Saturday, November 3, 2018

धर्मांधता

चार औरतों में बहस होती है... एक औरत (जो बाकी तीनों औरतों के धर्म की नहीं थी) पर इल्जाम लगता है कि उसने बाकी तीनों औरतों के धर्म का मजाक उङाया...

मामला दर्ज किया जाता है...

ट्रायल कोर्ट उस औरत को फांसी की सजा सुनाती है,

वो औरत हाईकोर्ट में अपील करती है... हाईकोर्ट उस औरत की फांसी की सजा बरकरार रखती है...

तब तक समाज के कुछ बुद्धिजीवी वर्ग इस फैसले के खिलाफ खङे होते हैं और उस औरत का सपोर्ट करते हैं...

सभी को धर्म विरोधी घोषित करके कत्ल कर दिया जाता है... इन सभी बुद्धिजीवियों के कारण धर्म खतरे में पड़ गया था और फिर कुछ धार्मिक और सांस्कृतिक सेनाओं के अलग अलग रेजिमेंट ने उनका कत्ल किया और अपने धर्म की रक्षा की..

उस औरत को बलात्कार करने और जान से मारने की धमकी दी जाती है... इन सब के बीच मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा... और सुप्रीम कोर्ट के जज ने निचली अदालतों के फैसले को पलटा और उस औरत को बाईज्जत बरी किया...

अब थोड़ी राहत की सांस लीजिए... शुक्र कीजिए ये हमारे देश का मामला नहीं है... ये घटना पाकिस्तान की है...

और वो औरत थी क्रिश्चियन जिनका नाम था आसिया बीबी (5 बच्चों की माँ) और बाकी तीनों थी मुस्लिम...

उस क्रिश्चियन औरत के सपोर्ट में आने वाले बुद्धिजीवियों के वजह से जिनका धर्म खतरे में पड़ गया था वो था जमात-उद-दावा जैसे कई सांस्कृतिक गुट और हाफिज सईद जैसे कई समाजसेवी और धर्मरक्षक नेता...

खैर... अब जिस धर्म विरोधी और देशद्रोही सुप्रीम कोर्ट के जज ने निचली अदालतों का फैसला पलटा... उसके कोर्ट के बाहर मीडिया में बयान से तो लग रहा था कि पता नहीं किस सुबह की सूरज उसे नसीब न हो...

लेकिन जरा सोचिए उस ट्राइल कोर्ट और लाहौर हाईकोर्ट के जज के बारे में... आखिर उसकी ऐसी क्या मजबूरी रही होगी कि एक जज के पद पर बैठ कर एक तुच्छ आरोप के आधार पर सीधे मौत का फरमान सुना दिया... जाहिर है ये एक जाहिलियत थी... जो उसने धर्मांधता के आगोश में आकर ये फैसला सुनाया था...

धर्म और जाहिलियत दोनों एक ही बात है... जिसने एक सुशिक्षित इंसान को भी अपने कर्तव्यों और मानवीय संवेदनाओं से परे कर दिया... तो अशिक्षितों की क्या मजाल..

अब जरा अपने देश के बारे में सोचिए... यही जाहिलियत थी जो पिछले सत्तर सालों से हिंदुस्तान और पाकिस्तान की मुल्यों को अलग रख रही थी...

आजादी के बाद हमने नेहरू जी का रास्ता चुना और चांद तक पहुंच गये... उसने जिन्ना का रास्ता चुना अभी तक कश्मीर में नहीं घुस पा रहा...

एक राम-मंदिर के लिए आज तक लाखों जाने चली गई और हजारों औरतों का बलात्कार हुआ... कल वो मंदिर अगर बन कर खड़ा हो गया तो राम जी को भी अपने धर्म और उनके रक्षकों के वीरगाथाओं पर गर्व होगा...

मजाल है आप उसके खिलाफ एक शब्द बोल दो... उसको छोङो गाय के नाम पर खुलेआम कत्ल हो रहा है... सरकार के केंद्रीय मंत्री तक उन कातिलों को फूल माला पहना रहे हैं... मजाल है कि कोई बुद्धिजीवी उनके खिलाफ खङे हो जाए... होते हैं लेकिन सभी के सभी धर्म विरोधी और देश विरोधी ही होते हैं...अगर औरत हुई फिर तो सावरकरवाद जिंदाबाद...

बस कुछ दिन और...उन धर्म विरोधी बुद्धिजीवियों का कत्ल भी होगा.... अभी सिर्फ बलात्कार की धमकियां ही मिल रही है...कुछ दिन बाद ऐसा होना असंभव नहीं लग रहा और ना ही ज्यादा मुश्किल... और बलात्कार की धमकियां और गालियाँ देने वाले लोगों को तो खुद इस देश का प्रधानमंत्री ट्विटर पर फॉलो करते हैं...

बस हमारे कुछ सांस्कृतिक और धार्मिक संगठनों को थोड़ा और मजबूत होने की देर है (बिल्कुल पाकिस्तान की तर्ज पर) ... सत्तर सालों से तो ये अपनी चड्डी ही संभाल रहे थे... लेकिन पिछले कुछ सालों से इन्हें पुरी संरक्षण मिल रही है...
अभी तक तो फिलहाल हथियार ही बरामद होते आ रहे हैं...

अभी हम पुरी तरह पाकिस्तान थोड़ी बने हैं... वो समय भी आने वाले हैं...अगर सब कुछ ऐसा ही चलता रहा तो... क्या पता शायद वही अच्छे दिन हो...

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