Tuesday, September 24, 2013

ध्यान आकर्षित

एक दिन किसी निर्माण के दौरान भवन की छटी मंजिल से सुपर वाईजर ने नीचे कार्य करने वाले मजदूर को आवाज दी.
निर्माण कार्य की तेज आवाज के कारण नीचे काम करने वाला मजदूर कुछ समझ नहीं सका की उसका सुपरवाईजर उसे आवाज दे रहा है.
फिर
सुपरवाईजर ने उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए एक १० रु का नोट नीचे फैंका, जो ठीक मजदूर के सामने जा कर गिरा
मजदूर ने नोट उठाया और अपनी जेब मे रख लिया, और फिर अपने काम मे लग गया .
अब उसका ध्यान खींचने के लिए सुपर वाईजर ने पुन: एक ५०० रु का नोट नीचे फैंका .
उस मजदूर ने फिर वही किया और नोट जेब मे रख कर अपने काम मे लग गया .
ये देख अब सुपर वाईजरने एक छोटा सा पत्थर का टुकड़ा लिया और मजदूर के उपर फैंका जो सीधा मजदूर के सिर पर लगा. अब मजदूर ने ऊपर देखा और उसकी सुपर वाईजर से बात चालू हो गयी.
ये वैसा ही है जो हमारी जिन्दगी मे होता है.....
भगवान् हमसे संपर्क करना ,मिलना चाहता है, लेकिन हम दुनियादारी के कामो मे व्यस्त रहते है, अत: भगवान् को याद नहीं करते.
भगवान् हमें छोटी छोटी खुशियों के रूप मे उपहार देता रहता है, लेकिन हम उसे याद नहीं करते, और वो खुशियां और उपहार कहाँ से आये ये ना देखते हुए,उनका उपयोग कर लेते है, और भगवान् को याद नहीं करते.
भगवान् हमें और भी खुशियों रूपी उपहार भेजता है, लेकिन उसे भी हम हमारा भाग्य समझ कर रख लेते है, भगवान् का धन्यवाद नहीं करते ,उसे भूल जाते है.
तब भगवान् हम पर एक छोटा सा पत्थर फैंकते है , जिसे हम कठिनाई कहते है, और तुरंत उसके निराकरण के लिए भगवान् की और देखते है,याद करते है.
यही जिन्दगी मे हो रहा है.
यदि हम हमारी छोटी से छोटी ख़ुशी भी भगवान् के साथ उसका धन्यवाद देते हुए बाँटें, तो हमें भगवान् के द्वारा फैंके हुए पत्थर का इन्तजार ही नहीं करना पड़ेगा...!!!!!

आतंकवाद क्या है

कहीं भी कोईं बम विस्फोट होता है तो आतंकवाद पर बहस छिड़ जाती है ये बहस गली मोहल्लों शहर की पान की दुकानों, चाय की दुकानों रेल में बस में सफर करने वाले डेली पेसेंजरों से शुरु होकर बड़े – बड़े मीडिया हाऊस के पैनल डिसक्सन तक पहुंच जाती है। लेकिन आतंकवाद क्या है उसकी परिभाषा क्या है ? उसका जनक कौह है ? ये कहीं सुनने को नहीं मिला और न ही कोई सटीक परिभाषा गढ़ी गई जिससे आतंकवाद को परिभाषित किया जा सके अगर 9/11 को ही आतंकवाद माना जाता है है तो नागाशाकी और हिरोशिमा की जमीन को बंजर बनाने वाला परमाणू हमला क्या था ? सम्राट अशोक द्वारा किया गया कलिंग का संहार क्या था ? अंग्रेजों द्वारा किया गया जलियां वाला बाग क्या था ? पवन पुत्र हनुमान जी द्वारा सोने की लंका को जला देना क्या था ? अमेरिका में जो हमला होता है तो वह आतंकी करते हैं मगर जब अमेरिका द्वारा ईराक, अफ्गानिस्तान, पाकिस्तान में ड्रोन हमले किये जाते हैं वह क्या है ? क्या वह आतंकवाद नहीं है ? फिस्तीनियों का इजरईल द्वारा किया गया नरसंहार क्या है ? 1983 में असम के नेली में किया गया 5000 बंग्लादेशिय़ों का संहार क्या था ? 1984 में दिल्ली में सिक्खों में का नरसंहार क्या था ? क्या वह आतंकवाद नहीं था ? 1987 में मेरठ के मलियाना हाशिमपुरा में पीएसी के द्वारा किया गया अल्पसंख्कों का कत्ल ऐ आम क्या था ? 1993 में मुंबई में शिवसेना के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया 1100 अल्पसंख्यकों का कत्ल ओ गारत क्या था ? क्या वह आतंकवाद नहीं था ? उसके बाद 2002 में भारत के कथित विकसित राज्य में जो हुआ क्या वह आतंकवाद नहीं था ? उसके बाद असम में, फारबिसगंज में, मुजफ्फरनगर में, महाराषट्रा के धूले में पश्चिमी यूपी के मसूरी में होने वाली घटनाओं को आप कौनसे चश्में से देखते हैं ? अगर निर्दोषों को ही मारना ही आतंकवाद है तो क्या उपरोक्त घटनाओं में मरने वाले निर्दोष नहीं थे ? अगर दिल्ली, मुंबई, समझोता एक्सप्रेस, अजमेर, हैदराबाद, बंग्लूरू अमेरिका, केनिया, इंग्लेंड आदी स्थानों पर बम विस्फोट करना ही आतंकवाद है तो फिर उपरोक्त घटनाओं को आप क्या नाम देंगे ? क्या ये आतंकवाद नहीं है ? क्या इन घटनाओं में मरने वाले निर्दोष नहीं थे ? बगदाद की सड़कों पर बहते हुऐ खून को, सीरिया में कैमिकल हमले में कतार लगाकर मारे गये लोगों के खून को किस घटना से जोड़ेंगे क्या वह आतंकवाद नहीं है ? अफसोस ये सब आतंकवाद है मगर हम और हमारे बुद्धीजीवी आतंकवाद की उसी परिभाषा को मानते हैं जिसे अमेरिका मानता है। 

भेड़िया

एक दिन भेड़िया मजे से
मछली खा रहा था की अचानक
मछली का कांटा उसके गले में अटक गया |
भेड़िया दर्द के मारे चीखा-चिल्लाया | वह
इधर-उधर भागता फिरा | पर उसे चेन न
मिला | उससे न खाते बनता था न पीते
बनता था |
तभी उसे नदी किनारे खड़ा एक सारस दिखाई
दिया | भेड़िया सारस के पास गया |
भेड़िया की आँखे में आसू थे | वह
गिडगिडा कर बोला, “सारस भाई, मेरे गले में
कांटा अटक गया है | मेरे गले से कांटा निकल
दो | में तुम्हारा अहसान कभी न भुलुगा | मुझे
इस दर्द से छुटकारा दिला दो |
सारस को भेडिये पर दया आ गई | उसने
अपनी लंबी चोंच भेडिये के गले में डाली और
कांटा निकाल दिया | भेडिये को बड़ा चेन
मिला | सारस बोला, भेडिये भाई मेने आप
की मदद की है अब आप मुझे कुछ इनाम दो |
इनाम की बात सुनते ही भेडिये को गुस्सा आ
गया | सारस की अपने बड़े-बड़े दांत दिखाते
हुए बोला, “तुझे इनाम चाहिए? एक तो मेरे मुंह
में अपनी गंदी चोंच डाली | मेने सही –
सलामत निकल लेने दी | और अब इनाम
मांगता है | जिंदा रहना चाहता है तो भाग
जा यंहा से इनाम मांगता है |”
बेचारा सारस वहा से चुप चाप चला गया |
सीख: जो भी आप की मदद करे
उसकी हमेशा मदद करे |

स्त्री

एक बार ध्यान लगाकर पढ़िएगा जरूर।
एक आदमी जब पैदा होता है तो उस समय जब
उसकी जीवन उर्जा बड़ी संवेदनशील होती है
तो उसे एक स्त्री ही संभालती है…



….
वो है उसकी माँ.
.…

फिर जब थोडा सा बड़ा होता है (बैठने लायक)
तो वहां भी एक लड़की ही मिलती है
जो उसकी देखरेख करती है उसके साथ खेलती है
….
उसका मन बहलाती है……. जब तक
की वो इतना बड़ा नहीं हो जाता की बाहर
के संसार में अपने दोस्त बना सके…

..
….
वो है उसकी बहिन……
……
फिर जब वो स्कूल जाता है तो वहां फिर एक
महिला है जो उसकी सहायता
करती है….. चीज़ों को समझने में………… उसे
सहारा देती है, उसकी कमजोरियों को दूर करने
में….. और उसको एक अच्छा इंसान बनाने
में…

……
वो है उसकी अध्यापिका…
…….…
फिर जब वो बड़ा होता है……….. और जब
जीवन
से उसका संघर्ष शुरू
होता है…. जब भी वो संघर्ष में वो कमजोर
हो जाता है…..
तो एक लड़की ही उसको साहस देती है


वो है उसकी प्रेमिका
(सामान्यत:)

……. .
जब आदमी को जरूरत होती है………. साथ
की अपनी अभिव्यक्ति प्रकट
करने के लिए …… अपना दुःख और सुख बाटने
के लिए फिर एक लड़की वहां
होती है…

…..
वो है उसकी पत्नी……
…..
फिर जब जीवन के संघर्ष और रोज
की मुश्किलों का
सामना करते करते आदमी कठोर होने लगता है
……..
तब उसे निर्मल बनाने वाली भी एक
लड़की ही होती है…

…..
और वो है उसकी बेटी.……
……
और जब आदमी की जीवन यात्रा ख़त्म होगी तब
फिर एक स्त्रीलिंग ही होगी जिससे उसका अंतिम
मिलन होगा ….. जिसमे वो समां कर
पूरा हो जायेगा…
....
...
… और वो होगी मात्रभुमि…
…..…
.
.
.
.
याद रखें अगर आप मर्द हैं तो सम्मान दें हर
महिला को…
……

……
जो हर पल आपके साथ किसी न किसी रूप में
है…

Sunday, September 22, 2013

इस दुनिया में हिन्दू तो पहले से हैं,लेकिन मुसलमान बाद में क्यों बने...???

प्रश्नः इस दुनिया में हिन्दू तो पहले से हैं,लेकिन मुसलमान बाद में क्यों बने...???

उत्तरःमानव इतिहास का अध्ययन करने से पता चलता है कि इस धरती पर अलग अलग विभिन्न मानव नहीं बसाए गए अपितु एक ही मानव से सारा संसार फैला है। निम्नलिखित तथ्यों पर ध्यान दें, आपके अधिकांश संदेह खत्म हो जाएंगे।
सारे मानव का मूलवंश एक ही पुरूष तक पहुंचता है, ईश्वर ने सर्वप्रथम विश्व के एक छोटे से कोने धरती पर मानव का एक जोड़ा पैदा किया जिनको आदम तथा हव्वा के नाम से जाना जाता है। उन्हीं दोनों पति-पत्नी से मनुष्य की उत्पत्ति का आरम्भ हुआ जिन को कुछ लोग मनु और शतरूपा कहते हैं तो कुछ लोग एडम और ईव जिनका विस्तारपूर्वक उल्लेख पवित्र ग्रन्थ क़ुरआन(230-38) तथा भविष्य पुराण प्रतिसर्ग पर्व खण्ड 1 अध्याय 4 और बाइबल उत्पत्ति (2/6-25) और दूसरे अनेक ग्रन्थों में किया गया है। उनका जो धर्म था उसी को हम इस्लाम कहते हैं जो आज तक सुरक्षित है।
ईश्वर ने मानव को संसार में बसाया तो अपने बसाने के उद्देश्य से अवगत करने के लिए हर युग में मानव ही में से कुछ पवित्र लोगों का चयन किया ताकि वह मानव मार्गदर्शन कर सकें। वह हर देश और हर युग में भेजे गए, उनकी संख्या एक लाख चौबीस हज़ार तक पहुंचती है, वह अपने समाज के श्रेष्ट लोगों में से होते थे तथा हर प्रकार के दोषों से मुक्त होते थे। उन सब का संदेश एक ही था कि केवल एक ईश्वर की पूजा की जाए, मुर्ति-पूजा से बचा जाए तथा सारे मानव समान हैं, उनमें जाति अथवा वंश के आधार पर कोई भेदभाव नहीं।
परन्तु उनका संदेश उन्हीं की जाति तक सीमित होता था क्योंकि मानव ने इतनी प्रगति न की थी तथा एक देश का दूसरे देशों से सम्बन्ध नहीं था। उनके समर्थन के लिए उनको कुछ चमत्कारियां भी दी जाती थीं, जैसे मुर्दे को जीवित कर देना, अंधे की आँखें सही कर देना, चाँद को दो टूकड़े कर देना आदि।
लेकिन यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि पहले तो लोगों ने उन्हें ईश्दूत मानने से इनकार किया कि वह तो हमारे ही जैसा शरीर रखने वाले हैं। फिर जब उनमें असाधारण गुण देख कर उन पर श्रृद्धा भरी नज़र डाली तो किसी समूह ने उन्हें ईश्वर का अवतार मान लिया तो किसी ने उन्हें ईश्वर की सन्तान मान कर उन्हीं की पूजा आरम्भ कर दी। उदाहरण स्वरूप गौतम बुद्ध को देखिए बौद्ध मत के गहरे अध्ययन से केवल इतना पता चलता है कि उन्हों ने ब्रह्मणवाद की बहुत सी ग़लतियों की सुधार की थी तथा विभिन्न पूज्यों का खंडन किया था परन्तु उनकी मृत्यु के एक शताब्दी भी न गुज़री थी कि वैशाली की सभा में उनके अनुयाइयों ने उनकी सारी शिक्षाओं को बदल डाला और बुद्ध के नाम से ऐसे विश्वास नियत किए जिसमें ईश्वर का कहीं भी कोई वजूद नहीं था। फिर तीन चार शताब्दियों के भीतर बौद्ध धर्म के पंडितों ने कश्मीर में आयोजित एक सभा में उन्हें ईश्वर का अवतार मान लिया।

बुद्धि की दुर्बलता कहिए कि जिन संदेष्टाओं नें मानव को एक ईश्वर की ओर बोलाया था उन्हीं को ईश्वर का रूप दे दिया गया।

इसे यूं समझिए कि यदि कोई पत्रवाहक एक व्यक्ति के पास उसके पिता का पत्र पहुंचाता है तो उसका कर्तव्य बनता है कि पत्र को पढ़े ताकि अपने पिता का संदेश पा सके परन्तु यदि वह पत्र में पाए जाने वाले संदेश को बन्द कर के रख दे और पत्रवाहक का ऐसा आदर सम्मान करने लगे कि उसे ही पिता का महत्व दे बैठे तो इसे क्या नाम दिया जाएगा....आप स्वयं समझ सकते हैं।

ऐसा ही बिल्कुल संदेष्टाओं के साथ भी हुआ।

जब सातवी शताब्दी में मानव बुद्धि प्रगति कर गई और एक देश का दूसरे देशों से सम्बन्ध बढ़ने लगा तो ईश्वर ने अलग अलग हर देश में संदेश भेजने के नियम को समाप्त करते हुए विश्वनायक का चयन किया। जिन्हें हम मुहम्मद सल्ल0 कहते हैं, उनके पश्चात कोई संदेष्टा आने वाला नहीं है, ईश्वर ने अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद सल्ल0 को सम्पूर्ण मानव जाति का मार्गदर्शक बना कर भेजा और आप पर अन्तिम ग्रन्थ क़ुरआन अवतरित किया जिसका संदेश सम्पूर्ण मानव जाति के लिए है । उनके समान धरते ने न किसी को देखा न देख सकती है। वही कल्कि अवतार हैं जिनकी हिन्दु समाज में आज प्रतीक्षा हो रही है।

Friday, September 13, 2013

सकारात्मक

अपनाएं खुश रहने के कुछ टिप्स...
हरदम खुश रहें.
खुशी मन की एक अवस्था का नाम है। इस
भागती-दौड़ती जिंदगी में हर कोई खुश
रहना चाहता है, पर रह नहीं पाता है।
इसका कारण यह है कि हर कोई काम के दबाव से
दो-चार है। रही-सही कसर अन्य घरेलू काम
पूरा कर देते हैं। बच्चों की-सी खुशी अब दुर्लभ
प्रतीत होती है। खेलते बच्चों का चिल्ला कर
खुशी का इजहार करना अब बहुत कम देखने
को मिलता है, क्योंकि आजकल के बच्चे पढ़ाई के
बोझ-तले दबे हुए हैं। उन्हें इतना होमवर्क
मिलता है कि वे चाह कर भी अधिक खेल और
खुशी का इजहार नहीं कर पाते हैं।
हमेशा सकारात्मक सोचें :- खुश रहने के लिए हमें
चाहिए कि हम हमेशा सकारात्मक ही सोचें।
नकारात्मकता से मन व शरीर पर विपरीत प्रभाव
पड़ता है। यह हो गया तो क्या होगा?
वो हो गया तो क्या होगा? आदि-आदि अनेक
प्रकार के नकारात्मक विचारों को झिड़क दें।
इससे कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है सिवाय
तनाव के।
हंसमुख रहें : - हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें। उदास
व गमगीन चेहरा किसी को भी नहीं लुभाता है।
हंसमुख व्यक्ति के आसपास सदा सभी लोग
मंडराते रहते हैं, जबकि दुखी या निराश
व्यक्ति से लगभग सभी लोग किनारा कर लेते हैं।
इसलिए व्यक्ति को हर परिस्थिति में मुस्कुराते
रहना चाहिए।
चार्ली चैप्लिन से प्रेरणा लें :- मशहूर ब्रिटिश
हास्य कलाकार चार्ली चैप्लिन के निजी जीवन
को अगर हम देखें तो पाएंगे कि वे काफी दुखी,
निराश एवं एक हद तक गरीब व्यक्ति थे।
बावजूद इसके, उन्होंने अपने निजी जीवन
को कभी भी चेहरे व पर्दे पर प्रकट नहीं होने
दिया।
उनकी एक प्रेमिका ने उनको सिर्फ इसलिए छोड़
दिया, क्योंकि उनके पास धन का अभाव था,
यानी वे 'गरीब' कलाकार थे। इस पर उन्होंने
सोचा था कि प्रेमिका भी उसी के पास होती है
जिसके पास धन होता है। इसका उन्हें
गहरा सदमा लगा था।
इसके बाद भी उन्होंने अपने निजी जीवन को अपने
ऊपर हावी नहीं होने दिया तथा अपनी कला के
माध्यम से ‍ब्रिटेन ही नहीं,
सारी दुनिया को हंसाया और आज
भी ‍‍‍फिल्मी पर्दे के माध्यम से हंसा रहे हैं। उनके
जैसा हंसोड़ कलाकार अब कहां? तो यह है
परिस्थितियों से पार पाने का तरीका।
परिस्थितियां आती-जाती हैं : - हर व्यक्ति के
जीवन में उतार-चढ़ाव आते-जाते रहते हैं। इनसे
निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि अपना मनोबल
मजबूत कर उससे लोहा लेने के लिए भिड़
जाना चाहिए। अगर हम महापुरुषों की जीवनी पढ़ें
तो पाएंगे कि उनके जीवन में कई विषम
परिस्थितियां आईं किंतु उन्होंने हार
नहीं मानी और परिस्थितियों को अपने पक्ष में
कर लिया।
उन्होंने परिस्थितियों का डटकर
मुकाबला किया तथा हमेशा मुस्कुराते रहें।
कभी भी उनका उदास चेहरा हमने नहीं देखा।
गांधीजी व नेहरूजी का तो हमने
मुस्कुराता चेहरा ही देखा है, कभी भी उदास
या गमगीन नहीं।
खिलखिलाओ और जोर से हंसो :- चाहे
कैसी भी परिस्थिति हो, इंसान
को हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए। खिलखिलाने से
मनुष्य का तनाव कम होता है तथा वह चिंतामुक्त
होता है और शरीर से सकारात्मक
रसायनों का स्राव होता है। मनोचिकित्सक
भी कहते हैं कि हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहने
वाला व्यक्ति जीवन-पथ पर
हमेशा अग्रणी रहता है तथा वह अन्य के मुकाबले
जुझारू होता है।
इस प्रकार की छोटी-बड़ी बातों को ध्यान में
रखकर हम भी खुश रह सकते हैं तथा जीवन
को उमंग उत्साह से भरपूर कर सकते हैं। तो आप
भी आज और अभी से खिलखिलाना शुरू कर
दीजिए तथा दूसरों को भी खिलखिलाइए।

"अगले जनम मोहे बिटिया न देना"

महानायक अमिताभ बच्चन ने दिल्ली दुष्कर्म
पीड़िता को अपनी श्रद्धांजलि स्वरुप यह
कविता लिखी----------- --
==========================
माँ बहुत दर्द सह कर।
बहुत दर्द दे कर..
तुझसे कुछ कह कर मैं जा रही हूँ........
आज मेरी विदाई में जब सखियाँ मिलने
आएँगी...
सफ़ेद जोड़े में लिपटी देख सिसक सिसक मर
जाएँगी...
लड़की होने का खुद पे फिर वो अफ़सोस
जताएंगी.....
माँ तू उनसे इतना कह
देना दरिंदो की दुनिया में संभल कर
रहना.......... .....
माँ राखी पर जब भैया की कलाई सूनी रह
जाएगी..
याद मुझे कर कर जब उनकी आँख भर
आयेगी....
तिलक माथे पर करने को माँ रूह मेरी भी मचल
जाएगी...
माँ तू भैया को रोने न देना...
मैं साथ हूँ हर पल उनसे कह देना....... ... ..
माँ पापा भी छुप छुप बहुत रोएंगे ...
मैं कुछ न कर पाया ये कह के खुद
को कोसेंगे....
माँ दर्द उन्हें ये होने न देना..
इलज़ाम कोई लेने न देना...
वो अभिमान है मेरा सम्मान है मेरा..
तू उनसे इतना कह देना........
माँ तेरे लिए अब क्या कहूँ
दर्द को तेरे शब्दों में कैसे बाँधू ...
फिर से जीने का मौका कैसे मांगू......
माँ लोग तुझे सतायेंगे....
मुझे आजादी देने का तुझपे इलज़ाम लगायेंगे....
माँ सब सह लेना पर ये न कहना ---
"अगले जनम मोहे बिटिया न देना"
"अगले जनम मोहे बिटिया न देना"

रोचक तथ्य

रोचक तथ्य :-
1. मनुष्य का दाया फेफडा, बाएँ फेफडे से
बड़ा होता है क्योकि उसने दिल
को जगह देनी होती है.
2. आपकी हाथ की हथेली और पैर
का हथेली पर कभी भी बाल नही आ सकते.
3. जिन लोगो कि शरीर पर तिलों
की संख्या ज्यादा होती है वह औसतन कम
तिल वाले लोगो से ज्यादा जीते हैं.
4. अपने muscles के बारे में
सोचना आपको ताकतवर बनाता है.
5. दुनिया के सबसे कम उम्र के मां-बाप 8
और 9 साल के थे और 1910 में चीन में रहते
थे.