Wednesday, July 24, 2013
कल जब कुछ देशभक्त हुतात्मा चन्द्र शेखर आज़ाद और बालगंगाधर तिलक काजन्मदिन मना रहे थे,तब इलेक्ट्रोनिक मीडिया इंग्लैंड के राजकुमार के जन्म की खुशियाँ मना रहा था, मीडिया वालों ने उस अंगेज के बच्चे के शरीर के अलग-अलग हिस्सों का वजन तक बता दिया,पर किसी भी न्यूज़ चैनल नेँ जो खुद को संविधान का चौथा स्तम्भ बताते फिरते है,एक पल के लिए भी नहीं बताया की 23 जुलाई को हिंदुस्तान बचाने वाले क्रांतिवीरों का जन्म हुआ था। प्रधानमंत्री कार्यालय सेलेकर संसद भवन के किसी भी गलियारे में आज़ाद और तिलक का जिक्र नहीं हुआ। 23 मार्च को भी कुछ ऐसा ही महसूस हुआ था और चम्बल के किनारे पर बैठकर एक कविता लिखी थी, जिसकी दो पंक्तिया आज सटीक बैठती है- "हँसते-हँसते जो फाँसी वाले तख्तों पर झूल गए, हमें हनी सिंह याद रहा पर भगत सिंह को भूल गए।" agar meri bat se sehmat ho to share jarur kare jai hind,
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