Wednesday, June 3, 2020

नाजायज़

बिन ब्याही माँ :-

भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पांड्या अपनी गर्लफ्रेन्ड नताशा स्तांकोविक के साथ एक चित्र पोस्ट करके सुर्खियों में हैं जिसमें उन्होंने सूचित किया है कि उन दोनों के जीवन में एक तीसरा मेहमान आने वाला है।

यह अद्भुत है।

लोग हार्दिक पांड्या और नताशा स्तांकोविक को बधाई दे रहे हैं , तब जबकि इन दोनों ने अभी तक विवाह नहीं किया है।

पूर्व में ऐसे संबन्धों से जन्में बच्चों को ही "हरामी" या "हराम की औलाद" कहा जाता रहा है , ऐसी माँ को कुलटा कुलक्षिणी और चरित्रहीन कहा जाता रहा है पर अब आज के समय में यह सब बधाई के पात्र हैं।

निंदनीय है "सफूरा जरगर" जो 2018 में अपने विवाह के बाद जनवरी में गर्भवती हो गयी है , और वह अब आतंकवाद के आरोप में जेल में बंद है।

आप यह मत समझिए कि संघ ने केवल भारतीय समाज का विभाजन ही किया है बल्कि उसने अपने समर्थकों को बुद्धीविहीन करके "जोम्बी" बना दिया है।

यही कारण है कि बिनब्याहे "नताशा-हार्दिक" को गर्भवती होने की बधाई देने वाले ऐसे ज़हरीले पिस्सू "सफूरा जरगर" के चरित्र पर सवाल उठा रहे थे।

हकीकत यह है कि यह सभी एक तरह के "राजनैतिक कीड़े" बन चुके हैं जिनका हर आकलन , हर नैतिक और अनैतिक , हर हलाल और हराम कामों के आकलन का आधार केवल और केवल अपने आका के राजनैतिक हानि और लाभ के आधार पर होता है।

इनको ना नैतिकता से कोई मतलब होता है ना देश से ना अपने देश की संस्कृत से , यह इसमें ही खुश हैं कि सीएए के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहा "शाहीन बाग" बिना किसी परिणाम को हासिल किए खत्म हो गया।

यह इसमें ही खुश हैं कि सीएए विरोध से जुड़े सभी क्रांतिकारी एक एक करके दिल्ली दंगों में आरोपित करके यूएपीए में अंदर किए जा रहे हैं , तब जबकि देश एक महामारी की चपेट में है।

यह ज़ोम्बी इशरत जहां , आसिफ इकबाल तन्हा, गुलफिशा खातून, सफूरा जरगर, मीरां हैदर, शिफा उर रहमान, ताहिर हुसैन,खालिद सैफी, नताशा नरवाल ,उमर खालिद , डाक्टर कफील और शरजिल इमाम को जेल में देख के खुश होता है तब तो और जबकि उसे पता है कि असली अपराधी कौन है ?

ऐसे ज़ोंबी , दिल्ली दंगों के सुत्रधार कपिल मिश्रा , अनुराग ठाकुर , परवेश वर्मा , रागिनी तिवारी , रामभक्त गोपाल , कपिल गुर्जर को सरकार द्वारा सुरक्षा और संरक्षण देने से ही खुश हो जाते हैं।

इनको देश से भी मतलब नहीं जिसकी अर्थव्यस्था की बर्बादी की कहानी "मूडीज़" बयान कर रहा है और पिछले 21 वर्ष की सबसे बर्बाद अर्थव्यवस्था बता रहा है। इनको इससे खुशी है कि इस बर्बाद अर्थव्यवस्था में मुसलमान परेशान है कि नहीं।

भारतीय परंपरा , सभ्यता और संस्कृत बिन ब्याही माँ और बच्चे को कभी स्विकार नहीं करती रही है। उदाहरण के तौर पर आप अभिनेत्री नीना गुप्ता से पूछ लें और उनके दुखों को सुन लें जो ऐसी ही बिनब्याही माँ बनकर क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स की बेटी "मसाबा रिचर्ड्स" को जन्म दे चुकी हैं।

दरअसल बिन ब्याही औलाद पैदा करना एक अधूरे रिश्ते की कहानी है जिसमें होता सबकुछ वही है जो विवाह के पश्चात होता है पर केवल विवाह नहीं होता।

विवाह एक वैद्धता का प्रमाणपत्र है , विवाह के पश्चात जन्में बच्चों को आप "व्हाईट मनी" कह सकते हैं जो व्यवस्था की तमाम प्रक्रिया से गुज़रकर आपकी गोद में आते हैं। ऐसे ही बिनब्यही माँ के बच्चों को "ब्लैक मनी" कह सकते हैं।

दरअसल , बिनब्याही माँ का यह कान्सेप्ट मर्दों के लिए सुविधाजनक है , जो सबकुछ बिना किसी बंधन और ज़िम्मेदारी के पा लेते हैं , और जब चाहा बिन ब्याही माँ को छोड़ कर आगे बढ़ जाते हैं। 

विवाह महिलाओं को सुरक्षा देता है जो बिनब्याहे बाप देने से बचते हैं और भुगतती औरते हैं क्युँकि फिर उनको कोई नहीं पूछता। मर्द चाहे जितना बूढा हो जाए , चाहे जितने बच्चे का बाप हो उसकी अगली पसंद कुँवारी वर्जिन टीनएजर ही होती है।

लिव इन रिलेशनशिप के बाद बिनब्याही माँ के इस प्रमोशन के लिए हार्दिक पांड्या और नताशा इस देश की संस्कृत के गुनहगार हैं जिनको भारतीय सभ्यता कभी क्षमा नहीं कर पाएगी। 

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