Tuesday, September 24, 2013

भेड़िया

एक दिन भेड़िया मजे से
मछली खा रहा था की अचानक
मछली का कांटा उसके गले में अटक गया |
भेड़िया दर्द के मारे चीखा-चिल्लाया | वह
इधर-उधर भागता फिरा | पर उसे चेन न
मिला | उससे न खाते बनता था न पीते
बनता था |
तभी उसे नदी किनारे खड़ा एक सारस दिखाई
दिया | भेड़िया सारस के पास गया |
भेड़िया की आँखे में आसू थे | वह
गिडगिडा कर बोला, “सारस भाई, मेरे गले में
कांटा अटक गया है | मेरे गले से कांटा निकल
दो | में तुम्हारा अहसान कभी न भुलुगा | मुझे
इस दर्द से छुटकारा दिला दो |
सारस को भेडिये पर दया आ गई | उसने
अपनी लंबी चोंच भेडिये के गले में डाली और
कांटा निकाल दिया | भेडिये को बड़ा चेन
मिला | सारस बोला, भेडिये भाई मेने आप
की मदद की है अब आप मुझे कुछ इनाम दो |
इनाम की बात सुनते ही भेडिये को गुस्सा आ
गया | सारस की अपने बड़े-बड़े दांत दिखाते
हुए बोला, “तुझे इनाम चाहिए? एक तो मेरे मुंह
में अपनी गंदी चोंच डाली | मेने सही –
सलामत निकल लेने दी | और अब इनाम
मांगता है | जिंदा रहना चाहता है तो भाग
जा यंहा से इनाम मांगता है |”
बेचारा सारस वहा से चुप चाप चला गया |
सीख: जो भी आप की मदद करे
उसकी हमेशा मदद करे |

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