Monday, June 10, 2013

बुजुर्ग

मेरे कॉलोनी में एक बुजुर्ग थे तकरीबन ८६-८७ साल के.. उन्होंने
जिंदगी में काफी कुछ किया, बहुत इज्जत कमाई,
बहुतों को ऊँगली पकड़कर चलना सिखाया, छोटी सी झोपडी को महल
बना दिया | फिर शादी करने की सोची तो कभी लड़की नहीं मिली,
कभी लड़की के घरवालों ने पसंद नहीं किया | इससे वो इतने कुंठित
हो गए की जब भी अपने किसी की शादी की बात
चलती तो गुस्सा हो जाते, और गुस्से में भूल जाते
की की उनकी शादी की उमर जा चुकी | उनकी जिद्द के चक्कर में न
उनकी शादी हो रही थी और न अपने से छोटों की होने दे रहे रहे थे | पर
परिवार तो आगे बढ़ाना था, तो घर के लोगों ने सोच समझकर परिवार के
एक छोटे पर सबको पसंद आने वाले की शादी पक्की कर दी | वो बुजुर्ग
इससे नाराज हो गए और शादी में नहीं गए, लोगों ने पूछा तो घरवालों ने
बहाना मार दिया की बीमार हैं, अब ८६ के हो चले |
घर के लोगों ने बहुत समझाया की अब ८६ की उमर में सन्यास लो और
आराम करो, पर माने नहीं | अंततः उनके गुस्से के बावजूद लड़के
की शादी हुई, और जैसे ही लड़का घर पहुंचा, उन्होंने आशीर्वाद देने
की जगह दुल्हे पर पत्थर फेकने शुरू कर दिए |

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