Thursday, July 25, 2013
गुड़िया कृष्णा अस्पताल में खड़ा ईश्वर से अपनी माँ और तीन वर्षीय छोटी गुड़िया जैसी बहन रानी की जिंदगी लिए प्रार्थना कर रहा था . कल तक उसकी दुनिया सपनों से भरी थी . पिता थे नहीं,कृष्णा और माँ काम करके गुजारा कर रहे थे . कृष्णा माँ से कहता - " माँ मैं तो पढ़ नहीं सका,पर मैं खूब काम करूँगा और रानी को स्कूल भेजूंगा,उसे खूब पढ़ाऊंगा ताकि उसे घर-घर काम न करना पड़े ." वह जब भी स्कूल के सामने से निकलता और वहां छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल यूनिफार्म में कन्धों पर किताबों का बैग लटकाए देखता ,उसे कल्पना में रानी भी यूनिफार्म पहने स्कूल जाती दिखाई देती . माँ जहाँ काम पर जाती थी रानी ने वहां बच्चों को गुड़िया से खेलते देखा तबसे वह कृष्णा से कहती - " भैया, मुझे भी गुड़िया ला कर दो न,मैं भी गुड़िया का ब्याह रचाउंगी . " तबसे कृष्णा थोड़े-थोड़े पैसे जमा कर रहा था ताकि वह रानी को गुड़िया दिला सके . लेकिन कल सुबह जब माँ रानी के साथ सड़क पार कर रही थी अचानक एक ट्रक तेजी से आया और दोनों को टक्कर मारता निकल गया . माँ और रानी लहुलुहान गए . लोग जमा हो गए और दोनों को तुरंत अस्पताल पहुँचाया . डॉक्टर ने बताया दोनों की हालत चिंताजनक है . कृष्णा रात भर सीता चाची के साथ अस्पताल में बैठा रहा . सुबह डॉक्टर साहब जैसे ही रूम से बाहर निकले सीता चाची तुरंत डॉक्टर साहब के पास गई . डॉक्टर साहब बोले - " मुझे खेद है मैं रानी को नहीं बचा पाया ." " और रानी की माँ ? " " वो भी अंतिम साँसें गिन रही है . " कृष्णा सीता चाची से लिपट फूट-फूट कर रो पड़ा. रानी उसे छोड़ कर चली गई और माँ भी जीवन- मृत्यु के बीच झूल रही थी. वह रानी को एक गुड़िया तक दिला नहीं पाया . मुठ्ठी में रखी पचास की नोट पसीने में भीग रही थी . उसने तो सोचा था रानी के होश में आते ही वह उसे एक प्यारी सी गुड़िया ला कर देगा . अब तो रानी नहीं रही और माँ भी उसे हमेशा के लिए छोड़ कर जा रही है . तभी कृष्णा ने सीता चाची से कहा - " चलो चाची मुझे तुरंत दुकान ले चलो . " चाची हैरान रह गई . इतनी दुखद घड़ी में भी कृष्णा क्या खरीदना चाह रहा था ? कृष्णा सीता चाची को दूकान ले गया . दूकान में जाकर उसने एक प्यारी सी गुड़िया पसंद की और दुकानदार को उसे पैक करने को कहा . सीता चाची हैरानी से बोली - " कृष्णा तुम किसके लिए गुड़िया खरीद रहे हो ? " कृष्णा की आँखों से झर-झर आंसू बह रहे थे . वह बोला - " चाची, रानी मुझसे बार-बार गुड़िया मांगती रही लेकिन मैं उसे कभी गुड़िया नहीं दिला पाया . अभी थोड़े-थोड़े करके पैसे जमा किए थे और सोच ही रहा था कि उसे गुड़िया दिलाऊं कि यह हादसा हो गया . रानी तो भगवान् के घर चली गई और अब माँ भी रानी के पास जा रही है . ये गुड़िया मैं अब माँ के हाथ में दूंगा . वह जरूर यह गुड़िया रानी के पास पहुंचा देगी . " कहते-कहते कृष्णा ने कसकर गुड़िया को अपने नन्हे से सीने से चिपका लिया . कृष्णा और सीता चाची की आँखों से बहते आंसुओं की श्रद्धांजलि भी शायद गुड़िया अपने साथ ही ले जाने वाली थी .. . . .
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