एक जीप ले कर वहाँ पहुंच गए और ख़राब जीप को टो करके सुरक्षित जगह पर लाया गया. लेकिन इस चक्कर में परीक्षण का समय पाँच मिनट और बढ़ा दिया गया.

वी विल प्रोसीड

राजा रमन्ना
राजा रमन्ना
अंतत: मचान के पास मौजूद लाउड स्पीकर से उल्टी गिनती शुरू हुई. सेठना और रमन्ना ने ट्रिगर दबाने का गौरव प्रणव दस्तीदार को दिया.
जैसे ही पाँच की गिनती हुई प्रणव ने हाई वोल्टेज स्विच को ऑन किया. दस्तीदार के पैरों से ज़मीन निकल गई जब उन्होंने अपनी बाईं तरफ़ लगे इलेक्ट्रीसिटी मीटर को देखा.
मीटर दिखा रहा था कि निर्धारित मात्रा का सिर्फ़ 10 फ़ीसदी वोल्टेज ही क्लिक करेंपरमाणु डिवाइस तक पहुँच पा रहा था. उनके सहायकों ने भी ये देखा. वो घबराहट में चिल्लाए, "शैल वी स्टॉप ? शैल वी स्टॉप?" हड़बड़ी में गिनती भी बंद हो गई.
लेकिन दस्तीदार का अनुभव बता रहा था कि शॉफ्ट के अंदर अधिक आद्रता की वजह से ग़लत रीडिंग आ रही है. वो चिल्लाए, "नो वी विल प्रोसीड."
जॉर्ज परकोविच अपनी किताब इंडियाज़ न्यूकिल्यर बॉम्ब में लिखते हैं आठ बज कर पाँच मिनट पर दस्तीदार ने लाल बटन को दबाया.

कृष्ण ने पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया

उधर मचान पर मौजूद सेठना और रमन्ना ने जब सुना कि गिनती बंद हो गई है तो उन्होंने समझा कि विस्फोट को रोक दिया गया है. रमन्ना इयर्स ऑफ़ पिलग्रिमेज में लिखते हैं कि उनके साथी वैंकटेशन ने जो इस दौरान लगातार विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर रहे थे, अपना जाप रोक दिया था.

पोखरण परमाणु परीक्षण 1998
(भारत ने दूसरा परमाणु परीक्षण 1998 में वाजपेयी सरकार के दौरान किया.)
अभी सब सोच ही रहे थे कि उनकी सारी मेहनत बेकार गई है, कि अचानक धरती से रेत का एक पहाड़ सा उठा और लगभग एक मिनट तक हवा में रहने के बाद गिरने लगा. बाद में पी के आएंगर ने लिखा, "वो ग़ज़ब का दृश्य था. अचानक मुझे वो सभी पौराणिक कथाएं सच लगने लगी थीं जिसमें कहा गया था कि कृष्ण ने एक बार पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया था."
उनके बग़ल में बैठे सिस्टम इंटिगरेशन टीम के प्रमुख जितेंद्र सोनी को लगा जैसे उनके सामने रेत की क़ुतुब मीनार खड़ी हो गई हो.

औंधे मुंह गिरे

तभी सभी ने महसूस किया मानो एक ज़बरदस्त भूचाल आया हो. सेठना को भी लगा कि धरती बुरी तरह से हिल रही है. लेकिन उन्होंने सोचा कि विस्फोट की आवाज़ क्यों नहीं आ रही ? या उन्हें ही सुनाई नहीं पड़ रहा ? (रीडिफ़.कॉम से बातचीत- 8 सितंबर 2006)
लेकिन एक सेकेंड बाद विस्फोट की दबी हुई आवाज़ सुनाई पड़ी. चिदंबरम, सिक्का और उनकी टीम ने एक दूसरे को गले लगाना शुरू कर दिया. चिदंबरम ने बाद में लिखा, ''ये मेरे जीवन का सबसे बड़ा क्षण था.'' जोश में सिक्का मचान से नीचे कूद पड़े और उनके टख़ने में मोच आ गई.
कंट्रोल रूम में मौजूद श्रीनिवासन को लगा जैसे वो ज्वार भाटे वाले समुद्र में एक छोटी नाव पर सवार हों जो बुरी तरह से डगमगा रही हो. रमन्ना ने अपनी आत्मकथा में लिखा, "मैंने अपने सामने रेत के पहाड़ को ऊपर जाते हुए देखा मानो हनुमान ने उसे उठा लिया हो."
लेकिन वो इस उत्तेजना में भूल गए थोड़ी देर में धरती कांपने वाली है. उन्होंने तुरंत ही मचान से नीचे उतरना शुरू कर दिया. जैसे ही धरती हिली मचान से उतर रहे रमन्ना अपना संतुलन नहीं बरक़रार रख पाए और वो भी ज़मीन पर आ गिरे.
ये एक दिलचस्प इत्तेफ़ाक़ था कि भारत के क्लिक करेंपरमाणु बम का जनक, इस महान उपलब्धि के मौक़े पर पोखरण की चिलचिलाती गर्म रेत पर औंधे मुँह गिरा पड़ा था.

बुद्धा इज़ स्माइलिंग

अब अगली समस्या थी कि इस ख़बर को दिल्ली इंदिरा गाँधी तक कैसे पहुँचाया जाए?
सिर्फ़ इसी मक़सद से सेना ने वहाँ पर प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए ख़ास हॉट लाइन की व्यवस्था की थी. पसीने में नहाए सेठना का कई प्रयासों के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क स्थापित हुआ.
दूसरे छोर पर प्रधानमंत्री के निजी सचिव पी एन धर थे. सेठना बोले, "धर साहब एवरी थिंग हैज़ गॉन... " तभी लाइन डेड हो गई.
सेठना ने समझा कि धर को लगा होगा कि परीक्षण फ़ेल हो गया है. उन्होंने सेना की जीप उठाई और लेफ़्टिनेंट कर्नल पीपी सभरवाल के साथ बदहवासों की तरह ड्राइव करते हुए पोखरण गाँव पहुँचे जहाँ सेना का एक टेलिफ़ोन एक्सचेंज था.
वहाँ पहुँच कर सेठना ने अपना माथा पीट लिया जब उन्होंने पाया कि वो धर का डाएरेक्ट नंबर भूल आए हैं.
इंदिरा गांधी
इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में पहला परमाणु परीक्षण किया गया था
यहाँ सभरवाल उनकी मदद को आगे आए. उन्होंने अपनी सारी अफसरी अपनी आवाज़ में उड़ेलते हुए टेलिफ़ोन ऑपरेटर से कहा, "गेट मी द प्राइम मिनिस्टर्स ऑफ़िस. "
ऑपरेटर पर उनके इस आदेश का कोई असर नहीं हुआ. उसने ठेठ हिंदी में पूछा आप हैं कौन?
काफ़ी मशक्क़त और हील हुज्जत के बाद आख़िरकार प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क हुआ.
बहुत ख़राब लाइन पर लगभग चीखते हुए सेठना ने वो मशहूर कोड वर्ड कहा, "बुद्धा इज़ स्माइलिंग. "

प्रधानमंत्री निवास

उस घटना के 29 वर्षों बाद तक पी एन धर ने ये बात किसी को नहीं बताई कि सेठना के ये सारे प्रयास बेकार साबित हुए थे क्योंकि दस मिनट पहले ही थलसेनाध्यक्ष जनरल बेवूर का फ़ोन उन तक पहुँच चुका था.
धर उनसे सीधा सवाल नहीं कर सकते थे क्योंकि टेलिफ़ोन लाइन पर बातचीत सुनी जा सकती थी. धर ने उनसे पूछा था ‘ क्या हाल है?’ बेवूर का जवाब था,’ सब आनंद है.’
धर को उसी समय लग गया कि भारत का परमाणु परीक्षण सफल रहा है. उन्होंने तुरंत प्रधानमंत्री निवास का रुख़ किया. उस समय इंदिरा गाँधी अपने लॉन में आम लोगों से मिल रही थीं.
जब उन्होंने धर को आते हुए देखा तो वो लोगों से बात करना बंद उनकी तरफ़ दौड़ीं. उखड़ी हुई साँसों के बीच उन्होंने पीएन धर से पूछा, "क्या हो गया."
धर का जवाब था, "सब ठीक है मैडम."
धर ने अपनी आत्मकथा में लिखा, "मुझे अभी भी याद है कि ये सुनते ही इंदिरा गाँधी की बाँछे खिल गई थीं. एक जीत की मुस्कान को उनके चेहरे पर साफ़ पढ़ा जा सकता था."

अमेरिकन डॉलर v/s रुपया ..

सच्ची कहानी ..
अमेरिकन डॉलर v/s रुपया ..
एक सलाह उन सबके लिए जो भारतीय रुपए के मूल्य गिरने से चिंतित हैं
कृपया सारे देश के लोग सिर्फ 7 दिन के लिए कारों और अन्य पेट्रोल चलित वाहनों का प्रयोग (आपातकाल छोड़कर) एक साथ बंद कर दें निश्चित रूप से डॉलर का रेट नीचे गिरेगा.यह एक सच्चाई है|
अमेरिकन लोगो ने सोने की वैल्यू पेट्रोल के बराबर आँका इसलिए उन्होंने उन्होंने मध्य पूर्व के देशों के साथ समझौता किया पेट्रोल की बिक्री डॉलर के साथ होगी. और उन्होंने एक लीगल टैंडर की देनदारी के तहत डालर को सादे कागज पर छापा लेकिन अगर आपको अमेरिकन डॉलर पसंद नही तो उसके गवर्नर के पास जाकर इसके बदले मे सोना पाने के बारे मे पूछते है तो वह आपको सोना नही देगा क्योकि उनके डॉलर पर ऐसा कुछ भी नहीं लिखा हैं| यहाँ उल्लेखनीय बात एक और होगी की अमेरिकन्स ने डॉलर के बदले सोना रखना 70 साल पूर्व ही बंद कर दिया हैं|
इसके विपरीत भारतीय रुपए पर “मैं धारक को अंकित राशि अदा करने का वचन देता हूँ “यह साफ तौर पर छपा है साथ मे गवर्नर के हस्ताक्षर है इसका अर्थ अगर आप भारतीय रुपए से असंतुष्ट हैं तो गवर्नर से इसके बदले मे सोना पाने के बारे में पूछते हैं तो तत्काल इसके बदले मे सोना अदा कर देगा (अत्यंत सूक्ष्म अंतर है इसे इस तरह समझा जा सकता है एक उदाहरण देखिए)
यदि भारतीय पेट्रोलियम मंत्री पेट्रोल खरीदने मध्य पूर्व के देश जाता है वहाँ के तेल विक्रेता पेट्रोल के बदले डॉलर की माँग करेगा पर भारत के पास डॉलर नही है हमारे पास भारतीय रुपया है तब भारतीय मंत्री अमेरिका से डॉलर देने को कहता है इस पर अमेरिका फेडरल रिजर्व एक कोरा कागज लेकर डॉलर छापकर उसे देगा अतः हम डॉलर पाकर उसे पेट्रोल विक्रेता देकर पेट्रोल खरीदते हैं|
पर धोखा यहाँ है अगर आपका दिमाग बदलने पर अब आप डॉलर वापस कर बदले मे सोना चाहे तो अमेरिका कहता है हमने इसके बदले कुछ देने का वादा नही किया है डॉलर चेक करे इस पर साफ लिखा है कि डॉलर देनदारी है इस कारण अमेरिका को डॉलर छापने के लिए सोना रखने की जरुरत नही है|
भारत की वर्तमान समस्या अमेरिकी डॉलर खरीदने की है कोरे सफेद कागज पर छपे डॉलर के बराबर भारतीय सोना है अगर हम पेट्रोल की खपत कम कर देते हैं तो डॉलर कम होगा तो क्या हम अपने भारतीय रुपए की मजबूती के लिए यह छोटा सा काम नही कर सकते _? कुछ और कदम और उठाए जाकर देश की मुद्रा को बचा सकते हैं ऐसा क्यों सोचते है अमेरिकन डॉलर बूम है और भारतीय रुपया नीचे जा रहा है अब यहाँ सवाल यह कि मध्य पूर्व के देशों को पेट्रोल की बिक्री करने के बदले मे अमेरिका क्या देगा ताकि यह लोग पेट्रोल डॉलर मे बेचे मध्य पूर्व खाड़ी देश के राजा सुरक्षा के बदले अमेरिका को किराया अदा करते हैं इसके बदले मे अमेरिका वहाँ रोड बिलडिंग आदि बना देता है असलियत में यही अमेरिकी डॉलर की कीमत है यह हवा की तरह है कई कहते है एक दिन डॉलर नष्ट होगा|
अर्थव्यवस्था हमारे हाथ है :>भारतीय उद्योगों मे बनने वाले उत्पाद ही खरीदे शीतल पेय की लागत 70\80पैसे इसे 9रुपए मे बेचा जाता है मुनाफा अमेरिका की कंपनियों की जेब मे जा रहा है देशहित मे देशी उत्पाद ही खरीदे अगर हम ऐसा नही करेंगे तो आगे और रुपए मे गिरावट तय है इसके लिए जीवन शैली मे बदलाव करना जरूरी है प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाले पदार्थ जैसे टेल्कम पावडर शैंपू दूध पावडर ब्लैड खाद्य पदार्थ जो भी जरुरत हो स्वदेशी खरीदे पक्का होगा भारतीय मुद्रा भारत के बाहर नही जाएगी आज ही फैसला करें भारत को बचाएँ हम उदारीकरण और अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ के विरुद्ध नही अपने देश को बचाने की कोशिश कर रहे हैं|

In English
Real story of American Dollar v/s Indian Rupee
===================================
An Advice to all who are worrying about fall of Indian Rupee
Throughout the country please stop using cars except for emergency for only seven days (Just 7 days)
Definitely Dollar rate will come down. This is true. The value to dollar is given by petrol only.This is called Derivative Trading. America has stopped valuing its Dollar with Gold 70 years ago.
Americans understood that Petrol is equally valuable as Gold so they made Agreement with all the Middle East countries to sell petrol in Dollars only. That is why Americans print their Dollar as legal tender for debts. This mean if you don’t like their American Dollar and go to their Governor and ask for repayment in form of Gold,as in India they won’t give you Gold.
You observe Indian Rupee, ” I promise to pay the bearer…” is clearly printed along with the signature of Reserve Bank Governor. This mean, if you don’t like Indian Rupee and ask for repayment,Reserve Bank of India will pay you back an equal value of gold.(Actually there may be minor differences in the Transaction dealing rules, but for easy comprehension I am explaining this)
Let us see an example. Indian petroleum minister goes to Middle East country to purchase petrol, the Middle East petrol bunk people will say that liter petrol is one Dollar.
But Indians won’t have dollars. They have Indian Rupees. So what to do now? So That Indian Minister will ask America to give Dollars. American Federal Reserve will take a white paper , print Dollars on it and give it to the Indian Minister. Like this we get dollars , pay it to petrol bunks and buy petrol.
But there is a fraud here. If you change your mind and want to give back the Dollars to America we can’t demand them to pay Gold in return for the Dollars. They will say ” Have we promised to return something back to you? Haven’t you checked the Dollar ? We clearly printed on the Dollar that it is Debt”
So, Americans don’t need any Gold with them to print Dollars. They will print Dollars on white papers as they like.
But what will Americans give to the Middle East countries for selling petrol in Dollars only?
Middle East kings pay rent to America for protecting their kings and heirs. Similarly they are still paying back the Debt to America for constructing Roads and Buildings in their countries. This is the value of American Dollar. That is why Many say some day the Dollar will be destroyed.
At present the problem of India is the result of buying those American Dollars. American white papers are equal to Indian Gold. So if we reduce the consumption of petrol and cars, Dollar will come down
The Above Details are translated originally from Telugu Language to English by Radhika Gr.
Kindly share this and make everyone aware of the facts of American Dollar V/s Indian Rupee.
And here is a small thing other than petrol , what we can do to our Indian Rupee
YOU CAN MAKE A HUGE DIFFERENCE TO THE INDIAN ECONOMY BY FOLLOWING FEW SIMPLE STEPS:-
Please spare a couple of minutes here for the sake of India.
Here’s a small example:-
At 2008 August month 1 US $ = INR Rs 39.40
At 2013 August now 1 $ = INR Rs 62
Do you think US Economy is booming? No, but Indian Economy is Going Down.
Our economy is in your hands.INDIAN economy is in a crisis. Our country like many other ASIAN countries, is undergoing a severe economic crunch. Many INDIAN industries are closing down. The INDIAN economy is in a crisis and if we do not take proper steps to control those, we will be in a critical situation. More than 30,000 crore rupees of foreign exchange are being siphoned out of our country on products such as cosmetics, snacks, tea, beverages, etc. which are grown, produced and consumed here.
A cold drink that costs only 70 / 80 paise to produce, is sold for Rs.9 and a major chunk of profits from these are sent abroad. This is a serious drain on INDIAN economy. We have nothing against Multinational companies, but to protect our own interest we request everybody to use INDIAN products only at least for the next two years. With the rise in petrol prices, if we do not do this, the Rupee will devalue further and we will end up paying much more for the same products in the near future.
What you can do about it?
Buy only products manufactured by WHOLLY INDIAN COMPANIES.Each individual should become a leader for this awareness. This is the only way to save our country from severe economic crisis. You don’t need to give-up your lifestyle. You just need to choose an alternate product.
Daily products which are COLD DRINKS,BATHING SOAP ,TOOTH PASTE,TOOTH BRUSH ,SHAVING CREAM,BLADE, TALCUM POWDER ,MILK POWDER ,SHAMPOO , Food Items etc. all you need to do is buy Indian Goods and Make sure Indian rupee is not crossing outside India.
Every INDIAN product you buy makes a big difference. It saves INDIA. Let us take a firm decision today.
we are not anti-multinational. we are trying to save our nation. every day is a struggle for a real freedom. we achieved our independence after losing many lives.
they died painfully to ensure that we live peacefully. the current trend is very threatening.
multinationals call it globalization of Indian economy. for Indians like you and me, it is re-colonization of India. the colonist’s left India then. but this time, they will make sure they don’t make any mistakes.
Russia, S.Korea, Mexico - the list is very long!! let us learn from their experience and from our history. let us do the duty of every true Indian. finally, it’s obvious that you can’t give up all of the items mentioned above. so give up at least one item for the sake of our country!
We would be sending useless forwards to our friends daily. Instead, please forward this to all your friends to create awareness.
Source : http://www.allindiadaily.com/2013/08/real-story-of-american-dollar-vs-Indian-Rupee.html
Real story of American Dollar v/s Indian Rupee
www.allindiadaily.com
Real story of American Dollar v/s Indian Rupee. An Advice to all who are worrying about fall of Indian Rupee Throughout the country please stop using cars except for emergency for only seven days (Just 7 days) Definitely Dollar rate will come down. This is true. The value to dollar